Wednesday, May 4, 2011

अब बस भी करो दिग्गी राजा ।

दिग्विजय बोले, 'ओसामा जी कई वर्षों से पाक में रह रहे थे। पाक आर्मी ने क्‍यों नहीं कुछ किया? अमेरिका ने मारने के बाद समुद्र में फेंक कर अच्छा नहीं किया। अपने देश में भी मुंबई हमलों में मारे गए लोगों को उनके धर्म के अनुसार दफन किया गया।'
                         इनके पवित्र विचार दर्शा रहे हैं कि क्यों अब तक कसाब जिंदा है क्यों अफजल गुरू सरीखे आतंकवादी इस इंतजार में है कि कब कोई संगठन कुछ लोगों को बंधक बनाने के बाद उनकी रिहाई की मांग करे और उसके बाद भारत के ये दिग्गी जैसे नेता उन्हे पाकिस्तान तक छोडने के बाद कहें कि हम पर हुये हमले के आरोपी पाकिस्तान हमें सौंप दे ।
                                    अमेरिका अगर यह नही बताता कि हमने पाकिस्तान पर हमला करके लादेन को मार दिया और उसकी लाश को समुद्र में दफना दिया है तो क्या तब भी ये यह बयान दे पाते । दरअसल इस समय दिग्विजय को या तो देशद्रोही या फिर पागल करार करके मार देना चाहिये ताकि भारतीय मुसलमानों में ओसामा को हिरो बनाने की इनकी कोशिश नाकाम हो जाये । हमारे देश के मुसलमान कट्टर हिंदुस्तानी हैं । मैं पहले ये बात नही समझता था किंतु मुंबई पर हुए हमले के बाद यकिनन कह सकता हूँ कि शत प्रतिशत भारतीय मुस्लिम केवल हिंदुस्तान के हित में सोचते हैं जबकि बांग्लादेशी और कुछ पाकिस्तानी मुसलमान ही हमारे देश की हवा खराब करते हैं । यहां दिग्विजय नें जो बयान दिया है उससे साफ जाहिर होता है कि ये भारत विरोधीयों का अब खुलकर साथ देते हुए अपने को यासिन मलिक सरीखे लोगों में सम्मिलीत देखना चाहते हैं ।
                                      तो चलो क्यों ना हम दिग्विजय को अलकायदा प्रमुख बनाने के लिये आवेदन भेजवा दें ..... आखिर लादेन की जगह खाली जो हो गई है और उसने तो अपनी औलादों को अल-कायदा से दूर रहने की हिदायत दे दी है ..... दिग्विजय जैसे मौका परस्तों के लिये ही तो अल-कायदा की गद्दी खाली है ।

Wednesday, April 20, 2011

बुरे फंसे अन्ना हजारे

आज अमर सिंह की पत्रकार वार्ता में शिकार भले ही शशि भूषण व प्रशांत भूषण हों  मगर निशाने पर अन्ना हजारे दिख रहे थे ।  अन्ना हजारे नें अपने अनशन के समय शशि भूषण को ईमानदार बताते हुए जन लोकपाल कमेटी में उन्हे उपप्रमुख की नियुक्ति दिलवाए थे ।
                     कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने शांति भूषण और उनके बेटे को नोएडा के पास जमीन दिए जाने पर सवाल उठाते हुए उनसे खुद ही लोकपाल बिल की ड्राफ्ट कमेटी से अलग हो जाने की मांग की है. नया विवाद इन खबरों के सामने आने के बाद उठा जिसके मुताबिक शांति भूषण को उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 हजार स्क्वेयर मीटर जमीन आवंटित की जिनमें से हर एक की कीमत साढ़े तीन करोड़ है.   ताजा मामले के अनुसार - शांति भूषण के बेटे जयंत भूषण उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ नोएडा पार्क में मूर्तियां लगाए जाने के खिलाफ कोर्ट गए थे. उनका कहना है कि इसमें विवाद की वजह नहीं थी. नए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शांति भूषण ने कहा है, कुछ  "भ्रष्ट और महत्वपूर्ण"  राजनेता उन पर लगाए गए आरोपों के पीछे हैं क्योंकि कमेटी में उनके (शांति भूषण)  रहते "नरम" लोकपाल बिल तैयार करना मुमकिन नहीं होगा.
                              यहां एक दिलचस्प पहलू देखिये -  अन्ना हजारे नें सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखे कि 'पिछले दो दिनों में जिस तरह से सिविल सोसायटी के लोगों के खिलाफ खुलकर दुष्प्रचार किया जा रहा है, वह चिंता का विषय है।' उन्होंने कहा है कि ऐसा लग रहा है जैसे लोकपाल बिल की ड्राफ्टिंग प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए सारे भ्रष्ट लोग एकजुट हो गए हैं। दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना अन्ना ने कहा,'कांग्रेस के एक महासचिव बयानबाजी कर रहे हैं और मुझे लगता है कि इस तरह की बयानबाजी के लिए उन्हें पार्टी का सपोर्ट मिल रहा है। ज्यादातर बातें जो कही जा रही हैं वे गलत हैं। क्या आप (सोनिया) इन बयानों से सहमत हैं?'
                         अन्ना की च्ट्ठी के जवाब में सोनिया गांधी की ओर से पत्र आया ( सोनिया जी को लिखने की जरूरत नही पडती ) जिसमें कहा कि उन्होंने कभी भी कीचड़ उछालने और बदनाम करने की राजनीति पर यकीन नहीं किया और न ही वे ऐसे किसी भी प्रयास का समर्थन करती हैं। हजारे ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर कहा था कि कुछ कांग्रेस के नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गए आंदोलन की धार कुंद करने के लिए सुनियोजित तरीके से मुहिम चला रहे हैं , सोनिया ने कहा कि उन्हें (अन्ना हजारे को) उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर नीयत पर शंका नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और घूसखोरी से लड़ने की सख्त आवश्यकता है। वह मजबूत लोकपाल के पक्ष में हैं, जो संसदीय प्रणाली के नियमों के अंतर्गत कार्य करे।
                                                       मजे की बात ये है कि सुर दिग्गी राजा के भी बदल गये लेकिन इन शातिराना चालों के बीच अमर सिंह प्रकट हुए और दिग्गी राजा की कही बातों को पत्रकार वार्ता में देश के सामने रख दिये । शब्द दिग्गी राजा के थे और मुंह अमर सिंह का था । अब अन्ना हजारे के साथ साथ सारा देश सन्न है कि उन्हे क्या जवाब दिया जाए क्योंकि कानून बनाने वाले लोग जानते हैं कि किसी भी बात को चाहे वो झूठी ही क्यों ना हो साबित करने में सालों लग जाते हैं ।
                                                         इस शातिराना चाल में नुकसाल केवल दो लोगों का होगा एक अन्ना हजारे का और दुसरा .... मेरे देश का । इसलिये अब हमें ये सोचना है कि अमर सिंह की कांग्रेसी जुबान को कैसे खारिज करवाया जाए ।





Sunday, April 17, 2011

नौटंकी बेद करो दिग्गी राजा ।

दिग्गी राजा उर्फ दिग्विजय सिंग बडे अफसोस के साथ आपके नाम के साथ का सम्मनसूचक शब्द जी को हटाना पड रहा है । जरा सोचकर देखो कि आप किस पद पर बैठ कर क्या क्या कह रहे हो । लगता है कांग्रेस महासचिव का पद देकर गांधी परिवार ने आपको खरीद लिया है । अपने पदमोह से बाहर निकलो दिग्गी राजा और अपनी तमाम नौटंकी बाजी बंद करते हुए जनता को साफ साफ बतलाओ कि तुम्हारी सरकार काला धन वापस लाने के लिये क्या कर रही है । वैसे भी जनता अंधी नही है और दिल्ली की सुगबुगाहट सारे देश में धीरे धीरे फैल रही है कि हमारे देश में शेयर बाजार और वायदा कारोबार के जरिये  बाहर के काले धन को धीरे धीरे निवेश किया जा रहा है और मुनाफे के रूप में उसे देश में ही सफेद किया जा रहा है ।
                                           रामदेव बाबा से पूछो कि दस साल में उनके पास इतना पैसा कैसे आया पर पहले आप बताएं कि सारे नेता करोडपति से अरबपति कैसे बन रहे हैं । आप ही बता दो कि आपको सोनिया राहुल की गुलामी में ही अपनी राजनीती क्यो सुरक्षित लगती है । जो आप कह रहे हैं मैं भी उन्ही बातों का जवाब ले रहा हूँ । हमारे देश के अधिकतर रक्षा  सौदे इटली से ही क्यों हो रहे हैं जबकि इटली कोई प्रख्यात हथियार उत्पादक देश नही है । अब बातों को लंबा ना करके केवल एक बात पुछुंगा कि आप ही बताएं कि काला धन कब आएगा ।

