Saturday, August 1, 2015

याकूब अभी जिंदा है ।

30 जुलाई की सुबह खबर आई कि याकूब मेनन को फांसी हो गई है और उसकी लाश पोस्टमार्टटम के बाद उसके परिवार वालों को दे दी गई । लेकिन क्या सचमुच याकूब मर गया है ? क्योंकि याकूब तो कभी अकेला था ही नही । इस याकूब के साथ और भी कई याकूब थे । एक याकूब को तो उसके फर्जी नाम और  पासपोर्ट के बाद भी खुफिया एजेंसी पकड लाई लेकिन जो याकूब पकडाया वो तो केवल एक था । इसके बाद देश ने देखा  एक साथ 40 और याकूबों को  जो अलग अलग नामों और चेहरों  के साथ अपने शरीर के ही एक हिस्से याकूब को बचाने की लिए भागदौड कर रहे थे । फिर देखा ऐसे ही 12 और याकूबों को जो आधी रात को देश की सबसे बडी अदालत को रात मे ही उठा कर बैठा दिये और तब तक अपने शरीर के एक अंग को बचाने का प्रयास करते रहे जब तक कि उसके नष्ट होने की खबर नही मिली । इसके बाद फिर से देश ने देखा दुसरे दिन देश के महानायक स्व. अब्दुल कलाम की खबर को  एक खलनायक याकूब मेमन के जनाजे तले दबते हुए ।
                                                                    यदि अपने प्राचीन कथाओं पर यकिं करें तो इस याकूब का असली नाम  रक्तबीज है जिसके गिरे हर खून के कतरे से एक नया याकूब तैय्यार हो रहा है । वह याकूब इतनी तेजी से जमीन पर गिर कर फैले कि समझ ही नही पडा कि वो याकूब कब अभिनेता बन गया या कब पत्रकार कब विधायक और कब सांसद या समाजसेवी , ये देश को पता ही नही चला । अब याकूब को मारना असंभव हो गया है क्योंकि उसकी जडें तो संसद मे भी है मिडिया मे भी और जनता के बीच मे भी ..
                                                    इसीलिये मैने यह निष्कर्ष निकाला है कि याकूब ना तो मरा है ना ही मर सकता है क्योंकि रक्तबीज को खत्म करना  अब किसी के वश मे नही है । विदेश मे बैठे ढेर याकूबों को मारने की बात करने   वाले लोग क्या ये बताएंगे कि जब अपने ही देश के याकूब को मारने पर सैकडों याकूब खडे हो सकते है तो दस पंद्रह याकूबों के लिए कितने याकूब आ जाएंगे ?
                                                    अब तो मान ही लो भाई याकूब अमर है ।

Tuesday, September 23, 2014

हो रहा है तीसरा महायुद्ध- ये रहा प्रमाण ।

" In a short time the temples with colors Of white and black of the two intermixed: Red and yellow ones will carry off theirs from them, Blood, land, plague, famine, fire extinguished by water. "
                             
  जैसा कि आप लोगों को पता है अंगरेजी पर अपनी पकड कितनी मजबूत है , इसलिये इसके अनुवाद  करने मे भारी गल्तीयां हो सकती हैं मुझसे , लेकिन आप तो महान अंगरेजी के ज्ज्ञाता है इसलिये उपरोक्त कथन का हिंदी अनुवाद कर लिजिये और नीचे लिखे मेरे अनुवाद से मैच करिये....
 " कुछ ही समय बाद धर्म बांटेगा लोगों को काले और सफेद मे और इन दोनो के बीच लाल और पीले रंग वाले अपने अपने अधिकारों के लिये भिडेंगे । रक्तपात, भूकंप, बीमारियां, अकाल, युद्ध और भूख से मानवता बेहाल होगी  " नास्त्रेदमस - सेंचुरी 6  दसवां छंद ।
अगर ये मैने सही अनुवाद ढुंढा है तो इसका मतलब वर्तमान में  ये निकला कि  .. ..    काले ISIS वाले सफेद रंग वाले ईसाइयों , यहूदियों, यजिदियों व अरबी लोगों को मारने के लिये निकल पडे हैं । इन दोनों के बीच में  लाल यानि चीन  और पीले का मतलब जापान व भारत को लिया जा सकता है । चीन जापान और भारत दोनो के साथ साथ अन्य एशियाई देशों को आँखे दिखा रहा है और इसका जवाब नास्त्रेदमस के दुसरे छंद में मिलता है  ।  " When those of the arctic pole are united together, Great terror and fear in the East: Newly elected, the great trembling supported, Rhodes, Byzantium stained with Barbarian blood."
                 इसका अर्थ ये हो सकता है -  " तुर्की और मध्यपूर्व मे  रक्तपात से धरती दहल रही होगी । पूर्वी देशों मे आतंक और भय का राज होगा तब उत्तरी ध्रुव के देशों के द्वारा  एक नया व्यक्ति चुना जाएगा जिससे उसके शत्रु दहल जाएंगे "  वर्तमान समय मे चीन अपनी महत्वाकांक्षा बढा रहा है , साथ ही जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार चीन ISIS से केवल 25 डॉलर बैरल पर तेल खरीदी करके अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत कर रहा है साथ ही अपने पडोसी देशों पर हमले करनें की रणनीती बना रहा है । चूँकि चीन और ISIS का गठबंधन एक तरह से बन चूका है तो यह समझने मे देर नही लगनी चाहिये कि चीन के हथियारों और तकनीकी का इस्तेमाल करके आतंकी अपने धर्म की आड मे दुसरे देशों पर हमले करते हुए आगे बढते जाएंगे  । यह कैसे होगा आप लोग आगे देखियेगा लेकिन वर्तमान मे तो आपको प्रमाण चाहिये सबसे नजदिकी भविष्यवाणी वाला तो वह प्रमाण ये है कि इस समय एक ओर आतंकीयों को जहां उनके काले कपडों और झण्डों के कारण मुस्लिम धर्म का माना जा सकता है वहीं उसके विरूद्ध लडने वाले देशों को ईसाई या अन्य सफेद रंग को मानने वाले लोग ईसाई, अरबी, यहुदी व अन्य ... Liberty will not be recovered, A proud, villainous, wicked black one will occupy it, When the matter of the bridge will be opened, The republic of Venice vexed by the Danube. 
यानि लिबर्टी (अमेरिका) का वापसी करना मुश्किल होगा , और वह काले को मानने वाले उस पुल को खोल देंगे जो वेनिस (इटली)  के गणतंत्र को बंद करने के लिये होगा । 
फिर है -  In the country of Arabia Felix There will be born one powerful in the law of Mahomet: To vex Spain, to conquer Grenada, And more by sea against the Ligurian people. (V-55)  
यानि दूर अरब देश से आने वाला आतंक इतना ताकतवर हो जाएगा कि वह अपने मोहम्मद का ज्ञान देने के लिये स्पेन को जीतते हुए ग्रेनाडा और इटली पर कब्जा जमाएगा  । 
" The great army led by a young man, It will come to surrender itself into the hands of the enemies: But the old one born to the half-pig, He will cause Ch Ð ‘ lon and M Ð ‘ con to be friends.   " 
इसमें बाकि सब छोडो लेकिन जो MD है क्या वो मोदी हो सकता है । सारी दुनिया जिस एक व्यक्ति के नेतृत्व मे लडेंगे वो मोदी जी हो सकते हैं क्योंकि वर्तमान वही एक नेता है जो सर्वधर्म समभाव की बाते ना केवल करते हैं बल्कि उसे लागू भी करने का प्रयास कर रहे हैं ।

अब अगर आपको इन भविष्यवाणीयों का पूरा प्रमाण चाहिये तो केवल उस समय का इंतजार करिये जब समुद्र मे अमेरिका के पोतों का विनाश किया जाएगा और चीन के माध्यम से परमाणु हथियारों से हमला होगा । .....
 
 

Monday, August 18, 2014

कृष्ण प्राप्ति का महामंत्र ।

हे कृष्ण आखिर तुम कौन हो ? 
क्यों तुम्हे जग पाना चाहता है ?
तुम्हे पाने का आसान मार्ग क्या है कृष्ण ?
आखिर मीरा ने ऐसा क्या देख ली जो वो आपमें समा गई ।

कई सवाल हैं कृष्ण से संबंध रखने वाले । आज दुनिया भर मे कृष्ण जन्माष्टमी हर्षोउल्लास से मना रहे हैं , खुशी खुशी बताते हैं कि देखो कृष्ण जन्म ले रहे है , लेकिन एक सेकेंड के एक पल केवल सोच कर देखो क्या वो पल कृष्ण के लिये खुशियों का था ? जन्म लेते ही सगी माँ से विलग होकर उस माँ की गोद मे जाना जिसकी स्वयं की संतान उसके बदले मृत्यु के घाट उतरने वाली हो । बरसते पानी मे टोकरी मे रखे कान्हा को नंद  के द्वारा उफनती यमुना को पार करना ..  कृष्ण के कष्टों को समझने वाले कितने लोग होंगे आज जो एक धर्मवीर  को केवल राधा के प्रेम मे पडे प्रेमी का रूप देकर रख दिये हैं ।  
                                    कृष्ण को राधा के साथ मंदिरों मे स्थापित करने वाले लोगों से एक सवाल है कि क्या वे अपनी पत्नि की फोटो को हटाकर अपने ही घर मे अफनी प्रेमिका की तस्वीर लगा सकते हैं ? अगर आपमें ये हिम्मत है तो आप साहसी नही बल्कि चरित्रहिन होंगे जो पत्नि के रहते हुए भी उस प्रेमिका को पाने की लालसा कर रहे हैं जो आपकी ही अर्धांगिनी का घर तोड रही है ।  और अगर आपमें ये हिम्मत नही है तो फिर आप माता रूक्मणी की जगह कैसे किसी एक काल्पनिक चरित्र को बैठा सकते हैं ? अगर आप मानते हैं कि कृष्ण हैं , ये भी मानिये कि रूममणी भी हैं । कृष्ण नें केवल एक विवाह किये थे माँ रूकमणी से ,किंतु उनका प्रेम पूर प्रकृति से है । गांव, पर्वत, गाय, बांसुरी, नदि सब कुछ प्रकृति है । कृष्ण के पास  गोप गोपियों के लिये तब समय था जब वो वृंदाववन में थे , जब मथुरा पहुंचे तो उनके जीवन मे संघर्ष था स्वयं और गांव  का जीवन बचाने का संघर्ष । मथुरा से शुरू हुआ यह संघर्ष अंततः महाभारत युद्ध के साथ समाप्त हुआ । 
                                                          कृष्ण को कैसे पाएं हम , क्या मंत्र है कृष्ण को पाने का । किस महामंत्र के सहारे मीरा कृष्ण मे जीवित समा गई । वो कौन सा महामंत्र है जो कृष्ण को पाने मे सहयोग दे ...... 
वह महामंत्र है --- 
हरे राम हरे राम,  राम राम हरे हरे 
हरे कृष्ण हरेकृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
 --- हरे =  हरना , हरण करना, ले लेना 

 मेरे दुःख हर लो राम , मेरे संकट हर लो राम, हे राम मेरे राम प्रभु राम सारी विपदा हर लो ।
मुझे हर लो कृष्ण,  मेरा परिवार हर लो कृष्ण  , हे कृष्ण मेरे कृष्ण प्रभु कृष्ण मेरा सब कुछ हर लो ।

ये है वो महामंत्र ओर इसका अगर प्रभाव देखना हो तो इस्कान वालों का उदाहरण देखिये .. लाखों , करोडों कमाकर हरे रामा हरे कृष्णा गाते हुए मुक्ति मार्ग के लिये हजारों लोग निकल पडे हैं । जिनके पास धन है वो भी आज कृष्ण मे लीन है और जो दरिद्र है वो पाने के लालच मे इस महामंत्र का जाप करते हैं बिना ये सोचे कि ये जगत कल्याण का नही परमात्मा को पाने का निर्वाण महामंत्र है । ये वो महामंत्र है जो आपको धन वैभव से वंचित रखते हुए कष्ट देते हुए परमात्मा तक पहुंचाता है , इसीलिये कृष्ण सबकुछ पाते हुए भी आज तक अकेले हैं । 
उनके पास एक पत्नि थी जो आज उनसे दूर करके रख दी गई है उनकी समाधी (वीरावल मे भालका तीर्थ )  के बारे मे लोगों को नही पता  । सारा जगत जन्माष्टमी के दिन प्रसन्न है किंतु कृष्ण ........ हरे हरे 

Tuesday, August 5, 2014

नास्त्रेदमस - मोदी है राजा कलि ?

