Tuesday, November 24, 2015

तीसरा विश्वयुद्ध और भारत - नास्त्रेदमस


From the three water signs will be born a man 
who will celbrate Thursday as his holiday. 
His renown, praise, rule and power will grow 
on land and sea, bringing trouble to the East.  I-50 
इसमे नास्त्रेदमस ने जो लिखे है वह बहुत ही गूढ है । 
यदि इसे हम गूगल मे अनुवाद करें तो यह मिलता है  - 
तीन पानी के संकेत से एक आदमी पैदा हो जाएगा
जो उसकी छुट्टी के रूप में गुरुवार मनाएंगे।
उसका यश, स्तुति, शासन और सत्ता में विकसित होगा
पूर्व के लिए मुसीबत लाने भूमि और समुद्र, पर। 
अब इसका विश्लेषण करें तो जरा। . चूंकि इसके पूर्व मैने गुरूवार की जगह गुरू की महत्ता वाला समझ कर वह नेता मनमोहन सिंह को समझा था किंतु अब जबकि वह नेता नही रहे, तो उनकी बात नही करके आगे भविष्य के नेता की बात करते हैं । हमारे सनातन धर्म में गुरूओं की महत्ता इतनी  अधिक है कि बिना गरू कोई भी कार्य सिद्ध नही किया जाता । हर ग्रंंथ मे गुरूओं की महत्ता बताई गई है और प्राचीन काल मे भारत देश मे गुरूवार को अवकाश रखा जाता था । अब इस दोहे की सीधी व्याख्या करने की कोशिश करते हैं - तीन ओर पानी से घिरे देश ( भारत देश ) में एक महान व्यक्ति पैदा होगा जो गुरूवार के दिन अवकाश रखेगा । उसकी स्तुति गान  चहुं ओर होगी और वह पूर्व देश की भूमि और समुद्र को विकसित करने या मिलाने का कार्य करेगा ।  यदि कोई नेता आकर गुरूवार को अवकाश घोषित करता है तो जाहिर सी बात है वह नास्त्रेदमस की इस भविष्यवाणी का वह प्रमुख नेता बनकर सामने आएगा जिसके पीछे पूरी दुनिया शांति के लिये लडाई लडेगी । 
अब दुसरा दोहा भी देखते हैं  - 
The penultimate of the surname of the Prophet 
Will take Diana for his day and rest: 
He will wander far because of a frantic head, 
And delivering a great people from subjection.  सेंचुरी २-50
अब इसका तोड मरोड किया जाये जरा - इसमे छिपा है पैगंबर के सरनेम के अंत से पहले के नाम वाले व्यक्ति के बारे में। . तो इस पर जरा चिंतन किया जाए कि आखिर पैगंबर कौन है ? ईस्लाम कहता है पैगबंर मुहम्मद है और क्रिश्चियन  कहते हैं पैगंबर ईसा   हैं  … लेकिन तथ्य यह कहते हैं कि पैगंबर यहूदी थे और यहूदी से ही ईसा और मूसा की उत्पत्ति हुई थी । अब हम ईसा मूसा को छोडकर इत्हास के असली पैगंबर यहूदी को माते हुए बात करेंगे क्योंकि कम से कम यह अपवाद नही है । तो यहूदीयों के पैगंबर का नाम मिला है इब्राहिम या अबराहम। .
अब अगर पैगंबर इब्राहिम को मान कर चलें तो उनका नाम यदि इब्राहिम है तो उपनाम भी तो कुछ होगा ?? और नास्त्रेदमस की इस पहेली का हल ये है कि पैगंबर के उपनाम से पहले वाला नाम पैंबर का ही नाम होगा यानि इब्राहिम। .... अब इब्राहिम तो मिल गया लेकिन आगे क्या ?
कौन है वह इब्राहिम जो खूबसूरत  औरतों ( डायना ) को कभी भी अपनी आरामगाह मे ले जाता है  जिसे किसी सिर को काटने मे खूबसूरती दिखती है। । है कोई इब्राहिम नामक ऐसा क्रूर जो खुद को महान समझता हो ?
जी हां। … उस आदमी का नाम है अबु बकर अल बगदादी ....... 
अरे भाई कुछ भी समझ कर मत छोड दिया करो .. आगे भी पढना सिखो
अबु बक्र अल बगदादी जो खुद को महान (खलीफा) कहलाता है , जिसे कटे सिर की सजावट  मे खूबसूरती दिखती है ( यकिन ना हो तो ढेरो विडियो भी देख सकते है जिसमे बडी नजाकत के साथ सिरों को शहर भर मे सजाया जाता है ) वह जो किसी भी खूबसूरत औरत को अपने हरम मे ले जाता है ... उस अबु बकर अल बगदादी का असली और पूरा नाम - इब्राहिम अवाद इब्राहिम अली अल बदरी अल समराई ।

 Earthshaking fire from the centre of the earth

will cause tremors around the New City.
Two great rocks will war for a long time,
then Arethusa will redden a new river.  
( I-87)
The year 1999, seventh month, From the sky will come a great King of Terror: To bring back to life the great King of the Mongols, Before and after Mars to reign by good luck.
(X- 58)

At sunrise one will see a great fire,
Noise and light extending towards 'Aquilon:'
Within the circle death and one will hear cries,
Through steel, fire, famine, death awaiting them. (II- 91)

 ऊपर तीन अलग अलग सेंचुरी मे लिखी हुई पहेली है और यदि इन तीनों को आप आपस मे जोडकर एक बनायें तो यह बनता है कि 1999 के सातवें महिने में आसमान से आतंक का महान राजा (मंगोल कहा गया गया  ) आएगा । सूर्योदय से एक पर एक बड़ी आग देखेंगे, शोर और दिखेगा विशाल रोशनी का गोला । वृत्त मौत के भीतर और एक रोता सुना होगा,  स्टील, आग, अकाल, मृत्यु के माध्यम से ।  धरती के केन्द्र से  दो विशाल चट्टानें एक युद्ध का कारण बनेंगी । क्या न्यूयार्क का वर्ल्ड ट्रेंड सेंटर जो दुनिया का मुख्य व्यवसायिक केन्द्र भी था... वह दो विशाल चट्टानो की तरह धराशाही नही हुआ ? आतंक के विरूद्ध मुख्य लडाई इसी कारण से शुरू हो सकी वरना हम आज भी अमेरिका को आतंक का समर्थन करते देखते ।
                                               ये तो केवल एक उदाहरण है जो भविष्य में पूरा उतरा । नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी को समझने के लिये तात्कालिन घटनाक्रम को समझना होता है और उसी से यह अऩुमान लगाया जा सकता है कि आगे क्या होगा । 
                                        अब क्या - यदि देखें तो नास्त्रेदमस ने तीसरे महायुद्ध का विधिवत एळान का वह समय दिये हैं जब समुद्र मे महाशक्ति के जलपोत को डुबा दिया जाएगा ... यानि इस समय आतंक के विरू्दध चल रही लडाई मे किसी मजबूत राष्ट्र के जलपोत पर आतंकी हमला करके उसे तबाह कर देंगे जिसके बाद तीसरे महायुद्ध का एलान करते हुए दुनिया आततायियों के विरूद्ध एकजूट होकर लडेगी ... इसी बीच मे उल्लेख है कि - "" जब यह सब कुछ हो रहा होगा तो एक पूर्वी देश का राष्ट्रध्यक्ष विश्व के सारे देशों को एकजुटता से बांध रहा होगा । उसके पीछे दुनिया का हर देश खडे होगा और चीनी-अरब गठबंधन से लडेगा "" जाहिर सी बात है कि जब चीन अरबों का साथ दे रहा होगा तो वह तो दुनिया को नही बांधेगा  और इस समय मोदी जी के अलावा दुसरा कोई ऐसा नेता नही है जिसकी बात दुनिया सुन और मान रही हो । 

Friday, November 20, 2015

तीसरे विश्वयुद्ध के लक्षण - नास्त्रेदमस

पिछले भाग मे जैसा कि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणीयों से यह जानकारी मिली थी की महायुद्ध के समय   सागर सूखकर रेगिस्तान बन जाएगा  और यह भविष्यवाणी पूरी तरह से "अरल सागर " पर खरी उतरती है जो दुनिया का चौथा सागर होने के बाद अब पूरी तरह से रेगिस्तान मे बदल चूका है । तो क्या अब कोई शंका है मन मे कि हम तीसरे महायुद्ध के दौर मे  नही है ? हो सकता है अब भी कई लोगों के मन मे यह बात नही बैठी हो कि नास्त्रेदमस ने क्या देखकर भविष्यवाणी किया होगा , तो उन लोगों के लिये यह जानकारी पहुंचना जरूरी है कि नास्त्रेदमस भविष्यवाणी कैसे करता था और उसे यह ज्ञान कैसे मिला ? 
14 दिसंबर 1503 दिन गुरूवार को फ्रांस के कट्टर यहूदी परिवार मे जन्में मिशेल नास्त्रेदमस नें  बाद मे कैथोलिक ईसाई धर्म अपना लिया था । अपने जीवनकाल में नास्त्रेदमस नें फ्रांसीसी राजपरिवार की कई बार मदद की । उनकी बताई भविष्यवाणी के बाद राजपरिवार कई तरह की मुसीबतों से आसानी से उबर जाता था । लेकिन यह सब ऐसे ही नही हुआ । नास्त्रेदमस   1522 में डॉक्टर बन गए थे और अपना क्लीनिक चलाते थे । सन् 1936-37 में फैले प्लेग के कारण उनकी पत्नि और बच्चे खत्म हो गए और बस्ती वालों ने उन्हे सही चिकित्सक ना मान कर उनके पास जाना बंद कर दिये । इसकेबाद नास्त्रेदमस निरूद्देश्य इधर उधर घूमते रहे , जबकि उनके शिष्य शिग्ने के अनुसार वह उस दौरान मानसिक शांति के लिये भारत के हिमालय  क्षेत्र मे चले गए थे जहां उन्हे किसी साधु के द्वारा भविष्य देखने की सिद्धि मिली । शंकाओं को अलग करते हुए अब यदि नास्त्रेदमस की बात करें तो उन्होने यूँ तो दुनिया के हर देश के बारे मे कुछ ना कुछ भविष्यवाणी किये थे किंतु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि उन्होने भारत के ऊपर सबसे ज्यादा भविष्यवाणी किये हैं । इसमे रानी लक्ष्मीबाई से लेकर नरेन्द्र मोदी तक की भविष्यवाणी है और अभी तक यह सभी भविष्यवाणी तभी सही साबित होती आई है जब वह घटना घट जाती है ।
                                                     अब बात करते हैं भविष्यवाणी की  , तो ..   सेंचुरी V-27 Through fire and arms not far from the Black Sea, He will come from Persia to occupy Trebizond: Pharos, Mytilene to tremble, the Sun joyful, The Adriatic Sea covered with Arab blood.
 में नास्त्रेदमस ने जो लिखे हैं उसका अर्थ यह बनता है कि काला सागर से होकर कोई परशिया (फारस की ओर से ) आएगा वह तुर्की और ग्रीस को कब्जा करके अरबी लोगों के रक्त से अरब सागर को खून से लाल कर देगा । अब तुर्की और ग्रीस पर आतंकी कब्जा होना कोई बडी बात नही रह गई है । इन देशों का बडा हिस्सा आतंकी गतिविधियों वाले तत्वों के हाथ में है । वर्तमान मे आतंकी समूह तुर्की से होकर  ही अपना तेल का अवैध कारोबार संचालित करते हैं ।

