Monday, September 26, 2011

PRASHANTAM: मुझे मिल गया नास्त्रेदमस का मेबस ।

PRASHANTAM: मुझे मिल गया नास्त्रेदमस का मेबस ।: क्या पहले मुझे नास्त्रेदमस का परिचय देने की जरूरत है । मुझे नही लगता क्योंकि सब कुछ विकीपीडिया में मिल जाएगा सो वहां से आप पढ लिजिए । मैं ...

मुझे मिल गया नास्त्रेदमस का मेबस ।

क्या   पहले मुझे नास्त्रेदमस का परिचय देने की जरूरत है । मुझे नही लगता क्योंकि सब कुछ विकीपीडिया में मिल जाएगा सो वहां से आप पढ लिजिए । मैं तो लिखने बैठा हूँ इस दुनिया की तबाही के बारे में महान भविष्यवक्ता  नास्त्रेदमस की भविष्यवाणीयों के बारे में कुछ बताने और कुछ आपको सुझाने के लिए ।
                                                        मैने  इस संबंध में एक लेख लिखा था तीसरा विश्वयुद्ध शुरू - नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पूर्णता की ओर    इसमें मैने बताया था की दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के ना केवल कगार पर है बल्कि बहुत तेजी से युद्ध शुरूआत होने की भूमिका लगभग तय हो गई है । किस तरह से लडाई छिडेगी इसका एक खाका तैयार हो गया है । आगे मैं जो भी लिखने जा रहा हूँ उस पर केवल पढनें तक सीमीत ना रहे बल्कि आप इससे आगे की सोचें । भाई मेरा दिमाग अलग और आपका अलग काम करता है । चलो छोडो बात करते हैं आगे की -
                              मेबस ( MABUS )  के बारे में सबसे पहले चर्चा करते हैं । इस नाम को आडा टेढा उल्टा सीधा सब कुछ करके दुनिया के विशेषज्ञों नें देख लिये हैं अब इसके बारे में मेरा जो नजरिया है उस पर गौर फरमाएं और यदि सही लगे तो प्लीज.... अपना नाम जोड कर मत बता देना की ये आपकी खोज है  । दरअसल इस नाम की खोज पर कई सालों से मैं भी लगा हुआ था और हर उभरते नाम के साथ इस नाम को जोडने का प्रयास करता रहा ।

Mabus तो जल्द ही मर जाएगा, वहाँ आ जाएगा

लोगों और जानवरों में से एक भयानक भगदड़:

फिर अचानक एक प्रतिशोध देखेंगे,

सौ, हाथ, प्यास, भूख जब धूमकेतु चलेंगे. (सदी द्वितीय, 62 रुबाई)

                           अब कोई इसे मेबस कहता है तो कोई माबस कहेगा लेकिन मैं इसे केवल मबुस ही समझा और इसी आधार पर उस मबुस की खोज करने निकल पडा । .. बोर हो गए ना... लेकिन अब जो बता रहा हूँ उसे आप भूमिका कह सकते हैं । जैसा की मैने तीसरा विश्वयुद्ध शुरू लेख में बता चूका हूँ की गद्दाफी पनडुब्बी अथवा अन्या साधनों से होता हुआ इटली तक पहुंचेगा । लेकिन पुनः नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी में सेंचुरी 9 के 3 खंड में लिखा है
The "great cow" at Racenna in great trouble, Led by fifteen shut up at Fornase:
At Rome there will be born two double-headed monsters,
Blood, fire, flood, the greatest ones in space .  यहां पर खोजबीन किया तो पाया की Racenna में मात्र एक स्पेलिंग का फेरबदल करो और c की जगह पर v का इस्तेमाल करने पर इस नाम का इटली का एक समुद्र तटीय नगर  है  । अब जबकि रेवेना मिल गया तो वहां से लिबिया का पहुंच मार्ग ढुंढा और त्रिपोली से रेवेना का नक्शा इस तरह से बना ----

अब इसके साथ नीचे की नीली लाइन पर गौर फरमाएं यह लाइन सीधे त्रिपोली, लिबिया तक के लिये खींची गई है (कुछ मेहनत आप भी करो औऱ गुगल मेप से रास्ता ढुंढो ) मुझे कुल समुद्री दुरी 1000 किलोमीटर के आसपास की मिली । अब आपको लगेगा की इस दूरी का मेबस से क्या जोड हो सकता है । हां .. आप सही है इन दोनो का कोई जोड नही है लेकिन जोड बनाना है तो कुछ गुणा भाग भी तो करना पडेगा । 
At Rome there will be born two double-headed monsters, इस लाइन का क्या आप हिंदी में रूपांतरण करेंगे । मुझे जितनी अंग्रेजी समझ में आई उसके अनुसार नास्त्रेदमस रोम में दो सिर वाले राक्षस के जन्म लेने की बात कहते हैं । जी हां .....ये है दो सिर वाला राक्षस ...मेबस या माबस लेकिन मेरी भाषा में मबुस ।
                                            गद्दाफी गायब है और इस लेख को लिखे जाने तक लापता ही है लेकिन नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के अध्ययन के अनुसार वह इस समय या तो इटली के रेवेना शहर तक पहुंच चुका होगा या पहुंचने वाला और यही गद्दाफी है मबस का MA (गद्दाफी के नाम के पहले मुअम्मर लगता है जिसके उच्चारण का एक हिस्सा मुअम् ... फिर मुअम् से बना इस तरह से बना आपके मेबस का और मेरे मबुस का म ।
                                        जब मबस का मिल गया तो पीछे के BUS को ढुंढने मे कोई कठिनाई नही पडी । दो सिर वाले राक्षसों का एक सिर मुअम्मर गद्दाफी है तो दुसरा सिर उस बुस का है जो गद्दाफी का परम प्रिय हो या फिर ऐसा आदमी जो गद्दाफी की तरह का तानाशाही रवैय्या रखते हुए अय्याशी कर रहा हो और रहता इटली में हो । .... अरे वाह आप भी पहचान गये ... जी हां मबुस  का बुस बुर्लोस्कोनी ही है ... कैसे .. जरा उसके नाम के हिस्सों को अलग अलग करो .. बुर्लोस्-कोनी... फिर से कहो .. बुर्लोस् .... फिर से कहो ... बुस् ... हो गया हिज्जों में तैय्यार मबुस नामक दो सिरों वाला राक्षस । ... ।
                                          कहते हैं की जब दुनिया के सबसे बडे दुश्मन को अपने घर में छिपाना हो तो दुनिया के सामने उसे अपना सबसे बडा दुश्मन बताओ (पाकिस्तान नें ओसामा के साथ यही नाटक दुनिया के सामने दिखाया था )   तब मुझे समझ आया की क्यों बुर्लोस्कोनी गद्दाफी को अपना सबसे बडा दुश्मन बता रहा है । उसका बयान जब मैने पढा की गद्दाफी का बस चले तो वह मुझे अभी मरवा डाले तो मुझे गडबड लगी, क्योंकि दोनो की एक फोटो से मुझे उनके रिश्ते बडे मीठे लगे थे .।.. आप भी देखें ....
.................................................................................... ....................................................................................... ..................................................................................... ......................................................................................... ........................................................................................ ............................................................................... ........................इन तस्वीरों को देककर आप क्या कहेंगे । सबसे बडी बात है इन दोनो महानुभावों का व्यवहार । दोनो की भाषाओं में तानाशाही झलकती है । दोनो ही कानून की परवाह नही करते । दोनो को एशोआराम पसंद है । दोनो को खूबसूरत लडकियों का शौक है । वगैरह वगैरह ... अब आप ही सोचें की क्या मेरी खोज गलत है । अगर गलत लगे तो मेरे अगले लेख को जरूर पढ लिजियेगा ।