तीन ओर जल से घिरे , पूर्वी देश में एक शासक पैदा होगा जो गुरूवार को अपना उपासना दिवस घोषित करेगा । इस गैर इसाई महापुरूषकी महानता, सराहना व अधिकारों की चर्चा प्रबल होगी और वह सारी धरती व समुद्रों पर तूफान की तरह हावी रहेगा ( सेंचुरी 1- 50 )      
  एशिया मे वह होगा जो यूरोप मे नही हो सका होगा । एक विद्वान शांति दूत पूर्व के सभी राष्ट्रों पर हावी होगा ( दसवीं सेंचूरी -75 दोहा ) ।

इन दो दोहों की  व्याख्या से मेरे इस लेख के  केंन्द्र बिंदु नरेन्द्र मोदी बने हैं। वर्तमान समय मे पूर्वी देशों मे एकमात्र नरेन्द्र मोदी ही वह व्यक्ति है जो असली शांतिदूत की भूमिका निभा रहे हैं । चाहे वह पाकिस्तान की बात हो , चीन की , भूटान की या फिर नेपाल की उन्होने शुरूआत अपने पडोसियों से संबंध सुधारने से ही किये है और अचानक  सारे पडोसी भी भारतीयों को अपने से लगने लगे हैं । पाकिस्तान मे तो इतना भारी परिवर्तन हुआ कि उसने वजिरिस्तान से सारे आतंकियों को कदेड दिया और अब जो आतंकी काश्मीर मे है ुन्हे भी संरक्षण देना बंद कर रहा है । देश की नक्सल समस्या के समाधान के लिये उन्होने अप्रत्याशित रूप से नेपाल जाकर माओवादी प्रचंड से मुलाकात करे . जिसका परिणाम भी देश के भीतर नक्सल खत्म होने मे कारगर रूप से दिखेगा । मोदी ने कभी भी युद्ध की बात नही किये और ना ही अपने धर्म से डिगे । जब सारे नेता स्वयं को धर्म निरपेक्ष दिखाते फिर रहे थे उस समय मोदी ने अपने धर्म की व्यख्या दकर सभी को हैरान कर दिये । लोक सभा चुनाव मे सभी को उम्मीद थी कि बिना धर्म निरपेक्ष बने जीत हासिल नही हो सकती किंतु मोदी ने अपने को सनातनी धर्म के नियमों पर आधारित धर्म निरपेक्षता का सिद्धांतवादी साबित करके चुनाव मे भारी विजय पा लिये ।  मोदी को अवतारी पुरूष साबित करने मे मुझे पता है भारी दिक्कतें आएंगी , किंतु दुसरे अवतारी पुरूष चाहे वह राम हों या कृष्ण, गुरू गोविंद हों या महावीर हर किसी को अपने अपने काल और युग मे तकलीफें ही झेलनी पडती है ।
                                      अवतारी काल पुरूष वही मनुष्य बन सकता है जो विपरित परिस्थियों से जूझ कर , विपत्तियों से लड कर अपने धर्म पथ पर सदा कायम रहता है । हिंदु धर्म मे राजा कलि के बारे मे कहा गया है कि यह अवतारी राजा चारों युग की प्रधानता के अनुसार शुद्र होगा । सतयुग- ब्राह्मण (राजा हरिशचंद्र ) , त्रेता युग - क्षत्रीय ( राजा राम ), द्वापर युग - वैश्य ( कृष्ण यदु वंशी थे । यादव वैश्यों मे होते है क्योंकि उनका मुख्य कार्य देश के दुग्ध उद्योग को संचालित करना होता है  ) अब बारी है कलयुग की  - अपने शुरूआती तीनों युगों की तरह यह युद्ध भी अधर्म पर विजय पाने के लिये ही लडा जाएगा यह तय है,  लेकिन  जीतेगा कौन ? जीतेगा वह राजा जो धर्म के मार्ग पर चलना जानता हो । जिसे अपने धर्म का ज्ञान हो , जो स्वयं से बढ कर परमात्मा को माने , जो अपने हर कार्य को गंभीरता के साथ पूर्ण करे । ..
                                     ऐसा कोई नेता या राजा जो पूरी दुनिया मे हो तो वर्तमान मे मुझे नरेन्द्र मोदी के अतिरिक्त कोई नही दिखता । हमारे देश का संविधान प्रधानमंत्री को राजा की तरह का अधिकारी बनाता है और अब हमारा राजा अपने जिस कर्म पथ पर आगे बढ रहा है वह उन्हे राजा कलि बनाने के एक कदम और करीब ले जाता है । जिस तरह से मोदी अपने धर्म और कर्म  मार्ग पर आगे बढ रहे हैं उसे देखते हुए यह आंकलन करना कठिन नही है कि वह गुरूवार के दिन अवकाश घोषित करा दें , क्योंकि गुरूवार को सनातनी धर्म के नियमो के अऩुसार केवल साधना का दिन माना जाता है और आज भी कई घरों मे गुरूवार को शरीर पर तेल, साबुन लगाना वर्जित माना जाता है तथा कुछ घरों मे झाडू पोंछा तक नही होता है ।
 
आगे होने वाली घटनाक्रमों की एक महत्वपूर्ण कडी
एक पनडुब्बी में तमाम हथियार और दस्तावेज लेकर वह व्यक्ति इटली के तट पर पहुंचेगा और युद्ध शुरू करेगा । उसका काफिला बहुत दूर से इतालवी तट तक आएगा । ( दुसरी सेंचुरी-5वां दोहा )
 समुद्री मार्ग से इटली पहुंचने का आसान रास्ता समुद्र ही है  और वो देश  जहां से पहुंचा जा सकता हो वह लीबिया, अल्जीरिया, मिश्र, सऊदी अरब, तुर्की और इस्राइल हैं । इन सभी देशों मे से केवल सऊदी अरब को छोडकर शेष सभी देश युद्धरत है , चाहे वह युद्ध आपसी हो या फिर गृह युद्ध । जिस तरह से इराक पर आतंकी कब्जा हो चूका है उसे देखते हुए यह कहना ठीक ही होगा कि उक्त सभी देश आज नही तो कल आतंकीयो के हाथ पडने वाले हैं ।

Tuesday, July 8, 2014

नक्सल , सेना और सरकार


छत्तीसगढ  कांग्रेस के बडे नेताओं का एक साथ नक्सली हमले में सफाया कोई सामान्य घटना नही कही जा सकी । इस दरभा कांड ने पूरे देश की राजनीती को झकझोर कर रख दिया था । दरभा कांड से पहले आम जनता के मन मे यह भावना बैठी हुई थी कि नक्सली केवल पुलिस, सेना और निरीह जनता को ही मारते हैं , लेकिन इस घटना ने इतिहास और सोच को एक साथ बदल दी । इस घटना के बाद एक पक्ष के लोगों के सामने नक्सलियों का क्रूर चेहरा सामने आया जिसमे बताया गया कि नक्सली महिलाएं महेन्द्र कर्मा के शरीर को चाकूओं से गोद गोद कर मारी थी और शरीर मे गोलियो के तो तीन लेकिन चाकूओं के 70 से ज्यादा जख्म थे । अब महेन्द्र कर्मा की मौत का दुसरा पक्ष जो नक्सलीयों की नही ग्रामीणों की बात करता है और कहता है कि महेन्द्र कर्मा के द्वारा सलवा जुडुम की आड मे स्थानीय आदिवासीयों के ऊपर भारी अत्याचार किया गया था तथा कई लडकियां सलवा जुडुम समर्थकों की हवस का शिकार बनी थी और उन्ही शिकार महिलाओं ने महेन्द्र कर्मा को इस प्रतिशोध भरे तरिके से दुर्दांत बदला ली हैं  । 
                                                      नक्सलियों का यह तौर तरीका सभ्य समाज को कतई रास नही आ सकता और ना ही समाज या कानून इसे स्वीकार करेगा किंतु घटना तो घटी है । एक दुसरे पर दोषारोपण चलता रहा और चल भी रहा है किंतु सेना ने दोषारोपण से स्वयं को दूर रखते हुए अपनी सटिक रणीनीतीक कार्यवाही जारी रखी जिसकी वजह से बस्तर कुछ हद तक शांत हो गया ।                 
                  एक बात जो मुझे याद पडती है कि कांग्रेसी नेताओं के काफिले पर हमले के कुछ दिन पहले महेन्द्र कर्मा के कई साथीयों को छत्तीसगढ हाईकोर्ट क द्वारा बलात्कारों के मामले से बरी कर दिया गया था । इस बात का उस घटना क्या संबंध हो सकता है इस पचडे मे मैं नही पडना चाहता क्योंकि बात केवल हवा हवाई ही होती है । नक्सलियों से मिलने का दावा करने वाले पत्रकार भी खुलेआम यह नही कह सकते कि मैं नकस्लियों से उनकी समस्याएं जानकर आया हूँ क्योंकि तब वह नक्सल समर्थक माना जाता है । आज बस्तर के आदिवासी अपने जल जंगल जमीन के हक मे अकेले लड रहे हैं यह सोचकर कि शायद प्रवीरचंद भंजदेव पुर्नजन्म लेकर उनकी रक्षा कर सके और अपना जंगल बचा सके ।
                           नक्सल क्या है, नक्सली कौन है के बजाय हमे अपनी सेना का मनोबल बढाना होगा जो धुर नक्सली क्षेत्रों मे जाकर नक्सली मुक्त जंगल बनाना चाह रहे हैं । वैसे मुझे एक सीआरपीएफ के जवान के साथ घटी घटनाक्रम भी ध्यान आ रही है जो मोहला मानपुर क्षेत्र मे हुई थी जिसमे उक्त जवान की जान नक्सलियों ने यह वादा करने पर बख्शे थे कि वह वापस जात ही सेना की नकरी छोड देगा और उसने वैसा ही किया भी था । सेना के सामने सबसे बडी जिम्मेदारी यह है कि वह नक्सलियों के खात्मे के अलावा आदिवासीयों के पुर्नवास के लिये भी योजनाएं चलाए ताकि मुहं मे गमछा बांधे नक्सली औऱ उसी गमछे को सिर पर लपेट कर हाथ जोडकर खडे ग्रामीण मे वह अंतर समाप्त कर सके ...................
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जो पूरी तरह से असंभव है क्योंकि लडाई तो नक्सल,  सेना  और सरकार की है लेकिन नाश आदिवासीयों के जल जंगल जमीन का हो रहा है ।

