Sunday, December 19, 2010

दिग्गी जोकर की दुक्की चाल

बहुत खुब ... दिग्विजय सिंह जो दग्गी राजा कहलाते थे अब  कांग्रेस की महारानी और उनके युराज के जोकर बन गये हैं । वैसे भी अब दिग्विजय को लोगों नें महत्व देन  बंद कर दिया है और उनकी महत्ता मध्यप्रदेश में तभी तक है जब तक वे अपने आकाओं के जोकर बने रहेंगे । दिग्विजय सिंह अपने को किस हद तक मसखरे साबित कर रहे हैं इसकी बानगी रविवार को देखने को मिली जब उन्होने कांग्रेस महाधिवेशन में संघ के खिलाफ राहुल रागा अलापा । उन्होंने आरएसएस की तुलना जर्मन तानाशाह हिटलर की नाज़ी सेना तक से करने में कोई संकोच नहीं किया। कांग्रेस महाधिवेशन में राजनीतिक प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत करते हुए दिग्विजय ने कहा, 'राष्ट्रवादी विचारधारा के नाम पर आरएसएस मुसलमानों को ठीक उसी तरह निशाना बना रही है जिस प्रकार हिटलर ने 1930 में यहूदियों को निशाना बनाने के लिए की गई कार्रवाई को राष्ट्रवाद का नाम दिया था।'
                                   लेकिन एक बात दिग्विजय बताना भूल गये कि आजादी के बाद से अब तक संघ ने कितने मुसलमानों की हत्या की या करवाई है ? दरअसल भारत को संगठित रखने में अब तक के सबसे सफल संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को आतंकवादी संगठन अथवा हिंदु वादी आतंकी संगठन का धब्बा लगाकर कांग्रेस भाजपा को तोडना चाहती है ताकि देश में उनका कोई विरोधी ना बचे । भाजपा नें अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर जैसी ताकत हासिल करी है उसके पीछे कांग्रेसी नेताओं को संघ का महत्व समझ में आ रहा है और वह देश को मजबूत और एकत्रित रखने वाली ताकतों को खत्म करने के लिये संघ पर वार कर रही है । 
                                  दिग्विजय को संघ की तुलना नाजीयों से करनी पडी ताकि राहुल के संघ- सिमि वाले विवाद का पटाक्षेप हो सके लेकिन वे एक बात भूल गये कि यदि संघ हिटलरी सिद्धांत अपनाता तो सोनिया को देश में रहने की अनुमती भी नही मिलती क्योंकि संघ का प्रभाव हर दल और हर भारतीय के ऊपर एक बराबर है चाहे वह कांग्रेसी हो या फिर मुस्लिम । हिटलर ने नस्लवाद को बढावा दिया तथा जर्मनों को शुद्ध  आर्य़ रक्त वाला बताते हुए बाकि जातीयों को खत्म करने पर तुल गया था जबकि संघ  भारत में हर जाति को साथ लेकर एक मजबूत भारत के निर्माण के लिये प्रयास करता है ।  कांग्रेसी नेताओं की एक शातिराना चाल होती है जिसके तहत सुनियोजित तरीके से विपक्षी दलों पर हमले किये जाते हैं , उन्हे मानसिक रूप से प्रशानिक अधिकारीयों के द्वारा हतोत्साहित किया जाता है ( जिसे राजनीतीक पद का दुरूपयोग कहा जाता है ) लेकिन खुद की करनी को बडी आसानी से भूला दिया जाता है । घोटाला, भ्रष्टाचार औऱ संघ- सिमि मुद्दे के कांग्रेसी सदमें को दिग्विजय के द्वारा जोकराना अंदाज में उबारने का प्रयास किया जा रहा है । लेकिन याद रखिये संघ पर आरोप लगाने के बाद बिहार में कांग्रेस की जो हालत हुई है उसने केवल देश को मजबूत बनाने   की दिशा में एक सुनहरी रोशनी की झलक बाकि देशवासियों को दिखाई है ।