Sunday, October 2, 2016

मोदी के दाँव मे उलझा चीन ।

चीनी राष्ट्रपति के लिए चित्र परिणाम
प्राचीन  भारत ने दुनिया को जो कौटिल्य शास्त्र दिया था उसे दुनिया ने केवल पढने और पढाने तक ही सीमित रखे रही जिसका  परिणाम ये हुआ कि आज के मोदीमय भारत की किसी भी चाल का दुनिया का कोई भी अंदाजा नही हो रहा है । पूरी दुनिया में भारी तालीयां बजी और वाह वाही हुई जब नरेन्द्र मोदी ने केरल मे ताल ठोक कर कहे कि  हम पाकिस्तान को दुनिया मे अलग थलग कर देंगे और उसे अकेले रहने पर मजबूर कर देंगे । तब दुनिया को यह लगा लगा कि मोदी जी नें बहुत ही बढिया भाषण दिए , उरी हमले का बहुत ही करारा जवाब दिए लेकिन भारत नें 28-29 सितंबर की रात मे पाकी आतंकी ठिकानों पर सीमा पार जाकर सैन्य हमला करवाकर पूरी दुनिया को यह बात बताए तो अमेरिका सहित सारी दुनिया सन्न रह गई क्योंकि इस तरह के आपरेशन हमेशा गोपनीय रहा करते हैं । पाकिस्तानी सेना भी गुपचाुप तरिके से भारतीय सेना के हमले के निशानों को झाड पोंछ कर साफ करती रही लेकिन भारत ने दुनिया भर को बता दिया कि हां हमारे जवानों ने 50 आतंकी पाक मे घूस कर मारे हैं और अपने 18 साथियों की शहादत का बदला लिए है  । अब देखें क्या हुआ ?
                                     मोदी जी ने जब कहे कि हम पाकिस्तान को अलग थलग करेंगे तो वह कौटिल्य की कूटनीती थी जिसमे अपने शत्रु को हमेशा अलग कर दिया जाता है । इसके दो लाभ होते हैं 1.- हमें पता होता है कि हमारा स्पष्ट शत्रु कौन है और दुसरा - हमारे साथ मित्रता का ढोंग करने वाले कितने लोग शत्रु के पाले मे जाते हैं । जाहिर सी बात है अब पाकिस्तान के साथ फिलहाल अकेला चीन खडा दिखलाई पड रहा है    
                                      अब देखते हैं कि पाकिस्तान मे नवंबर मे होने वाले सार्क सम्मेलन के बहिष्कार की बात उठी तो पाकिस्तान को लगा कि अकेले भारत उसके साथ होगा लेकिन जब उसके आंकलन से अलग बांग्लादेश, अफगानिस्तान, श्रीलंका, मालदीव जैसे देश भी भारत के साथ खडे हो गए तो उसके होश उडने वाजिब थे । लेकिन ये देश भारत के सर्मथन मे कैसे आए ... ये आए थे मोदी जी सामनीती के तहत और उन्हे हमेशा अपना मित्र बताते रहे जिससे उन छोटे देशों को भी एक हिम्मत मिली और उन्हे गर्व हुआ भारत जैसे शक्तिशाली देश की मित्रता से , जबकि पाकिस्तान और चीन इन्हे हमेशा हेय दृष्टि से देखते रहे और केवल अपने लिए लाभ का बाजार बना रखे थे । इसके साथ ही मोदी जी ने दामनीती का भी इस्तेमाल करते गए  जिसमे मोदी जी ने छोटे देशों को भी अपनी ओर से हर संभव आर्थिक व सामाजिक हर संभव सहायता उपलब्ध कराते रहे , नतीजा ये हुआ कि उन देशों को यह समझ आ गया कि भारत के साथ खडे होने पर उन्हे ताकत के साथ ही मजबूत आर्थिक आधार भी मिलेगा । इसके साथ ही देश मे अपने खुफिया तंत्रों का इस्तेमाल बढाने के साथ ही साथ दुश्मन के घर भी अपने भेदिये लगा कर सरकार नें अपनी भेदनीती को अमल मे लाई और उसी के आधार पर पाकिसतानी आतंकीयों पर दण्डनीती का प्रहार किया गया । 
                                                मोदी जी ने इस समय देश की प्राचीन युद्धकला के सभी शास्त्रगत तैय्यारीयां पूरी कर लिये होंगे ऐसा मेरा अनुमान है । भारत नें पाकिस्तान के आतंकी संरक्षण की बिसात पर बिछी  बिसात पर सिंधु जल समझौता रद्द करने का छोटा सा प्यादा आगे किए यह वो प्यादी चाल थी जिसको बचाने के लिए आगे पीछे कोई समर्थन नही था , ना तो स्वयं भारत मे इस नदी को रोकने के लिए डैम थे और ना ही अन्य कोई तात्कालिक उपाय लेकिन इस प्यादी चाल में पाक के संकेत पर चीन नें अपना घोडा बढा कर ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों का पानी भारत आने से तत्काल रोक दिया । चीन नें घोडा तो बढा दिया लेकिन अब उसका घोडा खुद भारी आफत मे आ गया है क्योंकि अब घोडा ढाई कदम बढाने के बाद केवल वापिस अपने ही घर जा सकता है और दुसरा कोई काम नही कर सकता लेकिन अब उसका वह घोडा दुनिया देख चूकी है और अब मोदी जी को पता चल गया कि उनके सामने की बिसात मे फिलहाल अकेला पाक नही चीन भी है । यानि अब उन्हे दो दो चाल चलने का मौका मिलेगा । 
                                                चीन की इस चाल से पाक कुछ समय के लिए खुश हो सकता है लेकिन जिस तेजी से मोदी जी के साथ बलुच, सिंध और पीओके की जनता चाल चलना शुरू करेगी चीन को भी पीछे हटना पडेगा क्योंकि चीन जब अपनी इस चाल की काट तलाश कर होगा तब तक मोदी जी की बिछाई बिसात जिस पर वियतनाम, जापान औऱ मंगोलिया के सामने चीन को अकेले जूझना पड रहा है साउथ चायना सी में उसके स्वयं की प्रतिष्ठा दांव पर लग जाएगी और उसे पाक की प्रतिष्ठा बनाम स्वयं की प्रतिष्ठा मे से एक का चुनाव करना होगा ।
                                            फिलहाल तो दुनिया को अभी बहुत कुछ देखना बाकी है क्योंकि चीन के वीटो पावर के इस्तेमाल से मसूद अजहर का बचना पूरे संयुक्त राष्ट्र के अस्तित्व पर  ही खतरे की तलवार बन कर लटक गया है । भारत की इस चाल मे संयुक्त राष्ट्र भी सुरक्षित नही बचेगा ऐसी मुझे पूरी संभावना दिख रही है । बाकी तीसरा विश्वयुद्ध तो चल ही रहा है , देखते हैं अगली खबर क्या आती है ।