Sunday, May 18, 2014

नरेन्द्र मोदी - देश के बाद विश्व है ।

" मैं ना तो आया हूँ और ना ही किसी ने भेजा है , मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है " ये वो शब्द हैं जो बोले तो बनारस मे गए थे लेकिन हर बनारस वासियों की तरह सारे भारतीयों के दिलों में घर कर गए । एक सहज भाव जो माँ के आंसूओं और पिता की शहीदी पे भारी पडे । देश के सामने  तीन मुख्य बातें थी जिनमे से एक को चुनना था झुठे वादे के सहारे खडी कांग्रेस, कायरों की तरह जिम्मेदारी से भागी आप पार्टी और ठोस विकास को लेकर खडे नरेन्द्र मोदी । इस बार भाजपा के जीत का चाहे जो भी गणित या आंकलन राजनीतीक पंडित लगाएं मुझे लगता है किसी का भी ध्यान मुख्य जड की ओर नही जा पाएगा कि इतनी बडी जीत आखिर सुनिश्चित कैसे हुई ? दरअसल अभी तक कांग्रेस की जीत की बहुत बडी वजह जो उनका फार्मुला भी था कि जाति और धर्म के नाम पर तो वोट उन्हे नही भी मिलेंगे तो कोई बात नही उनकी सहयोगी सपा, बसपा,एनसीपी जैसे दलों को तो मिल ही जाएंगे और रही बात भ्रष्टाचार की तो कांग्रेस के नेताओं ने एक बात हमेशा कहे हैं कि जनता को भूलने की आदत है । 
                                                  बस इन्ही दो फार्मुलों को भाजपा ने तोड दिया । इस बडी जीत में बहुत बडी भागीदारी कांग्रेस के नेताओं ने भी निभाए है जो गाहे बगाहे उटपटांग बयानबाजी करके जनता के मन में मोदी के प्रति हमदर्दी जगाते रहे । इसमे से एक बयान जिसकी काट भाजपा के बहुत काम आई वह थी " जनता को भूलने की आदत है , जब वह बोफोर्स को भूल गई , वैसे ही सैनिकों के कटे सिर और भ्रष्टाचार को भूल जाएगी " लेकिन मोदी एंड कंपनी ने जनता को भूलने नही दिया । जनता को कटे सिर से लेकर ताजा भ्रष्टाचार और बढती महंगाई को जनता के जेहन मे ताजा रखा जिसका परिणाम ये रहा की जनता ने बैनर पोस्टर तो दुसरे दलों के लगाए लेकिन काम पूरा मोदी जी का कर दिये । 
                                                    बनारस के रोड शो में उमडी भारी भीड से राहुल और केजरीवाल मुगालते मे आ गए कि जनता का उन्हे समर्थन है, जबकि बिना रोड शो किये मोदी के साथ की भीड को उन्होने बाहरी कार्यकर्ताओं का तमगा दे दिया । बनारस ने अपनी सदाबहार मेहमाननवाजी को बरकार रखा जिसमे कांग्रेस, केजरीवाल और सपा को भीड के मामले मे कोई निराशा हाथ नही लगने दी लेकिन प्रत्याशी वही चुने जो उनके दिल मे था । गुजरात और राजस्थान तो समझ आया लेकिन आसाम मे मिली जीत से जनता  मोदी जी की इस बात से सहमत दिखी की " बांग्लादेशीयों को बाहर निकाला जाए " इस मुद्दे पर ऐसा लगा की भाजपा अपना खाता भी नही खोल पाएगी लेकिन वास्तव मे उस क्षेत्र की जनता ने बीजेपी को जीत दिला कर मोदी जी के साथ सहमती दिखा दी । आए दिन दंगे फासदों वाले राज्यं से उन सभी दलों का सफाया हो गया जो दंगो की आड मे केवल जाति और धर्म की राजनीती कर रहे थे ।
                                                     ये तो हुई भारत देश की बातें अब जरा रूख विदेशों की ओर करते हैं । मोदी जी को वीजा देने मे हमेशा कडा रूख अपनाने वाला अमेरिका इस समय केवल मोदी जी को आमंत्रित करके इति श्री कर चूका है । पाकिस्तान की दहशत तो मोदी जी के नाम से ही इतनी ज्यादा थी की वह और उसके नमुांइदे लगातार मोदी विरोध मे लगे रहे । चीन हो या फिर अन्य देश हर किसी को मोदी नाम से ही इतनी ज्यादा दहशत है मानो कोई दुसरा हिटलर सत्ता मे आ गया हो जबकि वास्तविकता ये है कि कांग्रेस और विरोधी दलों ने मोदी के नाम की आड मे केवल अपनी गंदी राजनीती और विदेशी फंड बढाते गए थे । भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर किसी को चुनाव लडने का अधिकार है और फिर जब हमारे देश मे ओवैसी जैसे लोग अपनी पार्टी बनाकर  सांसद बन सकते हैं तो उस लिहाज से तो भाजपा कई गुना ज्यादा बेहतर है फिर भी केवल भाजपा को सांप्रदायिक संगठन के रूप मे देखना अमेरिका सहित दुसरे देशों को अब भारी पड रहा है । अमेरिका मे सिक्ख विरोधी दंगों के मामले मे सोनिया की अमेरिका मे पेशी चल रही है लेकिन दंगो का जनक और सूत्रधार मोदी को माना जाता रहा अब वही देश भारत को किस नजरिये से देखेंगे ये सोचने वाली बात है । वैसे नरेन्द्र मोदी ने जो भी कहे उसे पूरा करके दिखलाए हैं और अगर उन्होने कहे थे कि एक ऐसा भारत देश का निर्माण करूंगा जहां आने के लिये अमेरिका जैसे देश कतार मे लग कर वीजा लेंगे , तो मुजे लगता है अब वह वक्त आ गया है । 
                                                              इस समय सारा विश्व लड रहा है । हर देश किसी ना किसी युद्ध मे व्यस्त है कोई गृह युद्ध में तो कोई आतंकियों से तो कहीं आपस मे ही औऱ अगर मनमोहन की कोई उपलब्धी हम मानेंगे तो यही की कम से कम हमारे देश मे ये हालत वो नही बनने दिये । झूक कर औऱ देश की गरिमा को गिरा कर ही सही अभी तक उन्होने देश को युद्ध से बचाए रखा था लेकिन अब देश एक ऐसे हाथों मे आ गया है जिसके आने के पहले ही पडोसी मुल्कों में केवल नाम की ही दहशत है ।  
                                                       आगे ईश्वर की मर्जी ।

Tuesday, May 6, 2014

राम के मोदी या मोदी के राम

लोकसभा 2014 मे यह मेरी पहली और इकलौती पोस्ट है जिसे मै आज इसलिये लिखने जा रहा हूँ क्योंकि मोदी ने आज अपना अंतिम ट्रंप कार्ड खेलकर पूरे लोकसभा चुनाव मे अपनी जीत का स्पष्ट दृष्टिकोंण रख दिये हैं । अब इस लोक सभा चुनाव की पूरी तैय्यारी मे सबसे बडी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नरेन्द्र मोदी की चर्चा ही केंद्र बिंदु मे रखते हुए अपन बात करें तो देखते हैं कि एक ओर संपूर्ण विपक्ष है और एक तरफ अकेले मोदी । ना कोई दल ना कोई अन्य नाम सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी । मोदी ने अपने चुनावी अभियान की शुरूआत करते ही ये आभास दिला दिया था कि उनके पास विपक्ष की हर प्रश्न का उत्तर है औऱ हर वार की काट भी मौजूद है । 
विपक्ष के पास नरेन्द्र मोदी के लिये केवल गोधरा दंगे के अलावा बाकि सारी कहानी केवल झूठ पर टिकि थी मसलन गुजरात मे विकास नही हुआ, गुजरात के किसान आत्महत्या कर रहे हैं , गुजरात मे केवल अमीर उद्योगपतियों को बढावा दिया जा रहा है , गुजरात मे पंजाब के किसानों को मार कर भगाया जा रहा है वगैरह वगैरह ..... 
                                       लेकिन विपक्ष के इन झूठे दावों की पोल हर चुनाव मे मतदान के पहले ही खुल जाती थी और मोदी को बढत मिल जाती थी जिससे विपक्ष का हर दांव खाली चला जाता था, लेकिन एक बात औऱ गौर करने लायक है कि मोदी का साथ ना केवल मानवों की टीम दे रही है बल्कि कोई ना कोई अदृष्य ताकत भी उनके साथ चल रही है जो हर वार का जवाब उन्हे कुदरती तौर पे दे देती है । कांग्रेसी नेता हों या फिर किसी भी दल के नेता ..जिसने भी मोदी जी के खिलाफ मुंह खोला उसे तत्काल किसी ना किसी मुसीबत मे कुरती तौर से मुश्किलों का सामना करना पड गया । दिग्विजय तो मात्र एक उदाहरण है जिन्होने मोदी जी की पत्नि को लेकर कई अंट शंट बयान देते रहे लेकिन कुदरती तौर पे जब उनका चाहरा अमृता राय के नाम के साथ उजागर हुआ तो वह स्वयं सबसे बडे चरित्रहिन व्यक्ति निकले ।  इशी तरह कपिल सिब्बल, चिंदंबरम औऱ आजम और खुर्शीद के विरूद्ध भी कुछ ना कुछ ऐसा होता चला गया जिसमे उन्हे ही मुंह की खानी पडी । 
                                        पं. बंगाल मे ममता के विरूद्ध जब मोदी ने बिगुल फूंका तो ममता नेबांग्लादेशीयों का सपोर्ट करके खुद अपने जीत का रहस्य एक तरह से कबूल कर ली की उनकी सेना बांग्लादेशियो पर ही टिकी हुई है नतीजा आसाम मे हुई 30 मौतों के रूप मे सामने आया ।   और आखिरकार मोदी जी ने कल की फैजाबाद सभा मे राम जी की तस्वीर के सामने भाषण देकर औऱ राम राज्य की बात कह कर विपक्ष और चुनाव आयोग दोनो को एक साथ पटखनी दे दी है । प्रभु राम जी की तस्वीर लगाने से कांग्रेस और तृणमूल ने तो पूरी भाजपा पार्टी को ही बैन करने की बात कह कर खुद अपने पैर पे कुल्हाडी मार लिये हैं । दरअसल ये एक ऐसा दांव है जिसमे समर्थन ना देने वाला वृहद हिंदु वोट एक झटके मे ही गंवा देगा और वो हिंदु वोट यादव, भूमिहार,   औऱ दलितों मे भी बहुलता के साथ हैं । मुस्लिम वोटर  तो इस बार अप्रत्याशित रूप से खामोशी ओढते हुए स्वयं को निष्पक्ष  बताने की कोशिश मे है ताकि मोदी सरकार आने पर वे कह सकें कि हमारे समर्थन के बिना ये सरकार नही बन सकती थी । 
                                          मोदी ने इस चुनाव मे अपना एकदम स्पष्ट नजरिया रखते हुए कार्य किये है जो केवल मजबूत सेना,  मजबूत देश, विकास पूरक देश, समर्थ राष्ट्र,  भ्रष्टाचार मुक्त देश , महंगाई मु्क्त देश और धर्म से ऊंचा राष्ट्र पर आधारित है । इसके विपरित विपक्षी दलों के पास जाति , धर्म और  झूठे विकास के खोखले दावों के अलावा कुछ नही है । विपक्ष केवल गोधरा दंगो के नाम से देश के मुस्लिम वोटरों को मोदी का भय दिखाकर ही वोट हासिल करना  चाहता है जो वर्तमान मे शिक्षित जनता के गले नही उतर रहा । 
                                              अब फैसला तो 16 मई से ही मिलना शुरू होंगे तब तक हम मोदी राम है या राम के मोदी है पर बहस चालू रखेंगे एबीपी और एनडीटीवी के माध्यम से ।