Friday, April 15, 2011

क्रूर प्रशासन की वेदी 4 लोगों की बलि ।

एक परिवार में माँ सहित तीन बहनों नें केवल इस लिये अपनी जिंदगी खत्म कर ली ताकि उनके परिवार का इकलौता बेटा अपने जीवन का शेष भाग सुखपूर्वक बिता सके । यह दर्दनाक घटना कोई अचानक ही नही घट गई बल्कि इस पूरे परिवार नें अपने को लगातार चार दिनों तक खुद को कैद  करते हुए, मीडिया के समक्ष अपनी पूरी बातें रखते हुए और सब कुछ होने के बाद भी अपनी मांगो को पूरा ना होते देखने के बाद जहर खाकर अपनी ईहलीला समाप्त कर ली । ( संलग्न विडियों में महिला विप्र समाज की ममता शुक्ला पूरे केस पर प्रकाश डालते हुए )
                                                  सेक्टर-4, सडक 34 , भिलाई में हुए इस ह्दयविदारक घटना में तीन अमानवीय पहलू उभर कर सामने आए हैं
1) भिलाई स्टील प्लांट का अमानवीय प्रबंधन 2) पुलिस प्रशासन की अदूरदर्शीता 3) राज्य शासन की घोर लापरवाही ।
1. भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारीयों ने 17 साल से काबिज पूर्व बीएसपी कर्मी  स्व. एमएल शाह जो बीएसपी के औद्योगिक संबंध विभाग में उप प्रबंधक थे कि तीन दिसंबर 1994 को रहस्यमय ढंग से रेल पटरी पर मृत मिले थे । शाह नें अपनी डायरी में उन लोगों के नाम लिखे हुए थे जिनसे उन्हे अपनी जान को खतरा था । उनकी मौत के बाद तात्कालिन नियमों के अनुसार मृतक के पुत्र सुनील कुमार को अनुकंपा नियुक्ति मिल जानी थी लेकिन बीएसपी के अधिकारी उसे नौकरी ना देकर केवल आश्वासन देते रहे । इसके बाद 1995 के नियमो का हवाला देते हुए बताया गया कि  अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान हटा दिया गया है जबकि सुनील के पिता की मौत 1994 में हुई थी और उस समय के नियमों के आधार पर सुनील की अनुकंपा नियुक्ति का आधार बनता था ।
                                    जब सुनील नें अपने परिवार को चलाने के लिये नौकरी के एवज में पचास लाख रूपयों की मांग की, जो की वर्तमान रेटिंग के आधार पर सही है  तो तत्काल बीएसपी प्रबंधन नें सुनील का परिवार बैकफुट पर जैसी खबरों का प्रचार करवा दिया ।
                     एक ओऱ बीएसपी प्रबंधन अपने ही मृत कर्मी के परिवार के लिये उसके अधिकार को  देने में असमर्थ बता रहा था तो वहीं दुसरी ओर लाखों रूपये खर्च करके हेमा मालिनी के बैले डांस का आयोजन सेक्टर-1 में किया जा रहा था जिसे मंगलवार को सुनील के परिवार द्वारा आत्महत्या कर लेने के बाद रद्द करा दिया गया  । अब बीएसपी प्रशासन अपने को बचाने के लिये सुनील को फंसाने का कुत्सिक षणयंत्र रच रहा है । उस पर अपने परिवार को आत्महत्या करने के लिये उकसाने सहित कई मामले बनाने की तैय्यारी चल रही है ।
2). - इस मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही की गई । परिवार को केवल आश्वासन ही दिया जाता रहा । एस.पी. अमित कुमार द्वारा हमेशा यही कहा जाता रहा कि हम मामले को देख रहे हैं जबकि ऊपर सुनील का बयान सुनें । इसके अलावा सोमवार की रात को जब मैं सुनील के घर गया तो सुनील की माँ बताते बताते रो पडी की पुलिस वाले आकर कहते हैं कि मरने वाले लोग सीधे मर जाते हैं तुम लोगों के जैसे नौटंकी नही करते .. इसका क्या मतलब है । सुनील अभी जिंदा है और अस्पताल में है पुलिस उसका बयान लेने को आतुरता दिखा रही है लेकिन उन अपराधियों को नही पकड रही जिनके नाम सुनील के पिता ने अपनी डायरी में लिखे थे । अभी तक पुलिस नें बीएसपी प्रशासन के खिलाफ कोई अपराध दर्ज नही किया है जबकि बीएसपी प्रशासन पर मामला बनता है लेकिन इस मामले का सबसे दुःखद पहलू ये है कि पूरा पुलिस विभाग बीएपी की शरण में ही पडा हुआ है और जैसा बीएसपी अधिकारी चाह रहे हैं एस.पी. महोदय वैसा करवा रहे हैं । अभी तक सुनील को सेक्टर-9 हास्पिटल में रखा गया है जो कि भिलाई इस्पात संयंत्र का अश्पताल है और यहां के डॉक्टरों को तनख्वाह बीएसपी से मिलती है सो जाहिर है कि जैसा प्रबंधन चाहेगा वैसा ही वहां के डॉक्टर अपनी रिपोर्ट देंगे । जबकि एसपी अमित कुमार को चाहिये था कि सुनील को तत्काल सेक्टर9 हास्पिटल से निकाल कर दुर्ग के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिये रखा जाता ताकि इलाज व रिपोर्ट निष्पक्ष बन पाती । हो सकता है कि सुनील नें सल्फास की कुछ गोलियां निगल भी ली हों लेकिन असप्ताल इस बारे में मौन साध ले तो एक हफ्ते बाद कौन सा डॉक्टर से बता पाएगा कि सुनील नें जहर खाया था या नही । जिन जिम्मेदारियों के लिये सुनील 17 साल से लड रहा था अब वे जिम्मेदारी सुनील पर नही रही तो क्या ऐसा नही हो सकता कि सुनील अब अपराध की राह  अपना ले।
3.- इस मामले में राज्यशासन नें भी अपनी लापरवाही दिखलाने में कोई कसर बाकि नही छोडी । भिलाई इस्पात संयंत्र को केन्द्र की जवाबदारी बताते बताते मुख्यमंत्री ये भूल गये कि यह संयंत्र छत्तीसगढ राज्य का गौरव कहा जाता है । सुनील का परिवार पाँच दिनों तक अपने को कैद करके रखे रहा और राज्य के किसी भी मंत्री तो छोडिये कलेक्टर तक नही पहुंचे । सुनील की मौत नही हुई लेकिन अपनी आँको के सामने पूरे परिवार को मृत देखकर उसकी क्या हालत हो रही होगी इससे राज्यशासन को कोई दरकार नही है । मुख्यमंत्री अपने राज्य के एक इस्पात संयंक्ष को संभाल नही पा रहे हैं जबकि यहां खुलेआम दुसरे राज्यों के लोगों को पैसे लेकर के नौकरी लगाई जा रही है । चाहे वह बीएसपी हो या फिर जे.पी. सीमेंट दोनो जगहों का यही हाल है । स्थानीय लोगों की उपेक्षा की  जा रही है औऱ आसपास के लोगों को सारा प्रदूषण झेलना पड रहा है । यहां पर एक जवाबदारी से मुख्यमंत्री अपना पल्ला झाड सकते हैं बाकि मामले में क्या कहेंगे उनसे पुछने वाला कोई नही है । धन्य है रमन सरकार ।

Tuesday, April 12, 2011

भिलाई में पूरे परिवार नें जहर खाया... चार की मौत

भिलाई 12 अप्रेल । स्टील प्लांट में अनुकंपा नौकरी नहीं मिलने से तंग आकर युवक समेत पूरे परिवार ने जहर खा लिया है । उन्हें गंभीर हालत में बीएसपी के सेक्टर-9 हास्पिटल में भर्ती कराया गया जहां युवक की  माँ और तीन बहनों की मौत हो गई है ।

