Tuesday, September 20, 2016

तीसरा महायुद्ध और भारत

" विश्व कल्याण और धर्म रक्षा के लिए युद्ध करने वाला शस्त्रनीती और धर्मशास्त्र में श्रेष्ठ योद्धा कहलाता  है "    
 भारत नें कभी भी पहले हमला नही किया है,  लेकिन 18 सितंबर 2016 को काश्मीर के उरी सेक्टर मे हहुए आतंकी हमले के बाद अब भारत अपनी नीती जरूर बदलेगा । महायुद्ध का आगाज होना है तो तय है ही लेकिन उस युद्ध को टालने के लिए अपने सैनिकों और देशवासियों की कुर्बानीयां देना कहाँ तक जायज है ? जो शत्रु अपनी सीमाओं को भल जाए , जो शांति ना चाह कर हमेशा हिंसा चाहता हो ऐसे शत्रुओं को लाड प्यार देना अब भारत को सहनशील नही कायरता का दर्जा देगा । भारत को लोग एक ऐसे देश के रूप मे याद करेंगे जिसकी सीमा के अंदर घूस कर केवल चार आतंकी 18 सैनिकों को मार देते हैं और सरकार उन सैनिकों को शहिद का दर्जा देकर और कडी कडी , बडी बडी बातें करके फिर बैठ जाती है । अब तक तो ऐसा ही होता आया है .... लेकिन अब ! अब शायद ऐसा नही होगा । देश को जवाब देना ही होगा और देश अब इसके लिए तैय्यार भी है ।
                                                   पाकिस्तान  अपने आतंकीयों को भेजकर हमला कराने के बाद इसे भारत के काश्मीर की आजादी का मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा । पाक ने चीन को भी इस मामले मे अपने साथ जरूर शामिल रखा होगा क्योंकि पाक को पता है कि बारत ने यदि पीओके पर हमला किया तो वहां चीन - पाक की करोडों डॉलर की  मिली जुली योजनाओं पर बडा असर पडेगा और चीन को सीधे सीधे अपने 50 करोड डॉलर डुबते दिखेंगे । कोई बडी बात नही की चीन भी पाक के समर्थन मे बात करे लेकिन वो किसी बी हालत मे इस अतिसंवेदनशील समय में भारत के खिलाफ  कोई भभी कडा बयान देने से बचना चाहेगा क्योकि उसे पता है कि इस समय भारत की जनता ही युद्ध के मूड मे आ गई है । अभी तक जो सरकारें रहती थी उनकी युद्धनीतीयों मे कायरता देखकर ही जनता ने इस बार मोदी जी को इस उम्मीद से लाई है कि वह पाकिस्तान को नेस्तनाबूत करेंगे और भारत पर हो रहे बार बार हमलों से निजात दिलाएंगे । 
                                                   मोदी सरकार इस समय चारों मोर्चों पर पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है । कहाँ क्या क्या तैय्यारीयां किस किस मोर्चें पर चल रही हैं वह अब तक के समाचारों व पुष्ट, अपुष्ट जानकारीयों पर आधारित है । इसमे लिखी हुई कई जानकारीयां ऐसी भी है जो समय काल स्थिति परिस्थिति पर पूरी होती नजर आएंगी या फिर समयानुसार उन नीतीयों को बदला भी जा सकता है । 
मोदी जी के पाँच मोर्चे  
1. सेना - सेना को पूरी छूट दे दी गई है और साथ ही सैन्य रणनीतीकारों को युद्ध संबंधित सभी तैय्यारीयों के निर्देश दे दिए गए हैं । सेना को पूरी छूट दी गई है कि वह पाक पर सीधा हमला करेगी या केवल सीमित क्षेत्रों मे यह फैसला सेना ही करेगी । इसके साथ ही पहली बार सेना के तीनो सेना प्रमुखों को आपसी तालमेल के आधार पर ही कार्यवाही करना होगा बिना किसी राजनैतिक दबाव के । सेना के साथ भारत के सभी खुफिया विभाग मिलकर काम करेंगे और अपनी सूचनाओं का आदान प्रदान सीधे करेंगे बगैर अपने आला अधिकारियो तक पहुंचाने के ।  
2. गृह - गृह मंत्रालय से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं अलगाववादियों और हमलावरों  पर सख्त कार्यवाही करने के । गृह मंत्रालय के ऊपर बडी जिम्मेदारी ये है कि प्रदर्शनकारियो को पैलेट गन से संभालना है या सीधे गोली मारनी है इसका फैसला तात्कालिक तौर पर कौन करेगा ? सरकार केवल यह चाहती है कि कोई भी निर्दोष ना मारा जाए किंतु उग्र भीड पर जवाबी कार्यवाही मे किसी की मौत होती है , चाहे वह बच्चा ही क्यों ना हो उस पर सरकार क्या जवाब देगी यह पहले से स्पष्ट करने की तैय्यारी है । संभवतः अब किसी भी प्रदर्शनकारी की मौत होने पर सरकार उसे अलगाववादी समर्थक ही मानगी ऐसी संभावना है ।