Monday, September 19, 2011

कांग्रेसियों भारत माता की रक्षा करो ।

इस तस्वीर को गौर से देखो और यदि कांग्रेसी हो तो सोचो की इस तस्वीर की विशेषता क्या है । नही समझ आया ... यहां सोनिया और राहुल आपस में गुफ्तगूं  कर रहे हैं ऐसा लगता है ना... यदि इन्हे कोई जरूरी बात करनी होती तो ये घर में भी कर सकते थे सार्वजनिक रूप से इस तरह की तस्वीरें जारी करने का क्या मतलब है ?  यदि आप  कांग्रेसी कार्यकर्ता हैं तो आपको बताया जाएगा की देश की समस्याओं पर गंभीर विचार विमर्श चल रहा है जबकि वास्तविकता ये है की राहुल सोनिया मैडम को वहां होने वाली बातों का इटली में अनुवाद बता रहे हैं । जी हां भारत देश के महान कांग्रेसी बंधुओं आपकी माननीया सोनिया गांधी को हिंदी तो छोडिये अंग्रेजी भी ढंग से आती है क्योंकि ये मात्र हाई स्कूल पास हैं । संसद में अपनी पढाई के विषय में दिये झूठे हलफनामे पर सोनिया गांधी संसद में माफी मांग चूकी हैं । अब आते हैं मुद्दे की बात पर- - - यदि आप कट्टर कांग्रेसी हैं तो जाहिर सी बात है की आपके पास कम से कम 2 एन.जी.ओ. जरूर होंगे .... उन एन.जी.ओ. को मिलने वाला पैसा कहां से आता है और आप तक कितना पहुंच रहा है उससे भले ही आपका कोई लेना देना ना हो लेकिन इस देश का बंटाधार होने के पीछे एक वजह ये भी है ।
                                              चलिये ये बात हटाएं क्योंकि इससे आपका पेट जुडा है .. हां तो बात हो रही थी सोनिया मैडम की ... क्या आप जानते हैं की उन्हे क्या बीमारी थी ? नही मालूम ... हां यही है सही जवाब ... दरअसल उन्हे डरने की बीमारी है सोनिया गांधी बांग्लादेश के दौरे पर गईं और 25 जुलाई को अचानक गायब हो गईं ... किसी को कोई खबर नही लग पाई की सोनिया कहां है ( सोचो जिस दिन मैडम के खिलाफ आप-हम मिल कर अपने देश का काला धन लाने के लिये एक जुट हो जाए और मैडम ऐसे ही गायब हो जाए तो कौन वापस ला पाएगा मैडम को...) जब मैने यह खबर पढा तो मुझे लगा की अन्ना हजारे की क्रांती से डरकर मैडम पहले ही गायब हो गई है लेकिन 2 अगस्त को एक छोटी सी खबर नें मुझे चौंका दिया ... खबर थी राजीव गांधी फांउडेशन द्वारा गुडगांव में 5 एकड जमीन का अवैध रूप से अधिग्रहण के विरूद्ध कोर्ट में मामला दर्ज ... अब मामला समझ में आया की मैडम को लगा कहीं अदालत नें उन्हे कोर्ट में हाजिर होने को कह दिया तो ?  बस फिर क्या था मैडम मिली सीधे अमेरीका के 5  स्टार अस्पताल में  ।
                                        इस तरह की खबरें भी हैं कि सोनिया स्‍वास्‍थ्‍य लाभ के लिए वील कॉर्नेल मेडिकल सेंटर या कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में भी दाखिल हो सकती हैं। यह दुनिया के आलीशान व नामी अस्‍पतालों में से एक है।  कोलंबिया यूनिवर्सिटी सेंटर में पांच सितारा होटल जैसी सुविधाएं हैं। सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ के दौरान यह सेंटर ऐसे आलीशान कमरे मुहैया कराता है जहां से हडसन नदी का नजारा दिखता है। यहां तीमारदारों के लिए विजिटर रूम की सुविधा है जो आम तौर पर अन्य अस्पतालों में नहीं होती है ।
                         मेरा ये बातें लिखने का उद्देश्य यह है की आम कांग्रेसी भी यह जाने की मैडम की सोच कितनी उच्च है । जिस तरह के घाटों की बात कह कर आम जनता पर महंगाई डायन का वार किया जा रहा है वह सब दिखावा है । दरअसल हम भारतीय दुनिया के सबसे अमीर देश के वासी है । जब हमारे मंदिरों के खाजनों को सरकार अपने कब्जे में कर रही है तो वह चर्च और दरगाहों की अकूत दौलत पर हाथ क्यों नही डाल रही है . हमारे सारे मंदिरों का चढावा अपने बाप की बपौती समझ कर सरकार इस्तेमाल कर लेती है मगर दुसरे धर्मों के पैसों को जिनसे वास्तव में आतंकवादीयों को व धर्मांतरण करने वालों को पनाह मिलती है उस धन पर सरकार कोई रूख नही बताती है । क्यों ... क्योकि किसी दरगाह, मजार या चर्च के पैसों की बात सोचना भी अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना होता है जिनके विरोध को सरकार सहन नही कर सकती ।
                          यह बात भारतीय मुस्लिम कांग्रेसियों को भी समझना होगा की सोनिया गांधी उस इटली देश की पैदाइश है जिसने दुनिया को माफिया दिया है । सोनिया के मन में भारत देश या यहां के निवासियों के लिये कोई दया श्रद्धा भाव नही है । वह आज भी इटली की ही परंपरा का पालन कर रही है इसका एक उदाहरण देखिये ----स्नातक की पढ़ाई के बाद राहुल ने प्रबंधन गुरु माइकल पोर्टर की प्रबंधन परामर्श कंपनी मॉनीटर ग्रुप के साथ 3 साल तक काम किया। इस दौरान उनकी कंपनी और सहकर्मी इस बात से पूरी तरह से अनभिज्ञ थे कि वो किसके साथ काम कर रहे हैं क्योंकि राहुल यहां एक छद्म नाम रॉल विंसी के नाम से कार्य करते थे। राहुल का नाम रॉल विंसी छद्म नाम नही है बल्कि सोनिया की बहन विंसी परिवार से है अनुष्का के पति वाल्टर विंसी हैं ।  प्रयंका बढेरा  की शादी रॉबर्ट वाड्रा से हुई, जिनसे उनकी मुलाकात उनके पारिवारिक मित्र ओत्तावियो क्वात्रोची के घर  पर हुई. उनके रेहन और मिराया दो बच्चे हैं ।
                                   आज हालात यह है भारत की सारी बडी मिडिया के कार्यकर्ता भले ही भारतीय हों लेकिन मालिक कोई ना कोई चर्च है । जैसे एंण्डियन एक्सप्रेस नें बोफोर्स से संबंधित कई बडे खुलासे किये यहां तक की वाल्टर विंसी को इटली में दी गई नकद रकम का भी खुलासा सबसे पहले इसी अखबार नें किया था लेकिन आज हालात यह है कि इण्डियन एक्सप्रेस समूह में चर्च एक्ट्स मिनिस्ट्रीज का काफी बडा हिस्सा है और चर्च सोनिया या उसके परिवार के विरूद्ध कोई बात नही छापता है ।
                                            मैं यह सब इसलिये लिख रहा हूँ क्योंकि हम आप सबसे पहले भारतीय हैं और पार्टीवादी बाद में । मैं आपसे हर पार्टी से अलग (भाजपा भी कोई दुध की धुली नही है) केवल राष्ट्रहित में देश के सभी कांग्रेसी भाइयों व सोनिया समर्थकों से एक ही अपील करता हूँ की इस देश की रक्षा और सुरक्षा की जवाबदारी हम पर ही है और सोनिया को समर्थन देकर हम अपनी ही जान से खिलवाड कर रहे हैं ।
                                             मेरा आप सभी लोगों से निवेदन है की एक बार ये सोच कर देखें की जब सोनिया के खिलाफ सारे सबूत मिल जाएँगे और हम अपने हिस्सा का धन मांगने सोनिया को तलाशेंगे लेकिन वह सारे परिवार के साथ गायब मिले तो हम क्या करेंगे ।

Friday, September 16, 2011

गैस के दाम बढ गए।

मैं कोई भविष्य वक्ता नही हूँ लेकिन जैसी परिस्थिति दिख रही है उसी के अनुसार यह खबर बना रहा हूँ । मुझे पता है कि इस पर फटाफट क्लिक लगेंगी । मेरा अनुरोध है की खबर को नजरअंदाज ना करें और सोचें की जब हम कोई गाडी खरीदते हैं तो रजिस्ट्रेशन के समय ही हमसे लाइफ टाइम रोड टैक्स ले लिया जाता है । अब जबकि हमने पूरा रोड टैक्स दे दिये हैं तो फिर जगह जगह टोल नाके पर हमसे सडक के नाम पर पैसे वसूलने का सरकारी औचित्य क्या है । ये कोई व्यंग्य नही सत्यता है की इसी तरह की कई ऐसी चीजें हैं जिन पर हमारा ध्यान नही जाता । हम आज भी नही सोच रहे हैं कि जब एक अन्ना के साथ करोडों अन्ना खडे हो सकते हैं तो वो अन्ना हमेशा खडे क्यों नही होते हैं सरकार के खिलाफ । आज हमारे ही पैसों से सारा देश चल रहा है इन मंत्रीयों संतरीयों को हम ही पैसे दे रहे हैं और ये लोग हमारी ही ऐसी की तैसी कर रहे हैं और हम बडे इत्मीनान से बैठे हैं की कब कोई पार्टी या अन्ना जैसा कोई व्यक्ति आए तो हम उसके साथ खडे हो जाए ं. क्यों नही हम खुद इस काम की शुरूआत करते हैं ताकी कोई एक आगे ना दिखे सब एक साथ दिखें जिससे किसी एक केजरीवाल या रामदेव बाबा या फिर बालकृष्ण जैसे लोग ही जन सेवा के नाम नजरों में आ गये तो सरकार उनके पीछे हाथ धो कर पड गई । हम उनकी उन कारगुजारीयों को ही सच समझने लगे जबकी भूल गये कि यही वो लोग हैं हैं जिन्होने हमें एक आंदोलन की राह दिखलाए हैं ।
                                    पेट्रोल के दाम बढ चुके हैं और अब रसोई गैस की बारी है । सरकार क्यों बढा रही है रसोई गैस के दाम इससे हमें कोई सरोकार नही लेकिन इस बात से सरोकार की जिस घाटे की बात करके सरकार ये दुष्कर्म कर रही है क्या वह घाटा सरकारी एयर लाइनों को बंद करके पूरा नही किया जा सकता । क्या वह घाटा राष्ट्रपति से लेकर एक सरपंच तक की तनख्वाह को कम करके पूरा किया जा सकता ।
                                    मैं लिखना नही चाहता लेकिन लिखना पड रहा है कि इमरजेंसी के समय इंदिरा सरकार नें राजस्थान के राजाओं की जो अकूत खजानों पर कब्जा जमाया था वह सारा खजाना कहां गया । देश का सारा काला धन कब वापस आएगा । अगर कोई बडा जन आंदलोन उठा और माइनो परिवार को देश छोडकर भागना पडा तो भारत देश के वासी अपना खजाना किससे वापस ले पाएंगे । सोनिया गांधी इलाज के नाम पर विदेश गईं क्या कोई इस बात को सोचने की जहमत उछाया की जब तक अन्ना का आंदोलन ठंडा नही पडा तब तक मैडम की तबियत खराब रही । उनका इलाज किस बीमारी का हुआ इसे उनका निजी मामला बता दिया गया लेकिन किसी नें कांग्रेस पार्टी से पुछा कि जब इस देश में सब कुछ सार्वजिनक है तो फिर उनकी बिमारी निजी कैसे हुई । उनकी हालत किसी भी तरह से बीमारों जैसी नही है । इसका मतलब ये है की दुसरे देशों की जैसी जनक्रांति से डर कर मैडम देश छोड कर वैसे ही भाग गई थीं । अगर वो डरी नहीं थी तो फिर बताया जाए कि उन्हे कौन सी बीमारी हुई थी जिसका इलाज हमारे देश में संभव नही है ।      
                                             चलो छोडो इन बातों को और सोचो की रसोई गैस के दाम बढनें के बाद आप क्या करने वाले हैं ।