                     सडक 34,  सेक्टर 4 निवासी सुनील कुमार ने पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए बीएसपी में आवेदन दिया था। लेकिन 17 साल बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली। उसने बीएसपी प्रबंधन को कई चिट्ठी लिखी, पर कोई फायदा नहीं हुआ। चार दिन पहले उसने बीएसपी प्रबंधन द्वारा उसके घर की लाइट काटने तथा जबरन घर से बाहर निकालने के प्रयास के विरोध में स्वयं को परिवार सहित कैद कर लिया था । चार दिनों तक पूरा परिवार  कमरे से बाहर नहीं निकला था। बीएसपी प्रबंधन ने उसे मनाने की कोशिश की। ठोस पहल नहीं होने पर युवक ने अपने परिवार के चार सदस्यों समेत जहर खा लिया। पड़ोसियों ने उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया। चारों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है ।
                                   अचानक हुए इस घटनाक्रम से प्रशासन भी सकते में आ गया औऱ आनन फानन मामले को दबाने के प्रयास होने लगे किंतु मिडिया द्वारा निष्पक्ष भाव से कार्य करने के कारण उन्हे अपना कुप्रयास बंद करना पडा । माँ मोहिनी साहू व तीनों बहनों रेखा शोभा औऱ शीला की मौत के बाद सुनील गुप्ता सदमें की हालत में है  और उसकी हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है ।
बस वादा करना भर जानती है हमारी सांसद ः- भाजपा सांसद सरोज पाण्डेय नें कल सुनील साहू से फोन पर चर्चा करके कहीं थी की मैं शाम तक पहुंच कर सबकुछ ठिक कर दूंगी और आपको इंसाफ मिलकर रहेगा  लेकिन शाम को स्वयं ना आकर अपनी  प्रतिनिधी सीता मिश्रा को उनके पास बात करने के लिये भेज दी जिससे पूरा परिवार बेहद आक्रोशित हो गया था और उसके बाद उन लोगों ने मंगलवार को बाहर आने की बात कहते हुए सभी से बातचीत बंद कर दिये ।
                           इस मामले में मैं स्वयं कल रात को सुनील से मिलने पहुंचा था । रात तकरीबन 9 बजे मैने उससे चर्चा की की आपको ऐसा करने से क्या मिलेगा तो सुनील की माँ रोते हुए कहने लगी की इस तरह से हमें जीकर क्या मिलेगा हालांकी थोडी देर बाद सुनील नें संयमित होते हुए मुझसे कहा कि डब्बू भाई कल सुबह आप जरूर आइयेगा ... लेकिन मेरा दुर्भाग्य की अचानक परिजन की तबियत ज्यादा खराब होने के कारण सुबह 7 बजे मैं रायपुर चला गया और अभी लौटते ही पूरे घटनाक्रम को लिख रहा हूँ ।
बी.एस.पी. का अडियल रूख - आज चार मौतों से घबराए बीएसपी के एम. डी.  वी. के. नें घटनाक्रम के प्रति दुःख जाहिर करते हुए कहा कि प्रबंधन सुनील को नौकरी देने को तैय्यार था लेकिन कल रात की चर्चा में सुनील नें मुझे साफ बताया था कि बी.एस.पी. के अधिकारी तो उल्टा उन्हे  आग लगा लेने की बात करते हैं और पुलिस भी परेशान कर रही है । 
इस मामले में वैशाली नगर विधानसभा के विधायक भजन सिंह निरंकारी महापौर निर्मला यादव नें रविवार को सुनील से मिलने के बहाने अपनी राजनीतीक रोटी सेंकने पहुंचे थे क्योंकि भजन सिंह का वह निर्वाचन क्षेत्र नही है वो केवल ये जताने पहुंचे थे कि उनके बगैर महापौर कुछ नही करती ।
राज्य शासन भी दोषी - क्या इस मामले में मुख्यमंत्री का कोई फर्ज नही बनता था ? राज्य शासन से केवल एक पुलिस मित्र ममता शुक्ला पहुंची थी वह भी कोर्ट कचहरी की भाषा में परिवार को समझाइश देकर चली गईं । आज इस दुःखद घटना के बाद सारे भिलाई शहर में मातम सा छा गया था जबकि अधिकारीयों के चेहरे की हवाइयां किसी बडे उपद्रव का संकेत का आभास दे रही थी ।
सेक्टर 9 हास्पीटल में आज जनता का रोष खुलकर सामने आ गया और पुलिस को भीड संभालने में खासी मशक्कत करनी पडी ।
                                         खैर .......       अब जनता की बारी है देखें वह इस मामले को क्या तुल देती है ।




Thursday, April 7, 2011

देश में बजा क्रांति का बिगुल

काम नही आई सचिन पर खेली गई रणनीती ।

जी हां मैं बिलकुल सही हूँ । जब तक विश्वकप चला रहा था सोनिया राहुल प्रधानमंत्री हर कोई अपने को क्रिकेट प्रेमी दर्शा रहा था । क्रिकेट की आड में सरकार बचती चली गई क्योंकि जनता का ध्यान विश्व कप पर था । विश्व कप खत्म होते ही इनकी योजना थी सचिन तेंदुलकर को  भारत रत्न देने के लिये  बवाल मचाया जाए और जनता सचिन को भारत रत्न दिया जाये या ना दिया जाए इस बहस में लग जाए तब तक आई.पी.एल. मैच चालू हो जाएंगे और इस तरह से फिर सरकार को एक दो माह तक राहत मिल जाएगी और तब तक तो जनता बहुत हद तक महंगाई और भ्रष्टाचार का मामला भूल जाएगी और अन्ना हजारे का पूर्व नियोजित अनशन फ्लॉप हो जाएगा । लेकिन इस जगह पर हजारे जीत गए । सरकार की योजना ध्वस्त हो गई और सारा देश एक नई क्रांति की याद दिलाता हुआ सडकों पर उतर आया । अब सरकार की जान सांसत में अटक गई है । वह इंदिरा की तरह इमरजेंसी नही लगा सकती क्योंकि अन्ना हजारे की मांग लोकपाल विधेयक बहुत ही मामूली सी मांग है लेकिन इसका प्रभाव बहुत ही व्यापक है ।
                                            अन्ना के समर्थकों ने उमा भारती को वापस भगा कर एक नई दिशा बतलाई की अब उसे किसी भी नेता का साथ नही चाहिये औऱ अब वह एक आम आदमी के साथ इस नई लडाई को लडेगी । कांग्रेस की सांस अटक गई है क्योंकि वह जानती है कि इस मामले मे सेना भी जनता के साथ है और पुलिस प्रशासन इन नेताओं से त्रस्त हो चुका है । सभी जगह इस आंदोलन को जिस तरह का व्यापक समर्थन मिल रहा है उससे यह अंदाजा लग चुका है कि अब जनता बरगलाने वाली नही है । इसका एक नमूना तब देखने को मिला जब हजारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल नें कपील सिब्ल को नोटिफिकेशन को लेकर करारा सवाल दागा । अरविंद केजरीवाल  के इस कथन पर कि प्रधानमंत्री के प्रेस को बयान देने से कुछ नही होगा हमें कानूनी तौर से नोटिफिकेशन चाहिये  से सारा देश उसका मुरीद हो गया और एक झटके मे केजरीवाल सचिन से बडे ओहदे पर दिखने लगे । जनता के सामने पहली बार ये सच्चाई आई की अभी तक प्रधानमंत्री के बयानों पर कोई कार्यवाही इसलिये नही होती थी क्योंकि वह केवल जबानी होती थी कानूनन कुछ नही होता था ।
                                        आज स्व. राजीव दीक्षित जी की बहुत याद आ रही है । उन्होने जिस आजादी बचाओ आंदोलन की राह जनता को दिखलाई थी वह आज साकार हो रही है । सचमुच हमें इसी तरह की आजादी चाहिये जिससे हम देश के घुनों को मार सकें ।
                    मैं आज सच्चे मन से राजीव दीक्षित जी के चरणों में श्रद्धा के फूल करते हुए ये सौगंध उठाता हूँ कि जब भी आवश्यकता होगी अपने खून का एक एक कतरा देश की क्रांति को समर्पित कर दूंगा ।

Wednesday, April 6, 2011

बिजली के खेल से किसानों की तबाही ।

पावर हब प्रदेश में पावर का खेल, बलौदा बाजार में ब्लड कैंसर के मामले बढे ।  

जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ, सरगुजा, अंबिकापुर जैसे वनाच्छादित जगहों पर सरकार नें पावर प्लांट लगाने की अनुमति क्या दी वहां के निवासियों का जीना मुहाल हो गया है । कोरबा में लैंको अमरकंटक पावर प्लांट के एक उदाहरण से आप सभी जगहों की स्थिति का आंकलन कर सकते हैं । मैं कल रात को इ क्षेत्रों का चार दिवसीय दौरा निपटा कर आया हूँ । इस प्लांट को शुरूआत में 300-300 मेगावाट के दो प्लांट लगाने से हुई थी लेकिन अगले 5 साल में इसने अपनी क्षमता 1960 मेगावाट कर ली है । इस कंपनी के कारनामें देखें - इसे पानी देने के लिये हसदेव नदी  पर एनीकेट बनाने का प्रस्ताव पास हुआ और कार्य मिला शांति इंजीकॉन को जिसके प्रबंधक स्थानीय विधायक के पुत्र हैं ।  एनिकेट बनाने के लिये शांति इंजीकॉम द्वारा कुदुरमाल गांव में पत्थरों के लिये जमकर ब्लास्टिंग की गई जिससे वहां के निवासियों के 150 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो गये । इसी जगह पर सतगुरू कबीर की मजार स्थित है जो इस विस्फोट से क्षतिग्रस्त हो गई है ।   ... एक ओर सरकार कबीर साहब के लिये बडे बडे आयोजन करती है वहीं मजार के क्षतिग्रस्त होने पर नजरअंदाजी की दोगली नीती से स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हुई है । दिसंबर से जनवरी तक अमीत जोगी द्वारा लगातार आंदोलन चलाया गया जिसमें 15 दिनों का आमरण अनशन भी हुआ तब कहीं जाकर कलेक्टर द्वारा शांति इंजीकॉम को ब्लासटिंग रोकने का आदेश जारी किया गया ।