Sunday, November 15, 2015

फ्रांस अटैक बनाम नास्त्रेदमस का तीसरा महायुद्ध

13 नवंबर को फ्रांस मे जो खूनी खेल खेला गया उसे नास्त्रेदमस ने सालों पहले बर्बर सेना का नाम दिया था । जब मैने पूर्व मे भी लिखा था कि हम लोग वर्तमान मे तीसरे महायुद्ध के दौर से गुजर रहे हैं तो मुझे कई मित्रों की आलोचना का शिकार होना पडा जिसके बाद मैने वह सीरिज लिखना बंद कर दिया । लेकिन अब जबकि मेरे प्रिय आलोचकों को पोप ने तीसरे महायुद्ध की शुरूआत होने की बात कह कर जवाब दे दिये तो मैं उसी कडी को आगे बढाना चाहूँगा । यदि मैने आज से दो माह पूर्व ही यह सब लिख दिया होता तो शायद आप लोगों को तब यकिन नही होता कि इतना भीशण काण्ड होगा और दुनिया अचानक तीसरे महायुद्ध में उलझी नजर नही आती , लेकिन क्या अब आपके पास उन बातों का जवाब है जिसे नास्त्रेदमस नें 400 साल पहले ही बयान कर दिया था ।  खैर अब तीसरे महायुद्ध की बात करते हैं और आपको बताते हैं क नास्त्रेदमस की कूट भविष्यवाणी क्या कहती है -
सेंचुरी 7/70 -  He will enter, wicked, unpleasant, infamous, tyrannizing over Mesopotamia. All friends made by the adulterous lady, the land dreadful and black of aspect. 
ये मूल भविष्यवाणी है जिसका आप कुछ भी अनुवाद कर सकते हैं लेकिन जब इसे अंग्रेजी मे ही लिखा पढते हैं तो कुछ शब्द बनते हैं - मेसोपोटामिया, क्रूर, निर्दयी, व्याभिचार, महिला , दोस्त , मजबूत , काला , जमीन ... 
अब इसका सीधा सा रूपांतर करते हुए बात करते हैं कि एक  क्रूर और निर्दयी व्यक्ति   मेसोपोटामिया मे शासक बनेगा और अनेक प्रबल दोस्त बनाएगा । उसके लोग महिलाओं को व्याभिचार का जरिया बनाएंगे और वह काले लोगों की धरती से होकर अनेक देशों को युद्ध की आग मे झुलसा देगा । 
अब आप जानना चाहेंगे कि ये मोसोपोटामिया कौन सा देश है ? तो दोस्तो  मेसोपोटामिया का यूनानी अर्थ है "दो नदियों के बीच"। यह इलाका दजला और फ़ुरात नदियों के बीच के क्षेत्र में पड़ता है। इसमें आधुनिक इराक़ बाबिल ज़िला, उत्तरपूर्वी सीरिया, दक्षिणपूर्वी तुर्की तथा ईरान का क़ुज़ेस्तान प्रांत के क्षेत्र शामिल हैं यानि लगभग वह सारे क्षेत्र जो वर्तमान में ISIS के पास है ।
अब आते हैं दुसरी कडी पर सेंचुरी 1/51 -  The head of Aries, Jupiter and Saturn. Eternal God, what changes ! Then the bad times will return again after a long century; what turmoil in France and Italy.
इसमें तो शायद कुछ शंका ही नही बचती है । सीधी सी बात है बृहस्पति और शनि जब मेष राशि मे प्रवेश करेंगे तब फ्रांस और इटली दोनो ही देशों मे अफरा तफरी मचेगी । दोनो देश भीषण युद्ध की चपेट मे आकर चरमपंथीयों के गुलाम बन जाएंगे । ( गुलाम बन जाएंगे नास्त्रेदमस के दुसरे दोहों मे अस्पष्ट है ) लेकिन यह होकर रहेगा ।
तीसरी कडी इटली पर ही है - At the New City he is thoughtfil to condemn; the bird of prey offers himself to the gods. After victory he pardons his captives. At Cremona and Mantua great hardships will be suffered.
इटली के दो शहर मान्टुआ और क्रोमिया पर शिकारी पक्षी अपनी प्रार्थना पढेगा , जाहिर सी बात है कि इटली के इन दो शहरो का उल्लेख बताता है कि फ्रांस के साथ ही इटली पर भी तबाही बरपने वाली है ।
और यहां सेंचुरी 1/34 में  ( The bird of prey flying to the left, before battle is joined with the French, he makes preparations. Some will regard him as good, others bad or uncertain. The weaker party will regard him as a good omen. ) शिकारी पक्षी के सामने फ्रांस का झुकना बताता है ।
अब बात करते है आने वाले समय की तो  फ्रांस पर हुए हमले के बाद दुनिया भले ही कहे कि तीसरे महायुद्ध की शुरूआत हो रही है लेकिन हमें तो पहले से पता है कि हम तीसरे महायुद्ध की शुरूआत देख चूके हैं ।
तो अब और आगे क्या ... आगे यह है कि The head of Aries, Jupiter and Saturn.  Eternal God, what changes   ! Then the bad times will return again after a long century;  what turmoil in France and Italy. 
अगर हालात पर ध्यान दें तो साफ जाहिर है कि अब फ्रांस और इटली मे भारी उथल पुथल और मारकाट  का दौर शुरू होने वाला है  . फ्रांस पर हमले के बाद इटली भी  खौफजदा है क्योंकि वर्तमान में उस पर सीधा हमला ईसाईयत के सबसे बडे दुश्मन इस्लाम से हो रहा है जो ईसाइयों से कही ज्यादा क्रूर, खौफनाक और कट्टरपंथी है  और अब आगे की ओर बढते हैं जहां 54 नंबर पर नास्त्रेदमस कहते हैं - I the land with a climate opposite to Babylon there will be great shedding of blood. Heaven will seem unjust both on land and sea and in the air. Sects, famine, kingdoms, plagues, confusion. 
यानि मिश्र (बेबीलोन) की विपरित आबोहवा वाले देश मे प्लेग जैसी बीमारियों के साथ ही खून की नदियां बहेंगी भारी रक्तपात और बीमारीयों से वह राज्य तबाही के कगार पर पहुंच जाएगा ... यहां पर सीधी बात ये समझ मे आती है कि किसी यूरोपीय देश पर कीटाणु या रासायनिक हमला होने की भी संभावना है ।
अब आगे सेंचुरी 2 के 34वें दोहे को देखते है The senseless ire of the furious combat Will cause steel to be flashed at the table by brothers: To part them death, wound, and curiously,  The proud duel will come to harm France. 
 जिसमे लिखा गया है कि एक मेज पर दो भाई विध्वंस के लिये आपस मे ही लड लेंगे और इन सबसे भारी तबाही फ्रांस मे ही मचेगी . यानि की किसी संस्था मे शामिल दो देश आपस मे ही लड जाएंगे और एक आतंक का साथ देगा तो दुसरा शांति के मार्ग की बात करेगा । अभी जी 20 सम्मेलन चल रहा है जिसमे मुझे ऐसा लग रहा है कि शांति बनाने की अपील चीन के द्वारा की जा सकती है ताकि शांति की आड मे वह अपनी आतंकी सहयोग मुहिम को आगे बढा सके ।
लेकिन यह सब कब होगा
इसे नास्त्रेदमस सेंचुरी 6-55 मे कहते हैं कि - By the appeased Duke in drawing up the contract, Arabesque sail seen, sudden discovery: Tripolis, Chios, and those of Trebizond, Duke captured, the Black Sea and the city a desert. 
इसमें एक सागर के सूख कर रेगिस्तान बनने की  बात कही गई है और आपको ये जानकारी होना ही चाहिये की वर्तमान मे दुनिया का चौथा सबसे बडा सागर अरल सागर वर्तमान मे सूख कर रेगिस्तान बन चूका है -
ये थी अरल सागर की पहले की तस्वीर