Monday, September 12, 2011

भिलाई में सेक्स बनाम नक्सली..।

11 अगस्त को एक मामूली सी घटना घटी है । भिलाई पावर हाऊस स्थित अपना केसरी लॉज (सपना टॉकीज के पास) में महिला पुलिस सेल नें छापा मारकर  वहां से 6 लडकों व 7 लडकियों को हिरासत में लिया । छावनी थाना प्रभारी डी.एस. परिहार के अनुसार स्कूल - कॉलेज के छात्र छात्रा थे । देर रात धारा 151 के तहत जमानत पर लडकियों को छोड दिया गया व लॉज मालिक रंजन गुप्ता को जेल भेजा गया । ......। चलो कोई बात नही मामूली घटना है इसलिये इसे यहीं खत्म कर दिया जाए । केवल यहीं ऐसा हो रहा है ऐसा नही है पूरे भिलाई शहर का यही हाल है । शहर में आने जाने वालों का तो कोई हिसाब नही रख सकता लेकिन वो जो सालों से सेक्टर क्षेत्रों में या फिर झुग्गी बस्तीयों में आराम से रह रहे हैं उनका भी कोई पता लगाने वाला नही है । जबकि हकीकत ये है की इस संवेदनशील मामले में जितनी जवाबदारी पुलिस की है उससे कहीं ज्यादा यहां के रहवासियों की बनती है जो पुलिस को तो कोस देते हैं पर अपना कर्तव्य नही निभाते ।
                   .....अररररररर रूकिये जनाब नक्सली गाथा शुरूआत अब यहीं से  होती है .... रंगरेलियां मनाते पकडे गये लोग कौन थे, उनके पते क्या क्या थे इस बात की जानकारी लेने पर थाना प्रभारी नें बता दिये की उनके नाम पते नही बताये जा सकते ..... अब सवाल ये था की लडकियों के नाम पते या तस्वीर अखबारों में ना छापी जाये इस बाबत तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू है किंतु ये नियम कहां से आया की पुलिस को जो पते बताये जाएं वो उन्हे ही सच माने । खैर ... युवतियां डोंगरगांव (राजनांदगांव जिला), दल्ली राजहरा (राजनांदगांव जिला), दुर्ग व खैरागढ (राजनांदगांव जिला) की बताई गईं  और युवक - केशव साहू, लन्नू साहू (रायपुर), विवेक चतुर्वेदी (अहिवारा), मनोज नेताम (जामुल), अमीन मेनन, ( फरसगांव, बस्तर ) तथा दिल्ली का जसबीर सिंह का बताया गया है ।
                                                                अब देखें कहानी का मोड ... लॉज से 8  किलोमीटर की दूरी पर जमुल है जहां का निवासी मनोज नेताम बताया गया ।  भिलाई के उत्तरी सीमा पर स्थित जामुल तकरीबन 7-8 माह पहले तब सुर्खियों में आया था जब पुलिस नें दो नक्सलीयों को गोली मारकर ढेर की थी । जामुल के बाद अहिवारा आता है जहां से दुर्ग, रायपुर, कवर्धा, नांदगांव जाने के रास्ते हैं । भिलाई की पश्चिम दिशा पर नेशनल हाईवे पर बढते चलें तो दुर्ग के बाद राजनांदगांव आता है जहां से दल्ली राजहरा व खैरागढ पहुचने का मार्ग है । अब पूर्व की ओर चलें तो रायपुर है जहां से धमतरी कांकेर होते हुए फरसगांव का मार्ग है ।
                                                              खैर रररर ...। फरसगांव का एक नाम आया है अमीन मेनन ... फरसगांव से जानकारी लेने पर पता चला की इस नाम का कोई लडका वहां नही रहता है ...हां केशकाल के एक पत्रकार हैं अमीन मेनन जिनका उस लडके से कोई लेना देना नही है । जब थाना प्रभारी को ये जानकारी दी गई तो बजाये सत्यता पता करने के उन्होनें बात टाल दिये ।
                                                             अभी 8-10 पहले ही धमतरी के नगरी-सिहावा (जहां से आगे बढकर फरसगांव जाया जाता है ) क्षेत्र में नक्सली केंप से सोनिया, राहुल सहित कई  राष्ट्रीय और रमन सिंह सहित राज्य स्तर के लगभग हर नेताओं  की तस्वीरें बरामद हुई है जिससे ये अंदाजा लगाया जा रहा था की ये नेता नक्सली निशानें  पर हैं । भिलाई की जिस लॉज से इन्हे हिरासत में लिया गया था उस लॉज का रजिस्टर खाली था  औऱ इन लोगों के कोई नाम पते दर्ज नही थे । महिला सेल प्रभारी अंजना सिंह के अनुसार पिछले कई दिनों से इस लॉज में संदिग्ध गतिविधीयां चल रही थी जिसके बाद छावनी थाने के साथ मिलकर छापामार कार्यवही की गई ।
पीटा एक्ट की कार्यवाही क्यों नही की गई - इस बारे में चर्चा करने पर छावनी थाना प्रभारी व महिला सेल प्रभारी दोनों नें एक ही बात कहे की मैचिंग ना होने के कारण पीटा एक्ट नही लगाया जा सका । जबकि लॉज के दरवाजे को तोडकर लडकी को बाहर निकाला गया था तथा माउथ फ्रेशनर व कंडोम बरामद हुए थे ।
                                                                  चलो इस बात को छोड भी दें की लडके लडकी कमरे में क्या कर रहे थे तो भी ये बात किसी बडे खतरे से कम नही है की भिलाई शहर में नक्सली जिले के लोग इतनी आसानी से आवाजाही कर रहे हैं की पुलिस को भनक तक नही लग रही है । भिलाई स्टील प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तो बी.एस.पी. और सी.आई.एस.एस. तय कर लेती है लेकिन उन जगहों का क्या होगा जहां आम जनता की आवाजाही सर्वाधिक रहती है ।
                                                                   हम केवल इस बात से संतुष्ट नही हो सकते की नक्सली आवाजाही से हम पर कोई फर्क नही पडता क्योंकि हो सकता है योजना भिलाई में बनती हो और कार्यवाही बस्तर या राजनांदगांव में अंजाम दी जाती हो ।

Sunday, September 11, 2011

अमर सिंह निर्दोष और अन्ना भ्रष्टाचारी हैं ।

कभी कभी मेरे मन में ये खयाल आता है की हम देवता को देवता ही क्यों कहते हैं राक्षस क्यों नही, आदमी - आदमी ही क्यों कहलाता है जानवर क्यों नही कहलाता सांसदों को डाकू क्यों नही कहते हैं वगैरह वगैरह .... फिर मन में खयाल करना छोड कर मनन शुरू किया औऱ पाया की मेरा खयाल ही गलत है । हम इंसान है और हर चीज की आकृति देखने के लिये उसका नामकरण करके रखे हैं मसलन यदि आँख बंद करके सोचूं सोनिया... तो माँ लक्ष्मी की सूरत नही आती बल्कि सोनिया की ही तस्वीर दिखती है ।
खैर छोडो आगे की बात रखता हूँ ... इस छोटी सी धरती पर भारत नामक एक छोटा सा देश हुआ करता है जिसमें विभिन्न प्रकार के प्राणी विचरण करते हैं सूक्ष्मदर्शी से भी ना देखे जा सकने लायक सूक्ष्म भ्रष्टाचारी जीवों से लेकर दिग्विजय सिंह जैसे विभिन्न आकार, प्रकार और विचारों वाले प्राणीयों तकबहुत ही कम लोगों को यह ज्ञात होगा कि दिग्विजय को जल्द से जल्द संरक्षित प्राणीयों में रखने के लिये कांग्रेस एक संरक्षित पार्क बनाने वाली है जहां दिग्विजय सहित अन्य इकलौती खूबियों वाले प्रणीयों को रखा जाएगा जैसे वफादार कलमाणी के लिये उस पार्क में अलग से कटघरा रखा जाएगा । इस मुहिम को आगे बढाने व इससे मिलने वाले असीमित लाभ शीघ्र पाने के लिये इस आंदोलन को दिग्गी राजा के हाथों में सौंप दिया गया है क्योंकि उन्ही की अनेक विशेषताओं में से एक यह भी है कि वे संरक्षित प्राणीयों को जल्द सूंघ लेते हैं ( सोनिया, राहुल इसके उदाहरण हैं भाई) ।
अपने वफादारी गुणों के अनुरूप दिग्गी राजा चुपचाप बैठे हुए अमर सिंह को सूंघ रहे थे । अमर की गिरफ्तारी पर भी वे केवल चीभ निकाले हांफते बैठे रहे लेकिन जैसे ही एक हिरोइन का बयान आया की देख अमर का मुंह खुला तो तेरे मालिकों की भी खैर नही वैसे ही तुरंत कटकटाकर दौड पडे अमर सिंह को डुबने से बचाने के लिये । इसके पीछे दो कारण है एक दिग्विजय ही ये जानते हैं की अमर सिंह भी उन्ही की तरह संरक्षित प्रजाती में शामिल होने की दौड में हैं और दुसरा ये की अमर के प्रसिद्ध वचनों में से एक है की हम तो डुबेंगे , सनम तुमको भी ले डुबेंगे । अब आप ही बताओ की सनम तो सनम है चाहे वो अमर सिंह की हो या दिग्विजय की ... बस फिर क्या था दिग्गी राजा नें फरमान जारी कर दिया की अमर सिंह निर्दोष हैं क्योंकि उन्हे सनम का समर्थन है और अन्ना हजारे इसलिये भ्रष्ट हैं क्योकि उन्हे आर.ए.एस. नें समर्थन दिया हुआ है ।
अब दो ही रास्ते हैं की अपने खयाल का फिर से अध्ययन करूं और सोचूं की कहीं ऐसा तो नही की हमारे सरकारी शब्दकोष में निर्दोष का मतलब अपराधी और भ्रष्ट का मतलब इमानदार हो गया है और दुसरा  सरल रास्ता ये है की चादर तान कर सोता ही रहूँ ।

Wednesday, May 4, 2011

अब बस भी करो दिग्गी राजा ।

दिग्विजय बोले, 'ओसामा जी कई वर्षों से पाक में रह रहे थे। पाक आर्मी ने क्‍यों नहीं कुछ किया? अमेरिका ने मारने के बाद समुद्र में फेंक कर अच्छा नहीं किया। अपने देश में भी मुंबई हमलों में मारे गए लोगों को उनके धर्म के अनुसार दफन किया गया।'
                         इनके पवित्र विचार दर्शा रहे हैं कि क्यों अब तक कसाब जिंदा है क्यों अफजल गुरू सरीखे आतंकवादी इस इंतजार में है कि कब कोई संगठन कुछ लोगों को बंधक बनाने के बाद उनकी रिहाई की मांग करे और उसके बाद भारत के ये दिग्गी जैसे नेता उन्हे पाकिस्तान तक छोडने के बाद कहें कि हम पर हुये हमले के आरोपी पाकिस्तान हमें सौंप दे ।
                                    अमेरिका अगर यह नही बताता कि हमने पाकिस्तान पर हमला करके लादेन को मार दिया और उसकी लाश को समुद्र में दफना दिया है तो क्या तब भी ये यह बयान दे पाते । दरअसल इस समय दिग्विजय को या तो देशद्रोही या फिर पागल करार करके मार देना चाहिये ताकि भारतीय मुसलमानों में ओसामा को हिरो बनाने की इनकी कोशिश नाकाम हो जाये । हमारे देश के मुसलमान कट्टर हिंदुस्तानी हैं । मैं पहले ये बात नही समझता था किंतु मुंबई पर हुए हमले के बाद यकिनन कह सकता हूँ कि शत प्रतिशत भारतीय मुस्लिम केवल हिंदुस्तान के हित में सोचते हैं जबकि बांग्लादेशी और कुछ पाकिस्तानी मुसलमान ही हमारे देश की हवा खराब करते हैं । यहां दिग्विजय नें जो बयान दिया है उससे साफ जाहिर होता है कि ये भारत विरोधीयों का अब खुलकर साथ देते हुए अपने को यासिन मलिक सरीखे लोगों में सम्मिलीत देखना चाहते हैं ।
                                      तो चलो क्यों ना हम दिग्विजय को अलकायदा प्रमुख बनाने के लिये आवेदन भेजवा दें ..... आखिर लादेन की जगह खाली जो हो गई है और उसने तो अपनी औलादों को अल-कायदा से दूर रहने की हिदायत दे दी है ..... दिग्विजय जैसे मौका परस्तों के लिये ही तो अल-कायदा की गद्दी खाली है ।