Wednesday, March 26, 2014

संयुक्त राष्ट्र - गुलाम तैय्यार करने वाला संगठन ।

फिर से भविष्यवाणी ।  अरे भाई हर बात को आप लोग भविष्यवाणी से क्यों जोड लेते हो ? कभी संभावना की तलाश भी कर लिया करो कि जो हो रहा है अगर वैसे ही चलता रहा तो आगे क्या होगा । अब आपको लग रहा होगा कि संयुक्त राष्ट्र भंग हो या चलता रहे अपने को क्या - तो यह सोच बदल दिजिये क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के द्वारा दुनिया के कई देशों को स्वास्थ्य सुविधा की राशि इसी के माध्यम से मिलती है - भारत को भी । हमारे देश की कई योजनाएं ऐसी है जिनमे सारा पैसा संयुक्त राष्ट्र के द्वारा ही आता है और सरकार उन पैसों का इस्तेमाल नीजी स्वार्थ मे करती हैं.....  खैर  वो भ्रष्टाचार का मामला है ना कि हमारी इस पोस्ट का । तो सबसे पहले बात करते हैं संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का उद्देश्य क्या था ?? संयुक्त राष्ट्र के व्यक्त उद्देश्य हैं युद्ध रोकना, मानव अधिकारों की रक्षा करना, अंतर्राष्ट्रीय कानून को निभाने की प्रक्रिया जुटाना, सामाजिक और आर्थिक विकास उभारना, जीवन स्तर सुधारना और बीमारियों से लड़ना । 
                       1.- युद्ध रोकना संयुक्त राष्ट्र का पहला उद्देश्य है लेकिन यह अपने उस उद्देश्य को वर्तमान मे भूल कर भेदभाव अपना रहा है जैेसे - अमेरिका ने लिबिया औऱ इराक को कथित तौर से आजादी दिला दिया लेकिन उसका परिणाम क्या हुआ ? इराक से अथवा लीबिया से दुनिया को कोई खतरा नही था और यह शुद्ध रूप से उनके तेल भण्डारो पर कब्जा करने की अमेरिकी साजिश थी जिसमे वह पूर्णतः सफल हो गया । इन युद्धों मे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका केवल इतनी भर रही की उसे इराक और लीबिया  की जनता सद्दाम औऱ गद्दाफी के तानाशाही से मुक्त होती दिखलाई पडी, जबकि वर्तमान मे दोनो देश गृहयुद्ध की आग मे जल रहे हैं । 
                    2.- मानव अधिकारों की रक्षा  जबकि वर्तमान समय मे सीरिया, मिश्र, सूडान उत्तर कोरिया सहित कई अफ्रीकी राष्ट्रों की जनता  अपने अधिकारों  को जानना तो दूर अपनी जान बचाने की जद्दोजहद मे है । संयुक्त राष्ट्र अपनी सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से जो दवाएं अथवा रसद उन देशों को पहुंचा रहा है वह पूर्णतः मिशनरी संस्थाएं होती है जो जनता की सेवा के नाम से पैसों की हेरा फेरी करके अपने चर्च को लाभ पहुंचाती है फिर चाहे वह धर्म परिवर्तन हो या फिर चर्च को आर्थिक सहायता । हमारे देश मे भी जो NGO संचालित होते हैं उनके अधिकार धर्म व जाति के आधार पर अलग अलग होते हैं । ईसाइ मिशनरीयों को मिलने वाला धन असीमित हो सकता है किंतु सामान्य NGO को मिलने वाले धन की जांच पर इतने अडंगे रहते है कि संचालक त्रस्त हो  जाते हैं यानि की मानव अधिकारों की रक्षा के नाम से संयुक्त राष्ट्र मिशनरी और यूरोपीय संघों को लाभ पहुंचा रहा है । ताजा जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र आज इटली के उन नौसैनिकों के मामले पर संज्ञान लेने वाला है तथा भारत देश को निर्देश देने वाला है,  जिन पर हमारे देश के नागरिकों की हत्या का मामला चल रहा है ।
                        3.- अंतर्राष्ट्रीय कानून को निभाने की प्रक्रिया जुटाना जबकि इस क्षेत्र मे संयुक्त राष्ट्र के पास ऐसा कोई उल्लेखनीय योगदान नही होगा जिससे यह साबित होता हो कि अंतर्राष्ट्रीय कानून को निभाने मे कोई खास पहल की गई हो । इसका नजरिया हमेशा यह रहता है कि जहां पर अंर्तराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो रहा है वह यूरोपीय संघ - अमेरिका के हित मे है या नही । यदि हित मे है तो जायज औऱ अगर नही है तो नाजायज ।  चूँकि इसका नियंत्रण मुख्य रूप से इटली, अमेरिका औऱ फ्रांस के नियंत्रण मे है सो यह संगठन उन्ही के हितों मे बातें और काम करने को प्राथमिकता देता है ।
                      4.- सामाजिक और आर्थिक विकास उभारना इसके आड मे यह पूर्णरूपेण ऐसे कार्यक्रम तैय्यार करवाता है जिससे उस देश की सामाजिक प्रणाली अस्त व्यस्त हो जाती है । हमारे देश मे ही इसका उदाहरण देखिये - सामाजिक स्वतंत्रता के नाम पर सेक्स बढाया गया, धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर हमारे ही देश मे ईसाइ और मुस्लिम धर्म को आरक्षण लाभ दिया जाने लगा , आर्थिक विकास व सहयोग के नाम से अमेरिकी कंपनीयों को बढावा दिया गया जैसा हमारे देश मे किया गया वैसे ही इस संगठन के द्वारा विश्व के अन्य विकासशील देशों के साथ किया जा रहा है औऱ जो देश इसका विरोध करते हैं उन्हे बेवजह के कडे प्रतिबंध के नाम पर धमकाने वाले संयुक्त राष्ट्र के सरपरस्त हावी हो जाते हैं । 
                        5.- जीवन स्तर सुधारना और बीमारियों से लड़ना यह एक ऐसा फार्मुला जिसके लिये दवा कंपनीयां अरबों खरबों खर्च कर रही हैं । जीवन स्तर सुधारने के नाम पर साफ सफाई , साफ पेयजल और बेहतरीन स्वास्थय सुविधाएं दी जानी चाहिये और इन कामों मे होने वाला खर्च यूँही सरकारी खातों मे या तो वापस चले जाता है या फिर नेता अधिकारीयों की जेब मे । बीमारियों से लडने के नाम पर दवा कंपनीयां भारी फर्जीवाडा कर रही है एड्स जैसी बीमारी जिससे विश्व मे एक भी दमी की मौत नही हुई कंडोम बेचने के नाम पर फैला दी गई । यौन संक्रमण , हेपेटाइटिस,  स्वाइन फ्लू जैसी कई बीमारियां ऐसी है जिन्हे हमारे यहां सामान्य दवाओं से ठीक कर लिया जाता था लेकिन संयुक्त राष्ट्र की आड मे 2 का माल 200 बनाकर दवा कंपनीयां सप्लाई कर रही है  और मजे की बात ये है कि ये सभी कंपनीयां या तो अमेरिका की होती है या फिर फ्रांस की ।  
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                                   सच तो ये है कि मुझे कहीं भी संयुक्त राष्ट्र की ऐसी महती भूमिका दिखलाई नही पडी है जिससे मैं यह मान सकूँ कि संयुक्त राष्ट्र विश्व मे कोई परिवर्तन ला सकता है । विश्व बैंक हो या फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन , अंतराष्ट्रीय कृषि कोष हो या खाद्य एवं कृषि संगठन  यह सभी पूर्ण रूप से संयुक्त राष्ट्र के अधीन होकर अपने आका मुल्कों के हितों की रक्षा करते हैं । ये हर देश को केवल अपने हिसाब से नियंत्रित करने की चाल चलते हैं और कुछ नही ।

Thursday, March 6, 2014

सावधान - तीसरा विश्वयुद्ध जारी है ।

सूखा जरूरी नही की गरमी में आए ओले से भी सूखा पडता है ।
तो कैसे हैं जनाब आप लोग,  औऱ कैसा लग रहा है तीसरे महायुद्ध के दौर मे अपना समय गुजारना ।   जाहिर सी बात है आप कहेंगे मुझे अपने दिमाग का इलाज करवाना चाहिये । मैं आपकी सलाह मान भी लेता लेकिन क्या करूं ये नास्त्रेदमस जी मुझे बार बार झिंझोड कर उठा देते हैं और कहते हैं पढ और लिख । मैंने कई दफा उन्हे समझाया कि आदरणीय मेरा अंगरेजी से दूर दूर तक कोई लेना देना नही है तो बस उत्तराखण्ड के अपने मित्र चेतन हरिया थमा दिये । कहे कि उसके कंधे का आपरेशन हुआ है वो अपने घर मे रहेगा उससे अनुवाद करवाओ तो.. अब क्या किया जा सकता है सिवाय ये बताने के लिये की लो जनाब आप तीसरे महायुद्ध के दौर मे ही अपना जीवन बीता रहे हैं ... पता था आप भी केजरीवाल की तरह प्रमाण मांगेगे तो चलिये क्रमवार प्रमाण पकडते चलिये ... लेकिन उसके पहले मुझे झेलिये ।
                                                      मैं आगे की कडियां बताने से पहले कुछ बाते आप लोगों की जानकारी मे देना चाहता हूँ कि अभी जब मैं पोस्ट को लिख रहा हूँ तो दुनिया मे इस समय क्या हो रहा है - 
1. - दक्षिणी सूडान मे जबरदस्त गृहयुद्ध ।
2. - अफगानिस्तान - तालिबान मे युद्ध ।
3. - चीन और जापान के मध्य द्विप को लेकर युद्ध के हालात ।
4. - ईराक मे गृहयुद्ध जारी ।
5. - इज्राइल द्वारा सीरिया मे बमबारी ।
6. - रूस - यूक्रेन को लेकर पूरे विश्व मे तनाव ।
               इसके अलावा कई अफ्रीकी देशों मे   आपसी लडाईयां या गृहयुद्ध चल रहे है । यानि दुनिया एक तरह से कहीं ना कहीं युद्ध कर ही रही है । अब इन सके बीच नास्त्रेदमस की भूमिका क्या है ये देखिये -- 
 नास्त्रेदमस अपनी तीसरी सेंचुरी के 4- 5  दोहे मे लिखते हैं - 
" Near, far the failure of the two great luminaries Which will occur between April and March. Oh, what a loss! but two great good-natured ones By land and sea will relieve all parts. " 

When they will be close the lunar ones will fail, From one another not greatly distant, Cold, dryness, danger towards the frontiers, Even where the oracle has had its beginning.
                                                   
                                               इसमे नास्त्रेदमस ने अप्रेल और मार्च या मई माह में दो शक्तियों के टकराव के बारे मे लिखा है । इस साल अगले महिने अप्रेल मे अप्रत्याशित रूप से दो सूर्य ग्रहण पड रहे हैं 15 अप्रेल और 29 अप्रेल को । कुछ जानकारों के अनुसार दो सूर्य ग्रहण एक ही माह मे पडना बेहद अशुभ है और ऐसा माना जा रहा है कि महाभारत काल के बाद यह योग बन रहा है । अब अगर इस ग्रहण को हम बेस मानकर  चलें कि इन्ही ग्रहण के कारण बहुत कुछ बदलाव हो सकते हैं । वर्तमान समय मे सारी दुनिया सर्द की तेज लहरों व भारी बरसात से जूझ रही है । इससे फसलें भी बरबाद हो रही है यानि सूखे का खतरा बढ चूका है ।  यानि भविष्यवाणी के अनुसार हम लोग विश्वयुद्ध के दौर मे पहुंच चूके हैं और आगे बढकर झांकने का प्रयास करते हैं कि नास्त्रेदमस क्या कहना चाहते हैं ।
सेंचुरी3/22 में लिखा है
 " Six days the attack made before the city: Battle will be given strong and harsh: Three will surrender it, and to them pardon: The rest to fire and to bloody slicing and cutting. "
                    यह भविष्यवाणी 6 दिन का युद्ध की बात बतलाता है जो 1967 मे इस्राइल ने सीरिया, जॉर्डन और मिश्र को अकेले हरा कर जीता था । इस युद्ध का उल्लेख नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी मे तीसरे विश्वयुद्ध की शुरूआती पृष्ठभूमि के बीच मे आया है इसलिये मेरा ये अनुमान है कि यह घटना दोहराई जा सकती है और शायद इस बार इसका परिणाम अलग हो ।

" By the appeased Duke in drawing up the contract, Arabesque sail seen, sudden discovery: Tripolis, Chios, and those of Trebizond, Duke captured, the Black Sea and the city a desert " 
                                        
                                          इस पहेली मे ब्लैक सी यानि काला सागर का उल्लेख है । काला सागर वह हिस्सा है जहां पर रूस ने अफनी सेना को यूक्रेन के विरूद्ध अलर्ट पर रखा है । मुझे जहां तक समझ पड रहा है कि काला सागर के इस भाग मे जो युद्ध होगा उसमे महाशक्ति को हार का सामना करना पड सकता है यानि रूस की हार हो सकती है ।  चूँकि आज 6 मार्च ही है इसलिये अभ अगले महिने तक देखते हैं क्या क्या हवा बदलती है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी ...तब तक आप लोग विश्वयुद्ध के शुरूआती भाग का आनंद लिजिये ।
औऱ क्या ............... आगे की खोज जारी है अभी भी ... 