3. विदेश- विदेश मंत्रालय को जिम्मेदारी दी गई है विश्व के सभी देशों और संयुक्त राष्ट्र मे पाकिस्तान को आतंकवाद समर्थक देश घोषित करने का दबाव बनाने के लिए । इसके अलावा पाकिस्तान के साथ कडाई से निपटने का और दुसरे मंचो पर पाकिस्तान की बात का जवाब पूरी कठोरता से देने का कार्य भी विदेश मंत्रालय को देखना है । विदेश मंत्रालय को पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थक होने संबंधी समस्त दस्तावेज कल गृह मंत्रालय द्वारा सौंप दिए गए हैं ।
4. वित्त - वित्त मंत्री अरूण जेटली से कहा गया है कि सेना को किसी भी साजो सामान की कमी ना होने पाए इसके लिए सारे वित्तीय इंतजाम तैय्यार रखे जाएं . धन की पूर्ति निर्बाध बनाने के लिए देश के भीतर मौजूद बडी मात्रा मे छिपा कर रखे गए काले धन को सीधे जब्त किया जाए । इसमें कई राजनेता व बडे अधिकारी फंसेगे जो अपने समर्थकों के साथ मोदी सरकार पर बदले की कार्यवाही का इल्जाम लगा कर देश के भीतर उपद्रव फैलाने का काम कर सकते हैं , इस बात की आशंका कल जेटली द्वारा पीएमओ से जताई गई है ।
5. पीएमओ - पीएमओ को आशंका है कि जब सेना पाकिस्तान पर जवाबी कार्यवाही करेगी तो भारत के भीतर कई राजनैतिक दल व नेता उसके विरोध मे सामने आकर देश की छबि विश्व के सामने खराब करने का प्रयास करेंगे । इस आशंका के मद्दे नजर राष्ट्रपति जी के पास निवेदन दिया गया है कि भारत - पाक युद्ध की यदि शुरूआत होती है तो वह पूरे  देश में  राष्ट्रपति शासन लागू करवा दें जिससे सेना का अधिकार  बढ जाए और वह  पूरी स्वतंत्रता के साथ देश के भीतर मौजूद देशद्रोहीयों से भी निपटने मे सक्षम हो सके ।  इसका एक फायदा यह भी होगा कि अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव को लोकसभा के साथ कराने के लिए स्थगित किया जा सकता है ताकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराये जा सकें ।
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मोदी सरकार ने अभी तक अपनी कूटनीतीयों के तहत रूस, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन को अपने साथ ले ली है । चीन को नजरअंदाज करने का फायदा यह मिला है कि अब चीन खुद अपनी बात कहने के लिए तडप रहा है । भारत स्थित चीनी दूतावास ने अपनी चीन सरकार को आगाह कर दिया है कि इस समय भारत के साथ जरा भी कठोरता से बात ना करे और NSG पर सहयोग देने की बात करे । चीन इस समय खुद भी बडे आर्थिक संकट से घिरा हुआ है । उसका व्यापार घाटा लगातार बढ रहा है और इस समय वह यह नही चाहेगा कि भारत के साथ होने वाले उसके ढाई अरब डॉलर के व्यापार पर कोई आंच आए ,  उसकी चिंता फिलहाल पीओके और बलूचिस्तान पर है जहां उसके 50 करोड डॉलर फंसे हुए है । अगर भारत ने उसे जरा सा भी यह आश्वासन दिया कि वह उसके हितों का ख्याल रखेगा तो चीन को भारत के पाले आने मे जरा भी देर नही लगेगी ।
                  रही बात पाकिस्तान की तो उसके पास खोने के लिए कुछ भी नही है । अगर भारत उस पर हमला करता भी है तो कोई बडी बात नही कि उसकी सेना खुद ही सरेंडर करके कहे हमें अपने ही देश मे मिला लो.... इतिहास गवाह है कि 1971 के युद्ध में केवल खाना मिलने के लालच मे पाकिस्तान के 1 लाख सैनिकों ने केवल 12 हजार सैनिको के सामने आत्मसमर्पण कर दिए थे ।