                                           ये बात थी एक एनीकेट की          अब जरा लैंको अमरकंटक की कारगुजारी पर नजर डालें- यह कंपनी स्थानीय लोगों को रोजगार, पर्यावरण की कई योजनाओं, स्कूल, अस्पताल के साथ साथ किसानों को अधिकतम मुआवजा तथा परिवार के एक व्यक्ति को रोजगार देने जैसी लोकलुभावन बातों के साथ अपना काम शुरू किया । आज हालात ये हैं कि परिवार तो छोडिये स्थानीय लोगों को भी कंपनी रोजगार नही दे रही है । नदी से होकर खेतों को तीन मीटर गहरा खोदते हुए जो पाइप लाइन बिछाई गई उन खेतों के किसानों को जो मुआवजा मिला उससे तो वे खेत की मिट्टी भी बाहर नही फेंकवा पाए । कंपनी का कहना था कि हम तो केवल गढ्ढा खोद रहे हैं जमीन अधिग्रहित नही कर रहे हैं सो क्यों मुआवजा दें । आसपास के पूरे पेडों को काट दिया गया ताकि वाहन निर्बाध रूप से आना जाना कर सकें । वृक्षारोपण की कोई श्रंखला तैय्यार नही की गई जबकि केंद्रिय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार एक पेड के बदले न्यूनतम चार पेड लगाने का नियम है ।
                                           लगभग यह हाल सभी पावर प्लांटो का है । समस्या यहीं पर खत्म ना होकर तब शुरू होती है जब पानी की किल्लतें होना चालू हो जाती है । साफ पानी ना होने के कारण (जमीन में ब्लास्टिंग होगी तो क्या अमृत मिलेगा ) पीलीया और हैजा जैसी बीमारी तो आम है अब हाथी पांव भी इन बीमारीयों की दौड में शामिल हो गया है । सबसे चिंताजनक स्थिति बलौदाबाजार की है जहां लगातार बढते उद्योग , गिरते जलस्तर, घटते वन और बढते प्रदुषण के कारण ब्लड कैंसर की बीमारी तेजी से फैल रही है । इस छोटी सी जगह से 3 माह में 4 से 5 केस ब्लड कैंसर के आए हैं जिनमें से एक पत्रकार भी है जो पैसे ना होने के कारण मुंबई से वापस आ गया है
                                                    जन जागरण का एक अनूठा नजारा चांपा मे देखने को मिला । यहां के युवा अलग अलग दलों से संबंध रखते हैं किंतु पर्यावरण के मसले पर एक जुट होकर आंदोलन करते हैं । यहां पर कांग्रेस, भाजपा, एन.एस.यू.आई. और विद्यार्थी परिषद के सभी सदस्यों नें अपना एक अलग सर्वदलीय मंच बना रखें है और जब कभी स्थानीय मसले पर आंदोलन करता होता है तो सभी सदस्य इस एक मंच से अपना आंदोलन चलाते हैं । इसके क सदस्य आशईष चौधरी भी है जो बताते हैं कि किसी तरह से स्थानीय लोग राजनीती से दूर होकर अब अपने हित के लिये लड रहे हैं । ये लोग जनजागरण करते हैं और लोगों को हिदायत देते हैं कि किसी भी तरह के प्रदुषण होने की दशा में तत्काल सबको चेतावनी दें औऱ मजबूती से उसका विरोध करें ।
                                                  लेकिन इस दौरे पर  एक दुःखद पहलू ये भी दिखा कि प्रशासन और कंपनी के साथ साथ स्थानीय प्रिंट मिडिया भी आमजनों के हितों की अनदेखी कर रहा है ।

Thursday, March 31, 2011

गिरी बिजली, जोगी अब तेरा सहारा

शाबाश रमन सिंह जी । बहुत ही शातिराना चाल चल रहे हो आम जनता के साथ । पहले विपक्ष को अपने साथ मिला लिये फिर विपक्ष को आदिवासियों की ओर भिडा दिये और विद्युत नियामक बोर्ड की आड में बिजली दरों में 22 फीसदी तक की बढोत्तरी कर डाले । क्योंकि अब आपसे कोई कुछ पुछ तो सकेगा न ही क्योंकि आप तो बता दोगे कि भाई मैं तो चाँवल वाला बाबा हूँ भला बिजली से मेरा क्या लेना देना । सारा प्रदेश जानता था कि बिजली के दाम बढेंगे फिर भी सबने बढने का इंतजार किया किसी ने यह नही पुछा कि जब प्रदेश में सरप्लस बिजली उत्पादन हो रहा है तो राज्य के निवासियों को धूल गर्दा खिलाने के बाद अब बढी बिजली का पैसा क्यों वसूला जा रहा है । 24 घंटे लाइट रहना कोई उपलब्धी नही कही जा सकती क्योंकि ये काम जोगी शासन में हो चुका था रहा सवाल बिजली के दामों में बढोत्तरी का तो इसका कारण एक ही समझ पडता है कि प्रदेश के नेताओं को हराम के खाने की इतनी बुरी आदत पड गई है कि अभ वो हर जगह से पैसा खाना चाहते हैं । जोगी जी जिन्होने वास्तव में प्रदेश में एक बेहतरीन शासन कायम किये थे और बनियों को दूर करके आदिवासीयों और प्रदेश की जनता को मुनाफा दिलाते रहे थे उनके खिलाफ माहौल बना कर अब खुद बनियागिरी कर रहे हैं ।
                                             इस समय यदि कोई सही व्यक्ति हो सकता है जिसके बैनर के नीचे प्रदेश की जनता रमन सरकार को कटघरे में खडे कर सकती है तो वह निश्चित रूप से अजीत जोगी हो सकते हैं । मेरे इस कथन से कोई मुझे कांग्रेस समर्थक ना समझे इसलिये साफ कर देना चाहूँगा कि मैं एक पत्रकार होने की दृष्टि से केवल व्यक्ति का चुनाव करता हूँ जिससे आम जनता का हीत सध सके । मेरे कहने का अर्थ आप ये समझें कि प्रधेश में जो मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार चल रहा है उससे निपटने के लिये विपक्ष होता है लेकिन इश समय प्रदेश का विपक्ष सरकारी बोली मे चल रहा है इसलिये वर्थमान में प्रदेश के लोगों को एक ऐसे व्यक्ति का साथ चाहिये जिसके साथ मिलकर हम अपनी आवाज बुलंद कर सकें । यदि मैं और आप अकेले खडे होकर जनता के सामने चिल्लाएंगे तो स्वार्थी कहलाएँगे जबकि एक पदस्थ  व्यक्ति के कहने पर कार्यवाही होती है ।
              मुझे पूरा यकिन है कि जोगी जी इसे जरूर पढेंगे इसलिये मेरा उनसे निवेदन है कि आदरणीय जोगीजी छत्तीसगढ प्रदेश की भोली जनता को वह मार्ग बताएं जिसके द्वारा प्रदेश सरकार की मनमानी और बनियागिरी को बंद कराया जा सके । हर जगह भ्रष्टाचार अपना पैर पसार रहा है छोटे छोटे कामों के लिये रिश्वत मांगी जा रही है , कानून व्यवस्था बिगड रही है यहां तक की पुलिस विभाग भी असंतुष्ट है (निधी तिवारी की मौत पर कोई कार्यवाही नही हुई, दुर्ग में पार्षद के खिलाफ कार्यवाही होने पर थाना प्रभारी को लाइन में बैठा दिया गया जैसी कई घटनाएं है) । भाजपा के नेता अपना जीवन स्तर सुधारने के चक्कर में जनता को दिन हिन बना रहे हैं । इस बिजली की बढती किमत जनता को कहां ले जाकर मारेगी इसकी कल्पना व्यर्थ है । चांवल 2 रूपये किलो मिल रहा होगा लेकिन उसकी आड में 10 रूपये की बिजली थमा देना कहां का न्याय है । अतः आपसे निवेदन है कि इस मामले को ध्यान में रखते हुए किसी आंदोलन की रूपरेखा तय करें ।
                                                नेताओँ को तो मुफ्त में मिल रही है बिजली उनका इससे कोई लेना देना नही है । पहले तो घटिया मीटर दिये गये जो औसत से ज्यादा खपत दिखा रहे हैं और ऊपर ये अब किमत भी बढा रहे हैं ।
                                               और क्या लिखूं मन में भरी भडास के कारण कुछ समझ नही आ रहा है इसलिये अभी तो बंद करता हूँ फिर लिखूंगा ।

Monday, March 28, 2011

विश्वकप के कारण टिकी हुई सरकार

आखिर कांग्रेसनीत सरकार गिर क्यों नही रही है ... महंगाई आसमान छू ली, सारे मंत्रालय खरबों का घोटाला करके भी बेशर्मी से डटे पडे हैं, विकीलीक्स के अनुसार मनमोहन सरकार को बचाने के लिये अरबों की रिश्वत दी गई, खाद्य मंत्री उलजलूल भाषा में बात करते हैं, सीबीआई सहित सभी संस्थाएं सरकारी चक्की में उन्ही की भाषा में चल रही है , कानून लगातार धराशाही हो रहे हैं लेकिन फिर भी जनता खामोश है ... क्यों ? क्यों नही जनता का विद्रोह खुल कर सामने आ रहा है क्यों वह किसी बाबा के कहने पर चलना चाहती है, क्यों वह इस सरकार का कार्यकाल पूरा होने दे रही है ?  क्यों ?क्यों ? और आखिर में एक औऱ क्यों ?  क्या इसका जवाब आपके पास है क्यों ? ... मेरे पास तो है .... मेरा जवाब है कि सरकार इसलिये अपना कार्यकाल पूरा करेगी क्योंकि विपक्ष भी नाकारा और निकम्मा है । उनके नेता आडवाणी को प्रधानमंत्री की गद्दी के अलावा कुछ नही दिखाई दे रहा है । दरअसल विपक्ष इस इंतजार में है की जनता के बीच से कोई आवाज उठे (जैसे बाबा रामदेव) तो तुरंत वह अपनी बंदुक उसके कंधे पर रख दे ताकि उनकी कमजोरी को कोई सीधा निशाना ना बना सके ।                                                              इसके बाद दुसरा कारण है मेरा परिवार ... मैं अपने परिवार को छोडकर फिलहाल कहीं नही जा सकता इसका नुकसान भी मुझे ही उठाना पड रहा है । तीसरा कारण है वर्ल्ड कप का होना .. क्योंकि हमारे देश के सारे युवा इस खेल में इतने आलसी बने रहते हैं कि उन्हे देश दुनिया से कोई मतलब नही रहता । वैसे ये कहना अतिश्योक्ति नही होगी की वर्ल्ड कप के कारण सरकार बची हुई है । मनमोहन नें भी समय का फायदा उठाते हुए जनता का ध्यान पाकिस्तान पर लगा दिये हैं । भोली भाली जनता को क्या मिलेगा इससे स्वयं जनता को कोई लेना देना नही है लेकिन बस ... चले हैं सब क्रिकेट के पीछे मानो वही भ्रष्टाचार को खत्म कर देगा ।                                               चलो अब निपटने दो विश्वकप को फिर देखते हैं जनता खाली होने के बाद क्या करेगा । जीते तो शायद सरकार बच जाएगी वरना जनता खिडालियों की भडास जनता इसी सरकार पर निकाल देगी । 