Saturday, February 15, 2014

बिजली का झटका लगा केजरीवाल को ।

राजनीती के क्रकेट मैदान मे अरविंद केजरीवाल 49 रनों की पारी मे हिट विकेट आउट हो गए हैं । जनलोकपाल को लेकर इन्होने जो बखेडा खडा किये वो इनकी अदूरदर्शिता नही बल्कि सोची समझी रणनीती समझी जा सकती है । इन्होने दिल्ली सरकार से जो वादे करके सत्ता पे आए उनमें वो हर तरह से नाकाम हुए और अपनी नाकामियों को " हमें तो जानकारी ही नही थी कि ऐसा करना होता है " जैसी बेतुके बायनों से और भी जलील हुए । आज राजनीती के नजरिये से लोग केवल आप पार्टी और केजरीवाल को हेय दृष्टि से देखेंगे औऱ होना भी यही चाहिये क्योंकि आप को पता होना चाहिये था कि जिस भ्रष्ट सिस्टम से वो लडने के लिये आए हैं वो कौन लोग हैं । केजरीवाल की 49 दिन की सरकार ने ऐसा कोई भी काम नही की जिससे यह साबित हो सके कि वे एक बेहतर राष्ट्र का निर्णाण कर सकते हैं । दिल्ली की सत्ता पाने के बाद केजरीवाल ने बजाय केन्द्र सरकार की नाकामी को सामने लाने के केवल भाजपा और मोदी के ऊपर ध्यान केंद्रित रखा जिससे जनता को यह समझ आने लगा कि कांग्रेस ने ही आप पार्टी को जन्म दिया है औऱ यह पार्टी उसी तरह से काम करेगी जैसे शरद पवार, मायावती, मुलायम सिंह  और लालू यादव कर रहे हैं । यदि केजरीवाल सचमुच भ्रष्टाचार से लडना चाहते तो उनके पास कई रास्ते थे जिनमे से सबसे आसान रास्ता यह था कि वे अंबानी- कांग्रेस गठबंधन को जनता के सामने ढंग से उजागर करते । बजाय गैस के मूल्यों को बढाने के मुद्दो को सामने लाने के ,  वो सबसे पहले ये सवाल करते कि हमारे देश में पैदा होने वाली प्राकृतिक गैस के दाम डॉलर मे क्यों तय किये जा रहे हैं  ?  
                                            यह सवाल आमजन के दिमाग मे सबसे पहले आना चाहिये था कि हमारे ही देश मे पैदा होने वाले सामान को हम डॉलर के रूप मे भुगतान कर रहे हैं । जब एक उद्योगपति को पेट्रोलियम गैस के दाम का भुगतान सरकार डॉलर मे कर सकती है तो इस देश के किसानों को भी वह डॉलर मे ही भुगतान करे उसकी फसलों का । यह मामला एक ऐसा था जिसे वह ढंग से प्रस्तुत कर सकते थे किंतु इसके बदले उन्होने कांग्रेस - भाजपा को आपस मे हाथ मिलाने का मौका दे दिये  और जनलोकपाल जैसे मामलों मे खुद को शहिद साबित करने की नाकाम कोशिश किये ।
                                         यदि केजरीवाल ने वीरप्पा मोइली और अंबानी के विरूद्ध मोर्चा नही खोला होता तो शायद कुछ दिन और यह सरकार चल लेती किंतु वो भूल गए कि दिल्ली को बिजली  रिलायंस  एनर्जी ही दे रही है और बिजली दिल्ली की जान है । दिल्ली एक निकम्मा राज्य है इतना ज्यादा निकम्मा की उसके पास कुछ भी नही है सिवाय नेताओं और संसद के । दिल्ली का अपना कोई मौसम नही है ना ही कोई प्राकृतिक उपज जिससे वह पैसे कमा सके , ना तो कोई नदि उसकी धरा से उत्पन्न हुई है ना ही कोई पर्वत उसकी रक्षा कर सकता है , उसके वाशिंदे हरियाणा, यूपी और पंजाब के ही लोग हैं जिनकी बदौलत वहां काम चल रहा है । ऐसे निकम्मे राज्य का मुख्यमंत्री बनकर उसमे असफल होना केजरीवाल की नियती नही योजना कही जा सकती है । दिल्ली केन्द्र शासित राज्य है और वहां की विधानसभा का पूर्ण स्वामित्व केन्द्र के हाथों मे होता है ,  केन्द्र के पैसों से ही दिल्ली विधानसभा चलती है यानि केन्द्र सरकार को आप कोई चुनौती नही दे सकते ।
                                     अब केजरीवाल के पास लोकसभा मे बुरी तरह से परास्त होने के अलावा कोई रास्ता नही बचा है । आम जनता को जनलोकपाल उतनी आसानी से नही समझ पडेगा जितनी आसानी से विदेशी डॉलर और भारतीय करेंसी की समझ आ सकती है । बात बात पे धरना देने वाले केजरीवाल के खिलाफ कौन धरने पे बैठेगा पहले ये सोचना है ।

Thursday, December 5, 2013

छत्तीसगढ मे बदलेगा राज- कारण है ज्ञात ।

देश की पांच विधानसभा चुनाव मे अंतिम भाग के रूप मे दिल्ली वासियों ने अपना योगदान दिये हैं । 5 बजे चुनाव का दौर खत्म होते ही सभी चैनलों ने ताबडतोड एक्जिट पोलों की बरसात कर दिये । किसी ने भाजपा को 4 राज्यों मे जिताया तो किसी ने उलझन मे डाल दिया । लेकिन हम तो ठहरे छत्तसीगढिया सो बात करेंगे अपने छत्तीसगढ की । छत्तीसगढ मे कई महान विभूतियां है जो परिणाम को स्पष्टतः भाजपा के पक्ष में बता रहे होंगे तो कुछ कांग्रेस को 70 सीटों पर जीत दिलाने की बात करेंगे और कुछ होंगे जो कहेंगे हमारे बिना सरकार नही बनेगी । तो ... जैसा की भाजपा को जिताने वाले कहते हैं कि भाजपा की सरकार बन रही है तो उनकी बातें आगे करना ही बेमानी है क्योंकि वर्तमान मे उन्ही की सरकार है इसलिए हम उन्ही की सरकार बनेगी मान लेते हैं ।
कांग्रेस के लोगों ने तो कांग्रेस को 70 सीटों पर जीतने का दावा ठोंक दिये हैं तो उनकी बात करना भी व्यर्थ है । ..। तो अब बचते हैं हम जैसे वो लोग जो कहते है कि हमारे बिना सरकार नही बनेगी .... तो किस कारण से कहते हैं ये बात ...
  •  सबसे पहले बात करते हैं प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह जी की - ये भाजपा का राज पाठ 10 सालों तक संभाले हैं और जनता के बीच चाऊर वाले बाबा बन कर अवतरित हुए । इनके राज मे प्रदेश का विकास हुआ है , सडकों का विस्तारीकरण हुआ , प्रदेश के सभी जिलों का विद्युतिकरण हो गया , प्रदेश मे विकास की बयार बहने लगी , गरीबों को सस्ते में अनाज उपलब्ध हो गया । राजनांदगांव से चुनाव लड रहे हैं ।
 रमन सिंह भी हार सकते हैं - रमन राज पहले 5 सालों तक तो ठीक ठाक रहा लेकिन इसके बाद राज्य के बुरे हाल होने शुरू गए । भाजपा के कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया , उन्हे कमाई के लिये कोई अतिरिक्त साधन नही जुटाने दिये गए जबकि पार्टी पद मे बने लोगों ने अपनी संपत्तियां कई गुना बढा लिये । ऊर्झा मंत्री  होते हुए इन्होने छत्तीसगढ विद्युत राज्य मण्डल का विभाजन करके जो कंपनी बनाए वह घाटे मे चलने लगी क्योंकि सरकारी कर्मचारियों से किये जा सकने वाले कामों को निजी ठेकेदार के आदमी करने लगे । हर ठेके मे घोटाले की खबरें बाहर आने लगी, सस्तें मे अनाज मिलने से मजदूरों का अभाव पैदा हो गया  जिससे हर वर्ग दुःखी हो गया है । ये सब तो ठीक था किंतु जिस तरह से गरीब आदिवासीयों को नक्सली बनाने की होड का प्रचलन शुरू हुआ वह रमन सरकार को ले डूबा । आज हर आदिवासी जो जंगल को अपना समझता है डर रहा है कि कहीं उसे नक्सली ना बना दिया जाए । रमन सिंह की विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप मे अलका मुदलियार खडी हैं जिनके पति उदय मुदलियार को दरभा काण्ड मे नक्सलियों ने मार दिया था । अलका मुदलियार के साथ महिलाओं की सहानुभूति लहर खडी है , राजनांदगांव का व्यापारी वर्ग राजनांदगांव के फोर लेन ब्रिज के अब तक अधुरे निर्माण से खासा नाराज है क्योंकि उसकी वजह से उन्हे पिछले 4 सालों से धूल और अव्यवस्थित ट्रैफिक का सामना करना पड रहा है । रही सही कसर अटल बिहारी बाजपेई जी भतीजी करूणा शुक्ला ने वहां पहुंच कर पूरी कर दीं और महिलाओं तथा ब्राह्मण वोटों पर अच्छा खासा प्रभाव डालते हुए अलका मुदलियार का पक्ष मजबूत कर दीं है ............  आगे की बात 8 के बाद ।

                                छत्तीसगढ मे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से योजनाबद्ध होकर काम किए है वह सराहनीय है ।  जनता के बीच मे नरेन्द्र मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री का चेहरा साबित करके विधानसभा चुनाव मे उन्होने परिवर्तन की अहम् भूमिका निभा दिये । लेकिन एक व्यक्ति ऐसा है जिसने सत्ता परिवर्तन के लिए साम- दाम- दण्ड- भेद का एकदम सही और सटिक इस्तेमाल करके अभी से बाजी अपने हाथों मे  रख लिये हैं ...वह हैं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ......
                                   अजीत जोगी की एक जबरदस्त पकड ये है कि इनके समर्थक हर दलों मे बराबर भागीदारी बनाए हुए हैं । इनकी क्षमता इतनी जबरदस्त है कि यदि भाजपा को 46 सीटें अब मिलती हैं और कांग्रेस को 41 तो भी अजीत जोगी कांग्रेस की सरकार बना सकते हैं । यदि हम अंदरूनी सूत्रों की मानें तो भाजपा के 5 विधायक वो जीतरहे हैं जिन्हे अजीत जोगी का संरक्षण प्राप्त है यानि की सरकार बनने या बिगडने का समीकरण वो 5 विधायकों से भी संभव हो सकता है । इस विषय मे सोचने पर राजनितिक पंडित दल बदल कानून का हवाला देने लगेंगे लेकिन उन्हे समझाने के लिए इतना ही काफी है कि कानून के  जानकार उसकी कमियों को जानते हैं और उसे अमल मे लाते । दे दिया हूँ ..और दे दिया ..... कानूनी परिभाषा बदल जाती है ।

Sunday, October 13, 2013

हे राम तुम कब आओगे ।

और पिछले हजारों बरसों की तरह रावण आज भी अपनी जगह पर है ।
 वैसे ही निर्लज्जता से भरी हंसी ,
 मनमानी से तैय्यार खुद के नियम कानून, 
बाली के जैसे अपने से बलवान वीरों को अपना मित्र बना कर रखने की कला,
 साधु संतो को प्रताडित करने के लिये खर-दूषण और सूर्पनखा जैसे रिश्तेदार, अपनी सुख सुविधा के लिये दुसरे की सीता का हरण यही तो कर रहा है आज का रावण । लेकिन आज का  रावण अकेला नही है । यह अपने साथ सैकडों बाजू लेकर काम कर रहा है । पहले जो  काम अकेला एक रावण करता था उस काम को आज अलग अलग जगहों पर अलग अलग तरिके से रावण ही कर रहा है नाम बदल कर । कभी वह राम सिंह के रूप मे होता है तो कभी अजमल कसाब के जैसा दिखता है , कभी वह राघव जी की तरह काम करता है तो कभी आसाराम के भेष मे सबके बीच रहता है ।
                                                    रावण ने अपने युग को पूरी तरह से ससम्मान जीया था और अंत काल मे उसने राम को भी सम्मान दिया था । अपने गुरू महादेव शिव के लिये वह अपने ही शत्रु राम के पास जाकर रामेश्वरम् मे रेत के शिवलिंग को बांध कर अप्रतिम स्वरूप दे देता है । रावण सीता का हरण करने के बाद भी अशोक वाटिका जैसी सार्जनिक जगह पर रखता है ताकि बंद कमरे का आरोप कोई उस पर ना लगा दे । 
रावण ने अपनी नगरी को सोने की बना कर रखा था ताकि उसके वैभव से लोग त्रैलोक्य का राजा समझ सकें । वह भरे दरबार मे विभिषण को बडे भाई की हैसियत से केवल भगा देता है वध नही करता है वहीं अपनी एकमात्र पत्नि मंदोदरी को भी सस्मान राजरानी का दर्जा ही मिला रहता है । रावण के राजमहल मे ढेरों दास दासियां थीं किंतु उसका कोई हजारों रानियों वाला रनिवास नही था । रावण अपने पुत्रों को भी वीर बनाकर ही रखा था चाहे वह अक्षय कुमार हो या फिर इंद्र को जीतने वाला मेघनाथ । रावण अतुलित बल का स्वामी था लेकिन राजशास्त्र का भी ज्ञाता था । ज्योंहि वानर राज बाली से उसे हार का सामना होने की स्थिति बनी तत्काल उसने बाली को मित्रता का संदेश देकर अपने साथ कर लिया । उस काल के सभी शक्तिशाली राजा महाराजा रावण के मित्र ही थे कोई भी शत्रु नही था । 
                                  फिर ...... जिसका कोई शत्रु ना हो, देवता जिससे भय खाते हों , स्वर्ग मे इंद्र को जीतने वाला पुत्र हो पाताल मे अहिरावण जैसा शक्तिशाली भाई हो   अपनी बहन के नाक कान कटने के बाद अपनी बहन का बदला लेने के लिये स्वयं ही सीता का हरण कर दिया वह रावण जैसे पराक्रमी, दंभी राक्षसराज रावण का अंत बना ।
                               राम कौन थे, कहां से आए थे ये तो रामायण ने बता दिया लेकिन राम ने जो चौदह सालों तक अपने वनवास को संघर्षपूर्ण तरिके से जीये उसका वर्णन कौन करेगा ? सत्य ये है कि दशरथ पुत्र  राम को भगवान पुरूषोत्तम अर्थात पुरूषों मे उत्तम राम बनाने वाले उनके सदगुरू विश्वामित्र थे । विश्वामित्र ने यदि राम को सहारा नही दिये होते और शक्तिशाली देवास्त्रों दिव्यात्रों से सुसज्जित नही किये होते तो साधारण राम    कितनी देर रावण के आगे टिक पाता । एक साधारण से तीर को भयंकर ब्रह्मास्त्र मे बदलने का दिव्य गुप्त विज्ञान देने वाले विश्वामित्र ही थे जिनकी वजह से राम को विजय प्राप्त हुई । सदगुरू विश्वामित्र ने राम को वह कला दिये जिससे राम ने शिव के धनुष  की प्रत्यांचा चढाकर तोड दियेअन्यथा राजा जनक के दरबार मे सर्वश्रेष्ठ राजा बैठे हुए थे ।
                                राम का जीवन  किसी फिल्म की तरह का नही था जिसमे चमत्कारी ढंग से खाना पीना मिल जाता । राम ने संघर्ष किये वह किसी विमान मे बैठकर जंगल पार नही किये वरन् पैदल बीहड जंगलों को पार किये ।  आज जिन जंगलों को मनोरंजन का साधन बनाया जा रहा है राम ने उन जंगलों का सम्मान करते हुए उस जंगल को क्षति पहुंचाने वाले राक्षसों से मुक्त करवाए थे । राम और लक्ष्मण की मित्रता किसी भी राजा से नही हुई किंतु उन्होने स्वयं राजा ना होते हुए भई अन्यों को राजा बना दिये । खर दूषण को मारकर अपने मित्र निषाद राज को वहां का आधिपत्य सौंप दिये , बाली को मारकर अपने मित्र सुग्रीव को भी राजा बना दिये ..यहां तक की अपनी शरण मे आए विभिषण को भी लंका का राजा बनाकर राजतिलक कर दिये ........।
                             चाहे रामायण हो या फिर हनुमान चालिसा ...सभी पूर्णतः गुरू को समर्पित हैं .. राम, सीता, लक्ष्मण अपने सदगुरू विश्वामित्र के ध्यान मे तल्लीन रहे , रावण अपने गुरू महादेव के ध्यान मे रहे तो हनुमान जी परमपिता परमात्मा प्रभु राम की भक्ति मे तल्लीन रहे । हनुमान जी ने अपने दैहिक गुरू श्री सूर्यदेव के पुत्र अंगद की रक्षा का वचन देकर तब तक उनके साथ रहे जब तक स्वयं अंगद ने उन्हे राम को नही सौंप दिये ।
................ क्या ऐसे हजारों राम के आए बिना आज के लाखों रावणों का विनाश संभव है ????????

