Wednesday, October 27, 2010

भिलाई- 70 वर्षीय अनुसूचित जाति वृद्ध दंपत्ति को थाने से अपमानित कर भगाया

आज सरकार वृद्धों को न्याय देने की बातें कर रही है लेकिन उन्ही वृद्धों को थाने में क्या क्या हाल झेलना पड रहा है इसकी एक बानगी भिलाई शहर के सुपेला थाने में विगत दिनों देखने को मिली जहां 70 वर्षीय रामनगर, सुपेला निवासी राम लगन प्रसाद अपनी 55 वर्षीय पत्नी के साथ चंगोरभाटा, रायपुर  निवासी राहुल राव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने वैशालीनगर पुलिस चौकी पहुंचे । प्रार्थी दंपत्ति के अनुसार राहुल राव इनके निवास के भीतर चाकू और कट्टा (देसी पिस्तौल) दरवाजे की कुंडी तोडकर भीतर घुसा और इनकी बेटी रंजीता के बारे में पुछताछ करने लगा । इस बारे अनभिज्ञता जाहिर करने पर राहुल द्वारा रामलगन को पूरे परिवार के साथ जान से मारने की बातें करने लगा जिस कारण पूरा परिवार भयभीत हो गया । 
                                ज्ञात हो कि रामलगन की तलाकशुदा बेटी रंजीता को राहुल राव द्वारा जबरन उठाकर रायपुर में अपने साथ रख लिया गया था । रंजीता के पहले पति से 2 लडके और एक लडकी हुए थे जिनमें से बडा लडका अपने पिता के साथ रहता है जबकि एक लडका और एक छेटी लडकी अपने नाना रामलगन के पास रह रहे हैं । राहुल का कहना था कि रंजीता उसके पास से भाग कर कहीं चली गई है और वह अपने पिता के अलावा कहीं नही जा सकती है । जबकि रामलगन को इस बात का अंदेशा था कि राहुल उनकी बेटी की हत्या कर चुका है और अब उसे लापता बताने की कोशिश कर रहा है । राहुल आदतन अपराधी है ।
                                  भयभीत दंपत्ति इस संबंध में वैशालीनगर पुलिस चौकी में जब रिपोर्ट करने पहुंचे तो वहां मौजूद चौकी प्रभारी की उपस्थिति में वहां के सिपाहीयों नें उक्त वृद्ध दंपत्ति की उम्र को नजरअंदाज करते हुए बदतमिजी करते हुए अपमानित करके थाने से भगा दिये । प्रभारी मुंशी  ने रिपोर्ट लिखने से इंकार करते हुए रायपुर थाने में रिपोर्ट करने की बात कही और आवेदन को फाडकर फेंक दिया और दुबारा चौकी में कदम रखने पर अंदर कर देने की धमकी दी । इस बात की कई बार मौखिक शिकायत वैशालीनगर पुलिस चौकी में रामलगन द्वारा की जा चुकी है जिस पर आजतक कोई कार्यवाही नही होने के कारण राहुल रानव कता मनोबल बढा हुआ है ।
                                      क्या प्रशासन गरीब अनुसूचित जाति पर हो रहे पुलसिसिया अत्याचारों को जानता है अथवा जानना नही चाहता । इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होना आवश्यक है क्योंकि नक्सली शहरों में कदम बढा रहे हैं और कहीं औसा ना हो कि गरीबों की सहानुभूति आगे चल कर ऐसे पुलिस वालों के कारण प्रशासन की सिरदर्दी ना बन जाए ।