Monday, September 5, 2016

मृत बच्चा जी उठा, डॉक्टर बने भगवान ।

डॉक्टर भगवान  होते हैं यह साबित कर दिये युवा डॉक्टर विकास अग्रवाल जी ने ।
             जी हाँ भाई साहब ! आप जो पढ कर एकदम सच है । आज जबकि देश के कई हिस्सों में  डॉक्टरों के द्वारा लापरवाही या अस्पतालों की लापरवाही के ढेरों मामले आ रहे हैं तो उस बीच इस तरह की खबरों को दबाना ना केवल डॉक्टरों के साथ नाइंसाफी होगी बल्कि आम जनता का भी विश्वास बढेगा की हाँ ! सचमुच डॉक्टर भगवान होते हैं । छत्तीसगढ के ह्दय स्थल इस्पात नगरी भिलाई  में स्थित है बीएम शाह अस्पताल । यह हॉस्पिटल अपने स्लोगन इलाज मानव का मानवता से पूरी तरह से सार्थक है क्योकि इस ट्रस्ट हॉस्पिटल में महज 100 रूपये की पर्ची मे गरीब मरीज अपना चेकअप करवा लेते है । इस हास्पिटल मे जिस तरह से मरीजों की सहायता की जाती है उसका उल्लेख करना उचित नही होगा क्योंकि बीएम शाह अस्पताल जिस तरह से लोगों को सहायता पहुंचाता है , जानकारी मिलने पर लोग उसका सदुपयोग कम , दुरूपयोग ज्यादा करने लगेंगे ।  
अब बीएम शाह अस्पताल में मिलने वाली सस्ती चिकित्सीय सुविधाओं को छोडकर बात करते हैं उस घटना की जिसके लिये आप इस जगह पर पधारे हैं । वैसे ये कोई मदारी की तरह की घटना नही है कि यूँ ही लिख कर खत्म कर दी जाए इस घटना को पढने के साथ साथ आपको यह भी समझना होगा कि जब ये बीएम शाह मे हो सकता है तो किसी दुसरे अस्पताल मे क्यों नही ।