Sunday, September 22, 2013

छत्तीसगढ में युवा पीढी करेगी त्रिकोणीय मुकाबला ।

यहां पर बात करते हैं छत्तीसगढ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी की । अजीत जोगी ने अपने तीन साल के कार्यकाल मे कई महत्वपूर्ण कार्य किये थे जो आज तक वर्तमान सरकार भुना रही है । पूरे राज्य मे बिजली दरों मे कमी, जीरो पावर कट राज्य, शत प्रतिशत विद्युति करण को मंजूरी , सीमेंट के दामों में भारी कमी चुस्त दुरूस्त कानून व्यव्स्था , अपराधों पर नियंत्रण जैसे कई अन्य विकास कार्य जो अजीत जोगी के कार्य काल मे पूरे हुए या आज तक चल रहे हैं जिनका लाभ भाजपा ले रही है । जहां जोगी काल मे 24 घण्टे बिजली हुआ करती थी आज ये आलम है कि राजधानी मे घण्टो बिजली बंद हो जाती है वो भी तब जबकि ऊर्जा मंत्री मुख्यमंत्री ही हैं । जहां एक ओऱ प्रदेश मे आपराधिक गतिविधियां बढी हैं वहीं बेगुनाहों को निजी स्वार्थ सिद्धि के लिये नक्सली बना दिया जाता है ।  
                                                  सबसे ज्यादा दुःखद पहलू ये है कि जिस तरह से केन्द्र की सरकार देश मे मनमानी कर रही है उसी तरह से प्रदेश की भाजपा सरकार भी कोई  कोर कसर बाकि नही रख रही है । उद्योंगो को बढावा देने का ढकोसला करने वाली भाजपा सरकार उद्यमियों को इतना उलझा रही है कि ईमानदारी से काम करने की कोई सोच ही नही सकता । हालात तो ये हैं कि प्रदेश के गृहमंत्री भी अपना दर्द बयां करते है कि - अधिकारी हमारी बात नही सुन रहे हैं । तो क्या बीजेपी की पकड खत्म हो गई मान लें  ??
                                                      नही .. बीजेपी नरेन्द्र मोदी के नाम से स्वयं को सुरक्षित समझ रही है और वास्तविकता भी यही है कि प्रदेश मे कांग्रेस तीन कारणों से शर्मनाक हालात मे है 
कारण 1- हाई कमान मे चापलूसों का जमावडा 
कारण 2- दुसरों के लिये बनाए गए नियमों का स्वयं पालन ना करना । 
कारण 3- झीरम घाटी (दरभा)  कांड मे प्रदेश के प्रमुख नेताओं की शून्यता का बनना ।

                                      इन्ही शून्यता को अवसर समझते हुए प्रदेश के युवा वर्ग ने अप्रयाशित तौर से समाजवादी पार्टी को प्रदेश मे सर्वोच्च प्राथमिकता दे दिया है । बीजेपी सरकार की मनमानी और भ्रष्टाचार से त्रस्त औऱ विपक्ष का गिरता स्तर और अंदरूनी लडाई ने प्रदेश मे समाजवादी पार्टी को नई दिशा तय करने का अवसर दे दिया है । क्षेत्रीय पार्ठीयों मे स्वाभिमान मंच तभी तक कारगर था जब तक उसके संस्थापक ताराचंद साहू जीवित थे आज यह संगठन केवल दुर्ग संभाग में सिमट गया है वहीं छोटे मोटे दल अपनी मौजूदगी दिखाने मे नाकामयाब रहे हैं जबकि समाजवादी पार्टी ने भाजपा के प्रमुख और कद्दावर नेत बृजमोहन अग्रवाल के सामने एकदम नया औऱ युवा चेहरा कुणाल शुक्ला के रूप में दे दिया है । कुणाल शुक्ला रायपुर दक्षिण के ही निवासी हैं तथा वह क्षेत्र ब्राह्मण बहुल क्षेत्र भी है जिससे जातिवाद का गणित एकदम सटिक बैठ गया है ।
                                              कांग्रेस ने मरवाही सीट पर अमीत जोगी या अजीत जोगी दोनो मे से एक को प्रत्याशी बनाने की बात कही है जबकि अजीत जोगी कांग्रेस के सबसे मजबूत नेता हैं । अजीत जोगी के पीछे सभी विरोधी लगे रहते हैं क्योंकि जो बात गलत होती है वह अजीत जोगी कभी सहन नही करते हैं । वहीं अमित जोगी ने युवा वर्ग मे अपनी मजबूत पैठ बना रखी है, उसके खडे किये गए सभी प्रत्याशी जीतते हैं जो उनकी लोकप्रियता का पैमाना समझा जा सकता है,  लेकिन कांग्रेस ने जिस तरह से जोगी परिवार की अनदेखी की है उससे प्रदेश मे तीसरे मुकाबले की संभावना को बल मिलता है ।
                                                  आज अमित जोगी के साथ प्रदेश के सभी छात्र एक आवाज पर खडे हो जाते हैं वहीं कांग्रेस के संगठन की आवाज पर 10 लोग नही पहुंच पाते हैं । भाजपा की सरकार है इसलिये उसकी डमा की गई भीड को हम वोट नही कह सकते । भाजपा का वोट बैंक वो पीडित उपभोक्ता , जनता है जो केन्द्र सरकार की पैदा की गई महंगाई और भ्रष्टाचार के कारण कांग्रेस से ही दूर हो गई है । 
                                               हालांकि आगे की बात तो समय की कोख मे हैं किंतु  सच कहूँ तो मैं जोगी जी के स्थान पर स्वयं को रख कर देखूं तो मेरे लिये कांग्रेस छोडना बेहद दुःखद हो सकता है,  लेकिन प्रदेश की समस्याओं को देखते हुए किसी पार्टी का ठप्पा लगाए रखना मैं कदापि उचित नही समझता और अपने प्रदेश की समस्याओं आदिवासी और सतनामीयों के शोषण को देखते हुए पार्टी छोड देता ।

Monday, August 26, 2013

दुनिया का महायुद्ध के शुरूआती दौर में प्रवेश ।

मेरे पूर्व मे लिखी भविष्यवाणीयों पर निराशा रखने वालों के लिये ये उत्साहजनक खबर प्रस्तुत है । अब आप सोचेंगे कि दुनिया तीसरे महायुद्ध में प्रवेश कर रही है तो उत्साह कैसा ? तो मेरा जवाब होगा कि आप जिस तरह से नए निर्माण के लिये उत्सुक होते हैं  वैसे ही सृष्टि भी अपने नियानुसार नया चाहती है । सृष्टि त्रस्त हो चूकि है मनुष्यों की बिछाई विनाश लीला से , हरे भरे जंगलो को काट दिया गया और अनवरत कटाई जारी है , पहाडों से बहने वाली नदियों को बांध बना कर  वहीं पर रोका जा रहा है , मानव अपनी मानवता को छोड रहा है क्योंकि वह धर्म से विमुख हो चूका है । बचपन मे माँ कहती थीं कि एक दिन ऐशा आएगा जब लोग संतो का अपमान करने लगेंगे , एक बटोली (कटोरा) अनाज रखने वाला आदमी बटुकधर राजा कहलाएगा , पैसों का कोई मोल नही होगा हर तरफ अधर्ण और अत्याचार होगा । अब मैं उन्हे कहता हूँ कि माँ आप सही हो लेकिन जो दिन आप कलयुग के अंत मे होगा कहती थी वह तो अब हो रहा है तो क्या अब कलयुग की समाप्ति पर हम खडे हैं ? लेकिन माँ आज भी पूरी तरह से आशांवित जवाब देती हैं कि नही अभी इससे भी बुरा समय आने वाला है , ये तो शुरूआत है ।
                                                              तो हम कहां थे ..... हां दुनिया का महायुद्ध के शुरूआती दौर में प्रवेश पर । इसे आप विषय कहें या फिर भविष्यवाणीयों की पूर्णता लेकिन अब मुझे सबूत मिलते जा रहे हैं कि दुनिया यकिनन विश्वयुद्ध में प्रवेश कर चूकि है , प्रबुद्ध नेता यदि इसे पढें तो शायद कुछ समय के लिये इस महायुद्ध को रोकने का प्रयास भी कर सकते हैं , लेकिन तब कठिनाई और बढेगी । जैसा कि मैने पूर्व में नास्त्रेदमस की भविष्यवाणीयों पर लिखा था उस समय मुख्य रूप से सिरिया का जिक्र हुआ था कि महायुद्ध की शुरूआत लिबिया, इराक या सिरिया से होगा और वह देश रासायनिक युद्ध छेड कर महायुद्ध का आगाज कर देगा  । 
यह सब बताने से पहले उन लक्षणों को निकालते हैं जो तीसरे विश्वयुद्ध के प्रारंभिक लक्षण बताते हैं - 
 1.- तीन ओर समुद्र से घिरे देश का प्रमुख जंगली जानवर के नाम पर आधारित जाति का होगा (मनमोहन सिंह) (1:50)
2.- वह तीन बहनों का पालक होगा जिनके नाम भाग्य पे आधारित होंगे (अमृत , उपेंद्र कौर , दमन  )
3.- दुनिया के शक्तिशाली देश का नेतृत्व ओ अक्षर के हाथों होगा ।
4.- दुनिया के अधिकांश देश आपस में या गृह युद्ध में रत होंगे (इस्राइल-फिलिपिंस, भारत-पाक, दोनो कोरिया, मिश्र, इराक, अफगानिस्तान, लिबिया, मध्य अफ्रीकी देश सुलग रहे हैं )
 5.- ईसाइयत के मुकाबले इस्लाम मजबूत होगा , उन पर कोई नियम कायदे लागू नही होंगे ।
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अब देखें वह समय कब आएगा - 
जब बृहस्पति और शनि मेष राशि में होंगे तब बर्बादी शुरू होगी । फांस और इटली मे अफरा तफरी मचेगी (I-51) जब बृहस्पति और शनि का मे, राशि में सोयगे हो चूका होगा (1999 मे हो चूका है) 
 कैसे आएगा - रातमें ऐसा लगेगा मानो सूरज निकल आया हो । सुअर जैसे मुखौटे पहने लोग दिखेंगे । शोर और चीख पुकार के बीच आसमान में भी युद्ध शुरू हो जाएगा । (I-64)
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इसके अलावा कई ऐसे तथ्य हैं जो महायुद्ध की शुरूआत की ओर इशारा कर रहे हैं -
* एक देश के द्वारा कीटाणु युद्ध की शुरूआत के बाद दो महाशक्ति (अमेरिका - ब्रिटेन) एक साथ आएंगे ।
*नया पोप वेटिकन को छोड फांस मे रहेगा ।
*सभी देश युद्धरत रहेंगे चाहे वह घरेलू हालात हों या दुसरे देशों से ।
*विश्व मे बाढ, भूकंप सहित तमाम प्राकृतिक आपदाएं अपना कहर बरपाएंगी ।
*विशाल पर्वत दहशत पैदा करेंगे और भूकंप देशों को बरबाद करेंगे ।
*भारत के जानवर जाति वाले नाम के मुखिया की मौत के बाद दक्षिण भारतीय नेता कमान संभालेगा ।
*सत्ताधीश कानून का माखौल उडाएंगे और जनता त्राही त्राही करेगी ।
*भय, भूख और भ्रष्टाचार का सर्वत्र माहौल होगा ।
*ताकतवर और ताकतवर बनेंगे लेकिन कमजोरों की लाशों को बिछा कर ।
*इस्लाम अपने सर्वोच्तम पर पहुंचेगा और हर देश में इनका स्वयं का नियम कायदा होगा ।
*इस्राइल को खत्म करने के लिये अरब एकजूट हो जाएगा ।
*चीन अरबों गठबंधन पश्चिमी देशों के लिये परेशानी खडा करेगा ।
*भारत मे मूल धर्म को कुचल दिया जाएगा और हरे सफेद धर्म वाले अपना प्रभुत्व कायम करेंगे  ।
*मुस्लिम शहजादा ईसाइ से प्रेम विवाह करेगा जिसके बाद से उसके देश मे हाहाकार मच जाएगा । 
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अब आगे क्या होगा यह तो समय बताएगा लेकिन अब हमें सोचना है कि हम अपने  धर्म के प्रति क्या भावना रखते हैं ।