Tuesday, March 22, 2011

नकलचोट्टा हरि भूमि .. हाहाहाहाहाहा

http://119.82.71.95/haribhumi/epapermain.aspx?queryed=9&eddate=3%2f19%2f2011  अरे भाई आप कौन हैं मैं नही जानता पर आपको धन्यवाद देना चाहूंगा कि आपने एक मरियल सुगड्डे से ब्लॉगर को धन्य कर दिये । इससे हम ब्लॉगरों को बडी हिम्मत मिली की चलो किसी राष्ट्रीय स्तर के प्रादेशिक अखबार नें अपने राजधानी एडिशन के मुखपृष्ठ पर  जगह तो दी । लेकिन भाई छापने से पहले मुझसे संपर्क कर लिये होते तो मैं आपको और भी बेहतर जानकारी दे देता । आपने मेरे ब्लॉग की हुबहु कापी तो कर लिये पर कई बातों को नजर अंदाज कर गये मसलन आपने पृष्ठ क्रमांक 48 को नास्त्रेदमस की पुस्तक का पृष्ठ समझ लिये जबकि मैने तो अपनी उस पुस्तक का पेज क्रमांक 48 का उल्लेख किया था जिसकी प्रेरणा से मैने उस लेख को पूरा किया था । हे मेरे हितचिंतक नकलचोट्टे जब आपने मेरे ब्लॉग की कापी किये तो आपको मेरा निवास भी देख लेना था कि मैं कहां का रहने वाला हूँ । चूंकि ये अखबार मैने खरीदा नही (मुफ्त मिलता है भाई .. ) इसलिये मुझे कोई कोफ्त नही हुई मुझे लगा जाने दो इतने अखबार आते हैं एकाध खबर अपनी भी लग गई तो क्या हुआ । धन्यवाद आपका जो आपने मेरे ही शहर में मेरी खबर को पहुंचा कर प्राथमिकता दे डाली आशा है भविष्य में इसी तरह से अपनी नकलची प्रक्रिया को बरकरार रखने में कामयाब होते रहेंगे और हम मासूम से ब्लॉगरों का हौसला बढाते  रहेंगे ।... आपकी असीम अनुकंपा का सदैव आकांक्षी ... (नाम क्यों लिखूं .. )

Thursday, March 10, 2011

Check out तीसरा विश्वयुद्ध शुरू – नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पूर्णता की ओर « ispat ki dhadkan

Check out तीसरा विश्वयुद्ध शुरू – नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पूर्णता की ओर « ispat ki dhadkan

तीसरा विश्वयुद्ध शुरू - नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पूर्णता की ओर

मैं जो लिख रहा हूँ वह कोई आजकल की लिखी हुई किताब से नही है बल्कि 14 दिसंबर 1503 को फ्रांस में जन्मे नास्त्रेदमस की लिखी भविष्यवाणी पर आधारित  पुस्तक से  पढकर लिख रहा हूँ ।
                                      नास्त्रेदमस की दुर्लभ भविष्यवाणी नामक इस पुस्तक के अनुवादक अशोक कुमार शर्मा हैं । मैं इस पुस्तक को पढ रहा था कि इसके पृष्ट क्रमांक 48 पर निगाह पडते ही मैं सन्न रह गया इसमें लिखा है "एक पनडुब्बी में तमाम हथियार और दस्तावेज लेकर वह व्यक्ति इटली के तट पर पहुंचेगा और युद्ध शुरू करेगा । उसका काफिला बहुत दूर से इतालवी तट तक आएगा "
                              अब इसके आगे की लाइन पर गौर फरमाएँ -  अगर विश्व मानचित्र को ध्यान से देखा जाये तो इटली के तट की ओर आने के लिये सबसे उपयुक्त रास्ता समद्र मार्ग ही लगता है । आधुनिक युद्धों में किसी भी देश पर मिसाइल तथा विमानों से आक्रमण करना तो संभव होगा नही । फिर पनडुब्बी द्वारा समुद्र के भीतर-भीतर होकर एक दम किसी देश पर हमला कर देना आसान भी  है और कम जोखिमभरा भी । अपने ही देश में दुश्मन पर अणु बम भी नही चलाया जा सकता । इससे मुकाबला सैनिको के बीच होगा न कि तकनीक के बीच ।
                                                        इसके बाद की लाइनों ने ही मेरे होश उडा दिये इसमें साफ साफ लिखा गया कि - इटली के चारो ओर मित्र राष्ट्र हैं मगर कुछ ही दूरी पर लगभग एक हजार किलोमीटर के क्षेत्र में लीबिया, अल्जीरिया, मिश्र, सउदी अरब, तुर्की और इस्राइली तट हैं । इनमें से कौन सा देश युद्ध शुरू करेगा अनुमान लगाना कठिन है मगर पश्चिमी समीक्षक यह संदेह करते हैं कि लीबिया यह कारनामा कर सकता है ।
                                     अब इसे पढने के बाद आप बतायें कि हाथों को लिखने से कैसे रोका जा सकता है । चाहे जैसी भी समीक्षा की की गई हो लेकिन यह बहुत ही सटीक भविष्यवाणी है ।  इन भविष्याणीयों में और भी कई बातें जुडी हुई है मगर वर्तमान में जिस तरह से वातावरण बन रहा है उसमें अमेरिका- रूस का गठबंधन एवं पूर्व में चीन- अरब गठबंधन बनने की आशंका बताई गई है । अभी हाल ही में इरान नें अमेरिका को लीबिया में दखलंदाजी करने से मना किया है । लेकिन ऊपर जिस तरह से पनडुब्बी की बात आई है उससे तो यही लगता है कि अमेरिका मित्र देशों के साथ मिलकर लीबिया को नो फ्लाई जोन में तब्दील करवा सकता है जिसके बाद गद्दाफी के पास पनडुब्बी के अलावा कोई दुसरा विकल्प नही बचेगा । 
                          अभी अभी की खबर है  -     समाचार चैनल 'अल जजीरा' के मुताबिक रास लानूफ शहर के ऊपर लड़ाकू विमान चक्कर लगा रहे हैं, जबकि विद्रोही विमानों का अपना निशाना बना रहे हैं। यानि की मैं इस खबर को लिख रहा हूँ और भविष्यवाणी का समय पास आता जा रहा है । इसके अलावा इसमें जिस तरह से विश्व के नेताओं की स्थिति जाहिर की गई है वह इस समय बिल्कुल सही स्थान पर है जैसे - तीन ओर  जल से घिरे देश में  एक नेता होगा जो जंगली नाम वाला होगा (इसकी व्याख्या इस प्रकार की गई है की भविष्य में कोई सिख(सिंह ) भारत मे प्रधानमंत्री पद पर बैठेगा ) वर्तमान में मनमोहन सिंह इसी पद पर हैं , एक देश मे जन क्रांति से नया नेता सत्ता संभालेगा ( मिश्र में हो चुका है )  नया पोप दुसरे देश में बैठेगा (वर्तमान के पोप फ्रांस में रहते हैं ) मंगोल (चीन) चर्च के खिलाफ युद्ध छेडेगा ( चीन नेंं अमेरिका को लीबिया से दूर रहने की सलाह दे डाली है ) इसके अलावा और भी कई चीजें ऐसी होने वाली है जो कुछ ही दिनों में पूरी हो सकती है । जैसे - छुपा बैठा शैतान अचानक बाहर निकल आएगा ( ओसामा या अन्य बडा आतंकवादी समाने आ सकता है) नया धर्म (इस्लाम) चर्च के खिलाफ भारी मारकाट करते हुए इटली और फ्रांस तक जा पहुंचेगा । 

                                                   उफ्फ्फ्फ्फ ना जाने और भी कितनी बातें है जिन्हे पढने से ही सिहरन हो जाती है । लेकिन जो नियती है वह तो निभ  कर ही रहेगी । 

