Thursday, December 5, 2013

छत्तीसगढ मे बदलेगा राज- कारण है ज्ञात ।

देश की पांच विधानसभा चुनाव मे अंतिम भाग के रूप मे दिल्ली वासियों ने अपना योगदान दिये हैं । 5 बजे चुनाव का दौर खत्म होते ही सभी चैनलों ने ताबडतोड एक्जिट पोलों की बरसात कर दिये । किसी ने भाजपा को 4 राज्यों मे जिताया तो किसी ने उलझन मे डाल दिया । लेकिन हम तो ठहरे छत्तसीगढिया सो बात करेंगे अपने छत्तीसगढ की । छत्तीसगढ मे कई महान विभूतियां है जो परिणाम को स्पष्टतः भाजपा के पक्ष में बता रहे होंगे तो कुछ कांग्रेस को 70 सीटों पर जीत दिलाने की बात करेंगे और कुछ होंगे जो कहेंगे हमारे बिना सरकार नही बनेगी । तो ... जैसा की भाजपा को जिताने वाले कहते हैं कि भाजपा की सरकार बन रही है तो उनकी बातें आगे करना ही बेमानी है क्योंकि वर्तमान मे उन्ही की सरकार है इसलिए हम उन्ही की सरकार बनेगी मान लेते हैं ।
कांग्रेस के लोगों ने तो कांग्रेस को 70 सीटों पर जीतने का दावा ठोंक दिये हैं तो उनकी बात करना भी व्यर्थ है । ..। तो अब बचते हैं हम जैसे वो लोग जो कहते है कि हमारे बिना सरकार नही बनेगी .... तो किस कारण से कहते हैं ये बात ...
  •  सबसे पहले बात करते हैं प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह जी की - ये भाजपा का राज पाठ 10 सालों तक संभाले हैं और जनता के बीच चाऊर वाले बाबा बन कर अवतरित हुए । इनके राज मे प्रदेश का विकास हुआ है , सडकों का विस्तारीकरण हुआ , प्रदेश के सभी जिलों का विद्युतिकरण हो गया , प्रदेश मे विकास की बयार बहने लगी , गरीबों को सस्ते में अनाज उपलब्ध हो गया । राजनांदगांव से चुनाव लड रहे हैं ।
 रमन सिंह भी हार सकते हैं - रमन राज पहले 5 सालों तक तो ठीक ठाक रहा लेकिन इसके बाद राज्य के बुरे हाल होने शुरू गए । भाजपा के कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया गया , उन्हे कमाई के लिये कोई अतिरिक्त साधन नही जुटाने दिये गए जबकि पार्टी पद मे बने लोगों ने अपनी संपत्तियां कई गुना बढा लिये । ऊर्झा मंत्री  होते हुए इन्होने छत्तीसगढ विद्युत राज्य मण्डल का विभाजन करके जो कंपनी बनाए वह घाटे मे चलने लगी क्योंकि सरकारी कर्मचारियों से किये जा सकने वाले कामों को निजी ठेकेदार के आदमी करने लगे । हर ठेके मे घोटाले की खबरें बाहर आने लगी, सस्तें मे अनाज मिलने से मजदूरों का अभाव पैदा हो गया  जिससे हर वर्ग दुःखी हो गया है । ये सब तो ठीक था किंतु जिस तरह से गरीब आदिवासीयों को नक्सली बनाने की होड का प्रचलन शुरू हुआ वह रमन सरकार को ले डूबा । आज हर आदिवासी जो जंगल को अपना समझता है डर रहा है कि कहीं उसे नक्सली ना बना दिया जाए । रमन सिंह की विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप मे अलका मुदलियार खडी हैं जिनके पति उदय मुदलियार को दरभा काण्ड मे नक्सलियों ने मार दिया था । अलका मुदलियार के साथ महिलाओं की सहानुभूति लहर खडी है , राजनांदगांव का व्यापारी वर्ग राजनांदगांव के फोर लेन ब्रिज के अब तक अधुरे निर्माण से खासा नाराज है क्योंकि उसकी वजह से उन्हे पिछले 4 सालों से धूल और अव्यवस्थित ट्रैफिक का सामना करना पड रहा है । रही सही कसर अटल बिहारी बाजपेई जी भतीजी करूणा शुक्ला ने वहां पहुंच कर पूरी कर दीं और महिलाओं तथा ब्राह्मण वोटों पर अच्छा खासा प्रभाव डालते हुए अलका मुदलियार का पक्ष मजबूत कर दीं है ............  आगे की बात 8 के बाद ।

