Wednesday, October 6, 2010

पुलिस मर रही है नेता क्यों नही ?


                                                चलो बच्चे लोग.... सब मिलकर ताली बजाओ आज एक नया खेल दिखाएगे ये नक्सली ... चार पुलिस वालों को बांधकर उन्हे एक एक कर धीरे धीरे गले पर धारदार हथियार से हलाक कर देंगे । पुलिस वाले चिल्लाते रहेंगे मगर हम सब लोग हंसते रहेंगे और उन्हे तडप तडप कर मरते देखते रहेंगे । तो फिर क्या कहते हो , खेल शुरू किया जाये । आंआंआं ... रूको रूको पहले कुछ और तमाशाबीनों को बुलाते हैं ः- 
   सबसे पहले आ रहे हैं वीरों के वीर प्रदेश के  सरदार    वैद्यराज   रमन सिंह जी
                                                          आप इनके मुस्कुराते चेहरे पर ना जाएं । ये मुस्कान तो  हमेशा ही रहती है । इनके पास  प्रदेश के हर रोगों की दवा हैं इनकी दवायें एकदम अचूक होती हैं बस कभी कभी जरा सी समस्या ये आ जाती है कि जिस आदमी के हाथों दवा भेजते हैं वह रास्ते में महंगी दवाओं को बेच देता है जिससे कोई कोई मौत हो जाती है लेकिन एक बात समझ में नही आती कि इनका परिवार कैसे चल रहा है । छोडिये व्यंग्यात्मकता को सीधे सीधे कहते हैं । ये हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी है स्वभाव से सरल व मृदुभाषी । ये प्रदेश की जनता के भलाई के बारे में हमेशा चिंतित रहते हैं लेकिन इनके बाकि बचे संगी साथी इनके ऊपर दाग धब्बे लगाते रहते हैं । ये पुलिस के हित की बातें गंभीरता से सोचते हैं ...... लेकिन सोचते हैं अमल में नही ला पाते ।
                    इसके बाद  आता है नंबर बाकियों का जिनमें से अपने गृहमंत्री को याद ना करना  शहिद पुलिस का अपमान होगा । ये साहेबान जिनका नाम ननकीराम कंवर है ये  प्रदेश में बढते अपराधों से बेहद चिंतित हैं इनका दर्द तब और बढ जाता है जब इनके करीबी गंभीर अपराधों में कभी कभार लिप्त मिलते हैं तो उन्हे छुडाने में इन्हे बहुत मेहनत करना पड जाता है । खैर आखिर हैं तो बेचारे मानव ही जब अपनों से फुरसत पाएंगे तब तो अपने सैनिकों का हालचाल जान पाएंगे ।
                      और हां एक आदमी नही पूरी संस्था की बात किये बिना तो बात पूरी ही नही होगी ... जी हां ठीक समझे मानवाधिकार आयोग । ये आयोग बडे ध्यान से देखता है कि कितने नक्सली मरे और कितनें ग्रामीण मरे । मृतकों की जांच पडताल करने ये  किरंदुल के घने जंगलों में जाकर पडताल करके बता सकते हैं कि फलां आदमी तो ग्रामीण था पुलिस नें उसे नक्सली बता कर मार डाला । अब इन्हे कौन समझाकर अपनी माथा फोडी करे इसलिये पुलिस अधिकारी कहते हैं कि देखो जवानो भले गोली खाकर मर जाना हम तुम्हे शहीद का दर्जा दे देंगे लेकिन किसी बिना वर्दी वाले नक्सली को मारे तो जीते जी हम मर जाएंगे । 
                      मतलब समझे आप ... चाहे कुछ भी हो .. नेता अधिकारी सब मिल कर पुलिस को शहीद करना चाहते हैं लेकिन एक बात जो सच है वो ये कि हमारे राज्य की पुलिस सबसे ज्यादा कर्तव्य परायण है वह बेधडक गोली खा लेती हैं मगर उफ्फ तक नही करती ।
                      
                               हमारे राज्य की पुलिसिया शहादत अमर रहे ।