अर्जुन सिंह मर गये

अर्जुन सिंह भी मर गये  ?  अब आप कहेंगे कि मै बजाय निधन या पंचतत्व में विलिन जैसी सभ्य बोली को छोडकर मर गये जैसी भाषा में क्यों पूछ रहा हूँ ... इसका कारण है मेरा अब भारतीय कुप्रथाओं का विरोध .. हमारी एक बहुत बडी कुप्रथा है कि मरने वाले के बारे में हम कोई चर्चा नही करते हैं उसकी सारी बुराईयों को छोडकर केवल अच्छाईयों की बातें करते हैं । चलो उस परंपरा का निर्वहन करते हुये सबसे पहले उनकी तारिफ करता हूँ ... ये एक ऐसे व्यक्ति रहे है जिन्होने देश के लगभग हर बडे पद पर कार्य किये हैं । इनकी सबसे बडी उपलब्धी पंजाब से आतंकवाद को खत्म करना था । १४ मार्च १९८५ को उन्होंने पंजाब के राज्यपाल के पद का दायित्व सभांला। २५ जुलाई १९८५ को अर्जुन सिंह जी उस दायित्व को पूरा करने में सफल हो गये जिसके लिये उन्हें पंजाब भेजा गया था। उस दिन हरचरण सिंह लोगोंवाल ने प्रधानमत्री श्री राजीव गांधी से मुलाकात की और पंजाब समझौते पर हस्ताक्षर किया।  ..... और यदि इन्होने गर्वनर के पद पर रहते हुये गिल को खुली छूट नही दिये होते तो आज भी हम पंजाब को जलता देखते रहते । ... चलो हो गये खुश ... अब बतायें इन्होने क्या किये .... चुरहट लाटरी कांड याद है कि भूल गये कि किस तरह से मुख्यमंत्री पद न्यायालय के आदेश पर इन्हे छोडना पडा था । ... चलो जाने दो यार मर गये को अब क्या उखाडना 
                      लेकिन अब मरने के बाद क्या होगा । अर्जुन के काले करोडों रूपयों का क्या होगा (अब ये मत कहना कि उनके पास कुछ नही होगा या वे इमानदार थे  , भाई जैन हवाला कांड की डायरी के नामों को याद करो)  एंडरसन के साथ हुए मौत के सौदों का क्या होगा,   आरक्षण जैसे बेतुके और देशद्रोह पूर्ण निर्णयों पर सहमती देकर इन्हे क्या मिलेगा .... जानते हैं क्या मिलेगा केवल एक तमगा मेरी ओर से ... ये कि इन्होने केवल स्वार्थ की राजनीती किये इन्हे देश की कभी कोई परवाह नही रही और ना ही मान सम्मान की .. ये उन मोटी चमडी वालों में से एक हैं जिन्हे आप कुछ भी कह दो कोई फर्क नही पडता क्योकि उनका जवाब होता है .. क्या हुआ .. गाली ही तो दिया ना .. पैसे ले गया क्या .......
                               लेकिन उनके मरने के बाद क्य होगा ये इस देश के नेताओं को बताना चाहूंगा कि देखो किस तरह से इनकी  मौत अमावस को हुई है ,, अमावस को प्रेत लोक के अलावा हर लोक के दरवाजे बंद रहते हैं और प्रेतात्माएं घुमती रहती है ...... अब जबकि अर्जुन मरे हैं तो उनकी आत्मा तो निकली ही होगी और इस समय गैस कांड में अकाल मौत मरे सारे लोग उन्हे बडे आराम से अपने पास बैठा कर सेंक रहे होंगे । उन्हे अपने कर्मों को भुगतने के लिये रोज एक नया जन्म लेना पडेगा कभी वो चींटी बन कर पैदा होंगे तो कभी बिल्ली के घर ... हर जन्म में वो अपने पापों को याद किया करेंगे कि मैने अपने दुर्लभ मानव शरीर का किस तरह से दुरूपयोग किया था .. मैने अपने जिन नाती पोतों को ध्यान में रखकर पाप से पैसा कमाया वो सब अब गलत संगत में पडकर उन पैसों को उडा दिये हैं और किस तरह से एक एक कर बदनाम मौत मर रहे हैं । 
                                            हे इस लेख को पढने वालों जरा गौर से पढो सोचो और समझो इस कथा को  ........ एक राजा था । उसका देश पूरे दुनिया का तीसरा सबसे बडा देश था और वहां की प्रजा बडी धार्मिक और कर्मठ थी । जनता ईमानदारी से अपना काम करती थी किंतु वह अपनी प्रजा पर कैसे भी करके टैक्स वसूली जारी रखता था जिन पैसों से जनता का भला हो सकता था उनसे वह अपना गुप्त धन बढाता था । वह अपने पैसों को दुसरे देशों में भी जमा करके रखता जाता था ताकि विपत्ति आने पर वह उस धन का उपयोग कर सके । एक दिन उसके अत्याचारों से त्रस्त जनता नें विद्रोह कर दिया और राजा के संभलने के पहले ही उसे उसके पूरे परिवार सहित मार डाला । 
                                                   राजा नें अपना जो धन दुसरे देशों में रखा था उन्हे मुफ्त में पाकर दुसरे देश समृद्ध होते गये ।  जिस धन को परिवार के लिये गडा कर रखा था वह सारा धन मिट्टी में दबता चला गया लेकिन राजा की आत्मा अपने धन को पाने के लिये भटकते रही । वह आज भी  कैसे भी करके अपने धन को वापिस पाना चाहता है ... अब वो चाहता है तो चाहे लेकिन आप सोचकर देखें कि अगर उसे धन मिल भी जाता है तो क्या वह अपनी आत्मा के साथ ले जा सकता है . .... नही.... क्योकि धन का उपयोग आत्मा के लिये नगण्य है .... आत्मा केवल कर्म के आधार पर ही दिव्यात्मा बन सकती है । धन का लोभ हर बार आपकी आत्मा को प्रेतलोक में लेकर जाता है । इसलिये पापों को छोडो और देश धर्म की ओर लौटो । और हां ये बातें  केवल भारतीय विचारधारा वालों के लिये है इटालियन विचारधारा के लिये ही तो कहानी लिखा हूँ ।

Wednesday, March 9, 2011

सदगुरू कृष्णायन जी का अलौकिक प्रवचन/ sadguru krishnayan ji maharaj

स्वर्ग नरक से परे है एक और लोक

                     दिनांक 4 मार्च 2011  को सदगुरू कृष्णायन जी महाराज के बरईपुर, बनारस स्थित आश्रम में महात्मा माधवदास जी के सतलोक गमन हेतू आयोजित जलवा चौकी (चौका आरती का वृहद रूप) कार्यक्रम मे उपस्थित सदगुरू के पुत्रों व आचार्यों ( सदगुरू शिष्य नही पुत्र बनाते हैं )  नें जिस अलौकिक दुनिया का भ्रमण किये वह केवल उन्ही की आत्मा बता सकती है । स्वर्ग, नरक से परे जिस सतलोक की बात गुरूदेव नें बताये वह दिव्य गुप्त विज्ञान (डिवाइस सिक्रेट साइंस) के साधकों के लिये वरदान साबित हुई । गुरूदेव के इस प्रवचन की कोई व्याख्या नही की जा सकती । केवल शांतचित्त के साथ देखिये और सुनिये । 

Monday, February 28, 2011

ये है मुसलमान

 इस चेहरे को देख कर आप क्या महसूस कर रहे हैं ... क्या आप बता सकते हैं इसका धर्म क्या हो सकता है.... नही... मैं बताता हूँ ये कौन है । ये है एक आम हिंदुस्तानी जिसे केवल अपने परिवार की रोजी रोटी की चिंता लगी रहती है । यदि शहर में हडताल हो जाये तो इसका परिवार भूखा सोता है, यदि दंगे फसाद हो जाएं तो सबसे पहले यही मरता है और अगर सरकार इसके नाम पर कुछ पैसे देती भी है तो वह सिस्टम के भ्रष्ट हाथों में चला जाता है । ये है नौशाद ।