वह चमत्कारी बालक जो डेढ घण्टे तक धडकनें बंद होने के बाद फिर से जीवित हो गया ।

                                        ये है महज 14 साल का बालक अंकित रॉय जिसे घर में जय के नाम से पुकारते हैं । पिता बृजेश रॉय रिजर्व बैंक नागपुर में गार्ड की नौकरी करते हैं और यह अपनी माँ और दो बडी बहनों के साथ स्टील नगर, केम्प 1 मे निवासरत हैं ।  29 अगस्त 2016 की रात 8 बजे के लगभग यह नहाने के लिए बाथरूम गया किंतु पास ही रखे कूलर में अचानक करंट प्रवाहित होने के कारण यह कूलर से चिपक कर वहीँ गिर गया । कुछ दूरी पर अंकित की माँ को कुछ गिरने की आवाज सुनाई दी तो वह बाथरूम के पास जाकर देखी कि अंकित का एक हाथ कूलर से चिपका हुआ है और पूरी बाडी जमीन पर गिरी हुई है तो वह तुरंत भाग कर मेनस्वीच बंद कर दी और आसपास के लोगों को आवाज देती हुई अंकित की ओर भागी । इस दौरान लगभग 10 मिनट बीत चूके थे और अंकित बेहोश हो गया था । घर वालों ने तुरंत घर से नजदीक अस्पताल बीएम शाह लेकर पहुंचे । ( अंकित के मामा नरेन्द्र पाण्डेय के अनुसार जब वो बीएम शाह लेकर पहुंचे उस समय तक अंकित की धडकनें बंद हो चूकी थी ) 
                                                 बीएम शाह की केजुअल्टी मे उस समय कार्डियोलॉजिस्ट विकास अग्रवाल मौजूद थे । उन्होने जांच करे तो पाए कि अंकित की धडकनें बंद हो चुकी हैं, लेकिन अंकित की कम उम्र के कारण संभवतः उसकी हार्टबीट लौट आए ये सोचकर डॉक्टर विकास नें अपने सहयोगी सिनीयर डॉक्टर नेम सिंग जी से संपर्क करे और उनकी सहमति मिलने के बाद परिवार वालों को ढांढस बंधाये कि  हम लोग कोशिश करके देखते हैं । इसके बाद धडकन बंद होने की बात  अंकित की माँ को न बता कर उसके मामा को बताये तथा स्पष्ट कह दिये कि ये एक बार कोशिश करके देखना चाहते हैं । उन्होने बच्चे को तुरंत वेंटिलेटर मे शिफ्ट कराए और बीएम शाह अस्पताल के डायरेक्टर रवि शाह जी को पूरी बात बताये । 
उस समय अस्पताल मैनेजमेंट  के सामने दो बडी समस्या खडी हो गई थी - 
1. अंकित के परिवार वालों को यह पता था कि उसकी धडकने बंद हो गई है और वे उसकी मृत्यु हो चुकी है यह मानकर  अपने परिजनों को उसकी मौत की खबर भेज चूके थे और ऐसी स्थितिमें यदि बच्चे के इलाज का पैसा जमा कराने को कहा जाता तो लोगों को अस्पताल पर आरोप लगाते हुए हंगामा करने का अवसर मिलता और अस्पताल की बदनामी होती ।
2. बच्चे की कम उम्र को देखते हुए डॉक्टरों के द्वारा जिस तरह से प्रयास की बात कही गई तथा मैनेजमेंट से रिस्क उठाने का आग्रह किया गया उसे  नजरअंदाज करना भी मुश्किल हो रहा था । 
                                   अंततः इस स्थिति से निपटने के लिये रवि शाह जी ने स्वयं के रिस्क पर योजनाबद्ध तरिके से काम शुरू करवा दिये । उनके द्वारा बिलिंग काउंटर को बता दिया गया कि वे अंकित के परिजनों से केवल पैसे जमा करने को कहें और उनके द्वारा बहस करने या दुर्व्यवहार अथवा उग्र व्यवहार होने पर कोई भी बात ना करें और पैसे के लिये दुबारा ना कहें । यानि अंकित की यदि धडकने वापिस नही आती है तो उसका समस्त बिल अस्पताल प्रबंधन वहन करता । इस तरह से डॉक्टर विकास अग्रवाल एवं डॉक्टर नेम सिंग जी  के द्वारा अंकित की धडकने वापिस लाने के लिये आपरेशन संजीवनी शुरू किया गया । इधर आईसीयू मे मौजूद नर्सिंग स्टाफ नें तब तक अंकित का चेस्ट कंप्रेशन ( CPR ) शुरू कर दिये थे  । धडकनें बंद होने की स्थिति मे यही एक मात्र रास्ता बचता है और मेडिकल साइंस के अनुसार CPR शुरू होने  के 45 मिनट तक यदि धडकन नही लौटती है तो इतने लंबे समय तक रक्त संचार रूकने के कारण मरीज के लीवर, कीडनी खराब हो जाते है और मस्तिष्क मे रक्त संचार ना पहुंचने के कारण उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया जाता है   

