Tuesday, August 16, 2016

जवान सीमा पर क्यो जाएं ? मरनें !

काश्मीर मे जो आज चल रहा है उसके जिम्मेदार वो भ्रष्ट नेता हैं, जिन्होने इस समस्या को हमेशा अपने राजनैतिक इस्तेमाल के लिये सुरक्षित बना रखा था । जवाहर लाल से लेकर मनमोहन  जैसे गैर भाजपा प्रधानमंत्रीयों ने कभी भी इस समस्या को गंभीरता से न लेकर हमेशा लचर और कचर रवैया अपनाये रखे । इस देश मे तो ऐसे  लोग भी खुलेआम सेना विरोधी भाषण बाजी करते आ रहे है जिन्हे एक समय देश मे प्रतिष्ठित और मर्यादित पद मिल चूके हैं । जब हमारे देश के प्रधानमंत्री लाल किले से दहाड कर कहते हैं कि हम पीओके के साथ साथ  बलुचिस्तान और बाल्टिस्तान की आजादी के लिये वहां की जनता के साथ है तो उस समय कंपकपी तो पाकिस्तान की छुटती है,  लेकिन हमारे प्रधानमंत्री के विरोध के स्वर  हमारे ही देश के लालू प्रसाद और सलमान खुर्शिद  जैसे नेताओं के मुंह से निकलते हैं । जब काश्मीर मे पत्थरबाजी और पेट्रोल बमों के बदले सेना पेलेट गन चलाती है तो पाकिस्तान के  विरोध के स्वर को  कांग्रेसी उपाध्यक्ष राहुल गाँधी  और आजम खान अपनी आवाज से समर्थन देते हैं ।  कांग्रेस अभी तक जिस तरह से काश्मीर में लग रहे भारत विरोधी नारों को अप्रत्यक्ष समर्थन देती चली आ रही थी उसी का नतीजा आज देश के सामने है कि केवल नारे लगाने वाले आज पत्थर  और पेट्रोल बमो के साथ सडक पर उतर चुके हैं ।  वर्तमान मे ऐसे गद्दारों की बदकिस्मती कहिये या देश की खुशनसीबी की देश का मुखिया एक राष्ट्रभक्त है जिसने देश को बचाने का संकल्प ले रखा है । आजाद इतिहास मे पहली बार सेना को इतनी आजादी  दी गई कि  वे अपना वह कर्म कर सकें जिसके लिये उसका निर्माण किया गया  है । सेना को डंडा पकडाने वाली कांग्रेस आज भी सेना को पूरी आजादी देने की पक्षधर नही है क्योकि तब उनके कानोंं मे काश्मीर के आजादी के नारे सुनने को नही मिलेंगेे । यहां  पर मैं कांग्रेेस इसलिये साफ साफ लिखूंगा क्योकि अभी तक जो भी हो रहा है उसके  लिये वही जिम्मेदार है और सबसे ज्यादा विरोध भी वही कर रही है .. औऱ हां इनके मणिशंकर  अय्यर जैसे तो पाकिस्तान जाकर मोदी को सत्ता से हटाने के लिये समर्थन भी मांगने  जाते हैं ।  यदि भारतीय सेना की कमान मॉनेक शॉ के हाथों मे नही होती तो शायद हम 1971 मेे भी पाकिस्तान के हाथों पराजय झेल चूके होते । इतिहास चाहे जो कहे मुझे नही लगता कि इंदिरा ने कभी पाकिस्तान को जीतने का प्रयास की हो  । जब भारतीय नौसेना नें केवल दो दिनों के भीतर करांची के बंदरगाहों को तबाह कर दी और पाकिस्तानी युद्धपोत गाजी को विशाखापट्टनम् के पास समुंदर मे डुबो दी , तब कहीं भारत की जीत सुनिश्चित हो सकी ।  लेकिन जीत का सेहरा बाँधा गया इंदिरा के सिर पे जिसने इमरजेंसी और राजघरानों से लुटपाट जैसे ना जाने कितने कर्मकाण्ड किये हैं ।  सेना के साथ खिलवाड यहीं नही रूका  बोफोर्स गाँधी हों या फिर कोल सिंह सभी ने देश की सुरक्षा से खिलवाड के अलावा कोई काम नही किये । सेना को जरूरत होती थी 10 की तो ये खर्च करते थे 15 लेकिन सेना को केवल 5 पकडा के दस खुद खा जाते थे । 