और ये है आज के सूखे अरल सागर की तस्वीर 




.....
शेष जारी रहेगा 

Thursday, October 22, 2015

राम की जय हो, रावण मृत्यु को प्राप्त हों ।

दशहरा आया और लगे लोग रावण के पुतलों को जलाने , बिना उसका अर्थ जाने या समझे । हमें तो बचपन से यही सिखाया गया है न कि जिस दिन प्रभु श्री राम चंद्र जी लंका जीतने के बाद अयोध्या मे वापिसी किये थे उसी दिन को सारे वैष्णव दशहरे  के प्रतिक स्वरूप पुतले दहन करते हैं । 
लेकिन क्या इससे रावण की जीवन गाथा समाप्त हो जाती है ? नही ! हमें राम के बारे मे तो बताया गया लेकिन रावण के बारेे में क्या ? बात बात पर हिंदु धर्म और जाति वाद की बात करने वाले लोगों को यह बात नजर नही आई की इस देश के एक महान प्रकाण्य ब्राह्मण का पुतला ऐसे लोग जलाते हैं जिनकी औकात  रावण का दास  बनने की भी ना हो । रावण की शक्ति का अंदाजा केवल इस बात से लगा लिजिये कि उसकी मृत्यु पर आज तक खुशी मनाई जा रही है जबकि सच्चाई ये थी की रावण ने कभी भी मनुश्य जाति से कोई बैर नही रखा ।  वह त्रैलोक्य सम्राट था लेकिन क्या उसने लंका के बाहर किसी अन्य देश पर कभी आक्रमण किया ? उस समय अयोध्या, काशी और मिथिला सहित कई देश थे लेकिन कहीं भी यह नही बताया गया कि वे रावण के अधीन थे या उन्होने लंका पर हमला किया हो । तो अब सवाल ये उठता है कि फिर रावण के शत्रु कौन थे ?
रावण के सबसे बडे शत्रु थे देवता ... रावण तंत्र के प्रकाण्य ज्ञाता थे और महादेव के परम भक्त होने के साथ साथ शिष्य भी । उन्होने वेदों सहित सभी ऋचाओं का अध्ययन करके यह जाने थे कि देवता लोग मनुष्यों को अपनी पूजा करने के लिये बाध्य करते हैं । देव लोग कभी नही चाहते की मनुष्य जाति के लोग परमात्मा को सीधे जानें जिसके लिये कभी अकला तो कभी बाढ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के स्ामी बनकर स्वयं की पूजा करवाते थे । देव लोक मे सुरा और सुंदरी की बातें लगभग हर जगह पढने मिल जाती है । स्वर्ग अर्थात देव लोक का प्रिय पेय सुरा है भोज्य मांस और नर्तकी के रूप मे मेनका , रंभा तो जग प्रसिद्ध हैं ही । तो...  देवेन्द्र नें जब रावण को सीधे महादेव के साथ जुडा हआ देखा तो उसने लंका पर भी प्राकृतिक आपदायें लाने का  दुष्प्रयास किया जिसका खामियाजा उसे रावण के पुत्र  मेघनाथ के हाथों शर्मनाक हार के रूप में भुगतना पडा और वह लंका की ओर दुबारा देखने की हिम्मत ना कर सका । इस तरह देवताओं का श्रीलंका में पूजन निशेध हो गया क्योंकि रावण की आज्ञा के अनुसार वहां पूर्ण रूप से सात्विकता इस तरह रखी गई ताकि महादेव सपरिवार कभी भी आना जाना कर सकें ।
नोट -  महादेव , माँ पार्वती (भगवती) , गणेश कार्तिकेय, हनुमान जी  ... इन्हे कभी भी मांस मदिरा का भोग नही लगाया जाता ।
किंतु पूर्वकाल सहित आज भी कई स्थानों पर अन्य देवी देवताओं को बलि दी जाती है । तो रावण जो स्वयं इतना प्रकाण्ड पंडित था लंका मे कैसे मांस मदिरा का प्रवेश होने देता ? रावण की मृत्यु के पश्चात देवताओं के प्रिय देवपूजक ऋषियो ने ( जैसे बशिष्ठ ) रावण औक तंत्र को ही बदनाम कर दिये और स्वयं को तथा मंत्रों को महान बता दिये । तंत्र के आविष्कारक शिव नें  रावण  को जिस तरह से गढे थे वैसा शिष्य बनाना किसी के बस मे नही था लेकिन ब्रहर्षि  विश्वामित्र नें दशरथ पुत्र राम को उसी तरह से गढना शुरू किये जिस तरह से रावण का अस्तित्व बना था । राम का उस जानकी से मिलन करवाए जिसके पिता राजा जनक नें अपने राज्य की ऋषि पत्नि गौतमी ( अङिल्या) के बलात्कारी राजा इंद्र का संपूर्ण पृथ्वी से हिस्सा दिलवाना बंद कर दिये थे और यह आदेश जारी कर दिये थे कि यदि किसी भी .यज्ञ में इंद्र को हिस्सा दिया गया तो उस यज्ञ को वह स्वयं जाकर नष्ट कर देंगे । अर्थात रावण के बाद जनक नें भी इंद्र को चुनौती दे रखे थे । विश्वामित्र नें राम को मथे , जगत कल्याण के लिये विश्वामित्र का साथ माता कैकेयी ने भी देते हुए राम को जगत कल्य़ाण के लिये बनवास में भेज दीं ।  इसके बाद की रामायण तो लोगों को पता है किंतु रावण का नही पता ।
रावण के पास जब सूर्पनखा ( असली नाम स्वर्ण रेखा अर्थात सोने की बनी रेखा ) रोते हुए पहुंची तो याद रखिये कहीं भी नही लिखा है कि रावण तुरंत उठ कर चला गया , वरन् अपने गुप्तचरों से सच्चाई जाना और उसके बाद उसने सूर्पनखा को ही डांट लगाया किंतु सूर्पनखा बार बार रावण के पुरूषत्व को चुनौती देने लगी तब वह स्वयं ( ना की किसी अन्य सेनापति या पुत्र भाई ) राम- लक्ष्मण के परिवार की स्त्री का अपहरण करके अपने साथ लंका लाया किंतु उसे अपने किसी रनिवास या बंद कमरे में ना रख कर  अशोक वाटिका जैसी सार्वजनिक जगह पर रखा । और एक बात - रामेश्वरम् मे राम के हाथों स्थापित शिवलिंग जो समुद्र की रेत का ही बना हुआ है आज तक इसलिये बंधा हुआ है क्योंकि उसमें  प्राण प्रतिष्ठा किसी साधारण मानव ने नही बल्कि प्रकाण्ड पंडित ब्राह्मण श्रेष्ठ पुरोहित रावण के द्वारा की गई थी और वह उसी तरह मान्य है जिस तरह राम च्रद्र जी का बनाया हुआ राम सेतु आज भी विद्यमान है ।
आज लोग रावण को बलात्कारी कहते हैं लेकिन इसका प्रमाण केवल तर्कहीन बातें ही हैं  वह ये नही बता पाते कि रावण की एक पत्नि मंदोदरी का ही नाम रावण के साथ क्यों है , किसी अन्य का क्यों नही ? यदि रावण नें महादेव को गुरू माना तो क्या अपने गुरू से छिपाकर कोई दुष्कृत्य वह कर सकता था ?  संभव ही नही क्योंकि स्वयं शिव नें अपनी एक ही पत्नि को सदा अपनाये हैं चाहे उसके लिये जन्मो जन्मांतर तक प्रतिक्षा क्यों न करनी पडी हो । यदि रावण के किसी दुष्कृत्य से महादेव रूष्ट हुए होते तो वह रावण के अंतकाल मे उसके हाथों स्वयं गढकर आज रामेश्वरम् मे नही बैठे होते ...
और अंत में हमें यह कदापि नही भूलना चाहिये की रावण नें प्राणप्रतिष्ठा के बाद जो हवन में आहूति डलवाये वह -  रावण की मृत्यु हो और राम विजय को प्राप्त हों के साथ संपन्न हुई थी ।
अब आप बताइये...जिस रावण की मृत्यु का उत्सव आज कलयुग तक मनाया जा रहा है वह रावण कैसा होगा ।

Saturday, August 8, 2015

ऐसे बनेगा आतंक का बादशाह ।

            नास्त्रेदमस की अभी तक की भविष्यवाणीयों मे से एक भविष्यवाणी सटिक रूप से ऐसी है जो दुनिया को पक्का सबूत दे रही है कि नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी समय के अनुसार ही अपने नियत समय पर पूरी हो रही है । नास्त्रेदमस ने सेंचुरी VIII- 70 में स्पष्ट रूप से लिखे हैं -    

      He will enter, wicked, unpleasant, infamous, tyrannizing over Mesopotamia. All friends made by the adulterous lady, the land dreadful and black of aspect. 


    इसका साधारण अर्थ है  -   एक कुख्यात आदमी मेसोपोटामिया का तानाशाह बनेगा और अपने कई मजबूत दोस्त बनाते हुए कई देशों को युद्ध की आग मे जला देगा । 



            अब इस बात की खाल निकालते हैं कि मेसोपोटामिया कौन सा देश है ? दरअसल मेसोपोटामिया का यूनानी अर्थ है "दो नदियों के बीच"। यह इलाका दजला (टिगरिस) और फ़ुरात (इयुफ़्रेटीस) नदियों के बीच के क्षेत्र में पड़ता है। इसमें आधुनिक इराक़ बाबिल ज़िला, उत्तरपूर्वी सीरिया, दक्षिणपूर्वी तुर्की तथा ईरान का क़ुज़ेस्तान प्रांत के क्षेत्र शामिल हैं। संलग्न नक्शे में मेसोपोटामिया राज्य की सीमा है और उस नक्शे मे यदि आप देखें तो पाएंगे कि वर्तमान मे उसके अधिकांश हिस्से पर आज काला आतंकवाद ISIS का खलीफा " अबु बगदादी " अपना पैर जमा चूका है । 

     
                                       यानि जिस जगह को नास्त्रेदमस ने तीसरे महायद्ध की शुरूआत  बताया है वहां पर आज सचमुच एक ऐसा आतंक विराजमान हो चूका है जिसके बढते खतरे से सारी दुनिया भयभीत है । नास्त्रेदमस का यह इशारा की वह कई मजबूत दोस्त बनाएगा से जाहिर है कि कोई महाशक्ति ( वर्तमान हालात मे वह चीन हो सकता है ) बगदादी का साथ देकर दुनिया को जीतने मे उसको सहयोग देगा । चीन का  अनुमान इसलिए लगाया जा रहा है क्योंकि नास्त्रेदमस की एक भविष्यवाणी के अनुसार इरान पर और तुर्की पर होने वाले हमले मे जो लाखो की संख्या में सैनिकों की बात हो रही है वह चीन के अलावा और कोई नही दे सकता । 

                               अब उस समय की गणना देखें जब यह समय आने वाला है -   -  सेंचुरी V-25  The Arab Prince Mars, Sun, Venus, Leo, The rule of the Church will succumb by sea: Towards Persia very nearly a million men, The true serpent will invade Byzantium and Egypt. 
                                             
  - अरबों का राजकुमार जब मंगल, सूर्य और शुक्र ग्रह सिंह राशि मे होंगे तब समुद्री जंग में ईसाईयों को मात देगा ।  रान की ओर से लाखों सैनिक कूच करेंगे लेकिन असली आतंक तुर्की और मिश्र मे घुस आएगा  ।   मतलब साफ है की जो परिस्थिति वर्तमान मे चल रही है उसमे किसी को यह बडी बात नही लग रही है कि ईरान और तुर्की भी बगदादी के कब्जे मे चले जाएंगे । 

अब आगे का हाल और देखते हुए कडी जोडने का प्रयास करते हैं - सेंचुरी V-11  The sea will not be passed over safely by those of the Sun, Those of Venus will hold all Africa: Saturn will no longer occupy their realm, And the Asiatic part will change.

                                     अर्थात इस्लाम ( जिसे नास्त्रेदमस शुक्र कहते हैं ) अपनी ताकत पूरे अफ्रीका में फैला लेंगे और चर्च वालों के लिए यह बहुत ही बुरा वक्त होगा । एशिया के कुछ भागों मे भी यह अपनी दखल देंगेे । अब अगर इन सभी कडियों को जोडते चलें तो क्या कहानी बनती है यह देखते हैं । ISIS अपना आतंक फिलहाल तुर्की , सीरीया, ईरान औरर सऊदी अरब में बढाते हुए वह  अफ्रीका की ओर बढेगा ना कि ारत की ओर । ISIS का मुख्य लक्ष्य ईसाईयत की तबाही है जो उन्हे भारत मे नही बल्कि तुर्की होकर यूरोप में जाने से पूरा होगा . यानि वह तुर्की ग्रीस स्पेन से होकर इटली को निशाना बनाएगा जिसके बाद फ्रांस का नंबर आएगा । अभी भारत मे जिस तरह की धमकी ISIS की ओर से आ रही है उससे कदापि नही लगता कि बगदादी किसी भी तरह से अफगान पाकिस्तान होकर भारत आने मे दिलचस्पी लेगा , यानि जाहिर सी बात है कि भारत मे ISIS का खौफ पाकिस्तान और चीन द्वारा  प्रायोजित होगा । यदि बगदादी को अफ्रीका मिल जाता है तो उसे यूरोप पहुंचने मे कोई कठिनाई नही होगी और वह चीन के सहयोग से अमेरिका और रूस को मात देने मे सक्षम होगा और फ्रांस इटली को वह स्वयं अपनी सेना से बर्बाद करवाने मे सक्षम रहेगा । 


सेंचुरी II-4/5 - 
4
From Monaco to near Sicily The entire coast will remain desolated:
There will remain there no suburb, city or town Not pillaged and robbed by the Barbarians.
5
That which is enclosed in iron and letter in a fish, Out will go one who will then make war, He will have his fleet well rowed by sea, Appearing near Latin land.