                                छत्तीसगढ मे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से योजनाबद्ध होकर काम किए है वह सराहनीय है ।  जनता के बीच मे नरेन्द्र मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री का चेहरा साबित करके विधानसभा चुनाव मे उन्होने परिवर्तन की अहम् भूमिका निभा दिये । लेकिन एक व्यक्ति ऐसा है जिसने सत्ता परिवर्तन के लिए साम- दाम- दण्ड- भेद का एकदम सही और सटिक इस्तेमाल करके अभी से बाजी अपने हाथों मे  रख लिये हैं ...वह हैं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ......
                                   अजीत जोगी की एक जबरदस्त पकड ये है कि इनके समर्थक हर दलों मे बराबर भागीदारी बनाए हुए हैं । इनकी क्षमता इतनी जबरदस्त है कि यदि भाजपा को 46 सीटें अब मिलती हैं और कांग्रेस को 41 तो भी अजीत जोगी कांग्रेस की सरकार बना सकते हैं । यदि हम अंदरूनी सूत्रों की मानें तो भाजपा के 5 विधायक वो जीतरहे हैं जिन्हे अजीत जोगी का संरक्षण प्राप्त है यानि की सरकार बनने या बिगडने का समीकरण वो 5 विधायकों से भी संभव हो सकता है । इस विषय मे सोचने पर राजनितिक पंडित दल बदल कानून का हवाला देने लगेंगे लेकिन उन्हे समझाने के लिए इतना ही काफी है कि कानून के  जानकार उसकी कमियों को जानते हैं और उसे अमल मे लाते । दे दिया हूँ ..और दे दिया ..... कानूनी परिभाषा बदल जाती है ।