लेकिन अब हालात बदल गए हैं । देश बदल रहा है और सेना भी बदल रही है । अब हमारे जवान सीमा पर मरने नही मारने केे लिये जा रहे हैं, जिसके लिये उन्हे बनाया गया है . अब सैनिको की शहादत पर हमें फक्र होता है बेबसी महसूस नही होती । कांग्रेसी परस्त न्याय पालिका के पेलेट गन पर पाबंदी लगाने जैसे आदेशों पर सेना का स्पष्ट संदेश की हम मारना बंद नही करेंगे पेलेट या बुलेट यह चुनना हमारा अधिकार है,  सेना के प्रति और भी गर्व प्रधान करता है और न्यायपालिका के आदेशों की धज्जियां उडती देख   देश गर्व करता है कि हाँ हमारी सेना सही है और न्याय पालिका गलत । 
                 कल ही चीफ जस्टिस का बयान पढने को मिला जिसमे वह सरकार से कह रहे हैं कि देश जजों की कमी से जूझ रहा है  और सरकार चीफ जस्टिस के भेजे कोलिजियम पर कोई जवाब नही दे रही है । साथ ही वो ये भी कहते हैंं कि सरकार को यदि किसी नाम पर आपत्ति हो तो वह कोलिजियम वापिस भेजे हम नाम बदल देंगे ... इसी बयान से साफ झलक रहा है कि न्याय पालिका मे कहीं ना कहीं कोई ऐसी गडबडी है जो मोदी जी की पकड मे आ चूकी है लेकिन वो  चाहते हैं कि गुनहगार खुद ही रूंदन विलाप करते हुए सामने आए और वही हो रहा है । यदि सरकार कोलिजियम को संशोधित करवा   देती तो ये चीफ जस्टिस महोदय इतना विलाप क्यों करते ?   अभी तो जनता को न्याय पालिका से भी जवाब नही मिला है कि याकूब मेनन जैसे देशद्रोही के लिये रात को तीन बजे अपनी कोर्ट खोलने वाले जज दिन मे चल रहे हेराल्ड केस पर तारिखों पर तारिखें  क्यों बढा रहे हैं .. भ्रष्टाचार के मामलों पर लंबी लंबी तारिखें लेकिन पेलेट गन पर दुसरे दिन ही आदेश कैसे ? गरीबों को सजा देने मे चौदह महिनें  लेकिन सलमान खान जैसों को 14 साल में भी सही सजा ना देने वाली न्याय पालिका मे कुछ नही भारी गडबड है, जिसे मोदी जी द्वारा सही समय पर सामने लाई जाएगी तब शायद पता चल सकेगा कि मनु सिंघवी जैसों के कितने चेले वहां पर बैठे हैं ।
                                         चाहे अब बात कहीं भी जाए , यह तय है कि देश के जवान अब शहीद होने से पहले कई देशद्रोहियों को मारेंगे यही बात देश के हित मे बडी बात होगी क्योकि,  जब भारतीय सेना के सामने मरने मारने की बात आती है तो दुनिया जानती है कि भारतीय सेना के पास योगेन्द्र सिंह यादव जैसे अनगिनत जीवट योद्धा आज भी हैं जो सीने पर 6 -6 गोलीयां खाने के बाद भी दुश्मन की पूरी बटालियन को नेस्तनाबूत करने के बाद, इलाज करवा कर फिर से सेना को अपनी सेवा देने के लिये उपलब्ध हो जाते हैं । 

                           जय हिंद , वंदे मातरम्