         ये दोनो दोहों को एक करके देखा जाए तो ऐसा लगता है कि इटली ( सिसली ) पर समुद्र की ओर से हमला करने का संकेत है ।  अब समुद्र के रास्ते पनडुब्बी का पहुंचना और अचानक से हमला कर देना कोई बडी बात नही है क्योंकि जब अमेरिका जैसे महाशक्ति के नगर को सुबह के 9 बजे हमला किया जा सकता है तो इटली उस नजरिये से कोई भी दम खम नही रखता है । इटली पर स्पेन के रास्ते आसानी से पहुंचा जा सकता है या फिर लिबिया के समुद्री रास्ते से । 
                              इन सभी कडियों को जोडने से एक बात तो साफ हो रही है कि ISIS से फिलहाल भारत को कोई खतरा नही है लेकिन पाकिस्तान और देश के भीतर बैठे गद्दारों के कारण हमारे देश को नुकसान पहुंच सकता है । हाल के घटनाक्रमों को देखा जाए तो ISIS भारत के नागरिकों को भी कोी नुकसान नही पहुंचा रहा है जिससे यह संदेश भी जा सकता है कि फिलहाल वह भारत से उलझने के मूड मे नही हैं । 
                                   लेकिन जो भी हो ISIS के खलीा अबु बगदादी तो फिलहाल आतंक के बादशाह बनने की दिशा मे जा रहे हैं ।




तीसरा विश्वयुद्ध जारी है ।

  आप यदि ये सोच रहे हैं कि जल्दी ही तीसरा महायुद्ध होने वाला है तो आप मुगालते मे है , क्योंकि जनाब तीसरा विश्वयुद्ध जारी है । इस समय सारी दुनिया लड रही है । कोई गृहयुद्द झेल रहा है तो कोई पडोसी देशों मे उलझ रहा है और जो बचे है वो आतंकवाद से लड रहे है । हाल ही में   मित्र   शिखर खरे जी से बात हो रही थी और बात ही बात मे एक लाइन आई की नास्त्रेदमस ने कहे थे कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब लोगों को धर्म बांटेगा । लोगों को  काला और सफेद रंग चुनना होगा लेकिन इन दोनो रंगो के बीच लाल और पीला भी अपने अधिकार के लिये लडेंगा । अब छोटी सी चर्चा मे तो जो कहना था वह कह दिए लेकिन बिना प्रमाण कहना ... ये भी तो गलत है । तो शिखर भाई चूँकि आप स्वयं नास्त्रेदमस के फैन है इसलिए आशा है की आपके मन मे ज्यादा सवाल नही उमडेंगे ... तो सबसे पहले नास्त्रेदमस की वह भविष्यवाणी जो वर्तमान समय मे सही साबित हो रही है ।

नास्त्रेदमस की सेंचुरी VI -10  में लिखा है - In a short time the temples with colors Of white and black of the two intermixed: Red and yellow ones will carry off theirs from them, Blood, land, plague, famine, fire extinguished by water.

                   इंग्लिश में लिखी गई इस पहेली को वर्तमान दृष्टिकोंण में दो भाग करके देखते हैं  - सबसे पहले मौौसम की बात करते हैं । वर्तमान समय मे सारी दुनिया मे बाढ , तूफान, चक्रवात, भूकंप, इबोला जैसी बीमारी और ज्वालामुखी सहित विभिन्न प्राकृतिक आपदाएं चल रही है । इनसे कोई भी देश अछूता नही है  और जो देश इनसे बच रहे हैं वहां पर युद्ध चल रहे हैं । हमारे देश को तो प्राकृतिक आपदाओं के साथ साथ पाकिस्तान के आतंकवाद और सीमा पर बमबारी के साथ साथ चीन से भी घूसपैठ झेलनी पड रही है । यानि मौसम का हाल देखें तो यह वातावरण नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी मे दिये गए विवरण के हिसाब से सही है ।
                           अब बात करते हैं धर्म की - आज इस्लाम का अर्थ हरा ना होकर काला हो गया है और वह काला रंग लगातार दुनिया में आतंक बढाते हुए आगे बढते जा रहा है । सफेद रंग जो ईसाइयत का प्रतीक है वह तो इससे भयभीत हो ही रहा है लेकिन अकारण भारत का लाल+पीला = भगवा रंग भी प्रभावित हो रहा है । नास्त्रेदमस ने उस समय सीधे काले रंग को स्पष्ट रूप से देख लिए थे जबकि ISIS का काला रंग हाल ही के समय मे अचानक अपने भयावह रूप मे दुनिया के सामने आया है । उन्होने केवल इस काले रंग वाले धर्म को ही नही बल्कि इसके साथ ही और भी कई बातें अलग अलग खण्डों मे लिखकर डालेे  हैं , जैसे "अ" नाम वाला वह क्रूर काला आदमी जो अपने धर्म का प्रखर ज्ञाता होगा । उसकी बोली बहुत ही नरम होगी लेकिन उसका केवल नाम दुश्मनो के दिलों मे खौफ पैदा कर देगा ।
इस बारे मे बाकी विवरण अतिशिघ्र देंगे ......... तब तक वर्तमान हालात और भविष्यवाणी को मिलाने मे आसानी होगी ।

Saturday, August 1, 2015

याकूब अभी जिंदा है ।

30 जुलाई की सुबह खबर आई कि याकूब मेनन को फांसी हो गई है और उसकी लाश पोस्टमार्टटम के बाद उसके परिवार वालों को दे दी गई । लेकिन क्या सचमुच याकूब मर गया है ? क्योंकि याकूब तो कभी अकेला था ही नही । इस याकूब के साथ और भी कई याकूब थे । एक याकूब को तो उसके फर्जी नाम और  पासपोर्ट के बाद भी खुफिया एजेंसी पकड लाई लेकिन जो याकूब पकडाया वो तो केवल एक था । इसके बाद देश ने देखा  एक साथ 40 और याकूबों को  जो अलग अलग नामों और चेहरों  के साथ अपने शरीर के ही एक हिस्से याकूब को बचाने की लिए भागदौड कर रहे थे । फिर देखा ऐसे ही 12 और याकूबों को जो आधी रात को देश की सबसे बडी अदालत को रात मे ही उठा कर बैठा दिये और तब तक अपने शरीर के एक अंग को बचाने का प्रयास करते रहे जब तक कि उसके नष्ट होने की खबर नही मिली । इसके बाद फिर से देश ने देखा दुसरे दिन देश के महानायक स्व. अब्दुल कलाम की खबर को  एक खलनायक याकूब मेमन के जनाजे तले दबते हुए ।
                                                                    यदि अपने प्राचीन कथाओं पर यकिं करें तो इस याकूब का असली नाम  रक्तबीज है जिसके गिरे हर खून के कतरे से एक नया याकूब तैय्यार हो रहा है । वह याकूब इतनी तेजी से जमीन पर गिर कर फैले कि समझ ही नही पडा कि वो याकूब कब अभिनेता बन गया या कब पत्रकार कब विधायक और कब सांसद या समाजसेवी , ये देश को पता ही नही चला । अब याकूब को मारना असंभव हो गया है क्योंकि उसकी जडें तो संसद मे भी है मिडिया मे भी और जनता के बीच मे भी ..
                                                    इसीलिये मैने यह निष्कर्ष निकाला है कि याकूब ना तो मरा है ना ही मर सकता है क्योंकि रक्तबीज को खत्म करना  अब किसी के वश मे नही है । विदेश मे बैठे ढेर याकूबों को मारने की बात करने   वाले लोग क्या ये बताएंगे कि जब अपने ही देश के याकूब को मारने पर सैकडों याकूब खडे हो सकते है तो दस पंद्रह याकूबों के लिए कितने याकूब आ जाएंगे ?
                                                    अब तो मान ही लो भाई याकूब अमर है ।

Tuesday, September 23, 2014

हो रहा है तीसरा महायुद्ध- ये रहा प्रमाण ।

" In a short time the temples with colors Of white and black of the two intermixed: Red and yellow ones will carry off theirs from them, Blood, land, plague, famine, fire extinguished by water. "
                             
  जैसा कि आप लोगों को पता है अंगरेजी पर अपनी पकड कितनी मजबूत है , इसलिये इसके अनुवाद  करने मे भारी गल्तीयां हो सकती हैं मुझसे , लेकिन आप तो महान अंगरेजी के ज्ज्ञाता है इसलिये उपरोक्त कथन का हिंदी अनुवाद कर लिजिये और नीचे लिखे मेरे अनुवाद से मैच करिये....
 " कुछ ही समय बाद धर्म बांटेगा लोगों को काले और सफेद मे और इन दोनो के बीच लाल और पीले रंग वाले अपने अपने अधिकारों के लिये भिडेंगे । रक्तपात, भूकंप, बीमारियां, अकाल, युद्ध और भूख से मानवता बेहाल होगी  " नास्त्रेदमस - सेंचुरी 6  दसवां छंद ।
अगर ये मैने सही अनुवाद ढुंढा है तो इसका मतलब वर्तमान में  ये निकला कि  .. ..    काले ISIS वाले सफेद रंग वाले ईसाइयों , यहूदियों, यजिदियों व अरबी लोगों को मारने के लिये निकल पडे हैं । इन दोनों के बीच में  लाल यानि चीन  और पीले का मतलब जापान व भारत को लिया जा सकता है । चीन जापान और भारत दोनो के साथ साथ अन्य एशियाई देशों को आँखे दिखा रहा है और इसका जवाब नास्त्रेदमस के दुसरे छंद में मिलता है  ।  " When those of the arctic pole are united together, Great terror and fear in the East: Newly elected, the great trembling supported, Rhodes, Byzantium stained with Barbarian blood."
                 इसका अर्थ ये हो सकता है -  " तुर्की और मध्यपूर्व मे  रक्तपात से धरती दहल रही होगी । पूर्वी देशों मे आतंक और भय का राज होगा तब उत्तरी ध्रुव के देशों के द्वारा  एक नया व्यक्ति चुना जाएगा जिससे उसके शत्रु दहल जाएंगे "  वर्तमान समय मे चीन अपनी महत्वाकांक्षा बढा रहा है , साथ ही जो जानकारी मिल रही है उसके अनुसार चीन ISIS से केवल 25 डॉलर बैरल पर तेल खरीदी करके अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत कर रहा है साथ ही अपने पडोसी देशों पर हमले करनें की रणनीती बना रहा है । चूँकि चीन और ISIS का गठबंधन एक तरह से बन चूका है तो यह समझने मे देर नही लगनी चाहिये कि चीन के हथियारों और तकनीकी का इस्तेमाल करके आतंकी अपने धर्म की आड मे दुसरे देशों पर हमले करते हुए आगे बढते जाएंगे  । यह कैसे होगा आप लोग आगे देखियेगा लेकिन वर्तमान मे तो आपको प्रमाण चाहिये सबसे नजदिकी भविष्यवाणी वाला तो वह प्रमाण ये है कि इस समय एक ओर आतंकीयों को जहां उनके काले कपडों और झण्डों के कारण मुस्लिम धर्म का माना जा सकता है वहीं उसके विरूद्ध लडने वाले देशों को ईसाई या अन्य सफेद रंग को मानने वाले लोग ईसाई, अरबी, यहुदी व अन्य ... Liberty will not be recovered, A proud, villainous, wicked black one will occupy it, When the matter of the bridge will be opened, The republic of Venice vexed by the Danube. 
यानि लिबर्टी (अमेरिका) का वापसी करना मुश्किल होगा , और वह काले को मानने वाले उस पुल को खोल देंगे जो वेनिस (इटली)  के गणतंत्र को बंद करने के लिये होगा । 
फिर है -  In the country of Arabia Felix There will be born one powerful in the law of Mahomet: To vex Spain, to conquer Grenada, And more by sea against the Ligurian people. (V-55)  
यानि दूर अरब देश से आने वाला आतंक इतना ताकतवर हो जाएगा कि वह अपने मोहम्मद का ज्ञान देने के लिये स्पेन को जीतते हुए ग्रेनाडा और इटली पर कब्जा जमाएगा  । 
" The great army led by a young man, It will come to surrender itself into the hands of the enemies: But the old one born to the half-pig, He will cause Ch Ð ‘ lon and M Ð ‘ con to be friends.   " 
इसमें बाकि सब छोडो लेकिन जो MD है क्या वो मोदी हो सकता है । सारी दुनिया जिस एक व्यक्ति के नेतृत्व मे लडेंगे वो मोदी जी हो सकते हैं क्योंकि वर्तमान वही एक नेता है जो सर्वधर्म समभाव की बाते ना केवल करते हैं बल्कि उसे लागू भी करने का प्रयास कर रहे हैं ।

अब अगर आपको इन भविष्यवाणीयों का पूरा प्रमाण चाहिये तो केवल उस समय का इंतजार करिये जब समुद्र मे अमेरिका के पोतों का विनाश किया जाएगा और चीन के माध्यम से परमाणु हथियारों से हमला होगा । .....
 