                        यदि इसके चेहरे को देखें तो आप इसके धर्म से इसे नही पहचान पाएंगे, इसे ही क्या आप किसी भी भारतीय को नही पहचान सकते कि आपके बाजू में बैठा सभ्रांत युवक मुस्लिम हो सकता है । हमारे देश के मुसलमान कोई दुसरे देशों से नही आए हैं वे इसी देश की धरा से जुडे हुए हैं उसी तरह से जैसे देश के सारे क्रिश्चियन हमारे ही भाई बंधु थे जिन्हे इसाई मिशनरीयों नें लालच देकर, इलाज करके और शिक्षा देने के बहाने अपने धर्म से जोड लिये ।
                                                           हमारे देश की मजबूती के लिये अपने उन सारे भाइयों को एक मंच पर लाने की आवश्यकता है जो उलजलूल धर्म या संप्रदाय के चंगुल में फंसते जा रहे हैं या फिर तथाकथित धर्म गुरूओं के शोषण का शिकार बनते जा रहे हैं ।
                               भारत में मुस्लिम धर्म को लाने वाले तो मुगल थे लेकिन अप्रत्याशित तरीके से उनके फैलाव को हिंदु पंडितों ने ही बढावा दिया था । मैं स्वयं कान्यकुब्ज ब्राह्मण हूँ लेकिन आज जब भी अपने आसपास के मुस्लिम भाइयों से मिलता हूँ तो बिल्कुल नही लगता कि मैं किसी दुसरे देशवासी से बात कर रहा हूँ । जिस तरह से ऊपर नौशाद की तस्वीर देखकर आप नही बता सकते उसी तरह यकिन रखें कि कोई दुसरा भी चेहरा देखकर हिंदु मुस्लिम का अंतर नही बता सकता । अब हमें बजाये ये सोचने के कि हिंदु राष्ट्र बनाया जाये हमें ये सोचना होगा कि एक ऐसा समाज बनाया जाये जहां हर संप्रदाय केवल मानव हित की सोचे और केवल एक ईश्वर की अराधना करे । आज कई गुरूओं ने अपने अपने आश्रम बना लिये हैं जिनमे एक ईश्वर की बातें बताई जाती है लेकिन घुमा फिरा कर वे भी गीता पर आ जाते हैं यानि उनका ज्ञान कहीं ना कहीं से रटा हुआ होता है । अधिकांश धर्म गुरू हास्यापद तरीके से पति पत्नि को दीक्षा देकर भाई बहन बना देते हैं यानि संबंधों की ऐसी की तैसी करने और सामाजिक गठबंधन को तोडने वालों की कोई बात नही करना चाहता  उन्हे तो लगता है कि मात्र शारीरिक संबंधो से दूरी करवाने से ईश्वर तक पहुंचा जा सकता है । ऐसे तथाकथित धर्म गुरूओं नें ही हमारे सनातन धर्म का सत्यानाश करने में अहम भूमिका निभाये हैं यदि किसी मुस्लिम ने हिंदु को छू भी दिया तो वह हिंदु भी मुसलमान माना जाता था जिसे उस समय के हिसाब से धार्मिक रिवाज बना दिया गया (दलितों का उदाहरण अब भी हमारे सामने है)  ऐसा होने का दुष्परिणाम ये हुआ कि हमारे ही कई पूर्वज और उनके रिश्तेदार आज मुस्लिम समाज में प्रतिष्ठित हो चुके हैं । 
                           ( इस लेख के कई भाग परम पूज्य गुरूदेव स्वामी श्री कृष्णायन जी महाराज के द्वारा उपदेशित हैं )                   
                                                                        

Sunday, February 27, 2011

हमारी मजबूरी, मजबूर प्रधानमंत्री

सोनिया मैडम की मेहरबानी है इस देश पर जो उन्होने मनमोहन सिंह  को इतिहास का सबसे मजबूत प्रधानमंत्री बताते हुए  देश का नेतृत्व दीं,  लेकिन जब लगातार  संप्रंग सरकार के भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगीं तो वही मजबूत मनमोहन मनमोहिनी मुस्कान के साथ अपने को मजबूर प्रधानमंत्री बताने लगे । काला धन को स्वदेश लाने की बातें जब भाजपा नें कही थी तो यही मनमोहन थे जिन्होने कहा था कि यूपीए सरकार के आने पर काला धन स्वदेश लाया जाएगा उस समय भाजपा ने अपने प्रधानमंत्री पद के रूप में लालकृष्ण आडवाणी को अपना उम्मीदवार बनाकर भारी भूल कर दी थी वह अपने को लौह पुरूष कहलवाते समय कांधार कांड भूल गये इसके अलावा अयोध्या केस को बंद करने का दोषी भी उन्हे ही जनता नें माना था इसलिये भाजपा की हार हुई । अगर कहा जाये कि विकास पर धर्ण हावी था तो गलत नही होगा क्योंकि भारतीय जनता पैसों में धोखा सहन कर लेती है मगर आस्था से खिलवाड नही होने देती ।
                                                              अभी तक जो भी भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं वे तो प्याज का केवल सतही परत है, जब उन छिलकों को उतारा जाएगा तो लगातार हर परत के नीचे एक भ्रष्टाचारी कांड खुलता जाएगा । हमारे देश का ये दुर्भाग्य है कि हम सदा से दुसरों के रहमोकरम पर जीना पसंद करते आए हैं फिर चाहे वे मुगल हों या अंग्रेज हम अपनी गुलामी मानसिकता से नही उबर पा रहे हैं । सोनिया को हम भारतीय कहते हैं मगर भूल जाते हैं कि यदि हमारे परिवार की कोई लडकी दुसरे समाज या जाति में शादी कर लेती है तो उससे हम सारे संबंध तोड लेते हैं मगर सोनिया के साथ ऐसा नही कर पा रहे हैं । हमारे देश के भ्रष्टाचारीयों नें सोनिया को अपनी माँ बना रखा है और उसके आँचल की ओट में देश का पैसा खा रहे हैं । सोनिया मन ही मन उन्हे धन्यवाद देती होंगी कि भले ही तुम लोग जितना चाहे उतना खा लो मगर पावर मेरे हाथों में रहने दो ताकि मैं तुम्हे बचा सकूं और  महारानी  बनी रहूं । 
                                                             बाबा रामदेव चाहे जिस स्वार्थ में हो लेकिन ये तो मानना पडेगा कि उन्होने खुल कर राजनीती में कदम रखने का एलान कर दिये हैं । उनके इस कदम के पीछे आरएसएस का अप्रत्यक्ष समर्थन से इंकार नही किया जा सकता जिसका एक सिद्धांत जैसे को तैसा मिले का भी है । यह भी तय है कि यदि रामदेव बाबा के दल को सत्ता मिली तो गांधी परिवार सबसे पहले फरार हो जाएगा क्यों ...................................... ये आप सोचें ............. और ये भी सोचें कि यदि ऐसा हुआ तो क्या हम उन पर आपराधिक मामले लागू कर पाएंगे (क्योंकि इटली का संविधान अपने देश में जन्मे हर बच्चे को और हर नागरिक को आजीवन नागरिकता देता है ताकि कभी किसी दुसरे देश में उस पर आपराधिक मामला बनने पर वह अपने देश इटली में पनाह पा सके   अब या तो मजबूर प्रधानमंत्री को झेलो या फिर मजबूती से उसको उखाड फेंको और ये ध्यान रखो कि इस समय सारे विश्व में सत्ता परिवर्तन जनता कर रही है , सेना नही ।                                                    

Sunday, February 20, 2011

हम हैं सूरदास .....




सूरदास ... महान कृष्ण भक्त औऱ अकबर के प्रमुख दरबारी .. वे अंधे या नही इसमें कई विषमतायें हैं लेकिन मैं उस तरफ हूँ जो उन्हे आँखो वाला अँधा कहते हों । जी हां मेरे विचर में सूरदास कृष्णमोह में ऐशे बंधे हुये थे कि उन्हे हर जगह कृष्ण ही कृष्ण दिखलाई पडते थे इसलिये उन्होने जमाने के हिसाब से स्वयं को अँधा माना और जब जमाने ने देखा कि उन्हे तो कृष्ण के सिवाय कुछ दिखलाई नही पड रहा है तो उसने भी उन्हे अँधा कहा ।



धन्य है सूरदास जिन्होने अँधत्व की एक नई परिभाषा बताये कि किस तरह आँखो के होते हुये भी अँधा बना जा सकता है । अरे हां .. याद आया अभी कुछ दिन पहले किसी अखबार में पढा कि गांव की युवती को नंगा करके सारे गाँव में घुमाया गया था और 5 लोगों नें उसका सामूहिक बलात्कार किये थे उस गाँव का नाम तो याद नही आ रहा है वरना आप लोगों को बताता कि चलिये देखिये वहाँ आज भी कई सूरदासी लोग रह रहे हैं । फर्क केवल इतना है कि सूरदास केवल कृष्ण के रूप में खोए रहते थे और ये सूरदास गोपियों में खोए रहते हैं .... र्निवस्त्र ।



अरेरेरेरेरे माफी चाहूंगा भाई अच्छे खासे धर्मचर्चा का मैने बलात्कार कर दिया ........ मुझे क्षमा करें हे देश के सूरदासी बंधुओं आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिये.... लेकिन क्या करूं मेरी भावना भी वैसी ही हो गई है जैसी देश की होती जा रही है, मैं अपने चरित्र को बचाने का प्रयास करता हूँ तो सामने दुसरी भावना आ जाती है । चलिये पुनः क्षमा याचना के साथ आगे बढते हैं .. सूरदास को कितना पारिश्रमिक अकबर देते होंगे ये तो नही पता लेकिन अच्छा देते होंगे तभी तो सूरदास को अपनी रचना बनाने में कोई परेशानी नही आती थी वरना आजकल के तो कई सूरदास रचना के साथ बैठकर, लेटकर ही अपनी रचना पूरी कर रहे हैं और उन्हे उनका मेहनताना भी रचना ही दे देती है ..... लेकिन बात वहीं अटक जाती है ,,...,, भावना पर आकर ... अब आपकी भावना को मैं अपनी समझने की भूल तो कदापि नही कर सकता भले ही आपकी भावना मुझ पर आकर्षित हो रही हो ... इसलिये हमने उसे नये जमाने में लिव ...सिव जैसा कुछ नाम दे रखा है ।



