Sunday, April 1, 2012

छत्तीसगढ कांग्रेसः- जोगी नही तो कौन

जबकि छत्तीसगढ राज्य इस समय अपने सबसे बुरे दौर में पहुचने को है औऱ  इस समय नवभारत अखबार में छपे इस ( http://www.navabharat.org/images/010412p1news14.jpg )लेख नें मुझे यह सब लिखने को आतुर कर दिया है । रमन सरकार में चारो ओर लूट मची हुई है मामला चाहे आदिवासियों की जमीन का हो या उनपर हुए लाठी डंडे के प्रयोग का हो .. किसानों की जमीनों का अधिग्रहण हो या सरकारी ठेके का मामला हो ...हर तरफ खुले आम लूट मची हुई है राज्य में पुल गिर रहे हैं बिना सडकों को बनाए ही  सडकों का भुगतान हो रहा है , बिजली की आड में अरबों का घोटाला हो चुका है और अभी होने को भी है... नक्सली खौफ बता कर उन क्षेत्रों की राशी भी कहां जा रही है कुछ नही पता .. अब जबकी हर ओर अराजकता और महंगाई अपने पैर पसार चुकी है तब जनता अपनी मायूसी निगाहें विपक्ष पर डालती है लेकिन अफसोस.... यहां तो विपक्ष भी बेवजह की लडाई लड रहा है इस राज्य में हर नेता अपने को सबसे ऊपर मान रहा है सबसे दुःख की बात तो ये है की जिन नेताओं को भाजपा कुशासन की बखिया उधेडनी चाहिये वह दिल्ली में बैठकर मंत्रणा कर रहे हैं की किस तरह से कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को बाहर का रास्ता दिखलाया जाए ।  इसके लिये कहा गया की दिल्ली में बैठकर नंदकुमार पटेल और चरणदास महंत भाजपा के खिलाफ रणनिती तय करेंगे लेकिन भीतरी सूत्रों की मानें तो ये दोनो महानुभाव दिल्ली में बैठकर अजीत जोगी को किसी दुसरे प्रदेश का राज्यपाल बनाकर भेजने का दबाव आलाकमान पर डाल रहे हैं और इसमें अप्रत्यक्ष तौर से मोतीलाल वोरा भी सहयोग कर रहे हैं । 
                       अब जरा एक नजर कांग्रेस के इन बडे नेताओं के ऊपर डालते हैं ।. 
सबसे पहले आते हैं श्रीमान चरणदास महंत ः- इनकी उपलब्धी ये है की जांजगीर, चांपा और कोरबा के बाहर किसी छत्तीसगढ की जनता से पुछो तो वह कहेगा कुछ तो हैं इसके अलावा कुछ पता नही । इन सांसद महोदय को केन्द्रिय राज्य कृषि मंत्री के बनते ही सीधे मुख्यमंत्री का सपना आने लगा है और ये अपने को बहुत महान समझने लगे है जबकि इनकी वास्तविकता हकीकत से कोसो दूर है । हैं तो कृषि मंत्री लेकिन राज्य तो छोडिये अपने संसदीय क्षेत्र के किसानों के हित में कोई कदम नही उठाये वहां के किसानों की जमीन धोखे से हथियाई गई और ये अपने ओहदे को पकडे दिल्ली में बैठे जोगी बुराई करते रहे ।

दुसरे हैं आदरणीय रविंद्र चौबे -- इनकी विधानसभा साजा है और वर्तमान में विपक्ष के नेता कम सत्ता के दलाल ज्यादा समझे जाते हैं । इन्होने एक बार भी भाजपा सरकार को इस तरह से नही घेरा की सरकार हिल जाए इससे सीधा असर जनता पर ये पडा की जनता इन्हे रमन का दल्ला कहने से नही चूकती । कई मौके ऐसे आए जब भाजपा नतमस्तक हो सकती थी उल्टा ये जनाब कोई दुसरे कांग्रेसी के द्वारा उन मुद्दों को उठाने पर बिफर पडते थे । जोगी जी एक ऐसे कद्दावर नेता हैं जिनके आगे सबकी तूती बंद हो जाती है और ये महानुभाव बजाय उनसे सलाह मशविरा करने के दिल्ली जाकर बैठे हैं जोगी जी को राज्यपाल बनाने के लिये अपना दावा लेकर ।
तीसरे परम आदरणीय सज्जन पुरूष हैं नंदकुमार पटेल --  8वीं कक्षा पढे ये जनाब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं और इन्हे मीठी छुरी कहा जाता है । इनका विधानसभा क्षेत्र कहां का है किसी आम छत्तीसगढी से पुछिये ... वह तो इनका नाम भी सुना हो तो बडी बात होगी जो किसी प्रदेश अध्यक्ष के लिये शर्म की बात होनी चाहिये। वैसे इन्होने बस्तर में अपना एक दांव खेलना चाहा था की बस्तर को अलग राज्य बना दिया जाए यानि जब कोई काम ना हो तो जो दिमाग में आए बोलते चलो । बस्तर वासियों नें कभी खुद को छत्ीसगढ से अलग नही समझे और ये जनाब बिना सोचे समझे उन्हे बांटने चले थे । पार्टी की एकता तो दूर की बात प्रदेश की एकता भी इन्हे नही भा रही है ।
 यानि कांग्रेस की तिकडी केवल दो काम पर लगी हुई है ।
1. भाजपा से सांठ गांठ करके अपना काम निकालो और अपना स्वार्थ निकालते चलो 
2. जोगी जी को प्रदेश से बाहर का रास्ता दिखलाओ क्योंकी यही एक ऐसे व्यक्ति हैं जो गलत नीतियों के लिये  भाजपा के साथ साथ कांग्रेसीयों को भी नही बख्शते हैं ।