 

Monday, August 18, 2014

कृष्ण प्राप्ति का महामंत्र ।

हे कृष्ण आखिर तुम कौन हो ? 
क्यों तुम्हे जग पाना चाहता है ?
तुम्हे पाने का आसान मार्ग क्या है कृष्ण ?
आखिर मीरा ने ऐसा क्या देख ली जो वो आपमें समा गई ।

कई सवाल हैं कृष्ण से संबंध रखने वाले । आज दुनिया भर मे कृष्ण जन्माष्टमी हर्षोउल्लास से मना रहे हैं , खुशी खुशी बताते हैं कि देखो कृष्ण जन्म ले रहे है , लेकिन एक सेकेंड के एक पल केवल सोच कर देखो क्या वो पल कृष्ण के लिये खुशियों का था ? जन्म लेते ही सगी माँ से विलग होकर उस माँ की गोद मे जाना जिसकी स्वयं की संतान उसके बदले मृत्यु के घाट उतरने वाली हो । बरसते पानी मे टोकरी मे रखे कान्हा को नंद  के द्वारा उफनती यमुना को पार करना ..  कृष्ण के कष्टों को समझने वाले कितने लोग होंगे आज जो एक धर्मवीर  को केवल राधा के प्रेम मे पडे प्रेमी का रूप देकर रख दिये हैं ।  
                                    कृष्ण को राधा के साथ मंदिरों मे स्थापित करने वाले लोगों से एक सवाल है कि क्या वे अपनी पत्नि की फोटो को हटाकर अपने ही घर मे अफनी प्रेमिका की तस्वीर लगा सकते हैं ? अगर आपमें ये हिम्मत है तो आप साहसी नही बल्कि चरित्रहिन होंगे जो पत्नि के रहते हुए भी उस प्रेमिका को पाने की लालसा कर रहे हैं जो आपकी ही अर्धांगिनी का घर तोड रही है ।  और अगर आपमें ये हिम्मत नही है तो फिर आप माता रूक्मणी की जगह कैसे किसी एक काल्पनिक चरित्र को बैठा सकते हैं ? अगर आप मानते हैं कि कृष्ण हैं , ये भी मानिये कि रूममणी भी हैं । कृष्ण नें केवल एक विवाह किये थे माँ रूकमणी से ,किंतु उनका प्रेम पूर प्रकृति से है । गांव, पर्वत, गाय, बांसुरी, नदि सब कुछ प्रकृति है । कृष्ण के पास  गोप गोपियों के लिये तब समय था जब वो वृंदाववन में थे , जब मथुरा पहुंचे तो उनके जीवन मे संघर्ष था स्वयं और गांव  का जीवन बचाने का संघर्ष । मथुरा से शुरू हुआ यह संघर्ष अंततः महाभारत युद्ध के साथ समाप्त हुआ । 
                                                          कृष्ण को कैसे पाएं हम , क्या मंत्र है कृष्ण को पाने का । किस महामंत्र के सहारे मीरा कृष्ण मे जीवित समा गई । वो कौन सा महामंत्र है जो कृष्ण को पाने मे सहयोग दे ...... 
वह महामंत्र है --- 
हरे राम हरे राम,  राम राम हरे हरे 
हरे कृष्ण हरेकृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
 --- हरे =  हरना , हरण करना, ले लेना 

 मेरे दुःख हर लो राम , मेरे संकट हर लो राम, हे राम मेरे राम प्रभु राम सारी विपदा हर लो ।
मुझे हर लो कृष्ण,  मेरा परिवार हर लो कृष्ण  , हे कृष्ण मेरे कृष्ण प्रभु कृष्ण मेरा सब कुछ हर लो ।

ये है वो महामंत्र ओर इसका अगर प्रभाव देखना हो तो इस्कान वालों का उदाहरण देखिये .. लाखों , करोडों कमाकर हरे रामा हरे कृष्णा गाते हुए मुक्ति मार्ग के लिये हजारों लोग निकल पडे हैं । जिनके पास धन है वो भी आज कृष्ण मे लीन है और जो दरिद्र है वो पाने के लालच मे इस महामंत्र का जाप करते हैं बिना ये सोचे कि ये जगत कल्याण का नही परमात्मा को पाने का निर्वाण महामंत्र है । ये वो महामंत्र है जो आपको धन वैभव से वंचित रखते हुए कष्ट देते हुए परमात्मा तक पहुंचाता है , इसीलिये कृष्ण सबकुछ पाते हुए भी आज तक अकेले हैं । 
उनके पास एक पत्नि थी जो आज उनसे दूर करके रख दी गई है उनकी समाधी (वीरावल मे भालका तीर्थ )  के बारे मे लोगों को नही पता  । सारा जगत जन्माष्टमी के दिन प्रसन्न है किंतु कृष्ण ........ हरे हरे 

Tuesday, August 5, 2014

नास्त्रेदमस - मोदी है राजा कलि ?

तीन ओर जल से घिरे , पूर्वी देश में एक शासक पैदा होगा जो गुरूवार को अपना उपासना दिवस घोषित करेगा । इस गैर इसाई महापुरूषकी महानता, सराहना व अधिकारों की चर्चा प्रबल होगी और वह सारी धरती व समुद्रों पर तूफान की तरह हावी रहेगा ( सेंचुरी 1- 50 )      
  एशिया मे वह होगा जो यूरोप मे नही हो सका होगा । एक विद्वान शांति दूत पूर्व के सभी राष्ट्रों पर हावी होगा ( दसवीं सेंचूरी -75 दोहा ) ।

इन दो दोहों की  व्याख्या से मेरे इस लेख के  केंन्द्र बिंदु नरेन्द्र मोदी बने हैं। वर्तमान समय मे पूर्वी देशों मे एकमात्र नरेन्द्र मोदी ही वह व्यक्ति है जो असली शांतिदूत की भूमिका निभा रहे हैं । चाहे वह पाकिस्तान की बात हो , चीन की , भूटान की या फिर नेपाल की उन्होने शुरूआत अपने पडोसियों से संबंध सुधारने से ही किये है और अचानक  सारे पडोसी भी भारतीयों को अपने से लगने लगे हैं । पाकिस्तान मे तो इतना भारी परिवर्तन हुआ कि उसने वजिरिस्तान से सारे आतंकियों को कदेड दिया और अब जो आतंकी काश्मीर मे है ुन्हे भी संरक्षण देना बंद कर रहा है । देश की नक्सल समस्या के समाधान के लिये उन्होने अप्रत्याशित रूप से नेपाल जाकर माओवादी प्रचंड से मुलाकात करे . जिसका परिणाम भी देश के भीतर नक्सल खत्म होने मे कारगर रूप से दिखेगा । मोदी ने कभी भी युद्ध की बात नही किये और ना ही अपने धर्म से डिगे । जब सारे नेता स्वयं को धर्म निरपेक्ष दिखाते फिर रहे थे उस समय मोदी ने अपने धर्म की व्यख्या दकर सभी को हैरान कर दिये । लोक सभा चुनाव मे सभी को उम्मीद थी कि बिना धर्म निरपेक्ष बने जीत हासिल नही हो सकती किंतु मोदी ने अपने को सनातनी धर्म के नियमों पर आधारित धर्म निरपेक्षता का सिद्धांतवादी साबित करके चुनाव मे भारी विजय पा लिये ।  मोदी को अवतारी पुरूष साबित करने मे मुझे पता है भारी दिक्कतें आएंगी , किंतु दुसरे अवतारी पुरूष चाहे वह राम हों या कृष्ण, गुरू गोविंद हों या महावीर हर किसी को अपने अपने काल और युग मे तकलीफें ही झेलनी पडती है ।
                                      अवतारी काल पुरूष वही मनुष्य बन सकता है जो विपरित परिस्थियों से जूझ कर , विपत्तियों से लड कर अपने धर्म पथ पर सदा कायम रहता है । हिंदु धर्म मे राजा कलि के बारे मे कहा गया है कि यह अवतारी राजा चारों युग की प्रधानता के अनुसार शुद्र होगा । सतयुग- ब्राह्मण (राजा हरिशचंद्र ) , त्रेता युग - क्षत्रीय ( राजा राम ), द्वापर युग - वैश्य ( कृष्ण यदु वंशी थे । यादव वैश्यों मे होते है क्योंकि उनका मुख्य कार्य देश के दुग्ध उद्योग को संचालित करना होता है  ) अब बारी है कलयुग की  - अपने शुरूआती तीनों युगों की तरह यह युद्ध भी अधर्म पर विजय पाने के लिये ही लडा जाएगा यह तय है,  लेकिन  जीतेगा कौन ? जीतेगा वह राजा जो धर्म के मार्ग पर चलना जानता हो । जिसे अपने धर्म का ज्ञान हो , जो स्वयं से बढ कर परमात्मा को माने , जो अपने हर कार्य को गंभीरता के साथ पूर्ण करे । ..
                                     ऐसा कोई नेता या राजा जो पूरी दुनिया मे हो तो वर्तमान मे मुझे नरेन्द्र मोदी के अतिरिक्त कोई नही दिखता । हमारे देश का संविधान प्रधानमंत्री को राजा की तरह का अधिकारी बनाता है और अब हमारा राजा अपने जिस कर्म पथ पर आगे बढ रहा है वह उन्हे राजा कलि बनाने के एक कदम और करीब ले जाता है । जिस तरह से मोदी अपने धर्म और कर्म  मार्ग पर आगे बढ रहे हैं उसे देखते हुए यह आंकलन करना कठिन नही है कि वह गुरूवार के दिन अवकाश घोषित करा दें , क्योंकि गुरूवार को सनातनी धर्म के नियमो के अऩुसार केवल साधना का दिन माना जाता है और आज भी कई घरों मे गुरूवार को शरीर पर तेल, साबुन लगाना वर्जित माना जाता है तथा कुछ घरों मे झाडू पोंछा तक नही होता है ।
 
आगे होने वाली घटनाक्रमों की एक महत्वपूर्ण कडी
एक पनडुब्बी में तमाम हथियार और दस्तावेज लेकर वह व्यक्ति इटली के तट पर पहुंचेगा और युद्ध शुरू करेगा । उसका काफिला बहुत दूर से इतालवी तट तक आएगा । ( दुसरी सेंचुरी-5वां दोहा )
 समुद्री मार्ग से इटली पहुंचने का आसान रास्ता समुद्र ही है  और वो देश  जहां से पहुंचा जा सकता हो वह लीबिया, अल्जीरिया, मिश्र, सऊदी अरब, तुर्की और इस्राइल हैं । इन सभी देशों मे से केवल सऊदी अरब को छोडकर शेष सभी देश युद्धरत है , चाहे वह युद्ध आपसी हो या फिर गृह युद्ध । जिस तरह से इराक पर आतंकी कब्जा हो चूका है उसे देखते हुए यह कहना ठीक ही होगा कि उक्त सभी देश आज नही तो कल आतंकीयो के हाथ पडने वाले हैं ।