Wednesday, April 20, 2011

बुरे फंसे अन्ना हजारे

आज अमर सिंह की पत्रकार वार्ता में शिकार भले ही शशि भूषण व प्रशांत भूषण हों  मगर निशाने पर अन्ना हजारे दिख रहे थे ।  अन्ना हजारे नें अपने अनशन के समय शशि भूषण को ईमानदार बताते हुए जन लोकपाल कमेटी में उन्हे उपप्रमुख की नियुक्ति दिलवाए थे ।
                     कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने शांति भूषण और उनके बेटे को नोएडा के पास जमीन दिए जाने पर सवाल उठाते हुए उनसे खुद ही लोकपाल बिल की ड्राफ्ट कमेटी से अलग हो जाने की मांग की है. नया विवाद इन खबरों के सामने आने के बाद उठा जिसके मुताबिक शांति भूषण को उत्तर प्रदेश सरकार ने 10 हजार स्क्वेयर मीटर जमीन आवंटित की जिनमें से हर एक की कीमत साढ़े तीन करोड़ है.   ताजा मामले के अनुसार - शांति भूषण के बेटे जयंत भूषण उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ नोएडा पार्क में मूर्तियां लगाए जाने के खिलाफ कोर्ट गए थे. उनका कहना है कि इसमें विवाद की वजह नहीं थी. नए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शांति भूषण ने कहा है, कुछ  "भ्रष्ट और महत्वपूर्ण"  राजनेता उन पर लगाए गए आरोपों के पीछे हैं क्योंकि कमेटी में उनके (शांति भूषण)  रहते "नरम" लोकपाल बिल तैयार करना मुमकिन नहीं होगा.
                              यहां एक दिलचस्प पहलू देखिये -  अन्ना हजारे नें सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखे कि 'पिछले दो दिनों में जिस तरह से सिविल सोसायटी के लोगों के खिलाफ खुलकर दुष्प्रचार किया जा रहा है, वह चिंता का विषय है।' उन्होंने कहा है कि ऐसा लग रहा है जैसे लोकपाल बिल की ड्राफ्टिंग प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए सारे भ्रष्ट लोग एकजुट हो गए हैं। दिग्विजय सिंह का नाम लिए बिना अन्ना ने कहा,'कांग्रेस के एक महासचिव बयानबाजी कर रहे हैं और मुझे लगता है कि इस तरह की बयानबाजी के लिए उन्हें पार्टी का सपोर्ट मिल रहा है। ज्यादातर बातें जो कही जा रही हैं वे गलत हैं। क्या आप (सोनिया) इन बयानों से सहमत हैं?'
                         अन्ना की च्ट्ठी के जवाब में सोनिया गांधी की ओर से पत्र आया ( सोनिया जी को लिखने की जरूरत नही पडती ) जिसमें कहा कि उन्होंने कभी भी कीचड़ उछालने और बदनाम करने की राजनीति पर यकीन नहीं किया और न ही वे ऐसे किसी भी प्रयास का समर्थन करती हैं। हजारे ने सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर कहा था कि कुछ कांग्रेस के नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़े गए आंदोलन की धार कुंद करने के लिए सुनियोजित तरीके से मुहिम चला रहे हैं , सोनिया ने कहा कि उन्हें (अन्ना हजारे को) उनकी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर नीयत पर शंका नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और घूसखोरी से लड़ने की सख्त आवश्यकता है। वह मजबूत लोकपाल के पक्ष में हैं, जो संसदीय प्रणाली के नियमों के अंतर्गत कार्य करे।
                                                       मजे की बात ये है कि सुर दिग्गी राजा के भी बदल गये लेकिन इन शातिराना चालों के बीच अमर सिंह प्रकट हुए और दिग्गी राजा की कही बातों को पत्रकार वार्ता में देश के सामने रख दिये । शब्द दिग्गी राजा के थे और मुंह अमर सिंह का था । अब अन्ना हजारे के साथ साथ सारा देश सन्न है कि उन्हे क्या जवाब दिया जाए क्योंकि कानून बनाने वाले लोग जानते हैं कि किसी भी बात को चाहे वो झूठी ही क्यों ना हो साबित करने में सालों लग जाते हैं ।
                                                         इस शातिराना चाल में नुकसाल केवल दो लोगों का होगा एक अन्ना हजारे का और दुसरा .... मेरे देश का । इसलिये अब हमें ये सोचना है कि अमर सिंह की कांग्रेसी जुबान को कैसे खारिज करवाया जाए ।





Sunday, April 17, 2011

नौटंकी बेद करो दिग्गी राजा ।

दिग्गी राजा उर्फ दिग्विजय सिंग बडे अफसोस के साथ आपके नाम के साथ का सम्मनसूचक शब्द जी को हटाना पड रहा है । जरा सोचकर देखो कि आप किस पद पर बैठ कर क्या क्या कह रहे हो । लगता है कांग्रेस महासचिव का पद देकर गांधी परिवार ने आपको खरीद लिया है । अपने पदमोह से बाहर निकलो दिग्गी राजा और अपनी तमाम नौटंकी बाजी बंद करते हुए जनता को साफ साफ बतलाओ कि तुम्हारी सरकार काला धन वापस लाने के लिये क्या कर रही है । वैसे भी जनता अंधी नही है और दिल्ली की सुगबुगाहट सारे देश में धीरे धीरे फैल रही है कि हमारे देश में शेयर बाजार और वायदा कारोबार के जरिये  बाहर के काले धन को धीरे धीरे निवेश किया जा रहा है और मुनाफे के रूप में उसे देश में ही सफेद किया जा रहा है ।
                                           रामदेव बाबा से पूछो कि दस साल में उनके पास इतना पैसा कैसे आया पर पहले आप बताएं कि सारे नेता करोडपति से अरबपति कैसे बन रहे हैं । आप ही बता दो कि आपको सोनिया राहुल की गुलामी में ही अपनी राजनीती क्यो सुरक्षित लगती है । जो आप कह रहे हैं मैं भी उन्ही बातों का जवाब ले रहा हूँ । हमारे देश के अधिकतर रक्षा  सौदे इटली से ही क्यों हो रहे हैं जबकि इटली कोई प्रख्यात हथियार उत्पादक देश नही है । अब बातों को लंबा ना करके केवल एक बात पुछुंगा कि आप ही बताएं कि काला धन कब आएगा ।