                                                        जब 45 मिनट भी बीत चुके लेकिन धडकनें वापिस नही आईं तो डॉक्टर निराश होकर अपने चैंबर मे चले गए । इधर नर्सिंग स्टाफ में मौजूद लोगो को बिल्कुल भी अच्छा नही लगा कि इस तरह से मेडिकल साइंस के आधार पर वे इस मासूम को मृत घोषित कर दें । स्टॉफ मे मौजूद आकाँक्षा, यशोदा और लीना नें डॉक्टर विकास से पुछे कि क्या कोई औऱ उपाय नही है सर ? तब विकास अग्रवाल नें उन्हे बताये कि CPR के अलावा और कोई उपाय नही है और मेडिसिन मे जो उन्हे देना चाहिये था वह दिया जा चूका है तब तक डॉक्टर नेम सिंग जी अंकित को ब्रेन डेड घोषित करने की कागजी कार्यवाही पूरी करना प्रारंभ कर चूके थे । इधऱ नर्सिंग स्टॉफ को अमित द्विवेदी और डोमन के रूप मे दो सहयोगी और मिल गए जो उनके साथ चेस्ट कंप्रेशन के लिये साथ मे सहयोग देने को तैय्यार हो गए क्योकि चेस्ट कंप्रेशन एक व्यक्ति  बडी मुश्किल से 10 मिनट ही कर पाता है क्योंकि उसमे काफी मेहनत और ऊर्जा लगती है । इन पाँचो नें 45 मिनट के बाद की जिम्मेदारी उठाए और फिर से चेस्ट कंप्रेशन देना शुरू दिये । नर्सिंग स्टॉफ की लगन देखकर डॉक्टर विकास अग्रवाल फिर से आईसीयू मे पहुंच गए और अंततः इन सभी की मेहनत 1 घण्टे से ज्यादा समय पर काम आई ..... अंकित की सांसे चलने लगी । उसकी धडकन लौटने लगी । पूरा नर्सिंग  स्टाफ खुशी से झूम उठा लेकिन डॉक्टर विकास को समझ आ गया कि उनकी जिम्मेदारी और बढ गई है । नर्सिंग स्टाफ ने जिस मेहनत से अंकित की सांसे ऊपर लाए थे अब आगे का काम डॉक्टर का था कि वह उन सांसो को वापिस ना जाने दें । 
                                                        डॉक्टर विकास के अनुसार ऐसे केस मे जब सांस वापिस आती है तो अक्सर मरीज कोमा मे चले जाता है और वह कब होश मे आएगा इसका कुछ पता नही होता , साथ ही मरीज के अंगो के खराब होने की संभावना भी बनी रहती है । इन सारी चुनौतीयों से जुझते हुए आखिरकार सुबह के 3 बजे अंकित को होश आ गया । सुबह के चार बजे उसकी सारी जांच करने के बाद जब अँकित के परिजनों को बताया गया कि अँकित अब बिल्कुल ठीक है तो किसी को भी यकिंन नही हुआ । सब भौंचक से एक दुसरे का मुँह देखने लगे और जबब समझ पडा कि डॉक्टर क्या कह रहे हैं तो अँकित की माँ खुशी के मारे सीधा आईसीयू की ओर दौडी । वहां पर नियमो को किनारे करके डॉक्टरों ने उसी समय अँँकित की माँ , पिता, बहनों  और मामा से मुकाता का प्रबंध करवा दिए । सुबह के 9 बजते बजते पूरे शहर मे यह बात आग की तरह फैल गई कि बीएम शाह अस्पताल मे एक मृत बच्चे को वापिस जीवनदान मिला । लोग एक दुसरे से पुछते फिरते रहे कि आखिर हुआ क्या था ? जो इस बात को सुनता हतप्रभ रह जाता । दैनिक छत्तीसगढ के रिपोर्टर संतोष मिश्रा जी को भी यह जानकारी मिली और हम दोनों एक साथ बीएम शाह पहुंचे जहाँ पर पूरी घटना का आँखो देखा हाल पता चला । पहले तो कानों को भी यकिंन नही हुआ कि क्या वाकई ऐसा हो सकता है ? फिर जाकर मिले अंकित से ... उसने देखते ही पुछा मुझे क्या हुआ था अंकल ? मुझको इतनी प्यास क्यो लग रही है ? उससे हम लोग क्या कहते .... सो हम लोग वापिस आ गए कई अनसुलझे सवाल को लेकर .... 
क्या जिस तरह से बीएम शाह के नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों ने अदम्य मेहनत करके एक बच्चे की जान वापिस ले आए उस तरह का कार्य दुसरे अस्पताल वाले क्यों नही कर सकते ? 
यदि सचमुच अंकित के प्राण वापिस नही आते तो क्या घर वाले इस बात को समझते कि वास्तव मे उनके बच्चे की जान बचाने के लिए अस्पताल और स्टाफ नें कितनी मेहनत किए थे ?
इतनी बडी घटना का , किसी भी बडे मीडिया में नही आना क्या यह सही आचरण है मीडिया का,  कि वह इतनी सकारात्मक पहल को एक अस्पताल का विज्ञापन मात्र समझे ?
क्या हम और हमारा समाज इतनी अज्ञानता का शिकार है कि मात्र धडकन बंद हो जाने को हम मृत्यु समझकर अपनी और आयु जी सकने वाले प्रियजन का अंतिम संस्कार कर देते हैं ?
              