Wednesday, May 8, 2013

कर्नाटक, कांग्रेस औऱ कराह

8 मई 2013 का दिन कर्नाटक की जीत के साथ देश की दशा और दिशा तय करने वाले दिन के रूप मे याद रखा जाएगा । यह चुनाव उस दौर मे हुए जबकि केन्द्रनीत कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के साथ साथ ताजा उठे रेलमंत्री के भांजे के घूस कांड मे उलझी हुई दिखलाई पड रही थी । देश को लग रहा था कि कांग्रेस के केन्द्र पर लग रहे भ्रष्टाचार और रिश्वत के साथ साथ सी.बी.आई. को मैनेज करने के आरोपों के बीच बीजेपी कर्नाटक को आसानी से निकाल लेगी और येदि का कोई भी प्रभाव बीजेपी पर नही पडेगा । 
                                                         लेकिन कर्नाटक की जनता  ने जिस शांत भाव से चुनाव मे अपना वोट देकर कांग्रेस को पूर्ण बहुमत से वापसी करवाई  उससे सभी दलों को  एक स्पष्ट संदेश मिला कि केन्द्र मे जो हो रहा है वह सांसद निपटेंगे और हमारे प्रदेश मे जो लूट खसोट कर रहा है हम उसे बेदखल कर देंगे । भाजपा के बुढऊ रणनीतिकारों की कार्यप्रणाली पर यह प्रश्न चिन्ह लग चूका है कि अब उनमे कोई दमखम नही बचा है और वो पार्टी के लिये केवल एक बोझ हैं । गुजरात के चुनाव को मोदी ने अपने अकेले के दम पर केवल अपने विकास के नाम पर जिताया तो वहीं दुसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी को हिमाचल के बाद कर्नाटक मे भी पटखनी दे दी । 
                                                          चूंकि मोदी कर्नाटक चुनाव मे सक्रिय नही रहे क्योंकि जिन लोगों ने उनके लिये गुजरात में कठिनाई पैदा किये थे कर्नाटक की जवाबदारी उन्ही के हाथों पर थी और उन लोगों ने यहां पर मोदी के जादू चलाने का असफल प्रयास भी किये . दरअसल यह जीत बीजेपी के रूढिवादी बुढऊ नेतृत्व की करारी हार है जिसे मोदी और कांग्रेस दोनों ने मिल कर उन्हे प्रदान किये हैं । कर्नाटक मे पूरी तरह से अपनी मनमानी चलाने वाले तथाकथित लौहपुरूष इतनी करारी शिकस्त के बाद भी जीवित कैसे बचे हैं यह भी जनता के लिये रहस्य रहेगा । 
                                                         कांग्रेस की इस जीत ने उसमे एक नया उत्साह भर दिया है और वह नवंबर मे होने वाले चुनाव के लिये पूरी तरह से तैय्यार हो चुकी है । डर केवल इस बात है कि कहीं कांग्रेस अतिआत्मविश्वास मे आकर कहीं लोकसभा भंग ना करा दे क्योंकि ऐसा हुआ तो बीजेपी पूरी तरह से नरेन्द्र मोदी को आगे कर देगी और फिर कांग्रेस का जादू मोदी के आगे फिका पड सकता है । कर्नाटक चुनाव पूरी तरह से सोनिया और राहुल के नियंत्रण मे रहा है और यह जीत पूरी तरह से जीत का श्रेय केवल इन्ही दोनो को जाएगा । यह पहला चुनाव देखने को मिला है जिसमे सोनिया ने पूरी सक्रियता के साथ अकेले हर मोर्चे पर बीजेपी को शिकस्त दी है जो प्रशंनीय है । राहुल गांधी भी राज्य के युवाओ को रिझाने मे कामयाब रहे उनके भाषण छोटे लेकिन पूरी तरह से आक्रामक रहे और सबसे बडी बात कांग्रेस इसलिये जीती क्योंकि जनता को प्रदेश की भ्रष्ट सरकार से मुक्ति चाहिये थी जैसे छत्तीसगढ की जनता मुक्त होने को तडप रही है ।

Sunday, March 24, 2013

छत्तीसगढ- कैंसर पीडित की वेदना संयुक्त राष्ट्र परिषद तक पहुंची ।



 ये मेडिकल सर्टीफिकेट पी.जी. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय , बिलासपुर के प्राध्यापक डॉ. एस.सी. शुक्ला का है जिन्हे मेडिकल डॉक्टरों के द्वारा चेकअप करने के पश्चात कोशिका कैंसर से पीडित पाते हुए उन्हे यह सर्टिफिकेट दिया था । इस मेडिकल सर्टिफिकेट को जारी करने की तिथी है 7 अप्रेल 2012 । यह एक वर्ष की वैधता वाला है तथा इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि छ.ग. शासन कि परिपत्र क्रमांक 2-39/93/17 मेडि. 4 दिनांक 10.11.1995 के अनुसार लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के उपचार में द्वितीय अभिमत से छूट दी गई है । 
                             अब जबकि इन्हे कैंसर है औऱ इनका नियमित इलाज अपोलो अस्पताल में चल रहा है, इसके बाद भी छत्तीसगढ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा 30 जुलाई 2012 को स्थानांतरण आदेश दे दिया जाता है और इनका ट्रांसफर बिलासपुर से बाहर शास. महाविद्यालय पंडरिया, जिला कबीर धाम कर दिया गया । स्थानांतरण के बाद भी सरकार के अन्याय की इंतेहा खत्म नही हुई , बल्कि उसी सूची में इनकी धर्म पत्नी श्रीमती अर्चना शुक्ला का स्थानांतरण भी शास. राजीव गांधी महाविद्यालय लोरमी जिला मुंगेली कर दिया गया । नियमों के अनुसार यदि पति पत्नी एक ही विभाग में कार्यरत हों तो उनका स्थानांतरण एक साथ- एक ही स्थान पर किया जाता है जबकि इस मामले में नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है ।
                      डॉ. एस.सी. शुक्ला की पत्नी व इनके छोटे भाई कमल शुक्ला के द्वारा कई बार मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग सहित मुख्यमंत्री के पास निवेदन दिया गया , यहां तक की मुख्यमंत्री के जनदर्शन में भी यह अपनी बात रख आए किंतु 7-8 माह बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा कोई सुध नही ली गई ।
                   
                       डॉ. शुक्ला का मामला इनके छोटे भाई कमल शुक्ला के द्वारा IHRO छत्तीसगढ के सामने रखा गया । मामले की शुरूआती बातों को जानने के बाद यह समझ में आया कि सरकार अपना रवैय्या नही बदलने वाली है अतः मेरे द्वारा यह मामला अपने मुख्यालय के समक्ष भेज दिया गया ।
                             मुख्यालय द्वारा मांगी गई सारी जानकरी उन्हे उपलब्ध करा दी गई जिसके बाद IHRO के राष्ट्रीय सचिव अनुराग ज्योति के द्वारा मामले को एमनेस्टी इंटरनेशनल, राष्ट्रीय  मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली भेजा गया  , किंतु मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी एक प्रति संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद के मुख्यालय जिनेवा , स्विटजरलैंड  भी भेज दी गई है ।  संभवतः पूरे छत्तीसगढ की यह पहली शिकायत है जो संयुक्त राष्ट्र मा.अ. परिषद को भेजी गई है किंतु यही एक शिकायत पूरे छत्तसीगढ के लोगों को उनके मानव अधिकार के बारे मे जागृत करने के साथ साथ सरकार को भी चेतावनी दे सकती है कि लोकतंत्र की सरकारों को विश्व समुदाय के बनाये नियमों के अनुसार चलना चाहिये अन्यथा भविष्य में इसके दुष्परिणाम झेलने पड सकते हैं ।

                                                

Saturday, February 23, 2013

देश का नकारा विपक्ष

आज देश की दुर्दशा के लिये हर कोई सत्ता पक्ष को कोस रहा है । कांग्रेस के कारण देश में महंगाई बढ गई है कांग्रेस के कारण देश मे आतंकी गतिविधियां बढ रही है , कांग्रेस के राज में भ्रष्टाचार चरम पर है , कांग्रेस के राज में बलात्कार हो रहे हैं , कांग्रेस का वर्तमान राज यानि अप्रत्यक्ष आपातकाल..........  वगैरह वगैरह......... कांग्रेस को सब कोस रहे हैं ..हम भी कोस रहे हैं और कोसते ही रहेंगे लेकिन  जिस तरह से सरकार सोचती है उस तरह से हम नही सोचते । संसद में क्या होता है जनता कुछ जानती है बाकि नही जानती । हर किसी को सोचने की आजादी है लेकिन उस सोच को लिखने की आजादी नही है । सोशल मिडिया में लिखते ही अगर कोई चपडगंजू केस करने की धमकी देता है तो सबसे पहले अपने उस विचार को हटाने की ओर ध्यान जाता है जो इस मानसिकता को दर्शाता है की यदि केस लगा तो कौन फालतू के झंझट में फंसेगा । सोशल मिडिया में हल्ला करने वाले सैकडों है जो देश औऱ धर्म की बातें करते रहते हैं लेकिन अपना नाम और चेहरा अज्ञात रखते हैं । 
                                  चलो अब सोशल मिडिया से बाहर आते हैं औऱ हमला करते हैं विपक्ष पर क्योकि हमारा विपक्ष सबसे अच्छा नकारा साबित हो रहा है । बोफोर्स से लेकर हेलीकॉप्टर घोटाले तक इससे ज्यादा घटिया विपक्ष का दुसरा उदाहरण देखने को नही मिल सकता । जब आम जनता बाबा रामदेव के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ रामलीला मैदान में जुटती है तो ये निकम्मे विपक्षी अपने अपने दडबों में घुसे रहते हैं जब दामिनी के लिये इंसाफ मांगने वालों के ऊपर पानी की बौछारें और आंसू गैस छोडी जाती है तो ये ऊंघते रहते है जब देश के प्रधानमंत्री टी.वी. पर पुछते हैं ठीक है तो ये आलसी सिर तक हिलाने की जहमत नही उठाते । 
                                अब संसद में जाकर बैठे तो कहते हैं गृहमंत्री भगवा आतंकवाद पर देश से माफी मांगे । यानि बजाय देश में हो रहे भ्रष्टाचार और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने की मांग करने के इन्हे भगवा आतंकवाद की बात सूझ रही है । 
                                    पेट्रोल डीजल के बाद अब शक्कर की किमतें भी  बाजार को तय करने का अधइकार दिया जाने वाला है और शक्कर बाजार देने के बदले मिलने वाले समर्थन से सरकार चलते रहेगी लेकिन विपक्ष को भी लगता है हिस्सा मिलने वाला है औऱ वह शक्कर के बाजारों को नियंत्रण मुक्त होने के बाद देश बंद करने जैसी हरकतें करेंगे । एफ.डी.आई. पर विपक्ष ने क्या किया , हेलीकॉप्टर मामले पर विपक्ष क्या कर रहा है शक्कर को सरकारी नियंत्रण से क्यों मुक्त किया जा रहा है क्या ये सब बातें पुछने के लिये जनता को धरना प्रदर्शन करना पडेगा । ये निकम्मा विपक्ष इस तर की हरकतें कर रहा है मानो कोई उससे विपक्षी दल का पद छिन लेगा ।