Friday, April 15, 2011

क्रूर प्रशासन की वेदी 4 लोगों की बलि ।

एक परिवार में माँ सहित तीन बहनों नें केवल इस लिये अपनी जिंदगी खत्म कर ली ताकि उनके परिवार का इकलौता बेटा अपने जीवन का शेष भाग सुखपूर्वक बिता सके । यह दर्दनाक घटना कोई अचानक ही नही घट गई बल्कि इस पूरे परिवार नें अपने को लगातार चार दिनों तक खुद को कैद  करते हुए, मीडिया के समक्ष अपनी पूरी बातें रखते हुए और सब कुछ होने के बाद भी अपनी मांगो को पूरा ना होते देखने के बाद जहर खाकर अपनी ईहलीला समाप्त कर ली । ( संलग्न विडियों में महिला विप्र समाज की ममता शुक्ला पूरे केस पर प्रकाश डालते हुए )
                                                  सेक्टर-4, सडक 34 , भिलाई में हुए इस ह्दयविदारक घटना में तीन अमानवीय पहलू उभर कर सामने आए हैं
1) भिलाई स्टील प्लांट का अमानवीय प्रबंधन 2) पुलिस प्रशासन की अदूरदर्शीता 3) राज्य शासन की घोर लापरवाही ।
1. भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारीयों ने 17 साल से काबिज पूर्व बीएसपी कर्मी  स्व. एमएल शाह जो बीएसपी के औद्योगिक संबंध विभाग में उप प्रबंधक थे कि तीन दिसंबर 1994 को रहस्यमय ढंग से रेल पटरी पर मृत मिले थे । शाह नें अपनी डायरी में उन लोगों के नाम लिखे हुए थे जिनसे उन्हे अपनी जान को खतरा था । उनकी मौत के बाद तात्कालिन नियमों के अनुसार मृतक के पुत्र सुनील कुमार को अनुकंपा नियुक्ति मिल जानी थी लेकिन बीएसपी के अधिकारी उसे नौकरी ना देकर केवल आश्वासन देते रहे । इसके बाद 1995 के नियमो का हवाला देते हुए बताया गया कि  अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान हटा दिया गया है जबकि सुनील के पिता की मौत 1994 में हुई थी और उस समय के नियमों के आधार पर सुनील की अनुकंपा नियुक्ति का आधार बनता था ।
                                    जब सुनील नें अपने परिवार को चलाने के लिये नौकरी के एवज में पचास लाख रूपयों की मांग की, जो की वर्तमान रेटिंग के आधार पर सही है  तो तत्काल बीएसपी प्रबंधन नें सुनील का परिवार बैकफुट पर जैसी खबरों का प्रचार करवा दिया ।
                     एक ओऱ बीएसपी प्रबंधन अपने ही मृत कर्मी के परिवार के लिये उसके अधिकार को  देने में असमर्थ बता रहा था तो वहीं दुसरी ओर लाखों रूपये खर्च करके हेमा मालिनी के बैले डांस का आयोजन सेक्टर-1 में किया जा रहा था जिसे मंगलवार को सुनील के परिवार द्वारा आत्महत्या कर लेने के बाद रद्द करा दिया गया  । अब बीएसपी प्रशासन अपने को बचाने के लिये सुनील को फंसाने का कुत्सिक षणयंत्र रच रहा है । उस पर अपने परिवार को आत्महत्या करने के लिये उकसाने सहित कई मामले बनाने की तैय्यारी चल रही है ।
2). - इस मामले में पुलिस प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही की गई । परिवार को केवल आश्वासन ही दिया जाता रहा । एस.पी. अमित कुमार द्वारा हमेशा यही कहा जाता रहा कि हम मामले को देख रहे हैं जबकि ऊपर सुनील का बयान सुनें । इसके अलावा सोमवार की रात को जब मैं सुनील के घर गया तो सुनील की माँ बताते बताते रो पडी की पुलिस वाले आकर कहते हैं कि मरने वाले लोग सीधे मर जाते हैं तुम लोगों के जैसे नौटंकी नही करते .. इसका क्या मतलब है । सुनील अभी जिंदा है और अस्पताल में है पुलिस उसका बयान लेने को आतुरता दिखा रही है लेकिन उन अपराधियों को नही पकड रही जिनके नाम सुनील के पिता ने अपनी डायरी में लिखे थे । अभी तक पुलिस नें बीएसपी प्रशासन के खिलाफ कोई अपराध दर्ज नही किया है जबकि बीएसपी प्रशासन पर मामला बनता है लेकिन इस मामले का सबसे दुःखद पहलू ये है कि पूरा पुलिस विभाग बीएपी की शरण में ही पडा हुआ है और जैसा बीएसपी अधिकारी चाह रहे हैं एस.पी. महोदय वैसा करवा रहे हैं । अभी तक सुनील को सेक्टर-9 हास्पिटल में रखा गया है जो कि भिलाई इस्पात संयंत्र का अश्पताल है और यहां के डॉक्टरों को तनख्वाह बीएसपी से मिलती है सो जाहिर है कि जैसा प्रबंधन चाहेगा वैसा ही वहां के डॉक्टर अपनी रिपोर्ट देंगे । जबकि एसपी अमित कुमार को चाहिये था कि सुनील को तत्काल सेक्टर9 हास्पिटल से निकाल कर दुर्ग के सरकारी अस्पताल में इलाज के लिये रखा जाता ताकि इलाज व रिपोर्ट निष्पक्ष बन पाती । हो सकता है कि सुनील नें सल्फास की कुछ गोलियां निगल भी ली हों लेकिन असप्ताल इस बारे में मौन साध ले तो एक हफ्ते बाद कौन सा डॉक्टर से बता पाएगा कि सुनील नें जहर खाया था या नही । जिन जिम्मेदारियों के लिये सुनील 17 साल से लड रहा था अब वे जिम्मेदारी सुनील पर नही रही तो क्या ऐसा नही हो सकता कि सुनील अब अपराध की राह  अपना ले।
3.- इस मामले में राज्यशासन नें भी अपनी लापरवाही दिखलाने में कोई कसर बाकि नही छोडी । भिलाई इस्पात संयंत्र को केन्द्र की जवाबदारी बताते बताते मुख्यमंत्री ये भूल गये कि यह संयंत्र छत्तीसगढ राज्य का गौरव कहा जाता है । सुनील का परिवार पाँच दिनों तक अपने को कैद करके रखे रहा और राज्य के किसी भी मंत्री तो छोडिये कलेक्टर तक नही पहुंचे । सुनील की मौत नही हुई लेकिन अपनी आँको के सामने पूरे परिवार को मृत देखकर उसकी क्या हालत हो रही होगी इससे राज्यशासन को कोई दरकार नही है । मुख्यमंत्री अपने राज्य के एक इस्पात संयंक्ष को संभाल नही पा रहे हैं जबकि यहां खुलेआम दुसरे राज्यों के लोगों को पैसे लेकर के नौकरी लगाई जा रही है । चाहे वह बीएसपी हो या फिर जे.पी. सीमेंट दोनो जगहों का यही हाल है । स्थानीय लोगों की उपेक्षा की  जा रही है औऱ आसपास के लोगों को सारा प्रदूषण झेलना पड रहा है । यहां पर एक जवाबदारी से मुख्यमंत्री अपना पल्ला झाड सकते हैं बाकि मामले में क्या कहेंगे उनसे पुछने वाला कोई नही है । धन्य है रमन सरकार ।

Tuesday, April 12, 2011

भिलाई में पूरे परिवार नें जहर खाया... चार की मौत

भिलाई 12 अप्रेल । स्टील प्लांट में अनुकंपा नौकरी नहीं मिलने से तंग आकर युवक समेत पूरे परिवार ने जहर खा लिया है । उन्हें गंभीर हालत में बीएसपी के सेक्टर-9 हास्पिटल में भर्ती कराया गया जहां युवक की  माँ और तीन बहनों की मौत हो गई है ।

                     सडक 34,  सेक्टर 4 निवासी सुनील कुमार ने पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए बीएसपी में आवेदन दिया था। लेकिन 17 साल बाद भी उसे नौकरी नहीं मिली। उसने बीएसपी प्रबंधन को कई चिट्ठी लिखी, पर कोई फायदा नहीं हुआ। चार दिन पहले उसने बीएसपी प्रबंधन द्वारा उसके घर की लाइट काटने तथा जबरन घर से बाहर निकालने के प्रयास के विरोध में स्वयं को परिवार सहित कैद कर लिया था । चार दिनों तक पूरा परिवार  कमरे से बाहर नहीं निकला था। बीएसपी प्रबंधन ने उसे मनाने की कोशिश की। ठोस पहल नहीं होने पर युवक ने अपने परिवार के चार सदस्यों समेत जहर खा लिया। पड़ोसियों ने उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया। चारों को आईसीयू में भर्ती कराया गया है ।
                                   अचानक हुए इस घटनाक्रम से प्रशासन भी सकते में आ गया औऱ आनन फानन मामले को दबाने के प्रयास होने लगे किंतु मिडिया द्वारा निष्पक्ष भाव से कार्य करने के कारण उन्हे अपना कुप्रयास बंद करना पडा । माँ मोहिनी साहू व तीनों बहनों रेखा शोभा औऱ शीला की मौत के बाद सुनील गुप्ता सदमें की हालत में है  और उसकी हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है ।
बस वादा करना भर जानती है हमारी सांसद ः- भाजपा सांसद सरोज पाण्डेय नें कल सुनील साहू से फोन पर चर्चा करके कहीं थी की मैं शाम तक पहुंच कर सबकुछ ठिक कर दूंगी और आपको इंसाफ मिलकर रहेगा  लेकिन शाम को स्वयं ना आकर अपनी  प्रतिनिधी सीता मिश्रा को उनके पास बात करने के लिये भेज दी जिससे पूरा परिवार बेहद आक्रोशित हो गया था और उसके बाद उन लोगों ने मंगलवार को बाहर आने की बात कहते हुए सभी से बातचीत बंद कर दिये ।
                           इस मामले में मैं स्वयं कल रात को सुनील से मिलने पहुंचा था । रात तकरीबन 9 बजे मैने उससे चर्चा की की आपको ऐसा करने से क्या मिलेगा तो सुनील की माँ रोते हुए कहने लगी की इस तरह से हमें जीकर क्या मिलेगा हालांकी थोडी देर बाद सुनील नें संयमित होते हुए मुझसे कहा कि डब्बू भाई कल सुबह आप जरूर आइयेगा ... लेकिन मेरा दुर्भाग्य की अचानक परिजन की तबियत ज्यादा खराब होने के कारण सुबह 7 बजे मैं रायपुर चला गया और अभी लौटते ही पूरे घटनाक्रम को लिख रहा हूँ ।
बी.एस.पी. का अडियल रूख - आज चार मौतों से घबराए बीएसपी के एम. डी.  वी. के. नें घटनाक्रम के प्रति दुःख जाहिर करते हुए कहा कि प्रबंधन सुनील को नौकरी देने को तैय्यार था लेकिन कल रात की चर्चा में सुनील नें मुझे साफ बताया था कि बी.एस.पी. के अधिकारी तो उल्टा उन्हे  आग लगा लेने की बात करते हैं और पुलिस भी परेशान कर रही है । 
इस मामले में वैशाली नगर विधानसभा के विधायक भजन सिंह निरंकारी महापौर निर्मला यादव नें रविवार को सुनील से मिलने के बहाने अपनी राजनीतीक रोटी सेंकने पहुंचे थे क्योंकि भजन सिंह का वह निर्वाचन क्षेत्र नही है वो केवल ये जताने पहुंचे थे कि उनके बगैर महापौर कुछ नही करती ।
राज्य शासन भी दोषी - क्या इस मामले में मुख्यमंत्री का कोई फर्ज नही बनता था ? राज्य शासन से केवल एक पुलिस मित्र ममता शुक्ला पहुंची थी वह भी कोर्ट कचहरी की भाषा में परिवार को समझाइश देकर चली गईं । आज इस दुःखद घटना के बाद सारे भिलाई शहर में मातम सा छा गया था जबकि अधिकारीयों के चेहरे की हवाइयां किसी बडे उपद्रव का संकेत का आभास दे रही थी ।
सेक्टर 9 हास्पीटल में आज जनता का रोष खुलकर सामने आ गया और पुलिस को भीड संभालने में खासी मशक्कत करनी पडी ।
                                         खैर .......       अब जनता की बारी है देखें वह इस मामले को क्या तुल देती है ।