Tuesday, July 8, 2014

नक्सल , सेना और सरकार


छत्तीसगढ  कांग्रेस के बडे नेताओं का एक साथ नक्सली हमले में सफाया कोई सामान्य घटना नही कही जा सकी । इस दरभा कांड ने पूरे देश की राजनीती को झकझोर कर रख दिया था । दरभा कांड से पहले आम जनता के मन मे यह भावना बैठी हुई थी कि नक्सली केवल पुलिस, सेना और निरीह जनता को ही मारते हैं , लेकिन इस घटना ने इतिहास और सोच को एक साथ बदल दी । इस घटना के बाद एक पक्ष के लोगों के सामने नक्सलियों का क्रूर चेहरा सामने आया जिसमे बताया गया कि नक्सली महिलाएं महेन्द्र कर्मा के शरीर को चाकूओं से गोद गोद कर मारी थी और शरीर मे गोलियो के तो तीन लेकिन चाकूओं के 70 से ज्यादा जख्म थे । अब महेन्द्र कर्मा की मौत का दुसरा पक्ष जो नक्सलीयों की नही ग्रामीणों की बात करता है और कहता है कि महेन्द्र कर्मा के द्वारा सलवा जुडुम की आड मे स्थानीय आदिवासीयों के ऊपर भारी अत्याचार किया गया था तथा कई लडकियां सलवा जुडुम समर्थकों की हवस का शिकार बनी थी और उन्ही शिकार महिलाओं ने महेन्द्र कर्मा को इस प्रतिशोध भरे तरिके से दुर्दांत बदला ली हैं  । 
                                                      नक्सलियों का यह तौर तरीका सभ्य समाज को कतई रास नही आ सकता और ना ही समाज या कानून इसे स्वीकार करेगा किंतु घटना तो घटी है । एक दुसरे पर दोषारोपण चलता रहा और चल भी रहा है किंतु सेना ने दोषारोपण से स्वयं को दूर रखते हुए अपनी सटिक रणीनीतीक कार्यवाही जारी रखी जिसकी वजह से बस्तर कुछ हद तक शांत हो गया ।                 
                  एक बात जो मुझे याद पडती है कि कांग्रेसी नेताओं के काफिले पर हमले के कुछ दिन पहले महेन्द्र कर्मा के कई साथीयों को छत्तीसगढ हाईकोर्ट क द्वारा बलात्कारों के मामले से बरी कर दिया गया था । इस बात का उस घटना क्या संबंध हो सकता है इस पचडे मे मैं नही पडना चाहता क्योंकि बात केवल हवा हवाई ही होती है । नक्सलियों से मिलने का दावा करने वाले पत्रकार भी खुलेआम यह नही कह सकते कि मैं नकस्लियों से उनकी समस्याएं जानकर आया हूँ क्योंकि तब वह नक्सल समर्थक माना जाता है । आज बस्तर के आदिवासी अपने जल जंगल जमीन के हक मे अकेले लड रहे हैं यह सोचकर कि शायद प्रवीरचंद भंजदेव पुर्नजन्म लेकर उनकी रक्षा कर सके और अपना जंगल बचा सके ।
                           नक्सल क्या है, नक्सली कौन है के बजाय हमे अपनी सेना का मनोबल बढाना होगा जो धुर नक्सली क्षेत्रों मे जाकर नक्सली मुक्त जंगल बनाना चाह रहे हैं । वैसे मुझे एक सीआरपीएफ के जवान के साथ घटी घटनाक्रम भी ध्यान आ रही है जो मोहला मानपुर क्षेत्र मे हुई थी जिसमे उक्त जवान की जान नक्सलियों ने यह वादा करने पर बख्शे थे कि वह वापस जात ही सेना की नकरी छोड देगा और उसने वैसा ही किया भी था । सेना के सामने सबसे बडी जिम्मेदारी यह है कि वह नक्सलियों के खात्मे के अलावा आदिवासीयों के पुर्नवास के लिये भी योजनाएं चलाए ताकि मुहं मे गमछा बांधे नक्सली औऱ उसी गमछे को सिर पर लपेट कर हाथ जोडकर खडे ग्रामीण मे वह अंतर समाप्त कर सके ...................
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जो पूरी तरह से असंभव है क्योंकि लडाई तो नक्सल,  सेना  और सरकार की है लेकिन नाश आदिवासीयों के जल जंगल जमीन का हो रहा है ।

Sunday, May 18, 2014

नरेन्द्र मोदी - देश के बाद विश्व है ।

" मैं ना तो आया हूँ और ना ही किसी ने भेजा है , मुझे तो माँ गंगा ने बुलाया है " ये वो शब्द हैं जो बोले तो बनारस मे गए थे लेकिन हर बनारस वासियों की तरह सारे भारतीयों के दिलों में घर कर गए । एक सहज भाव जो माँ के आंसूओं और पिता की शहीदी पे भारी पडे । देश के सामने  तीन मुख्य बातें थी जिनमे से एक को चुनना था झुठे वादे के सहारे खडी कांग्रेस, कायरों की तरह जिम्मेदारी से भागी आप पार्टी और ठोस विकास को लेकर खडे नरेन्द्र मोदी । इस बार भाजपा के जीत का चाहे जो भी गणित या आंकलन राजनीतीक पंडित लगाएं मुझे लगता है किसी का भी ध्यान मुख्य जड की ओर नही जा पाएगा कि इतनी बडी जीत आखिर सुनिश्चित कैसे हुई ? दरअसल अभी तक कांग्रेस की जीत की बहुत बडी वजह जो उनका फार्मुला भी था कि जाति और धर्म के नाम पर तो वोट उन्हे नही भी मिलेंगे तो कोई बात नही उनकी सहयोगी सपा, बसपा,एनसीपी जैसे दलों को तो मिल ही जाएंगे और रही बात भ्रष्टाचार की तो कांग्रेस के नेताओं ने एक बात हमेशा कहे हैं कि जनता को भूलने की आदत है । 
                                                  बस इन्ही दो फार्मुलों को भाजपा ने तोड दिया । इस बडी जीत में बहुत बडी भागीदारी कांग्रेस के नेताओं ने भी निभाए है जो गाहे बगाहे उटपटांग बयानबाजी करके जनता के मन में मोदी के प्रति हमदर्दी जगाते रहे । इसमे से एक बयान जिसकी काट भाजपा के बहुत काम आई वह थी " जनता को भूलने की आदत है , जब वह बोफोर्स को भूल गई , वैसे ही सैनिकों के कटे सिर और भ्रष्टाचार को भूल जाएगी " लेकिन मोदी एंड कंपनी ने जनता को भूलने नही दिया । जनता को कटे सिर से लेकर ताजा भ्रष्टाचार और बढती महंगाई को जनता के जेहन मे ताजा रखा जिसका परिणाम ये रहा की जनता ने बैनर पोस्टर तो दुसरे दलों के लगाए लेकिन काम पूरा मोदी जी का कर दिये । 
                                                    बनारस के रोड शो में उमडी भारी भीड से राहुल और केजरीवाल मुगालते मे आ गए कि जनता का उन्हे समर्थन है, जबकि बिना रोड शो किये मोदी के साथ की भीड को उन्होने बाहरी कार्यकर्ताओं का तमगा दे दिया । बनारस ने अपनी सदाबहार मेहमाननवाजी को बरकार रखा जिसमे कांग्रेस, केजरीवाल और सपा को भीड के मामले मे कोई निराशा हाथ नही लगने दी लेकिन प्रत्याशी वही चुने जो उनके दिल मे था । गुजरात और राजस्थान तो समझ आया लेकिन आसाम मे मिली जीत से जनता  मोदी जी की इस बात से सहमत दिखी की " बांग्लादेशीयों को बाहर निकाला जाए " इस मुद्दे पर ऐसा लगा की भाजपा अपना खाता भी नही खोल पाएगी लेकिन वास्तव मे उस क्षेत्र की जनता ने बीजेपी को जीत दिला कर मोदी जी के साथ सहमती दिखा दी । आए दिन दंगे फासदों वाले राज्यं से उन सभी दलों का सफाया हो गया जो दंगो की आड मे केवल जाति और धर्म की राजनीती कर रहे थे ।
                                                     ये तो हुई भारत देश की बातें अब जरा रूख विदेशों की ओर करते हैं । मोदी जी को वीजा देने मे हमेशा कडा रूख अपनाने वाला अमेरिका इस समय केवल मोदी जी को आमंत्रित करके इति श्री कर चूका है । पाकिस्तान की दहशत तो मोदी जी के नाम से ही इतनी ज्यादा थी की वह और उसके नमुांइदे लगातार मोदी विरोध मे लगे रहे । चीन हो या फिर अन्य देश हर किसी को मोदी नाम से ही इतनी ज्यादा दहशत है मानो कोई दुसरा हिटलर सत्ता मे आ गया हो जबकि वास्तविकता ये है कि कांग्रेस और विरोधी दलों ने मोदी के नाम की आड मे केवल अपनी गंदी राजनीती और विदेशी फंड बढाते गए थे । भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर किसी को चुनाव लडने का अधिकार है और फिर जब हमारे देश मे ओवैसी जैसे लोग अपनी पार्टी बनाकर  सांसद बन सकते हैं तो उस लिहाज से तो भाजपा कई गुना ज्यादा बेहतर है फिर भी केवल भाजपा को सांप्रदायिक संगठन के रूप मे देखना अमेरिका सहित दुसरे देशों को अब भारी पड रहा है । अमेरिका मे सिक्ख विरोधी दंगों के मामले मे सोनिया की अमेरिका मे पेशी चल रही है लेकिन दंगो का जनक और सूत्रधार मोदी को माना जाता रहा अब वही देश भारत को किस नजरिये से देखेंगे ये सोचने वाली बात है । वैसे नरेन्द्र मोदी ने जो भी कहे उसे पूरा करके दिखलाए हैं और अगर उन्होने कहे थे कि एक ऐसा भारत देश का निर्माण करूंगा जहां आने के लिये अमेरिका जैसे देश कतार मे लग कर वीजा लेंगे , तो मुजे लगता है अब वह वक्त आ गया है । 
                                                              इस समय सारा विश्व लड रहा है । हर देश किसी ना किसी युद्ध मे व्यस्त है कोई गृह युद्ध में तो कोई आतंकियों से तो कहीं आपस मे ही औऱ अगर मनमोहन की कोई उपलब्धी हम मानेंगे तो यही की कम से कम हमारे देश मे ये हालत वो नही बनने दिये । झूक कर औऱ देश की गरिमा को गिरा कर ही सही अभी तक उन्होने देश को युद्ध से बचाए रखा था लेकिन अब देश एक ऐसे हाथों मे आ गया है जिसके आने के पहले ही पडोसी मुल्कों में केवल नाम की ही दहशत है ।  
                                                       आगे ईश्वर की मर्जी ।