ऐसे औऱ भी कई अनसुलझे सवाल खडे हो सकते हैं हमारे सामने लेकिन बीएम शाह के डॉक्टरों ने जिस तरह का कारनामा कर दिखलाए हैं वह असंभव को संभव करने की तरह का कार्य है । मेडिकल साइंस मे अभी तक का सबसे लंबा CPR 45 मिनट का दर्ज है जबकि बीएम शाह नें 1 घण्टे 45 मिनट तक CPR करके मरीज की धडकन वापिस लाने मे  सफलता पाए हैं ।
जब डॉक्टर विकास से पुछे कि डॉक्टर साहब आप अंकित के जीवन बचाने का श्रेय किसे देना चाहेंगे .. तो उन्होने कहे कि सबसे पहले अपने नर्सिंग स्टाफ को उसके बाद मैनेजमेंट को और फिर ईश्वर को । यदि इन तीनों का सहयोग नही होता तो शायद हम लोग भी कुच नही कर पाते ।
तो क्या इतने बडे शब्द कोई साधारण डॉक्टर कह सकता है ? कदापि नही ,..., कोई दुसरा अस्पताल होता तो अभी तक वह पेड मीडिया के माध्यम से अपने अस्पताल का जोर शोर से प्रचार प्रसार कर डालता लेकिन यह अस्पताल चुपचाप केवल मानव सेवा कर रहा है पूरी मानवता के साथ ।
सादर नमन और धन्यवाद बीएम शाह अस्पताल , उसके स्टाफ और डॉ्कटरों को ।
आप डॉ्कटर विकास अग्रवाल जी का इंटरव्यूह यहाँ उपलब्ध है ।

