Wednesday, August 11, 2010

निधी के पिता को धमकी

रायपुर, दिनांक 11 अगस्त समय दोपहर लगभग 2.30 बजे , स्थान तेलीबांधा से अवंती विहार की ओर आने वाली सडक । आझ सूर्यकांत शुक्ला (निधी के पिता) अपने मित्र के साथ निधी की मौत के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए दस्तावेज लाने तेलीबांधा थाने में गये थे । उन्हे वहां बैठे तकरीबन 15-20 मिनट हुए थे कि सुधीर तिवारी (निधी का जेठ) अपने साथ तीन चार लोगों को लेकर थाने में पहुंचा । वहां टी.आई. साहब के पास इन्हे बैठा देखकर चुपचाप बाहर निकल गया ।
                                     इसके बाद जब सूर्यकांत शुक्ला अपने मित्र के साथ उनकी बाइक में वापस लौट रहे थे कि अचानक उन्हे दो आदमीयों नें बीच सडक पर रोक लिये ( वे दोनों सुधीर तिवारी के साथ थाने में पहुंचे थे) और उनसे कहा कि तुम्हारी बेटी नें आत्महत्या की है और तुम बेवजह तिवारी परिवार को तंग कर रहे हो । इस पर निधी के पिता नें कहे कि मेरी बेटी नें आत्महत्या की है या उसकी हत्या हुई है ये सब अदालत तय करेगी लेकिन तुम लोगों को इस मामले से क्या लेना देना है । इस बात पर दुसरे आदमी नें अपने हाथ का जोरदार वार शुक्ला जी के सिर किया जिसके कारण वे सडक पर गिरते गिरते बचे । तभी शुक्ला जी के मित्र नें गाडी खडी करके ज्यों ही उन्हे ललकारा तो वो दोनो लोग तुमको भी बाद में देख लेंगे की धमकी देते हुए सडक के दुसरी ओर चले गए । इस वारदात से भयभीत होकर शुक्लाजी बजाय थाने में जाने के सीधे अपने निवास (नेहरू नगर, भिलाई) आ गए और घर आकर ही उन्होने इस बात की जानकारी परिवार वालों को दी ।
                                                अब सवाल ये उठता है आखिर सुधीर तिवारी के साथियों नें निधी के पिता को क्यों मारा और धमकाया ? इसका सबसे बडा कारण है निधी की हत्या के मामले की पूरी लीपापोती इसी आदमी के द्वारा की जा रही है । यह शख्स वर्तमान में प्रधानमंत्री सडक परियोजना, नगरी में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत है और सडकों में कीतनी धांधली हो रही है यह सभी जानते हैं , इसके पास भी अथाह पैसे यहीं से आ रहे हैं जिसकी वजह से यह अपने को इतना सामर्थ्यवान समझ रहा है कि हत्या को भी आत्महत्या में बदल सकता है । सुधीर तिवारी की भूमिका निधी हत्याकांड में सबसे ज्यादा संदग्ध रही है, मसलन खुद ही कहता है कि निधी 23 जुलाई को शाम 4.30 जलकर मर गई लेकिन निधी के मायके में फोन 6 बजे करके कहता है कि तुरंत मेकाहारा अस्पताल पहुंचो अस्पताल में कहता है कि निधी नें आत्महत्या कर ली है लेकिन उससे ये कहने पर कि मरी हुई निधी को अस्पताल क्यों लाए तो चुप हो जाता है ।
                                खैर यह हुई पुरानी बातें अब देखें पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या कहती है - पीएम रिपोर्ट के अनुसार निधी की मौत को 24 घंटे हो चुके थे (समय लगभग दोपहर 3 बजे का निकलता है), गला दबाये जाने के संकेत हैं, पेट में नशीले पदार्थ मिले हैं और उसके गले में कार्बन नही मिला है जैसा जीवित जलने वाले व्यक्ति की सांस के साथ गले तक उतरने पर मिलता है, इन सब बातों से यह साबित होता है कि निधी की हत्या करके साक्ष्य छुपाने के लिये जलाया गया है । इस नृशंस हत्याकांड को दबाने का प्रयास सुधीर तिवारी इस लिये कर रहा है ताकि उसकी नौकरी बच सके क्योंकि जब सारा मामला खुलेगा तो सबसे पहले सुधीर तिवारी पर ही आरोप तय होगा ।
                                अब सवाल ये उठता है कि जब सुधीर तिवारी पर सबसे पहले मृत निधी के शव को जलाकर हत्या के साक्ष्यों को मिटाने और कानून को गुमराह करने का  प्रथम दृष्टि में सीधा सीधा मामला दिख रहा है तो उस जैसे खतरनाक अपराधी को कानून अब तक अपने शिकंजे में क्यों नही कसा ।