इनके अलावा चौथे शख्स हैं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल जी वोरा -- इन्हे प्रदेश की राजनीती से कोई लेना देना नही है ये सज्जन पुरूष इतने सीधे हैं की अपने बच्चों को भी गलत काम करने से रोक देते हैं । लेकिन उनके भोलेपन का नाजायज फायदा ये तीकडी उठा रही है । मोतीलाल वोरा को गुमराह करके बताया जाता है की अजीत जोगी के राज्य में रहते कोई भला नही होगा लेकिन वो भला किसका नही होगा ये नही बताते । 
हालांकी अजीत जोगी के शासन को प्रदेश की जनता सबसे बुरा दौर का समझती थी लेकिन कहते हैं की जब तक आपके पास कोई दुसरा ना हो जिससे आप तुलना कर सकें तब तक आप निर्णय नही ले सकते । कुछ ऐसा ही छत्तीसगढ में चल रहा है ।
                   यहां की जनता वर्तमान में इन तीन बडे नेताओं के कारण अब तक भ्रष्टाचार को झेलने के लिये मजबूर हो रही है । राहुल शर्मा मौत एक ऐसा हादसा है जिसके बदले भाजपा सरकार की बलि चढ जाती , आदिवासियों पर डंडे चलो इसके कारण वह गिर जाती, सडकों पर , बिजली के मुद्दों पर , अवैध शराब के मुद्दों पर  एसे कई मोड आए जहां पर भाजपा सरकार या गिर जाती या घुटने टेक जाती । जब रमन सिंह पर म.प्र. की खदानों का मामला उठा तो बजाय उसकी सच्चाई जाने अपना मौन समर्थन कांग्रेस नें दे दिया ।
                  दरअसल अजीत जोगी को बाहर रखने की एक वजह है प्रशासन पर गहरी पकड । चूंकी वे एक दूरदर्शी की सोच रखते हैं इसलिये कोई भी उन्हे जल्दी घुमा नही सकता ना अधिकारी और ना ही कोई दलाल .. जोगी जी साफ और स्पष्ट कहने के लिये बदनाम हैं जब नंदकुमार नें अलग बस्तर की मांग उठाए तो सबसे पहली कडी प्रतिक्रिया स्वयं अजीत जोगी नें ही दिये थे इसके अलावा उन्हे राजनितीक समझ भी गहराई तक है वे जानते हैं की जनता क्या चाहती है । हालांकी उनके कार्यकाल को जबरन बदनाम किया गया और इसकी वजह थे यही कांग्रेसी जो आज जोगी जी को अलग करके भाजपा सरकार से हाथ मिलाकर अपने को शहंशाह समझ रहे हैं जबकि आगामी चुनाव उन्हे धरातल दिखाने वाला है । 
          चूंकी जोगी जी को तत्काल छत्तीसगढ आकर एक बडा पद संभालना पडा था सो उन्होने रविंद्र चौबे जैसे लोगों पर भरोसा कर लिये जो आज उन्हे और पार्टी को खोखला करके खुद राजा बनने को ऊतारू हो रहे हैं जबकी स्वंय अजीत जोगी पहले इंजिनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थे फिर आई.पी.एस. बने उसके बाद आई.ए.एस. की शिक्षा भी पूरी कर लिये । कहने का मतलब यह है की जो व्यक्ति अपने कर्मों से राजा साबित हो चुका हो उसे किसी के रहमो करम की आवश्यकता नही होती है जबकी इन्हे विशेष  तौर पर पटेल जी को तो कोई ना कोई सरपस्ती जरूरी लगती है ।    

              अब दुसरी ओर केंन्द्र को देखें ... क्या ममता बनर्जी से उसे कोई सबक नही मिला ... जो ममता बनर्जी कांग्रेस की मुख्यमंत्री बन सकती थीं आज अपनी क्षेत्रीय पार्टी के बल पर वाम पंथीयों को परास्त कर दी कहीं अजीत जोगी नें भी वैसा करने की ठाने तो ये जरूर है की प्रदेश की जनता का समर्थन उन्हे अपने आप मिल जाएगा .... क्योंकी छत्तीसगढ की जनता केवल तीन नेताओं को जानती है और उनमें से एक को चुनेगी एक अजीत जोगी दुसरे रमन सिंह तीसरे दिलीप सिंह जुदेव.....कांग्रेस में दुसरा कौन ...आप बतलाएं
वैसे नीचे कुछ महत्वपूर्ण लिंक दे रहा हूँ जो आँखे खोलने को काफी है-
http://www.bhaskar.com/article/CHH-OTH-1910058-2996331.html (बस इतिश्री हो गई आदिवासी मामले की)
                  वैसे कांग्रेस  आलाकमान को चाहिये की वह अजीत जोगी के बारे में कोई फैसला करने के पहले हर जिले में एक सर्वे करा ले और जो गल्तीयां उत्तर प्रदेश में कर चूकी है वह छत्तीसगढ में दोहराने की गल्ती ना करे । क्योकी छत्तीसगढ में मिली हार के बाद से अब तक कांग्रेस पार्टी क्या मंथन कर रही है ये केवल तीन बडे नेता ही बता सकते हैं ।