Sunday, October 13, 2013

हे राम तुम कब आओगे ।

और पिछले हजारों बरसों की तरह रावण आज भी अपनी जगह पर है ।
 वैसे ही निर्लज्जता से भरी हंसी ,
 मनमानी से तैय्यार खुद के नियम कानून, 
बाली के जैसे अपने से बलवान वीरों को अपना मित्र बना कर रखने की कला,
 साधु संतो को प्रताडित करने के लिये खर-दूषण और सूर्पनखा जैसे रिश्तेदार, अपनी सुख सुविधा के लिये दुसरे की सीता का हरण यही तो कर रहा है आज का रावण । लेकिन आज का  रावण अकेला नही है । यह अपने साथ सैकडों बाजू लेकर काम कर रहा है । पहले जो  काम अकेला एक रावण करता था उस काम को आज अलग अलग जगहों पर अलग अलग तरिके से रावण ही कर रहा है नाम बदल कर । कभी वह राम सिंह के रूप मे होता है तो कभी अजमल कसाब के जैसा दिखता है , कभी वह राघव जी की तरह काम करता है तो कभी आसाराम के भेष मे सबके बीच रहता है ।
                                                    रावण ने अपने युग को पूरी तरह से ससम्मान जीया था और अंत काल मे उसने राम को भी सम्मान दिया था । अपने गुरू महादेव शिव के लिये वह अपने ही शत्रु राम के पास जाकर रामेश्वरम् मे रेत के शिवलिंग को बांध कर अप्रतिम स्वरूप दे देता है । रावण सीता का हरण करने के बाद भी अशोक वाटिका जैसी सार्जनिक जगह पर रखता है ताकि बंद कमरे का आरोप कोई उस पर ना लगा दे । 
रावण ने अपनी नगरी को सोने की बना कर रखा था ताकि उसके वैभव से लोग त्रैलोक्य का राजा समझ सकें । वह भरे दरबार मे विभिषण को बडे भाई की हैसियत से केवल भगा देता है वध नही करता है वहीं अपनी एकमात्र पत्नि मंदोदरी को भी सस्मान राजरानी का दर्जा ही मिला रहता है । रावण के राजमहल मे ढेरों दास दासियां थीं किंतु उसका कोई हजारों रानियों वाला रनिवास नही था । रावण अपने पुत्रों को भी वीर बनाकर ही रखा था चाहे वह अक्षय कुमार हो या फिर इंद्र को जीतने वाला मेघनाथ । रावण अतुलित बल का स्वामी था लेकिन राजशास्त्र का भी ज्ञाता था । ज्योंहि वानर राज बाली से उसे हार का सामना होने की स्थिति बनी तत्काल उसने बाली को मित्रता का संदेश देकर अपने साथ कर लिया । उस काल के सभी शक्तिशाली राजा महाराजा रावण के मित्र ही थे कोई भी शत्रु नही था । 
                                  फिर ...... जिसका कोई शत्रु ना हो, देवता जिससे भय खाते हों , स्वर्ग मे इंद्र को जीतने वाला पुत्र हो पाताल मे अहिरावण जैसा शक्तिशाली भाई हो   अपनी बहन के नाक कान कटने के बाद अपनी बहन का बदला लेने के लिये स्वयं ही सीता का हरण कर दिया वह रावण जैसे पराक्रमी, दंभी राक्षसराज रावण का अंत बना ।
                               राम कौन थे, कहां से आए थे ये तो रामायण ने बता दिया लेकिन राम ने जो चौदह सालों तक अपने वनवास को संघर्षपूर्ण तरिके से जीये उसका वर्णन कौन करेगा ? सत्य ये है कि दशरथ पुत्र  राम को भगवान पुरूषोत्तम अर्थात पुरूषों मे उत्तम राम बनाने वाले उनके सदगुरू विश्वामित्र थे । विश्वामित्र ने यदि राम को सहारा नही दिये होते और शक्तिशाली देवास्त्रों दिव्यात्रों से सुसज्जित नही किये होते तो साधारण राम    कितनी देर रावण के आगे टिक पाता । एक साधारण से तीर को भयंकर ब्रह्मास्त्र मे बदलने का दिव्य गुप्त विज्ञान देने वाले विश्वामित्र ही थे जिनकी वजह से राम को विजय प्राप्त हुई । सदगुरू विश्वामित्र ने राम को वह कला दिये जिससे राम ने शिव के धनुष  की प्रत्यांचा चढाकर तोड दियेअन्यथा राजा जनक के दरबार मे सर्वश्रेष्ठ राजा बैठे हुए थे ।
                                राम का जीवन  किसी फिल्म की तरह का नही था जिसमे चमत्कारी ढंग से खाना पीना मिल जाता । राम ने संघर्ष किये वह किसी विमान मे बैठकर जंगल पार नही किये वरन् पैदल बीहड जंगलों को पार किये ।  आज जिन जंगलों को मनोरंजन का साधन बनाया जा रहा है राम ने उन जंगलों का सम्मान करते हुए उस जंगल को क्षति पहुंचाने वाले राक्षसों से मुक्त करवाए थे । राम और लक्ष्मण की मित्रता किसी भी राजा से नही हुई किंतु उन्होने स्वयं राजा ना होते हुए भई अन्यों को राजा बना दिये । खर दूषण को मारकर अपने मित्र निषाद राज को वहां का आधिपत्य सौंप दिये , बाली को मारकर अपने मित्र सुग्रीव को भी राजा बना दिये ..यहां तक की अपनी शरण मे आए विभिषण को भी लंका का राजा बनाकर राजतिलक कर दिये ........।
                             चाहे रामायण हो या फिर हनुमान चालिसा ...सभी पूर्णतः गुरू को समर्पित हैं .. राम, सीता, लक्ष्मण अपने सदगुरू विश्वामित्र के ध्यान मे तल्लीन रहे , रावण अपने गुरू महादेव के ध्यान मे रहे तो हनुमान जी परमपिता परमात्मा प्रभु राम की भक्ति मे तल्लीन रहे । हनुमान जी ने अपने दैहिक गुरू श्री सूर्यदेव के पुत्र अंगद की रक्षा का वचन देकर तब तक उनके साथ रहे जब तक स्वयं अंगद ने उन्हे राम को नही सौंप दिये ।
................ क्या ऐसे हजारों राम के आए बिना आज के लाखों रावणों का विनाश संभव है ????????