Thursday, April 7, 2011

देश में बजा क्रांति का बिगुल

काम नही आई सचिन पर खेली गई रणनीती ।

जी हां मैं बिलकुल सही हूँ । जब तक विश्वकप चला रहा था सोनिया राहुल प्रधानमंत्री हर कोई अपने को क्रिकेट प्रेमी दर्शा रहा था । क्रिकेट की आड में सरकार बचती चली गई क्योंकि जनता का ध्यान विश्व कप पर था । विश्व कप खत्म होते ही इनकी योजना थी सचिन तेंदुलकर को  भारत रत्न देने के लिये  बवाल मचाया जाए और जनता सचिन को भारत रत्न दिया जाये या ना दिया जाए इस बहस में लग जाए तब तक आई.पी.एल. मैच चालू हो जाएंगे और इस तरह से फिर सरकार को एक दो माह तक राहत मिल जाएगी और तब तक तो जनता बहुत हद तक महंगाई और भ्रष्टाचार का मामला भूल जाएगी और अन्ना हजारे का पूर्व नियोजित अनशन फ्लॉप हो जाएगा । लेकिन इस जगह पर हजारे जीत गए । सरकार की योजना ध्वस्त हो गई और सारा देश एक नई क्रांति की याद दिलाता हुआ सडकों पर उतर आया । अब सरकार की जान सांसत में अटक गई है । वह इंदिरा की तरह इमरजेंसी नही लगा सकती क्योंकि अन्ना हजारे की मांग लोकपाल विधेयक बहुत ही मामूली सी मांग है लेकिन इसका प्रभाव बहुत ही व्यापक है ।
                                            अन्ना के समर्थकों ने उमा भारती को वापस भगा कर एक नई दिशा बतलाई की अब उसे किसी भी नेता का साथ नही चाहिये औऱ अब वह एक आम आदमी के साथ इस नई लडाई को लडेगी । कांग्रेस की सांस अटक गई है क्योंकि वह जानती है कि इस मामले मे सेना भी जनता के साथ है और पुलिस प्रशासन इन नेताओं से त्रस्त हो चुका है । सभी जगह इस आंदोलन को जिस तरह का व्यापक समर्थन मिल रहा है उससे यह अंदाजा लग चुका है कि अब जनता बरगलाने वाली नही है । इसका एक नमूना तब देखने को मिला जब हजारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल नें कपील सिब्ल को नोटिफिकेशन को लेकर करारा सवाल दागा । अरविंद केजरीवाल  के इस कथन पर कि प्रधानमंत्री के प्रेस को बयान देने से कुछ नही होगा हमें कानूनी तौर से नोटिफिकेशन चाहिये  से सारा देश उसका मुरीद हो गया और एक झटके मे केजरीवाल सचिन से बडे ओहदे पर दिखने लगे । जनता के सामने पहली बार ये सच्चाई आई की अभी तक प्रधानमंत्री के बयानों पर कोई कार्यवाही इसलिये नही होती थी क्योंकि वह केवल जबानी होती थी कानूनन कुछ नही होता था ।
                                        आज स्व. राजीव दीक्षित जी की बहुत याद आ रही है । उन्होने जिस आजादी बचाओ आंदोलन की राह जनता को दिखलाई थी वह आज साकार हो रही है । सचमुच हमें इसी तरह की आजादी चाहिये जिससे हम देश के घुनों को मार सकें ।
                    मैं आज सच्चे मन से राजीव दीक्षित जी के चरणों में श्रद्धा के फूल करते हुए ये सौगंध उठाता हूँ कि जब भी आवश्यकता होगी अपने खून का एक एक कतरा देश की क्रांति को समर्पित कर दूंगा ।

Wednesday, April 6, 2011

बिजली के खेल से किसानों की तबाही ।

पावर हब प्रदेश में पावर का खेल, बलौदा बाजार में ब्लड कैंसर के मामले बढे ।  

जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ, सरगुजा, अंबिकापुर जैसे वनाच्छादित जगहों पर सरकार नें पावर प्लांट लगाने की अनुमति क्या दी वहां के निवासियों का जीना मुहाल हो गया है । कोरबा में लैंको अमरकंटक पावर प्लांट के एक उदाहरण से आप सभी जगहों की स्थिति का आंकलन कर सकते हैं । मैं कल रात को इ क्षेत्रों का चार दिवसीय दौरा निपटा कर आया हूँ । इस प्लांट को शुरूआत में 300-300 मेगावाट के दो प्लांट लगाने से हुई थी लेकिन अगले 5 साल में इसने अपनी क्षमता 1960 मेगावाट कर ली है । इस कंपनी के कारनामें देखें - इसे पानी देने के लिये हसदेव नदी  पर एनीकेट बनाने का प्रस्ताव पास हुआ और कार्य मिला शांति इंजीकॉन को जिसके प्रबंधक स्थानीय विधायक के पुत्र हैं ।  एनिकेट बनाने के लिये शांति इंजीकॉम द्वारा कुदुरमाल गांव में पत्थरों के लिये जमकर ब्लास्टिंग की गई जिससे वहां के निवासियों के 150 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो गये । इसी जगह पर सतगुरू कबीर की मजार स्थित है जो इस विस्फोट से क्षतिग्रस्त हो गई है ।   ... एक ओर सरकार कबीर साहब के लिये बडे बडे आयोजन करती है वहीं मजार के क्षतिग्रस्त होने पर नजरअंदाजी की दोगली नीती से स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हुई है । दिसंबर से जनवरी तक अमीत जोगी द्वारा लगातार आंदोलन चलाया गया जिसमें 15 दिनों का आमरण अनशन भी हुआ तब कहीं जाकर कलेक्टर द्वारा शांति इंजीकॉम को ब्लासटिंग रोकने का आदेश जारी किया गया ।

                                           ये बात थी एक एनीकेट की          अब जरा लैंको अमरकंटक की कारगुजारी पर नजर डालें- यह कंपनी स्थानीय लोगों को रोजगार, पर्यावरण की कई योजनाओं, स्कूल, अस्पताल के साथ साथ किसानों को अधिकतम मुआवजा तथा परिवार के एक व्यक्ति को रोजगार देने जैसी लोकलुभावन बातों के साथ अपना काम शुरू किया । आज हालात ये हैं कि परिवार तो छोडिये स्थानीय लोगों को भी कंपनी रोजगार नही दे रही है । नदी से होकर खेतों को तीन मीटर गहरा खोदते हुए जो पाइप लाइन बिछाई गई उन खेतों के किसानों को जो मुआवजा मिला उससे तो वे खेत की मिट्टी भी बाहर नही फेंकवा पाए । कंपनी का कहना था कि हम तो केवल गढ्ढा खोद रहे हैं जमीन अधिग्रहित नही कर रहे हैं सो क्यों मुआवजा दें । आसपास के पूरे पेडों को काट दिया गया ताकि वाहन निर्बाध रूप से आना जाना कर सकें । वृक्षारोपण की कोई श्रंखला तैय्यार नही की गई जबकि केंद्रिय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार एक पेड के बदले न्यूनतम चार पेड लगाने का नियम है ।
                                           लगभग यह हाल सभी पावर प्लांटो का है । समस्या यहीं पर खत्म ना होकर तब शुरू होती है जब पानी की किल्लतें होना चालू हो जाती है । साफ पानी ना होने के कारण (जमीन में ब्लास्टिंग होगी तो क्या अमृत मिलेगा ) पीलीया और हैजा जैसी बीमारी तो आम है अब हाथी पांव भी इन बीमारीयों की दौड में शामिल हो गया है । सबसे चिंताजनक स्थिति बलौदाबाजार की है जहां लगातार बढते उद्योग , गिरते जलस्तर, घटते वन और बढते प्रदुषण के कारण ब्लड कैंसर की बीमारी तेजी से फैल रही है । इस छोटी सी जगह से 3 माह में 4 से 5 केस ब्लड कैंसर के आए हैं जिनमें से एक पत्रकार भी है जो पैसे ना होने के कारण मुंबई से वापस आ गया है
                                                    जन जागरण का एक अनूठा नजारा चांपा मे देखने को मिला । यहां के युवा अलग अलग दलों से संबंध रखते हैं किंतु पर्यावरण के मसले पर एक जुट होकर आंदोलन करते हैं । यहां पर कांग्रेस, भाजपा, एन.एस.यू.आई. और विद्यार्थी परिषद के सभी सदस्यों नें अपना एक अलग सर्वदलीय मंच बना रखें है और जब कभी स्थानीय मसले पर आंदोलन करता होता है तो सभी सदस्य इस एक मंच से अपना आंदोलन चलाते हैं । इसके क सदस्य आशईष चौधरी भी है जो बताते हैं कि किसी तरह से स्थानीय लोग राजनीती से दूर होकर अब अपने हित के लिये लड रहे हैं । ये लोग जनजागरण करते हैं और लोगों को हिदायत देते हैं कि किसी भी तरह के प्रदुषण होने की दशा में तत्काल सबको चेतावनी दें औऱ मजबूती से उसका विरोध करें ।
                                                  लेकिन इस दौरे पर  एक दुःखद पहलू ये भी दिखा कि प्रशासन और कंपनी के साथ साथ स्थानीय प्रिंट मिडिया भी आमजनों के हितों की अनदेखी कर रहा है ।

