Friday, November 20, 2015

तीसरे विश्वयुद्ध के लक्षण - नास्त्रेदमस

पिछले भाग मे जैसा कि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणीयों से यह जानकारी मिली थी की महायुद्ध के समय   सागर सूखकर रेगिस्तान बन जाएगा  और यह भविष्यवाणी पूरी तरह से "अरल सागर " पर खरी उतरती है जो दुनिया का चौथा सागर होने के बाद अब पूरी तरह से रेगिस्तान मे बदल चूका है । तो क्या अब कोई शंका है मन मे कि हम तीसरे महायुद्ध के दौर मे  नही है ? हो सकता है अब भी कई लोगों के मन मे यह बात नही बैठी हो कि नास्त्रेदमस ने क्या देखकर भविष्यवाणी किया होगा , तो उन लोगों के लिये यह जानकारी पहुंचना जरूरी है कि नास्त्रेदमस भविष्यवाणी कैसे करता था और उसे यह ज्ञान कैसे मिला ? 
14 दिसंबर 1503 दिन गुरूवार को फ्रांस के कट्टर यहूदी परिवार मे जन्में मिशेल नास्त्रेदमस नें  बाद मे कैथोलिक ईसाई धर्म अपना लिया था । अपने जीवनकाल में नास्त्रेदमस नें फ्रांसीसी राजपरिवार की कई बार मदद की । उनकी बताई भविष्यवाणी के बाद राजपरिवार कई तरह की मुसीबतों से आसानी से उबर जाता था । लेकिन यह सब ऐसे ही नही हुआ । नास्त्रेदमस   1522 में डॉक्टर बन गए थे और अपना क्लीनिक चलाते थे । सन् 1936-37 में फैले प्लेग के कारण उनकी पत्नि और बच्चे खत्म हो गए और बस्ती वालों ने उन्हे सही चिकित्सक ना मान कर उनके पास जाना बंद कर दिये । इसकेबाद नास्त्रेदमस निरूद्देश्य इधर उधर घूमते रहे , जबकि उनके शिष्य शिग्ने के अनुसार वह उस दौरान मानसिक शांति के लिये भारत के हिमालय  क्षेत्र मे चले गए थे जहां उन्हे किसी साधु के द्वारा भविष्य देखने की सिद्धि मिली । शंकाओं को अलग करते हुए अब यदि नास्त्रेदमस की बात करें तो उन्होने यूँ तो दुनिया के हर देश के बारे मे कुछ ना कुछ भविष्यवाणी किये थे किंतु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होने भारत के ऊपर सबसे ज्यादा भविष्यवाणी किये हैं । इसमे रानी लक्ष्मीबाई से लेकर नरेन्द्र मोदी तक की भविष्यवाणी है और अभी तक यह सभी भविष्यवाणी तभी सही साबित होती आई है जब वह घटना घट जाती है ।
                                                     अब बात करते हैं भविष्यवाणी की  , तो ..   सेंचुरी V-27 Through fire and arms not far from the Black Sea, He will come from Persia to occupy Trebizond: Pharos, Mytilene to tremble, the Sun joyful, The Adriatic Sea covered with Arab blood.
 में नास्त्रेदमस ने जो लिखे हैं उसका अर्थ यह बनता है कि काला सागर से होकर कोई परशिया (फारस की ओर से ) आएगा वह तुर्की और ग्रीस को कब्जा करके अरबी लोगों के रक्त से अरब सागर को खून से लाल कर देगा । अब तुर्की और ग्रीस पर आतंकी कब्जा होना कोई बडी बात नही रह गई है । इन देशों का बडा हिस्सा आतंकी गतिविधियों वाले तत्वों के हाथ में है । वर्तमान मे आतंकी समूह तुर्की से होकर  ही अपना तेल का अवैध कारोबार संचालित करते हैं ।