Saturday, February 16, 2013

देश का सत्यानाशी मुद्दा ।

बहुत दिन पहले की बात है जब मैं लिखने की कोशिश करता था उस समय सोचता था ऐसा लिखूंगा वैसा लिखूंगा फिर अखबार में छपेगा और देश का कल्याण हो जाएगा । वैसे भी लेखकों के लिये अगर कोई विषय बचता है तो वह देश होता है । महंगाई से लेकर दामिनी तक जैसे  मुद्दे तो आते जाते रहते हैं लेकिन देश का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा है जो   देश के नेताओं से लेकर भीखारी तक की सभी की भूख मिटाने में कारगर रहता है । देश के मुद्दों पर  औऱ घर के चुल्हों मं बहुत ही कम फर्क होता है । हम घर में रोटी पकाने के लिये पहले गेहूँ पिसकर आटा तैय्यार करते हैं फिर उस आटे में पानी मिलाकर गुंथते हैं फिर  उसकी लोई काटते हैं उसके बाद चुल्हा जला रोटी बेलते और सेकते जाते हैं । लेकिन देश के मुद्दों की रोटी पकाने की विधी उलट होती है । अब  अभी अपने पास कोई मुद्दा नही है  इसलिये पुराने मुद्दे को देखते की उसकी रोटी कैसे पकी । बहुत पहले यानि की लगभग दो तीन माह पहले का ये मुद्दा है दामिनी वाला उस दामिनी की रोटी देखिये कैसे पकी .... दामिनी अपने भावी मंगेतर के साथ घर के लिये लौटने हेतु बस का इंतजार कर रही थी । एक बस रूकी और उससे कहा गया कहां जाता है बहन जी ..आइये आइये ऊपर आ जाइये ... इसके बाद उस बस में बैठे 6 लोगों ने उसके साथ जो किया वो बताने के लिये आप किसी दुसरी साइट पर ढुंढिये क्योंकि यहां पर केवल मुद्दों की रोटी बन रही है । 
                                                 उसके बाद जो हुआ वो सब अचानक होता गया अचानक कई लोगों का विजय चौक पर जमा हो जाना अचानक से आप का आ जाना अचानक से राष्ट्रपति भवन पहुंचने की कोशिश करना , आधी रात को अचानक सोनिया का मोमबत्ती धारकों से मिलने आ जाना वगैरह वगैरह ... 
            अब देखिये इसकी रोटी कैसे बनती है - 
सबसे पहले दामिनी अस्पताल पहुंची  मुद्दा  बना अस्पताल पहुंचाने में देर लगाई गई 
फिर उसे इंसाफ दिलाने के लिये मोमबत्ती धारकों पर पुलिस प्रहार हुआ - मुद्दा बना पुलिस की क्रूरता
सोनिया रात को मोमबत्ती धारकों से मिली - मुद्दा  बना देश के लिये सोनिया जाग भी सकती हैं
फिर दामिनी को सिंगापुर ले गये -  मुद्दा बना मुर्दा शरीर को सिंगापुर क्यों ले जाया गया
फिर दामिनी को अधिकृत तौर से मृतिका घोषित करके वापस लाया गया और अँतिम संस्कार कर दिया गया-  मुद्दा बना गुप्त रूप से क्यों ये सब किया गया ।
फिर दामिनी के मातापिता को पैसे दिये गये -  मुद्दा बना पैसों से माँ बाप को खरीदा गया
फिर इंसाफ की मांग की गई -  मुद्दा  बना नाबालिग को कैसे फांसी की सजा दी जा सकती है
अब मामला फास्ट कोर्ट में है -  मुद्दा बना मामले में गति धीमी चल रही है ।
                                                               अब ये मुद्दे पर मुद्दे बनते चले गये और कई लोगों ने इसकी बनी रोटीयाँ खाई । किसी ने प्रेम से बैठकर तो किसी ने लाठी खाकर लेकिन दामिनी मुद्दे से रोटीयां सबको मिली । भीख मांगने वाला भी अपनी बेटी की ओर देखकर कहने लगा था बेटी संभल कर भीख मांगना दामिनी का मु्दा चल रहा है ।
                                        खैर ये तो हुई पुरानी बात अब एकदम ताजी ताजी खबर को मुद्दा बनाते हैं । ये मुद्दा इतनी तेजी से उछल रहा है की आप लोगों तक पहुंच ही चुका होगा या पहुंचने वाला होगा
                              ये मामला है गोधरा का जी हाँ  2002 को हुआ मामले में अभी तक रोटी बनाई और खाई जा रही है । ये हमारे देश के  लिये बेहद शर्मनाक मामला है और इसके मुद्दे की रोटी बहुत स्वादिष्ट होती है जबकि हमारे देश के लिये गौरव शाली इतिहास बनाते बोफोर्स, कामनवेल्थ, 2जी हेलीकाप्टर खरीद दलाली और महंगाई , भ्रष्टाचार  जैसे मामलों की रोटीयां इतनी कडवी होती है की बडी मुश्किल से इसका निवाला भीतर जा पाता है ।
                               इसलिये हे देश के लोगों यदि तु्म्हे मजेदार लज्जतदार मुद्दों की रोटीयां खानी हो तो दामिनी , एफ.डी.आई., भगवा आतंकवाद , क्रिकेट जैसे मु्द्दों  पर ही कायम रहना होगा क्योंकि इस देश में इस्लामी जेहाद, सरकारी घोटाले, नेताओं की काली करनी, आतंकवाद, पाकिस्तान, सैनिकों के सिर कटने जैसे मुद्दों की रोटियां आपके लिये महंगाई बढाकर स्वाद कडवा कर देंगी । 
                                   देख नही रहे हो हेलीकाप्टर घोटाले में फंसते ही सरकार ने पेट्रोल, डीजल के दाम बढा दी है और अब शक्कर को भी खुले बाजार में बिकवा कर महंगी करने की तैय्यारी में है ताकि ऐसे मुद्दे उठाने की कीमत तुम्हे कडवी रोटी देकर चुकानी पडे ।

Saturday, January 19, 2013

देश भक्ति मत झाडो, देश हम चला रहे हैं ।

डीजल हर महिने 50 पैसे की दर से बढते हुए अंततः सब्सीडी मुक्त हो जाएगा .औऱ हाँ रसोई के दामों की चिंता ना करे वो तो आप जब खरीदने के लिये पहुंचेगे तब बता दिया जाएगा की उसकी किमत कितनी बढाई गई है आप तो इस बात पर खुश हो जाइये की कांग्रेस ने सिलेंडर की संख्या 6 से बढा कर 9 कर दी है । ये हमारे देश की बदकिस्मती है की  जनविरोधी सरकार हम पर राज कर रही है और जनता केवल लोकतंत्र का ढोल अपने माथे पर फोड रही है । देश में एक बदलाव की उम्मीद जागी थी अन्ना हजारे से, लेकिन वो केजरीवाल के भ्रष्ट आचरण में ढह गई फिर लगा बाबा रामदेव कुछ कर दिखलाएंगे लेकिन आधी रात के सरकारी लाठीचार्ज से वो भी भाग गये । जनता खामोश रही चुपचाप एफ.डी.आई. औऱ भ्रष्टाचार को सहती रही फिर आ गई दामिनी , इसने एक नई दिशा दिखलाई लोग बिना किसी बाबा या नेता के सहारे खुद ब खुद जमा हो गये और देश की लाखों दामिनी के लिये लडते दिखलाई पडे । लेकिन फिर वही हुआ जिसका देश को से अंदेशा था दामिनी की आग को बुझाने के लिये सबसे पहले एफ.डी.आई. लागू कर दिया गया उससे फर्क ना पडते देख सचिन से सन्यास दिलवाया गया उसमें भी सचिन की बेइज्जती होती देख लाठी डंडो और आंसू गैस का सहारा लिया गया सब कुछ होता रहा लेकिन दामिनी की आग नही बुझ पाई ।
                                    जिस दामिनी के लिये पूरा देश लडने के लिये दिल्ली पहुंच रहा था उस दामिनी को भी सरकार इंसाफ नही दिला पा रही है इससे ज्यादा शर्म की बात कांग्रेस के लिये नही देश के लोगों के लिये है, देश की जनता के लिये है । कितनी आसानी से दामिनी को लोग भुला कर सैनिकों के कटे सिर के पीछे दौड पडे    कट्टर राष्ट्रवाद से बचने की नसीहतें सरकार देती दिखलाई पडने लगी । कांग्रेस भूल गई की ये देश केवल सरकार को सत्ता संभालने के लिये दिया गया है ना कि जनता को गुलाम बना कर रखने के लिये  और फिर कटे सिर के सैनिक ने सरकार की सारी खामियों को दबा दिया । लोग भ्रष्टाचार भूल गये, एफ.डी.आई. भूल गये, दामिनी भूल गये औऱ आज देश की जनता सैनिक के कटे सिर को केवल इसलिये भूल गई क्योंकि उन सैनिको के घर सेना प्रमुख चले गये     और इसके साथ ही उन सैनिकों की याद मिटाने के लिये सरकार ने डीजल की आग लगा दी ताकि उसमें उसके सारे पाप जल जायें ।
                                                                अब कांग्रेस का चिंतन शिविर लगेगा जिसमें बात होगी अपनी छबी सुधारने की । किस तरह से सोशल मिडिया पर नियंत्रण किया जाय या उसके बडे ग्रुप के लोगों को किस तरह से मिडिया की तरह मैनेज किया जा सके क्योंकि खुद कांग्रेस के नेताओं की फालोवर संख्या उतनी नही हो पाती है जितनी एक देशभक्ति से ओत प्रोत एंटी कांग्रेस वाले किसी ग्रुप की हो जाती है ।
                                                   हर बडी घटना से बडी घटना बनाने के बाद पहली घटना को दबाने की ये कांग्रेसी चाल कब आम जनता को समझ पडेगी ये देखने और समझने की बात है । वैसे अब ज्यादा समय नही है जब कांग्रेस को उसके गुनाहों की सजा मिलेगी । ये भारत देश है जहां के लोगों का अटल विश्वास  है की हर गुनाहों की सजा ईश्वर जरूर देता है । वैसे भी कांग्रेस के चिंतन शिविर में सुबह सोनिया ने कही की कांग्रेसी आपस में लडना बंद करें और उसी रात छत्तीसगढ भिलाई की होटल अमित में कांग्रेसी शराब के नशे में धुत होकर गोलीयां चला दिये आपसी झगडे में ।

Saturday, December 22, 2012

समस्या से बडा बलात्कार

बडे दिनों से एक मनमोहिनी बांसुरी की गुंज सुनाई पड रही थी । कभी उस धुन से सिलेंडर मरता था तो कभी पेट्रोल जलता था लेकिन उस मनमोहिनी धुन को सुनना सबकी मजबूरी थी क्योंकि उसे बजाने वाला अपनी ही धुन सुनाने में तुला रहता था उसे इस बात से कोई फर्क नही पडता था की कोई उससे बांसुरी रोकने को कह रहा है या कोई उससे कुछ समय चुप रहने की मांग कर रहा है उसे कोई फर्क नही पडता था। तभी उसकी बांसुरी का सुर बदल कर एफडीआई पर आ गये उस धुन पर उसे सुनने वाले खूब चिखे चिल्लाये उसे चुप हो जाने को कहते रहे लेकिन कोई फर्क नही पडा आखिर लोग ही चुप हो गये और धुन यथावत बजती रही । जनता खामोश थी  उसके लिए धुन सुनना इसलिये भी मजबूरी थी क्योंि उसे पता ही नही था की वह मनमोहिनी बांसुरी बजा कौन रहा है ।  
                                                  अब उसके सुर धीरे धीरे थमने लगे ... देश जैसा का तैसा शांति पूर्वक चल रहा था अचानक एक हादसा हो गया । बांसुरी वादक के घर में ही बलात्कार हो गया वो भी ऐसा की जिसने हर किसी के रोंगटे खडे कर दिये जिसने सुना वह उत्तेजित हो गया इस बीच उसके सहयोगी जो अलग अलग वाद्य लेकर बैठे थे उनके आपसी सुर बदल गये और ध्वनी कर्कश हो गई बस फिर क्या था उसल कान फाडू संगीत को बंद कराने के लिये जनता घरों से निकल पडी । अब उसे तलाश है उस बांसुरी वादक की जो देश की   अस्मत  से खिलवाड होने के बाद भी अपने घर में बैठा चैन की बांसुरी बजा रहा है ।