Sunday, September 22, 2013

छत्तीसगढ में युवा पीढी करेगी त्रिकोणीय मुकाबला ।

यहां पर बात करते हैं छत्तीसगढ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी जी की । अजीत जोगी ने अपने तीन साल के कार्यकाल मे कई महत्वपूर्ण कार्य किये थे जो आज तक वर्तमान सरकार भुना रही है । पूरे राज्य मे बिजली दरों मे कमी, जीरो पावर कट राज्य, शत प्रतिशत विद्युति करण को मंजूरी , सीमेंट के दामों में भारी कमी चुस्त दुरूस्त कानून व्यव्स्था , अपराधों पर नियंत्रण जैसे कई अन्य विकास कार्य जो अजीत जोगी के कार्य काल मे पूरे हुए या आज तक चल रहे हैं जिनका लाभ भाजपा ले रही है । जहां जोगी काल मे 24 घण्टे बिजली हुआ करती थी आज ये आलम है कि राजधानी मे घण्टो बिजली बंद हो जाती है वो भी तब जबकि ऊर्जा मंत्री मुख्यमंत्री ही हैं । जहां एक ओऱ प्रदेश मे आपराधिक गतिविधियां बढी हैं वहीं बेगुनाहों को निजी स्वार्थ सिद्धि के लिये नक्सली बना दिया जाता है ।  
                                                  सबसे ज्यादा दुःखद पहलू ये है कि जिस तरह से केन्द्र की सरकार देश मे मनमानी कर रही है उसी तरह से प्रदेश की भाजपा सरकार भी कोई  कोर कसर बाकि नही रख रही है । उद्योंगो को बढावा देने का ढकोसला करने वाली भाजपा सरकार उद्यमियों को इतना उलझा रही है कि ईमानदारी से काम करने की कोई सोच ही नही सकता । हालात तो ये हैं कि प्रदेश के गृहमंत्री भी अपना दर्द बयां करते है कि - अधिकारी हमारी बात नही सुन रहे हैं । तो क्या बीजेपी की पकड खत्म हो गई मान लें  ??
                                                      नही .. बीजेपी नरेन्द्र मोदी के नाम से स्वयं को सुरक्षित समझ रही है और वास्तविकता भी यही है कि प्रदेश मे कांग्रेस तीन कारणों से शर्मनाक हालात मे है 
कारण 1- हाई कमान मे चापलूसों का जमावडा 
कारण 2- दुसरों के लिये बनाए गए नियमों का स्वयं पालन ना करना । 
कारण 3- झीरम घाटी (दरभा)  कांड मे प्रदेश के प्रमुख नेताओं की शून्यता का बनना ।

                                      इन्ही शून्यता को अवसर समझते हुए प्रदेश के युवा वर्ग ने अप्रयाशित तौर से समाजवादी पार्टी को प्रदेश मे सर्वोच्च प्राथमिकता दे दिया है । बीजेपी सरकार की मनमानी और भ्रष्टाचार से त्रस्त औऱ विपक्ष का गिरता स्तर और अंदरूनी लडाई ने प्रदेश मे समाजवादी पार्टी को नई दिशा तय करने का अवसर दे दिया है । क्षेत्रीय पार्ठीयों मे स्वाभिमान मंच तभी तक कारगर था जब तक उसके संस्थापक ताराचंद साहू जीवित थे आज यह संगठन केवल दुर्ग संभाग में सिमट गया है वहीं छोटे मोटे दल अपनी मौजूदगी दिखाने मे नाकामयाब रहे हैं जबकि समाजवादी पार्टी ने भाजपा के प्रमुख और कद्दावर नेत बृजमोहन अग्रवाल के सामने एकदम नया औऱ युवा चेहरा कुणाल शुक्ला के रूप में दे दिया है । कुणाल शुक्ला रायपुर दक्षिण के ही निवासी हैं तथा वह क्षेत्र ब्राह्मण बहुल क्षेत्र भी है जिससे जातिवाद का गणित एकदम सटिक बैठ गया है ।
                                              कांग्रेस ने मरवाही सीट पर अमीत जोगी या अजीत जोगी दोनो मे से एक को प्रत्याशी बनाने की बात कही है जबकि अजीत जोगी कांग्रेस के सबसे मजबूत नेता हैं । अजीत जोगी के पीछे सभी विरोधी लगे रहते हैं क्योंकि जो बात गलत होती है वह अजीत जोगी कभी सहन नही करते हैं । वहीं अमित जोगी ने युवा वर्ग मे अपनी मजबूत पैठ बना रखी है, उसके खडे किये गए सभी प्रत्याशी जीतते हैं जो उनकी लोकप्रियता का पैमाना समझा जा सकता है,  लेकिन कांग्रेस ने जिस तरह से जोगी परिवार की अनदेखी की है उससे प्रदेश मे तीसरे मुकाबले की संभावना को बल मिलता है ।
                                                  आज अमित जोगी के साथ प्रदेश के सभी छात्र एक आवाज पर खडे हो जाते हैं वहीं कांग्रेस के संगठन की आवाज पर 10 लोग नही पहुंच पाते हैं । भाजपा की सरकार है इसलिये उसकी डमा की गई भीड को हम वोट नही कह सकते । भाजपा का वोट बैंक वो पीडित उपभोक्ता , जनता है जो केन्द्र सरकार की पैदा की गई महंगाई और भ्रष्टाचार के कारण कांग्रेस से ही दूर हो गई है । 
                                               हालांकि आगे की बात तो समय की कोख मे हैं किंतु  सच कहूँ तो मैं जोगी जी के स्थान पर स्वयं को रख कर देखूं तो मेरे लिये कांग्रेस छोडना बेहद दुःखद हो सकता है,  लेकिन प्रदेश की समस्याओं को देखते हुए किसी पार्टी का ठप्पा लगाए रखना मैं कदापि उचित नही समझता और अपने प्रदेश की समस्याओं आदिवासी और सतनामीयों के शोषण को देखते हुए पार्टी छोड देता ।