Wednesday, August 31, 2016

नास्त्रेदमस की सच भविष्यवाणीयाँ

आपको यदि ऐसा लगता है कि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणीयां केवल भविष्य पर ही खरी उतरेंगी तो आप गलत सोच रहे है । सच तो ये है कि नास्त्रेदमस की कई भविष्यवाणीयाँ सालों से सच होती चली आ रही है । उनकी लिखावट ऐसे जटिल पहेली के रूप मे होती है जिसे सुलझाने के लिये यकिनन आपको भी भविष्यदृष्टा बनना होता है । केवल लिखी बातो से ही आप सब कुछ जान जाएंगे यह संभव नही है । मेरा मकसद नास्त्रेदमस की भविष्यवाणीयों के आधार पर भविष्य मे होने वाली घटनाओं का वर्णन करना भर नही है अपितु किसी घटना से हो सकने वाले नुकसानों को कम करना है । पूर्व मे भी फ्रांस के राजशाही परिवारों ने नास्त्रेदमस की सहायता से कई बार ना केवल अपनी जान बचाये है बल्कि अपने से हो सकने वाली भूलों को सुधारे भी है ।
 नीचे मेरे द्वारा नास्त्रेदमस की सेंचुरी और दोहे को इस तरह से लिखा जाएगा जिससे आप समझ सकें जैसे 2- 32 का अर्थ सेंचुरी 2 का 32वाँ दोहा ।
The Lady in fury through rage of adultery, She will come to conspire not to tell her Prince: But soon will the blame be made known, So that seventeen will be put to martyrdom. 6-59
ऐसी कौन सी काली औरत होगी जो अपने देश के राजकुमार के साथ सत्रह लोगों को लेकर गायब हो जाएगी ?
The great Pilot will be commissioned by the King, To leave the fleet to fill a higher post: Seven years after he will be in rebellion, Venice will come to fear the Barbarian army. 6-75
            अब आप इन दोनों पहेली को कैसे समझेंगे ?    ये पहेली है भारत के प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर जो कि पहले पायलेट हुआ करते थे  और जब उस कोयले सी काली औरत ने बम का धमाका की थी तो राजीव गाँधी के साथ 17 लोगों की मौत हो गई थी । राजीव गाँधी की मौत से सबसे ज्यादा जो भयभीत हुई वह इटैलियन सोनिया गाँधी ही थी ।

At sunrise one will see a great fire, Noise and light extending towards 'Aquilon:' Within the circle death and one will hear cries, Through steel, fire, famine, death awaiting them. 2-91
Earthshaking fire from the centre of the earth will cause tremors around the New City. Two great rocks will war for a long time, then Arethusa will redden a new river. 1-87
The city of liberty made servile: Made the asylum of profligates and dreamers. The King changed to them not so violent: From one hundred become more than a thousand. 4-16
ये  भविष्यवाणीयाँ भी लगभग मिलती जुलती हैं ।इसे पढकर एक दृष्य याद आता है सुबह के 9 बजे न्यूयार्क शहर मे दो बडी चट्टानों की तरह खडे ट्वीन टावरों का तबाह होना जो आसमानी आग की लपटों की चपेट मे आकर पूरी तरह से नेस्तनाबूत हो गई थी और भविष्य मे एक लंबे युद्ध का कारण बनी है जो अभी तक जारी है ।
A man will be charged with the destruction of temples and sectes, altered by fantasy. He will harm the rocks rather than the living, ears filled with ornate speeches.1- 67
ISIS प्रमुख बगदादी की भाषा भी बडी ही कोमल लगती है लेकिन वह सभी मंदिर मजार और चर्चों को तहस नहस कर रहा है और इस्लाम के अलावा बाकी सभी धर्मो को वह काल्पनिक भी मानता है ।
Long awaited he will never return In Europe, he will appear in Asia: One of the league issued from the great Hermes, And he will grow over all the Kings of the East.10-75
पूर्वी देशों को एक सूत्र मे बाँधने का कार्य फिलहाल तो केवल नरेन्द्र मोदी ही कर रहे हैं 
Seven hundred captives bound roughly. Lots drawn for the half to be murdered: The hope at hand will come very promptly But not as soon as the fifteenth death. 3- 48
     यहाँ पर जिन सात सौ बंदियो को मारे जाने की बात कही गई है और 15 लोगों के बच जाने की यह घटना 2009 मे नाईजिरिया मे घट चुकी है । 700 लोगों को मार दिया गया था और सेना  केवल 15 लोगों को सुरक्षित निकाल पाई थी ।
The great shameless, audacious bawler, He will be elected governor of the army: The boldness of his contention, The bridge broken, the city faint from fear. 3-81
अभी 22 तारिख को ही अफगानिस्तान मे तालिबानियो ने अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान को जोडने वाले महत्वपूर्म पुल को तोड दिया है और वहां पर सुरक्षाबलों और तालिबान के बीच भयंकर लडाई अभी तक चल रही है जबकि वहां की जनता पलायन करना शुरू दी है तालिबानियों को मजबूत होता देखकर ।

आगे और भी है जिसे समय पर बताना उचित होगा ।