Tuesday, May 6, 2014

राम के मोदी या मोदी के राम

लोकसभा 2014 मे यह मेरी पहली और इकलौती पोस्ट है जिसे मै आज इसलिये लिखने जा रहा हूँ क्योंकि मोदी ने आज अपना अंतिम ट्रंप कार्ड खेलकर पूरे लोकसभा चुनाव मे अपनी जीत का स्पष्ट दृष्टिकोंण रख दिये हैं । अब इस लोक सभा चुनाव की पूरी तैय्यारी मे सबसे बडी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नरेन्द्र मोदी की चर्चा ही केंद्र बिंदु मे रखते हुए अपन बात करें तो देखते हैं कि एक ओर संपूर्ण विपक्ष है और एक तरफ अकेले मोदी । ना कोई दल ना कोई अन्य नाम सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी । मोदी ने अपने चुनावी अभियान की शुरूआत करते ही ये आभास दिला दिया था कि उनके पास विपक्ष की हर प्रश्न का उत्तर है औऱ हर वार की काट भी मौजूद है । 
विपक्ष के पास नरेन्द्र मोदी के लिये केवल गोधरा दंगे के अलावा बाकि सारी कहानी केवल झूठ पर टिकि थी मसलन गुजरात मे विकास नही हुआ, गुजरात के किसान आत्महत्या कर रहे हैं , गुजरात मे केवल अमीर उद्योगपतियों को बढावा दिया जा रहा है , गुजरात मे पंजाब के किसानों को मार कर भगाया जा रहा है वगैरह वगैरह ..... 
                                       लेकिन विपक्ष के इन झूठे दावों की पोल हर चुनाव मे मतदान के पहले ही खुल जाती थी और मोदी को बढत मिल जाती थी जिससे विपक्ष का हर दांव खाली चला जाता था, लेकिन एक बात औऱ गौर करने लायक है कि मोदी का साथ ना केवल मानवों की टीम दे रही है बल्कि कोई ना कोई अदृष्य ताकत भी उनके साथ चल रही है जो हर वार का जवाब उन्हे कुदरती तौर पे दे देती है । कांग्रेसी नेता हों या फिर किसी भी दल के नेता ..जिसने भी मोदी जी के खिलाफ मुंह खोला उसे तत्काल किसी ना किसी मुसीबत मे कुरती तौर से मुश्किलों का सामना करना पड गया । दिग्विजय तो मात्र एक उदाहरण है जिन्होने मोदी जी की पत्नि को लेकर कई अंट शंट बयान देते रहे लेकिन कुदरती तौर पे जब उनका चाहरा अमृता राय के नाम के साथ उजागर हुआ तो वह स्वयं सबसे बडे चरित्रहिन व्यक्ति निकले ।  इशी तरह कपिल सिब्बल, चिंदंबरम औऱ आजम और खुर्शीद के विरूद्ध भी कुछ ना कुछ ऐसा होता चला गया जिसमे उन्हे ही मुंह की खानी पडी । 
                                        पं. बंगाल मे ममता के विरूद्ध जब मोदी ने बिगुल फूंका तो ममता नेबांग्लादेशीयों का सपोर्ट करके खुद अपने जीत का रहस्य एक तरह से कबूल कर ली की उनकी सेना बांग्लादेशियो पर ही टिकी हुई है नतीजा आसाम मे हुई 30 मौतों के रूप मे सामने आया ।   और आखिरकार मोदी जी ने कल की फैजाबाद सभा मे राम जी की तस्वीर के सामने भाषण देकर औऱ राम राज्य की बात कह कर विपक्ष और चुनाव आयोग दोनो को एक साथ पटखनी दे दी है । प्रभु राम जी की तस्वीर लगाने से कांग्रेस और तृणमूल ने तो पूरी भाजपा पार्टी को ही बैन करने की बात कह कर खुद अपने पैर पे कुल्हाडी मार लिये हैं । दरअसल ये एक ऐसा दांव है जिसमे समर्थन ना देने वाला वृहद हिंदु वोट एक झटके मे ही गंवा देगा और वो हिंदु वोट यादव, भूमिहार,   औऱ दलितों मे भी बहुलता के साथ हैं । मुस्लिम वोटर  तो इस बार अप्रत्याशित रूप से खामोशी ओढते हुए स्वयं को निष्पक्ष  बताने की कोशिश मे है ताकि मोदी सरकार आने पर वे कह सकें कि हमारे समर्थन के बिना ये सरकार नही बन सकती थी । 
                                          मोदी ने इस चुनाव मे अपना एकदम स्पष्ट नजरिया रखते हुए कार्य किये है जो केवल मजबूत सेना,  मजबूत देश, विकास पूरक देश, समर्थ राष्ट्र,  भ्रष्टाचार मुक्त देश , महंगाई मु्क्त देश और धर्म से ऊंचा राष्ट्र पर आधारित है । इसके विपरित विपक्षी दलों के पास जाति , धर्म और  झूठे विकास के खोखले दावों के अलावा कुछ नही है । विपक्ष केवल गोधरा दंगो के नाम से देश के मुस्लिम वोटरों को मोदी का भय दिखाकर ही वोट हासिल करना  चाहता है जो वर्तमान मे शिक्षित जनता के गले नही उतर रहा । 
                                              अब फैसला तो 16 मई से ही मिलना शुरू होंगे तब तक हम मोदी राम है या राम के मोदी है पर बहस चालू रखेंगे एबीपी और एनडीटीवी के माध्यम से ।

Wednesday, March 26, 2014

संयुक्त राष्ट्र - गुलाम तैय्यार करने वाला संगठन ।

फिर से भविष्यवाणी ।  अरे भाई हर बात को आप लोग भविष्यवाणी से क्यों जोड लेते हो ? कभी संभावना की तलाश भी कर लिया करो कि जो हो रहा है अगर वैसे ही चलता रहा तो आगे क्या होगा । अब आपको लग रहा होगा कि संयुक्त राष्ट्र भंग हो या चलता रहे अपने को क्या - तो यह सोच बदल दिजिये क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के द्वारा दुनिया के कई देशों को स्वास्थ्य सुविधा की राशि इसी के माध्यम से मिलती है - भारत को भी । हमारे देश की कई योजनाएं ऐसी है जिनमे सारा पैसा संयुक्त राष्ट्र के द्वारा ही आता है और सरकार उन पैसों का इस्तेमाल नीजी स्वार्थ मे करती हैं.....  खैर  वो भ्रष्टाचार का मामला है ना कि हमारी इस पोस्ट का । तो सबसे पहले बात करते हैं संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का उद्देश्य क्या था ?? संयुक्त राष्ट्र के व्यक्त उद्देश्य हैं युद्ध रोकना, मानव अधिकारों की रक्षा करना, अंतर्राष्ट्रीय कानून को निभाने की प्रक्रिया जुटाना, सामाजिक और आर्थिक विकास उभारना, जीवन स्तर सुधारना और बीमारियों से लड़ना । 
                       1.- युद्ध रोकना संयुक्त राष्ट्र का पहला उद्देश्य है लेकिन यह अपने उस उद्देश्य को वर्तमान मे भूल कर भेदभाव अपना रहा है जैेसे - अमेरिका ने लिबिया औऱ इराक को कथित तौर से आजादी दिला दिया लेकिन उसका परिणाम क्या हुआ ? इराक से अथवा लीबिया से दुनिया को कोई खतरा नही था और यह शुद्ध रूप से उनके तेल भण्डारो पर कब्जा करने की अमेरिकी साजिश थी जिसमे वह पूर्णतः सफल हो गया । इन युद्धों मे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका केवल इतनी भर रही की उसे इराक और लीबिया  की जनता सद्दाम औऱ गद्दाफी के तानाशाही से मुक्त होती दिखलाई पडी, जबकि वर्तमान मे दोनो देश गृहयुद्ध की आग मे जल रहे हैं । 
                    2.- मानव अधिकारों की रक्षा  जबकि वर्तमान समय मे सीरिया, मिश्र, सूडान उत्तर कोरिया सहित कई अफ्रीकी राष्ट्रों की जनता  अपने अधिकारों  को जानना तो दूर अपनी जान बचाने की जद्दोजहद मे है । संयुक्त राष्ट्र अपनी सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से जो दवाएं अथवा रसद उन देशों को पहुंचा रहा है वह पूर्णतः मिशनरी संस्थाएं होती है जो जनता की सेवा के नाम से पैसों की हेरा फेरी करके अपने चर्च को लाभ पहुंचाती है फिर चाहे वह धर्म परिवर्तन हो या फिर चर्च को आर्थिक सहायता । हमारे देश मे भी जो NGO संचालित होते हैं उनके अधिकार धर्म व जाति के आधार पर अलग अलग होते हैं । ईसाइ मिशनरीयों को मिलने वाला धन असीमित हो सकता है किंतु सामान्य NGO को मिलने वाले धन की जांच पर इतने अडंगे रहते है कि संचालक त्रस्त हो  जाते हैं यानि की मानव अधिकारों की रक्षा के नाम से संयुक्त राष्ट्र मिशनरी और यूरोपीय संघों को लाभ पहुंचा रहा है । ताजा जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र आज इटली के उन नौसैनिकों के मामले पर संज्ञान लेने वाला है तथा भारत देश को निर्देश देने वाला है,  जिन पर हमारे देश के नागरिकों की हत्या का मामला चल रहा है ।
                        3.- अंतर्राष्ट्रीय कानून को निभाने की प्रक्रिया जुटाना जबकि इस क्षेत्र मे संयुक्त राष्ट्र के पास ऐसा कोई उल्लेखनीय योगदान नही होगा जिससे यह साबित होता हो कि अंतर्राष्ट्रीय कानून को निभाने मे कोई खास पहल की गई हो । इसका नजरिया हमेशा यह रहता है कि जहां पर अंर्तराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो रहा है वह यूरोपीय संघ - अमेरिका के हित मे है या नही । यदि हित मे है तो जायज औऱ अगर नही है तो नाजायज ।  चूँकि इसका नियंत्रण मुख्य रूप से इटली, अमेरिका औऱ फ्रांस के नियंत्रण मे है सो यह संगठन उन्ही के हितों मे बातें और काम करने को प्राथमिकता देता है ।
                      4.- सामाजिक और आर्थिक विकास उभारना इसके आड मे यह पूर्णरूपेण ऐसे कार्यक्रम तैय्यार करवाता है जिससे उस देश की सामाजिक प्रणाली अस्त व्यस्त हो जाती है । हमारे देश मे ही इसका उदाहरण देखिये - सामाजिक स्वतंत्रता के नाम पर सेक्स बढाया गया, धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर हमारे ही देश मे ईसाइ और मुस्लिम धर्म को आरक्षण लाभ दिया जाने लगा , आर्थिक विकास व सहयोग के नाम से अमेरिकी कंपनीयों को बढावा दिया गया जैसा हमारे देश मे किया गया वैसे ही इस संगठन के द्वारा विश्व के अन्य विकासशील देशों के साथ किया जा रहा है औऱ जो देश इसका विरोध करते हैं उन्हे बेवजह के कडे प्रतिबंध के नाम पर धमकाने वाले संयुक्त राष्ट्र के सरपरस्त हावी हो जाते हैं । 
                        5.- जीवन स्तर सुधारना और बीमारियों से लड़ना यह एक ऐसा फार्मुला जिसके लिये दवा कंपनीयां अरबों खरबों खर्च कर रही हैं । जीवन स्तर सुधारने के नाम पर साफ सफाई , साफ पेयजल और बेहतरीन स्वास्थय सुविधाएं दी जानी चाहिये और इन कामों मे होने वाला खर्च यूँही सरकारी खातों मे या तो वापस चले जाता है या फिर नेता अधिकारीयों की जेब मे । बीमारियों से लडने के नाम पर दवा कंपनीयां भारी फर्जीवाडा कर रही है एड्स जैसी बीमारी जिससे विश्व मे एक भी दमी की मौत नही हुई कंडोम बेचने के नाम पर फैला दी गई । यौन संक्रमण , हेपेटाइटिस,  स्वाइन फ्लू जैसी कई बीमारियां ऐसी है जिन्हे हमारे यहां सामान्य दवाओं से ठीक कर लिया जाता था लेकिन संयुक्त राष्ट्र की आड मे 2 का माल 200 बनाकर दवा कंपनीयां सप्लाई कर रही है  और मजे की बात ये है कि ये सभी कंपनीयां या तो अमेरिका की होती है या फिर फ्रांस की ।  
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                                   सच तो ये है कि मुझे कहीं भी संयुक्त राष्ट्र की ऐसी महती भूमिका दिखलाई नही पडी है जिससे मैं यह मान सकूँ कि संयुक्त राष्ट्र विश्व मे कोई परिवर्तन ला सकता है । विश्व बैंक हो या फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन , अंतराष्ट्रीय कृषि कोष हो या खाद्य एवं कृषि संगठन  यह सभी पूर्ण रूप से संयुक्त राष्ट्र के अधीन होकर अपने आका मुल्कों के हितों की रक्षा करते हैं । ये हर देश को केवल अपने हिसाब से नियंत्रित करने की चाल चलते हैं और कुछ नही ।

