Wednesday, February 9, 2011

चोरी कैसे बची ?

लो जी मैं फिर से घुमफिर कर आ गया अपने गुरूदेव के पास । लेकिन इस बार मैं नही दुसरा कोई बता रहा है अपनी बात जरा उनकी जुबानी भी तो कुछ सुनें (श्री श्याम बंसल द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर मेरे द्वारा कथानक पेश किया गया है )-

     हरिओम्, मेरा नाम श्याम बंसल है और मैं गुना (मध्यप्रदेश)  की मण्डी (अनाज मण्डी) में अभिलाषा साडी सेंटर के नाम से अपने पिता श्री बाबूलाल बंसल जी का दिया साडीयों का व्यवससाय चलाता हूँ । मेरा व्यवसाय ईश्वर कृपा से अच्छा चल रहा है 3 साल पूर्व मुझे  जब मन की शांति नही मिल रही थी  उस समय  मैं कई आश्रमों से   जुडा था किंतु वहां भी केवल धन ही गया मन की अशांति नही तब मुझे अपने एक रिश्तेदार दिल्ली जाने का मौका मिला और वहां जाकर मैने गुरूदेव कृष्णायन जी महाराज से दीक्षा ग्रहण कर ली  ।  17 जनवरी को मेरी पत्नि ज्योति नें बताईं कि उसकी एक बहन मीरा अग्रवाल जो तिल्दा, छत्तीसगढ में रहती है   वहां से गुरूदेव के आचार्य श्री संतोष शर्मा जी 31 जनवरी को 2 लोगों को गुप्त विज्ञान की कक्षा दोने के लिये गुना आ रहे हैं ।
                                                इसके बाद 31 जनवरी को मुझे सूचना मिली कि गुरूदेव के आचार्य श्री संतोष शर्मा जी गुना पहुंच चुके हैं तो फिर क्या था उनके साथ मिटिंग हुई और फिर मैने अपने परिवार के लोगों के साथ 1 फरवरी को दिव्य गुप्त विज्ञान की शिक्षा ले ली जिसमें मुझे ऊर्जा के सिद्धांत के साथ साथ दिव्यास्त्रों का प्रयोग करने की विधी बताई गई  ।  .... । कहते हैं समय के फेर को कोई नही जानता ठीक ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ ।  मैने 1 फरवरी को कक्षा ली और 4-5 फरवरी की रात को मेरे दुकान पर चोरों का धावा पड गया ।
                                                 चोरों ने दुकान का लॉकर तोडकर उसमें रखे 100-100 ग्राम चांदी के 2 सिक्के और ढाई हजार रूपये नगदी को अपनी जेब में रख लिये और 3 लाख के एन.एस.सी. सर्टिफिकेट को निकाल लिये । इसके बाद दुकान में रखी केवल किमती वैवाहिक साडियों को उन्होने एक साथ गत्ते के बडे बाक्स  में रख लिये (जिनका मूल्य तकरीबन ढाई लाख के  आसपास का बनता है) उसी बाक्स में उन्होने एन.एस.सी. के पेपर भी रख दिये और बाहर निकल गये ।
                                            चूंकि मेरी दुकान मण्डी में है इसलिये दिनभर तो चहल पहल रहती है लेकिन रात होते ही पूरी मण्डी में सन्नाटा पसर जाता है । चोरों नें ताला तोडा और सारा माल समेट कर जब बाहर की ओर भागने लगे तभी मेरी दुकान से कुछ दुरी पर रहने वाले सरदार जी की नजर मेरी दुकान के खुले शटर पर पडी तो वे मेरी दुकान की ओर बढने लगे इतने में उनकी नजर चोरों पर पडी तो वे चोर चोर का हल्ला करने लगे जिस पर चोरों नें बक्सा को वहीं छोडकर भाग निकले । इसके बाद सरदार जी नें फोन पर मुझे सूचित कर घटना की जानकारी दीये तो मैं औऱ मेरे सभी भाई दुकान पर पहुंचने लगे  । दुकान की हालत देखते ही मैं सन्नाटे में आ गया क्योंकि सारा किमती माल दुकान से गायब था और लाकर टुटा हुआ था इतनें में मेरे एक भाई की नजर सडक के किनारे पडे बाक्स पर गई तो हम लोगों नें बक्सा खोलकर देखा तो हैरान रह गये दुकान का सारा माल मुझे मिल गया था (2 सिक्के और नगद को छोडकर) ।
                                           सामान मिलने के बाद अचानक मुझे गुरूदेव का ध्यान आय़ा तो ऐसा लगने लगा मानो सारी घटना मेरे सामने ही हुई है और चोरी की  आधी रात को अचानक सरदार जी का बाहर निकलना और चोरों के द्वारा चोरी करने के बाद भी माल का ना ले जाया पाना केवल गुरूदेव के उन दिव्यात्रों से ही संभव हो सका था जिनके द्वारा मैने अपनी दुकान को सील किया हुआ था । ..................  सचमुच ... कोई इस घटना को  किसी भी नाम से संबोधित करे .... मेरे लिये तो यह केवल गुरूकृपा से ही संभव लग रहा है ।

                श्याम बंसल
                अभिलाषा साडी सेंटर
                अनाज मण्डी, गुना (मध्यप्रदेश)
                 मोबा.- 09425797374