अरे भाई अब मेरी भावना को आप गलत ना समझें वह मनमोहन की मोहिनी की तरह एकदम पाक साफ है यानि की नजर तो गंदी है मगर नियत साफ है । अब बात चली बलात्कार की तो याद आया कि एक देश का बलात्कार हो गया जिसका हुआ उसके बच्चों नें बलात्कारीयों के पिता पर उंगली उठाई और आरोप लगाये तो बच्चों के पिता नें सफाई के साथ कहा कि घर संभालने के लिये कई बातों को अनदेखा करना पडता है मेरे बच्चे तो अच्छे थे लेकिन तुम्हारी माँ को इतना सजधज कर जाते देख उनकी नियत बदल गई और जेवर उतारते उतारते जो हुआ उसे तुम लोग नाहक बलात्कार कह कर बलात्कार का नाम बदनाम कर रहे हो । तुम्हारे देश की लाज दुबारा ना लुटे इसलिये एक डायन को भेजा हुआ हूँ जो तुम्हारे देश की आबरू लुटे बगैर केवल घर बार बिकवा देगी और तुम्हारी बलात्कार की कहानी सूरदासी खबरों में दब जाएगी ।

Tuesday, February 15, 2011

भ्रष्टाचार क्यों और कैसे

बोफोर्स घोटाला- 64 करोड़ रुपए

यूरिया घोटाला- 133 करोड़ रुपए

चारा घोटाला- 950 करोड़ रुपए

शेयर बाजार घोटाला- 4000 करोड़ रुपए

सत्यम घोटाला- 7000 करोड़ रुपए

स्टैंप पेपर घोटाला- 43 हजार करोड़ रुपए

कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला- 70 हजार करोड़ रुपए

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला- 1 लाख 67 लाख करोड़ रुपए

अनाज घोटाला- 2 लाख करोड़ रुपए
ये है हमारे देश की वो हकिकत जो ये हकिकत बयां करती है कि अभी हम आगे नही बढ सकेंगे । हमारे देश में बढते भ्रष्टाचार के लिये कोई एक व्यक्ति दोषी नही है बल्कि इनकी जडों में जाते ही हमें नेता और अधिकारी ही नजर आते हैं । यदि किसी नेता का कोई सगा संबंधी या दोस्त भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाता है (जैसा कि सोनिया- क्वात्रोची) तो कार्यवाही केवल उस पर कंद्रित हो जाती है और यही है हमारे देश में बढ रहे भ्रष्टाचार की नींव ।
सोच कर देखें कि यदि क्वात्रोची को गिरफ्तार ना होने की दशा में सोनिया की गिरफ्तारी की जाती तो क्या होता ?
। ....। इसका जवाब कोई नही देगा क्योंकि उस समय देश के सारे नेता अपनी अपनी चढ्डी उतरने से बचाने के लिये एक साथ मंच पर खडे हो जाते । अब हमें ये सोचना है कि जब हमारे देश के विधान बनाने वाले ही करप्ट हैं तो देश को हम कैसे बचाएंगे । मैं कोई अर्थशास्त्री नही हूँ लेकिन इतना जरूर बता सकता हूँ कि यदि कानून बनाने वाले और उस कानून का पालन करने वाले अलग अलग हों तभी कोई प्रभावशाली कार्यवाही हो सकती है जबकि अभी होता ये है कि कानून बनाने वाली संसद से लेकर उसका पालन करने वाली संस्था तक सब कुछ नेताओं के द्वारा संभव होता है । नेता  न्यायपालिका को अपने प्रभाव में लेने का भी कुत्सिक षणयंत्र रच रहे हैं ताकि वह भी उनके हाथों में आ जाये और देश को इत्मिनान से खोखला किया जा सके ।
                                                  मैं व्यंग्य की भाषा में बहुत कुछ कह सकता था लेकिन लगा कि जब पूरे देश को शेष  विश्व हास्यापद नजरों से देख रहा है तो साफ साफ कहना ही ज्यादा बेहतर समझकर सीधे सीधे लिख रहा हूँ । सच तो ये है बढते भ्रष्टाचार के साथ साथ देश की  जेब ढिली हो रही है, जो पैसा देश का है उसे तो नेता अधिकारी मजे से खा रहे हैं और देश को विदेश के कर्ज से चला रहे हैं

Saturday, February 12, 2011

हम क्यों ना मनायें वेलेंटाइन डे

हा हा  हा ... ह हहा ... देखे क्या बढिया सीन है । चलो पहले बात करते हैं बांये की ..... ये हैं सेंट वेलेंटाइन जो अपनी प्यार की सेंट हमारी धरती पर धीमे धीमे छोड रहे हैं ... जबरदस्ती ही सही लेकिन इनकी तकनीक कारगर हुई है और अब   सारे देश की युवा लडकियां राखी को छोड राखी सावंत को पछाडने पर तुल गई हैं । उन्हे अब दांये में रूचि नही है उन्हे तो अब बांये में ज्यादा दिलचस्पी है । अरे भाई अब गया वो जमाना जब फिल्म अछूत कन्या में अशोक कुमार  देविका रानी  से चार हाथ दूर होकर गाना गाते थे अब तो फूल फास्ट का जमाना है फिल्म शुरू होते ही हिरोइन के आने की खबर उसकी हिलती छातीयां दिखा कर दी जाती है । .......
 अब बांये में हैं  सन् 1936 की फिल्म और दांये में है 2003 की बूम , और अब तो माशाअल्लाह 2011 चालू है देखें पिछले साल के हिस्स के बाद और कौन सी चीजें अपने नौजवानों के हिस्से में आती है .। 
                    भाई लोगों ऐसा है कि अपन तो एक बात जानते हैं कि जो काम अपने को नही आता लेकिन उसको दुसरे करते हैं तो अपन को चिढना जरूरी है । तो चलिये फिर .... देर किस बात की है भाई जाहिर सी बात है कि अब तो अपन प्रेमी रोमांस की उम्र से आगे बढ कर खरीदी प्रेम की उम्र में आ गये हैं लिहाजा चलो  भारतीय संस्कृति को याद करते हुये लाठीयां तैय्यार करो और निकल चलो मेरे साथ उस मुहिम में कि जो काम हम नही कर सकते वो हमारे सामने आज के नौजवान कैसे कर सकते हैं । ...... ।।




इन बेशर्मो को अब हम नही हमारी लाठीयां सबक सिखाइंगी । ............
..... ................अरे भाई वो बापू वाली तस्वीर गलती से लग है दरअसल में मैं ये वाली लाठी की बात कर रहा था । आशा है कि मेरे लिखे लेख को अच्छा ही कहेंगे .......

हिंदुस्तान नपुंसक है ।


सोचो ... सोचो... और सोचो कि भला मैने ये तस्वीर क्यों लगाई या ऐसी  हेडलाइन्स क्यों बनाई । आप चाहे जो सोचें... भाई हमने तो सोचा कि जब यासिन जैसा देशद्रोही खुलेआम हमारे देश में हमारी ही ऐसी की तैसी कर रहा है और भाजपा के फेंकें जूते उस तक नही पहुंच पा रहे हैं तो हम तो नपुंसक ही हुए ना और जब हम ही नपुंसक है तो सारा देश नपुंसक नही हुआ क्या ( क्यों .. पाकिस्तान को आतंकीयों का देश कहते हैं कि नही)  । अब जरा कुछ बातें करें अपने देश की एक प्रजाती की जिसे हम हिजडा या किन्नर कहते हैं । क्यों कहते हैं ये नही सोचते ... बस कहते हैं .... । जब वे हमारी दुकानों पर या मकानों में या फिर ट्रेनों पर वसूली अभियान करते हैं तो हम क्या करते हैं .... खुदको उन हिजडों के आतंक से बचाने के लिये 10-20 रूपये दे देते हैं । बस.... कुछ वैसा ही तो हम काश्मीर के लिये कर रहे हैं । वो हिजडे हम पर, हमारे देश पर आँखे गडाते जा रहे हैं, हिंदुओं को निर्ममता से मार रहे हैं, तिरंगे को अपना मानने से इंकार कर रहे हैं और हम उन हिजडों को बजाय ये कहने के की मर्द हो तो सामने आकर लडो.... चुपचाप नपुंसकों की तरह  बैठ गये हैं । 
                                              हे मेरे प्यारे नपुंसक साथियों आओ अपने देश की खातिर अपने अंदर कुछ जोश उत्पन्न करने वाली दवाइयों का सेवन कर लें । चलो.. .....  शहिदे आजम भगत सिंह, उधम सिंह या फिर चंद्रशेखर आजाद की भस्म को तलाश करें और उस भस्म में खुदीराम बोस की जवानी को  कारगील के शहीदों के जुनून में मिलाकर पी लें ....... शायद ये दवा हमारे भीतर कुछ मधर्नगी का अहसास पैदा कर सके ।
                                              हाहाहाहाहाहाहाहा .... मैं कोई मजाक नही कर रहा हूँ .. लेकिन सचमुच आज अपने भीतर के मर्द को मरा हुआ पा रहा हूँ क्योंकि मेरे जीवन में मेरी पत्नि और  10 और 8 साल के अपनें  बच्चों की जवाबदारी है और उनका मेरे सिवाय कोई नही है, इस कारण मैं अपने साथ साथ उन सभी देश प्रेमियों के जज्बातों को समझ सकता हूँ जो अकेले परिवार के है और उन हिजडों के खुले आतंक को अपने परिवार की खातिर चुपचाप सह रहे हैं जो देश पर लगातार हमले कर रहे हैं ।
                                         खैर... 2 शब्दों के साथ अपना लेख समाप्त करता हूँ कि - धन्यवाद हमारी 100 करोड की नपुंसक जनता को जो 1000 नेताओं के रहमो करम पर अपना देश बेच चुके हैं । जय हिंद ।।