Thursday, March 6, 2014

सावधान - तीसरा विश्वयुद्ध जारी है ।

सूखा जरूरी नही की गरमी में आए ओले से भी सूखा पडता है ।
तो कैसे हैं जनाब आप लोग,  औऱ कैसा लग रहा है तीसरे महायुद्ध के दौर मे अपना समय गुजारना ।   जाहिर सी बात है आप कहेंगे मुझे अपने दिमाग का इलाज करवाना चाहिये । मैं आपकी सलाह मान भी लेता लेकिन क्या करूं ये नास्त्रेदमस जी मुझे बार बार झिंझोड कर उठा देते हैं और कहते हैं पढ और लिख । मैंने कई दफा उन्हे समझाया कि आदरणीय मेरा अंगरेजी से दूर दूर तक कोई लेना देना नही है तो बस उत्तराखण्ड के अपने मित्र चेतन हरिया थमा दिये । कहे कि उसके कंधे का आपरेशन हुआ है वो अपने घर मे रहेगा उससे अनुवाद करवाओ तो.. अब क्या किया जा सकता है सिवाय ये बताने के लिये की लो जनाब आप तीसरे महायुद्ध के दौर मे ही अपना जीवन बीता रहे हैं ... पता था आप भी केजरीवाल की तरह प्रमाण मांगेगे तो चलिये क्रमवार प्रमाण पकडते चलिये ... लेकिन उसके पहले मुझे झेलिये ।
                                                      मैं आगे की कडियां बताने से पहले कुछ बाते आप लोगों की जानकारी मे देना चाहता हूँ कि अभी जब मैं पोस्ट को लिख रहा हूँ तो दुनिया मे इस समय क्या हो रहा है - 
1. - दक्षिणी सूडान मे जबरदस्त गृहयुद्ध ।
2. - अफगानिस्तान - तालिबान मे युद्ध ।
3. - चीन और जापान के मध्य द्विप को लेकर युद्ध के हालात ।
4. - ईराक मे गृहयुद्ध जारी ।
5. - इज्राइल द्वारा सीरिया मे बमबारी ।
6. - रूस - यूक्रेन को लेकर पूरे विश्व मे तनाव ।
               इसके अलावा कई अफ्रीकी देशों मे   आपसी लडाईयां या गृहयुद्ध चल रहे है । यानि दुनिया एक तरह से कहीं ना कहीं युद्ध कर ही रही है । अब इन सके बीच नास्त्रेदमस की भूमिका क्या है ये देखिये -- 
 नास्त्रेदमस अपनी तीसरी सेंचुरी के 4- 5  दोहे मे लिखते हैं - 
" Near, far the failure of the two great luminaries Which will occur between April and March. Oh, what a loss! but two great good-natured ones By land and sea will relieve all parts. " 

When they will be close the lunar ones will fail, From one another not greatly distant, Cold, dryness, danger towards the frontiers, Even where the oracle has had its beginning.
                                                   
                                               इसमे नास्त्रेदमस ने अप्रेल और मार्च या मई माह में दो शक्तियों के टकराव के बारे मे लिखा है । इस साल अगले महिने अप्रेल मे अप्रत्याशित रूप से दो सूर्य ग्रहण पड रहे हैं 15 अप्रेल और 29 अप्रेल को । कुछ जानकारों के अनुसार दो सूर्य ग्रहण एक ही माह मे पडना बेहद अशुभ है और ऐसा माना जा रहा है कि महाभारत काल के बाद यह योग बन रहा है । अब अगर इस ग्रहण को हम बेस मानकर  चलें कि इन्ही ग्रहण के कारण बहुत कुछ बदलाव हो सकते हैं । वर्तमान समय मे सारी दुनिया सर्द की तेज लहरों व भारी बरसात से जूझ रही है । इससे फसलें भी बरबाद हो रही है यानि सूखे का खतरा बढ चूका है ।  यानि भविष्यवाणी के अनुसार हम लोग विश्वयुद्ध के दौर मे पहुंच चूके हैं और आगे बढकर झांकने का प्रयास करते हैं कि नास्त्रेदमस क्या कहना चाहते हैं ।
सेंचुरी3/22 में लिखा है
 " Six days the attack made before the city: Battle will be given strong and harsh: Three will surrender it, and to them pardon: The rest to fire and to bloody slicing and cutting. "
                    यह भविष्यवाणी 6 दिन का युद्ध की बात बतलाता है जो 1967 मे इस्राइल ने सीरिया, जॉर्डन और मिश्र को अकेले हरा कर जीता था । इस युद्ध का उल्लेख नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी मे तीसरे विश्वयुद्ध की शुरूआती पृष्ठभूमि के बीच मे आया है इसलिये मेरा ये अनुमान है कि यह घटना दोहराई जा सकती है और शायद इस बार इसका परिणाम अलग हो ।

" By the appeased Duke in drawing up the contract, Arabesque sail seen, sudden discovery: Tripolis, Chios, and those of Trebizond, Duke captured, the Black Sea and the city a desert " 
                                        
                                          इस पहेली मे ब्लैक सी यानि काला सागर का उल्लेख है । काला सागर वह हिस्सा है जहां पर रूस ने अफनी सेना को यूक्रेन के विरूद्ध अलर्ट पर रखा है । मुझे जहां तक समझ पड रहा है कि काला सागर के इस भाग मे जो युद्ध होगा उसमे महाशक्ति को हार का सामना करना पड सकता है यानि रूस की हार हो सकती है ।  चूँकि आज 6 मार्च ही है इसलिये अभ अगले महिने तक देखते हैं क्या क्या हवा बदलती है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी ...तब तक आप लोग विश्वयुद्ध के शुरूआती भाग का आनंद लिजिये ।
औऱ क्या ............... आगे की खोज जारी है अभी भी ... 

Saturday, February 15, 2014

बिजली का झटका लगा केजरीवाल को ।

राजनीती के क्रकेट मैदान मे अरविंद केजरीवाल 49 रनों की पारी मे हिट विकेट आउट हो गए हैं । जनलोकपाल को लेकर इन्होने जो बखेडा खडा किये वो इनकी अदूरदर्शिता नही बल्कि सोची समझी रणनीती समझी जा सकती है । इन्होने दिल्ली सरकार से जो वादे करके सत्ता पे आए उनमें वो हर तरह से नाकाम हुए और अपनी नाकामियों को " हमें तो जानकारी ही नही थी कि ऐसा करना होता है " जैसी बेतुके बायनों से और भी जलील हुए । आज राजनीती के नजरिये से लोग केवल आप पार्टी और केजरीवाल को हेय दृष्टि से देखेंगे औऱ होना भी यही चाहिये क्योंकि आप को पता होना चाहिये था कि जिस भ्रष्ट सिस्टम से वो लडने के लिये आए हैं वो कौन लोग हैं । केजरीवाल की 49 दिन की सरकार ने ऐसा कोई भी काम नही की जिससे यह साबित हो सके कि वे एक बेहतर राष्ट्र का निर्णाण कर सकते हैं । दिल्ली की सत्ता पाने के बाद केजरीवाल ने बजाय केन्द्र सरकार की नाकामी को सामने लाने के केवल भाजपा और मोदी के ऊपर ध्यान केंद्रित रखा जिससे जनता को यह समझ आने लगा कि कांग्रेस ने ही आप पार्टी को जन्म दिया है औऱ यह पार्टी उसी तरह से काम करेगी जैसे शरद पवार, मायावती, मुलायम सिंह  और लालू यादव कर रहे हैं । यदि केजरीवाल सचमुच भ्रष्टाचार से लडना चाहते तो उनके पास कई रास्ते थे जिनमे से सबसे आसान रास्ता यह था कि वे अंबानी- कांग्रेस गठबंधन को जनता के सामने ढंग से उजागर करते । बजाय गैस के मूल्यों को बढाने के मुद्दो को सामने लाने के ,  वो सबसे पहले ये सवाल करते कि हमारे देश में पैदा होने वाली प्राकृतिक गैस के दाम डॉलर मे क्यों तय किये जा रहे हैं  ?  
                                            यह सवाल आमजन के दिमाग मे सबसे पहले आना चाहिये था कि हमारे ही देश मे पैदा होने वाले सामान को हम डॉलर के रूप मे भुगतान कर रहे हैं । जब एक उद्योगपति को पेट्रोलियम गैस के दाम का भुगतान सरकार डॉलर मे कर सकती है तो इस देश के किसानों को भी वह डॉलर मे ही भुगतान करे उसकी फसलों का । यह मामला एक ऐसा था जिसे वह ढंग से प्रस्तुत कर सकते थे किंतु इसके बदले उन्होने कांग्रेस - भाजपा को आपस मे हाथ मिलाने का मौका दे दिये  और जनलोकपाल जैसे मामलों मे खुद को शहिद साबित करने की नाकाम कोशिश किये ।
                                         यदि केजरीवाल ने वीरप्पा मोइली और अंबानी के विरूद्ध मोर्चा नही खोला होता तो शायद कुछ दिन और यह सरकार चल लेती किंतु वो भूल गए कि दिल्ली को बिजली  रिलायंस  एनर्जी ही दे रही है और बिजली दिल्ली की जान है । दिल्ली एक निकम्मा राज्य है इतना ज्यादा निकम्मा की उसके पास कुछ भी नही है सिवाय नेताओं और संसद के । दिल्ली का अपना कोई मौसम नही है ना ही कोई प्राकृतिक उपज जिससे वह पैसे कमा सके , ना तो कोई नदि उसकी धरा से उत्पन्न हुई है ना ही कोई पर्वत उसकी रक्षा कर सकता है , उसके वाशिंदे हरियाणा, यूपी और पंजाब के ही लोग हैं जिनकी बदौलत वहां काम चल रहा है । ऐसे निकम्मे राज्य का मुख्यमंत्री बनकर उसमे असफल होना केजरीवाल की नियती नही योजना कही जा सकती है । दिल्ली केन्द्र शासित राज्य है और वहां की विधानसभा का पूर्ण स्वामित्व केन्द्र के हाथों मे होता है ,  केन्द्र के पैसों से ही दिल्ली विधानसभा चलती है यानि केन्द्र सरकार को आप कोई चुनौती नही दे सकते ।
                                     अब केजरीवाल के पास लोकसभा मे बुरी तरह से परास्त होने के अलावा कोई रास्ता नही बचा है । आम जनता को जनलोकपाल उतनी आसानी से नही समझ पडेगा जितनी आसानी से विदेशी डॉलर और भारतीय करेंसी की समझ आ सकती है । बात बात पे धरना देने वाले केजरीवाल के खिलाफ कौन धरने पे बैठेगा पहले ये सोचना है ।