Thursday, March 31, 2011

गिरी बिजली, जोगी अब तेरा सहारा

शाबाश रमन सिंह जी । बहुत ही शातिराना चाल चल रहे हो आम जनता के साथ । पहले विपक्ष को अपने साथ मिला लिये फिर विपक्ष को आदिवासियों की ओर भिडा दिये और विद्युत नियामक बोर्ड की आड में बिजली दरों में 22 फीसदी तक की बढोत्तरी कर डाले । क्योंकि अब आपसे कोई कुछ पुछ तो सकेगा न ही क्योंकि आप तो बता दोगे कि भाई मैं तो चाँवल वाला बाबा हूँ भला बिजली से मेरा क्या लेना देना । सारा प्रदेश जानता था कि बिजली के दाम बढेंगे फिर भी सबने बढने का इंतजार किया किसी ने यह नही पुछा कि जब प्रदेश में सरप्लस बिजली उत्पादन हो रहा है तो राज्य के निवासियों को धूल गर्दा खिलाने के बाद अब बढी बिजली का पैसा क्यों वसूला जा रहा है । 24 घंटे लाइट रहना कोई उपलब्धी नही कही जा सकती क्योंकि ये काम जोगी शासन में हो चुका था रहा सवाल बिजली के दामों में बढोत्तरी का तो इसका कारण एक ही समझ पडता है कि प्रदेश के नेताओं को हराम के खाने की इतनी बुरी आदत पड गई है कि अभ वो हर जगह से पैसा खाना चाहते हैं । जोगी जी जिन्होने वास्तव में प्रदेश में एक बेहतरीन शासन कायम किये थे और बनियों को दूर करके आदिवासीयों और प्रदेश की जनता को मुनाफा दिलाते रहे थे उनके खिलाफ माहौल बना कर अब खुद बनियागिरी कर रहे हैं ।
                                             इस समय यदि कोई सही व्यक्ति हो सकता है जिसके बैनर के नीचे प्रदेश की जनता रमन सरकार को कटघरे में खडे कर सकती है तो वह निश्चित रूप से अजीत जोगी हो सकते हैं । मेरे इस कथन से कोई मुझे कांग्रेस समर्थक ना समझे इसलिये साफ कर देना चाहूँगा कि मैं एक पत्रकार होने की दृष्टि से केवल व्यक्ति का चुनाव करता हूँ जिससे आम जनता का हीत सध सके । मेरे कहने का अर्थ आप ये समझें कि प्रधेश में जो मुनाफाखोरी, भ्रष्टाचार चल रहा है उससे निपटने के लिये विपक्ष होता है लेकिन इश समय प्रदेश का विपक्ष सरकारी बोली मे चल रहा है इसलिये वर्थमान में प्रदेश के लोगों को एक ऐसे व्यक्ति का साथ चाहिये जिसके साथ मिलकर हम अपनी आवाज बुलंद कर सकें । यदि मैं और आप अकेले खडे होकर जनता के सामने चिल्लाएंगे तो स्वार्थी कहलाएँगे जबकि एक पदस्थ  व्यक्ति के कहने पर कार्यवाही होती है ।
              मुझे पूरा यकिन है कि जोगी जी इसे जरूर पढेंगे इसलिये मेरा उनसे निवेदन है कि आदरणीय जोगीजी छत्तीसगढ प्रदेश की भोली जनता को वह मार्ग बताएं जिसके द्वारा प्रदेश सरकार की मनमानी और बनियागिरी को बंद कराया जा सके । हर जगह भ्रष्टाचार अपना पैर पसार रहा है छोटे छोटे कामों के लिये रिश्वत मांगी जा रही है , कानून व्यवस्था बिगड रही है यहां तक की पुलिस विभाग भी असंतुष्ट है (निधी तिवारी की मौत पर कोई कार्यवाही नही हुई, दुर्ग में पार्षद के खिलाफ कार्यवाही होने पर थाना प्रभारी को लाइन में बैठा दिया गया जैसी कई घटनाएं है) । भाजपा के नेता अपना जीवन स्तर सुधारने के चक्कर में जनता को दिन हिन बना रहे हैं । इस बिजली की बढती किमत जनता को कहां ले जाकर मारेगी इसकी कल्पना व्यर्थ है । चांवल 2 रूपये किलो मिल रहा होगा लेकिन उसकी आड में 10 रूपये की बिजली थमा देना कहां का न्याय है । अतः आपसे निवेदन है कि इस मामले को ध्यान में रखते हुए किसी आंदोलन की रूपरेखा तय करें ।
                                                नेताओँ को तो मुफ्त में मिल रही है बिजली उनका इससे कोई लेना देना नही है । पहले तो घटिया मीटर दिये गये जो औसत से ज्यादा खपत दिखा रहे हैं और ऊपर ये अब किमत भी बढा रहे हैं ।
                                               और क्या लिखूं मन में भरी भडास के कारण कुछ समझ नही आ रहा है इसलिये अभी तो बंद करता हूँ फिर लिखूंगा ।

Monday, March 28, 2011

विश्वकप के कारण टिकी हुई सरकार

आखिर कांग्रेसनीत सरकार गिर क्यों नही रही है ... महंगाई आसमान छू ली, सारे मंत्रालय खरबों का घोटाला करके भी बेशर्मी से डटे पडे हैं, विकीलीक्स के अनुसार मनमोहन सरकार को बचाने के लिये अरबों की रिश्वत दी गई, खाद्य मंत्री उलजलूल भाषा में बात करते हैं, सीबीआई सहित सभी संस्थाएं सरकारी चक्की में उन्ही की भाषा में चल रही है , कानून लगातार धराशाही हो रहे हैं लेकिन फिर भी जनता खामोश है ... क्यों ? क्यों नही जनता का विद्रोह खुल कर सामने आ रहा है क्यों वह किसी बाबा के कहने पर चलना चाहती है, क्यों वह इस सरकार का कार्यकाल पूरा होने दे रही है ?  क्यों ?क्यों ? और आखिर में एक औऱ क्यों ?  क्या इसका जवाब आपके पास है क्यों ? ... मेरे पास तो है .... मेरा जवाब है कि सरकार इसलिये अपना कार्यकाल पूरा करेगी क्योंकि विपक्ष भी नाकारा और निकम्मा है । उनके नेता आडवाणी को प्रधानमंत्री की गद्दी के अलावा कुछ नही दिखाई दे रहा है । दरअसल विपक्ष इस इंतजार में है की जनता के बीच से कोई आवाज उठे (जैसे बाबा रामदेव) तो तुरंत वह अपनी बंदुक उसके कंधे पर रख दे ताकि उनकी कमजोरी को कोई सीधा निशाना ना बना सके ।                                                              इसके बाद दुसरा कारण है मेरा परिवार ... मैं अपने परिवार को छोडकर फिलहाल कहीं नही जा सकता इसका नुकसान भी मुझे ही उठाना पड रहा है । तीसरा कारण है वर्ल्ड कप का होना .. क्योंकि हमारे देश के सारे युवा इस खेल में इतने आलसी बने रहते हैं कि उन्हे देश दुनिया से कोई मतलब नही रहता । वैसे ये कहना अतिश्योक्ति नही होगी की वर्ल्ड कप के कारण सरकार बची हुई है । मनमोहन नें भी समय का फायदा उठाते हुए जनता का ध्यान पाकिस्तान पर लगा दिये हैं । भोली भाली जनता को क्या मिलेगा इससे स्वयं जनता को कोई लेना देना नही है लेकिन बस ... चले हैं सब क्रिकेट के पीछे मानो वही भ्रष्टाचार को खत्म कर देगा ।                                               चलो अब निपटने दो विश्वकप को फिर देखते हैं जनता खाली होने के बाद क्या करेगा । जीते तो शायद सरकार बच जाएगी वरना जनता खिडालियों की भडास जनता इसी सरकार पर निकाल देगी । 

Tuesday, March 22, 2011

नकलचोट्टा हरि भूमि .. हाहाहाहाहाहा

http://119.82.71.95/haribhumi/epapermain.aspx?queryed=9&eddate=3%2f19%2f2011  अरे भाई आप कौन हैं मैं नही जानता पर आपको धन्यवाद देना चाहूंगा कि आपने एक मरियल सुगड्डे से ब्लॉगर को धन्य कर दिये । इससे हम ब्लॉगरों को बडी हिम्मत मिली की चलो किसी राष्ट्रीय स्तर के प्रादेशिक अखबार नें अपने राजधानी एडिशन के मुखपृष्ठ पर  जगह तो दी । लेकिन भाई छापने से पहले मुझसे संपर्क कर लिये होते तो मैं आपको और भी बेहतर जानकारी दे देता । आपने मेरे ब्लॉग की हुबहु कापी तो कर लिये पर कई बातों को नजर अंदाज कर गये मसलन आपने पृष्ठ क्रमांक 48 को नास्त्रेदमस की पुस्तक का पृष्ठ समझ लिये जबकि मैने तो अपनी उस पुस्तक का पेज क्रमांक 48 का उल्लेख किया था जिसकी प्रेरणा से मैने उस लेख को पूरा किया था । हे मेरे हितचिंतक नकलचोट्टे जब आपने मेरे ब्लॉग की कापी किये तो आपको मेरा निवास भी देख लेना था कि मैं कहां का रहने वाला हूँ । चूंकि ये अखबार मैने खरीदा नही (मुफ्त मिलता है भाई .. ) इसलिये मुझे कोई कोफ्त नही हुई मुझे लगा जाने दो इतने अखबार आते हैं एकाध खबर अपनी भी लग गई तो क्या हुआ । धन्यवाद आपका जो आपने मेरे ही शहर में मेरी खबर को पहुंचा कर प्राथमिकता दे डाली आशा है भविष्य में इसी तरह से अपनी नकलची प्रक्रिया को बरकरार रखने में कामयाब होते रहेंगे और हम मासूम से ब्लॉगरों का हौसला बढाते  रहेंगे ।... आपकी असीम अनुकंपा का सदैव आकांक्षी ... (नाम क्यों लिखूं .. )

Thursday, March 10, 2011

Check out तीसरा विश्वयुद्ध शुरू – नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पूर्णता की ओर « ispat ki dhadkan

Check out तीसरा विश्वयुद्ध शुरू – नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पूर्णता की ओर « ispat ki dhadkan

तीसरा विश्वयुद्ध शुरू - नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पूर्णता की ओर

मैं जो लिख रहा हूँ वह कोई आजकल की लिखी हुई किताब से नही है बल्कि 14 दिसंबर 1503 को फ्रांस में जन्मे नास्त्रेदमस की लिखी भविष्यवाणी पर आधारित  पुस्तक से  पढकर लिख रहा हूँ ।
                                      नास्त्रेदमस की दुर्लभ भविष्यवाणी नामक इस पुस्तक के अनुवादक अशोक कुमार शर्मा हैं । मैं इस पुस्तक को पढ रहा था कि इसके पृष्ट क्रमांक 48 पर निगाह पडते ही मैं सन्न रह गया इसमें लिखा है "एक पनडुब्बी में तमाम हथियार और दस्तावेज लेकर वह व्यक्ति इटली के तट पर पहुंचेगा और युद्ध शुरू करेगा । उसका काफिला बहुत दूर से इतालवी तट तक आएगा "
                              अब इसके आगे की लाइन पर गौर फरमाएँ -  अगर विश्व मानचित्र को ध्यान से देखा जाये तो इटली के तट की ओर आने के लिये सबसे उपयुक्त रास्ता समद्र मार्ग ही लगता है । आधुनिक युद्धों में किसी भी देश पर मिसाइल तथा विमानों से आक्रमण करना तो संभव होगा नही । फिर पनडुब्बी द्वारा समुद्र के भीतर-भीतर होकर एक दम किसी देश पर हमला कर देना आसान भी  है और कम जोखिमभरा भी । अपने ही देश में दुश्मन पर अणु बम भी नही चलाया जा सकता । इससे मुकाबला सैनिको के बीच होगा न कि तकनीक के बीच ।
                                                        इसके बाद की लाइनों ने ही मेरे होश उडा दिये इसमें साफ साफ लिखा गया कि - इटली के चारो ओर मित्र राष्ट्र हैं मगर कुछ ही दूरी पर लगभग एक हजार किलोमीटर के क्षेत्र में लीबिया, अल्जीरिया, मिश्र, सउदी अरब, तुर्की और इस्राइली तट हैं । इनमें से कौन सा देश युद्ध शुरू करेगा अनुमान लगाना कठिन है मगर पश्चिमी समीक्षक यह संदेह करते हैं कि लीबिया यह कारनामा कर सकता है ।
                                     अब इसे पढने के बाद आप बतायें कि हाथों को लिखने से कैसे रोका जा सकता है । चाहे जैसी भी समीक्षा की की गई हो लेकिन यह बहुत ही सटीक भविष्यवाणी है ।  इन भविष्याणीयों में और भी कई बातें जुडी हुई है मगर वर्तमान में जिस तरह से वातावरण बन रहा है उसमें अमेरिका- रूस का गठबंधन एवं पूर्व में चीन- अरब गठबंधन बनने की आशंका बताई गई है । अभी हाल ही में इरान नें अमेरिका को लीबिया में दखलंदाजी करने से मना किया है । लेकिन ऊपर जिस तरह से पनडुब्बी की बात आई है उससे तो यही लगता है कि अमेरिका मित्र देशों के साथ मिलकर लीबिया को नो फ्लाई जोन में तब्दील करवा सकता है जिसके बाद गद्दाफी के पास पनडुब्बी के अलावा कोई दुसरा विकल्प नही बचेगा । 
                          अभी अभी की खबर है  -     समाचार चैनल 'अल जजीरा' के मुताबिक रास लानूफ शहर के ऊपर लड़ाकू विमान चक्कर लगा रहे हैं, जबकि विद्रोही विमानों का अपना निशाना बना रहे हैं। यानि की मैं इस खबर को लिख रहा हूँ और भविष्यवाणी का समय पास आता जा रहा है । इसके अलावा इसमें जिस तरह से विश्व के नेताओं की स्थिति जाहिर की गई है वह इस समय बिल्कुल सही स्थान पर है जैसे - तीन ओर  जल से घिरे देश में  एक नेता होगा जो जंगली नाम वाला होगा (इसकी व्याख्या इस प्रकार की गई है की भविष्य में कोई सिख(सिंह ) भारत मे प्रधानमंत्री पद पर बैठेगा ) वर्तमान में मनमोहन सिंह इसी पद पर हैं , एक देश मे जन क्रांति से नया नेता सत्ता संभालेगा ( मिश्र में हो चुका है )  नया पोप दुसरे देश में बैठेगा (वर्तमान के पोप फ्रांस में रहते हैं ) मंगोल (चीन) चर्च के खिलाफ युद्ध छेडेगा ( चीन नेंं अमेरिका को लीबिया से दूर रहने की सलाह दे डाली है ) इसके अलावा और भी कई चीजें ऐसी होने वाली है जो कुछ ही दिनों में पूरी हो सकती है । जैसे - छुपा बैठा शैतान अचानक बाहर निकल आएगा ( ओसामा या अन्य बडा आतंकवादी समाने आ सकता है) नया धर्म (इस्लाम) चर्च के खिलाफ भारी मारकाट करते हुए इटली और फ्रांस तक जा पहुंचेगा । 

                                                   उफ्फ्फ्फ्फ ना जाने और भी कितनी बातें है जिन्हे पढने से ही सिहरन हो जाती है । लेकिन जो नियती है वह तो निभ  कर ही रहेगी । 

अर्जुन सिंह मर गये

अर्जुन सिंह भी मर गये  ?  अब आप कहेंगे कि मै बजाय निधन या पंचतत्व में विलिन जैसी सभ्य बोली को छोडकर मर गये जैसी भाषा में क्यों पूछ रहा हूँ ... इसका कारण है मेरा अब भारतीय कुप्रथाओं का विरोध .. हमारी एक बहुत बडी कुप्रथा है कि मरने वाले के बारे में हम कोई चर्चा नही करते हैं उसकी सारी बुराईयों को छोडकर केवल अच्छाईयों की बातें करते हैं । चलो उस परंपरा का निर्वहन करते हुये सबसे पहले उनकी तारिफ करता हूँ ... ये एक ऐसे व्यक्ति रहे है जिन्होने देश के लगभग हर बडे पद पर कार्य किये हैं । इनकी सबसे बडी उपलब्धी पंजाब से आतंकवाद को खत्म करना था । १४ मार्च १९८५ को उन्होंने पंजाब के राज्यपाल के पद का दायित्व सभांला। २५ जुलाई १९८५ को अर्जुन सिंह जी उस दायित्व को पूरा करने में सफल हो गये जिसके लिये उन्हें पंजाब भेजा गया था। उस दिन हरचरण सिंह लोगोंवाल ने प्रधानमत्री श्री राजीव गांधी से मुलाकात की और पंजाब समझौते पर हस्ताक्षर किया।  ..... और यदि इन्होने गर्वनर के पद पर रहते हुये गिल को खुली छूट नही दिये होते तो आज भी हम पंजाब को जलता देखते रहते । ... चलो हो गये खुश ... अब बतायें इन्होने क्या किये .... चुरहट लाटरी कांड याद है कि भूल गये कि किस तरह से मुख्यमंत्री पद न्यायालय के आदेश पर इन्हे छोडना पडा था । ... चलो जाने दो यार मर गये को अब क्या उखाडना 
                      लेकिन अब मरने के बाद क्या होगा । अर्जुन के काले करोडों रूपयों का क्या होगा (अब ये मत कहना कि उनके पास कुछ नही होगा या वे इमानदार थे  , भाई जैन हवाला कांड की डायरी के नामों को याद करो)  एंडरसन के साथ हुए मौत के सौदों का क्या होगा,   आरक्षण जैसे बेतुके और देशद्रोह पूर्ण निर्णयों पर सहमती देकर इन्हे क्या मिलेगा .... जानते हैं क्या मिलेगा केवल एक तमगा मेरी ओर से ... ये कि इन्होने केवल स्वार्थ की राजनीती किये इन्हे देश की कभी कोई परवाह नही रही और ना ही मान सम्मान की .. ये उन मोटी चमडी वालों में से एक हैं जिन्हे आप कुछ भी कह दो कोई फर्क नही पडता क्योकि उनका जवाब होता है .. क्या हुआ .. गाली ही तो दिया ना .. पैसे ले गया क्या .......
                               लेकिन उनके मरने के बाद क्य होगा ये इस देश के नेताओं को बताना चाहूंगा कि देखो किस तरह से इनकी  मौत अमावस को हुई है ,, अमावस को प्रेत लोक के अलावा हर लोक के दरवाजे बंद रहते हैं और प्रेतात्माएं घुमती रहती है ...... अब जबकि अर्जुन मरे हैं तो उनकी आत्मा तो निकली ही होगी और इस समय गैस कांड में अकाल मौत मरे सारे लोग उन्हे बडे आराम से अपने पास बैठा कर सेंक रहे होंगे । उन्हे अपने कर्मों को भुगतने के लिये रोज एक नया जन्म लेना पडेगा कभी वो चींटी बन कर पैदा होंगे तो कभी बिल्ली के घर ... हर जन्म में वो अपने पापों को याद किया करेंगे कि मैने अपने दुर्लभ मानव शरीर का किस तरह से दुरूपयोग किया था .. मैने अपने जिन नाती पोतों को ध्यान में रखकर पाप से पैसा कमाया वो सब अब गलत संगत में पडकर उन पैसों को उडा दिये हैं और किस तरह से एक एक कर बदनाम मौत मर रहे हैं । 
                                            हे इस लेख को पढने वालों जरा गौर से पढो सोचो और समझो इस कथा को  ........ एक राजा था । उसका देश पूरे दुनिया का तीसरा सबसे बडा देश था और वहां की प्रजा बडी धार्मिक और कर्मठ थी । जनता ईमानदारी से अपना काम करती थी किंतु वह अपनी प्रजा पर कैसे भी करके टैक्स वसूली जारी रखता था जिन पैसों से जनता का भला हो सकता था उनसे वह अपना गुप्त धन बढाता था । वह अपने पैसों को दुसरे देशों में भी जमा करके रखता जाता था ताकि विपत्ति आने पर वह उस धन का उपयोग कर सके । एक दिन उसके अत्याचारों से त्रस्त जनता नें विद्रोह कर दिया और राजा के संभलने के पहले ही उसे उसके पूरे परिवार सहित मार डाला । 
                                                   राजा नें अपना जो धन दुसरे देशों में रखा था उन्हे मुफ्त में पाकर दुसरे देश समृद्ध होते गये ।  जिस धन को परिवार के लिये गडा कर रखा था वह सारा धन मिट्टी में दबता चला गया लेकिन राजा की आत्मा अपने धन को पाने के लिये भटकते रही । वह आज भी  कैसे भी करके अपने धन को वापिस पाना चाहता है ... अब वो चाहता है तो चाहे लेकिन आप सोचकर देखें कि अगर उसे धन मिल भी जाता है तो क्या वह अपनी आत्मा के साथ ले जा सकता है . .... नही.... क्योकि धन का उपयोग आत्मा के लिये नगण्य है .... आत्मा केवल कर्म के आधार पर ही दिव्यात्मा बन सकती है । धन का लोभ हर बार आपकी आत्मा को प्रेतलोक में लेकर जाता है । इसलिये पापों को छोडो और देश धर्म की ओर लौटो । और हां ये बातें  केवल भारतीय विचारधारा वालों के लिये है इटालियन विचारधारा के लिये ही तो कहानी लिखा हूँ ।

Wednesday, March 9, 2011

सदगुरू कृष्णायन जी का अलौकिक प्रवचन/ sadguru krishnayan ji maharaj

स्वर्ग नरक से परे है एक और लोक

                     दिनांक 4 मार्च 2011  को सदगुरू कृष्णायन जी महाराज के बरईपुर, बनारस स्थित आश्रम में महात्मा माधवदास जी के सतलोक गमन हेतू आयोजित जलवा चौकी (चौका आरती का वृहद रूप) कार्यक्रम मे उपस्थित सदगुरू के पुत्रों व आचार्यों ( सदगुरू शिष्य नही पुत्र बनाते हैं )  नें जिस अलौकिक दुनिया का भ्रमण किये वह केवल उन्ही की आत्मा बता सकती है । स्वर्ग, नरक से परे जिस सतलोक की बात गुरूदेव नें बताये वह दिव्य गुप्त विज्ञान (डिवाइस सिक्रेट साइंस) के साधकों के लिये वरदान साबित हुई । गुरूदेव के इस प्रवचन की कोई व्याख्या नही की जा सकती । केवल शांतचित्त के साथ देखिये और सुनिये ।