Monday, August 26, 2013

दुनिया का महायुद्ध के शुरूआती दौर में प्रवेश ।

मेरे पूर्व मे लिखी भविष्यवाणीयों पर निराशा रखने वालों के लिये ये उत्साहजनक खबर प्रस्तुत है । अब आप सोचेंगे कि दुनिया तीसरे महायुद्ध में प्रवेश कर रही है तो उत्साह कैसा ? तो मेरा जवाब होगा कि आप जिस तरह से नए निर्माण के लिये उत्सुक होते हैं  वैसे ही सृष्टि भी अपने नियानुसार नया चाहती है । सृष्टि त्रस्त हो चूकि है मनुष्यों की बिछाई विनाश लीला से , हरे भरे जंगलो को काट दिया गया और अनवरत कटाई जारी है , पहाडों से बहने वाली नदियों को बांध बना कर  वहीं पर रोका जा रहा है , मानव अपनी मानवता को छोड रहा है क्योंकि वह धर्म से विमुख हो चूका है । बचपन मे माँ कहती थीं कि एक दिन ऐशा आएगा जब लोग संतो का अपमान करने लगेंगे , एक बटोली (कटोरा) अनाज रखने वाला आदमी बटुकधर राजा कहलाएगा , पैसों का कोई मोल नही होगा हर तरफ अधर्ण और अत्याचार होगा । अब मैं उन्हे कहता हूँ कि माँ आप सही हो लेकिन जो दिन आप कलयुग के अंत मे होगा कहती थी वह तो अब हो रहा है तो क्या अब कलयुग की समाप्ति पर हम खडे हैं ? लेकिन माँ आज भी पूरी तरह से आशांवित जवाब देती हैं कि नही अभी इससे भी बुरा समय आने वाला है , ये तो शुरूआत है ।
                                                              तो हम कहां थे ..... हां दुनिया का महायुद्ध के शुरूआती दौर में प्रवेश पर । इसे आप विषय कहें या फिर भविष्यवाणीयों की पूर्णता लेकिन अब मुझे सबूत मिलते जा रहे हैं कि दुनिया यकिनन विश्वयुद्ध में प्रवेश कर चूकि है , प्रबुद्ध नेता यदि इसे पढें तो शायद कुछ समय के लिये इस महायुद्ध को रोकने का प्रयास भी कर सकते हैं , लेकिन तब कठिनाई और बढेगी । जैसा कि मैने पूर्व में नास्त्रेदमस की भविष्यवाणीयों पर लिखा था उस समय मुख्य रूप से सिरिया का जिक्र हुआ था कि महायुद्ध की शुरूआत लिबिया, इराक या सिरिया से होगा और वह देश रासायनिक युद्ध छेड कर महायुद्ध का आगाज कर देगा  । 
यह सब बताने से पहले उन लक्षणों को निकालते हैं जो तीसरे विश्वयुद्ध के प्रारंभिक लक्षण बताते हैं - 
 1.- तीन ओर समुद्र से घिरे देश का प्रमुख जंगली जानवर के नाम पर आधारित जाति का होगा (मनमोहन सिंह) (1:50)
2.- वह तीन बहनों का पालक होगा जिनके नाम भाग्य पे आधारित होंगे (अमृत , उपेंद्र कौर , दमन  )
3.- दुनिया के शक्तिशाली देश का नेतृत्व ओ अक्षर के हाथों होगा ।
4.- दुनिया के अधिकांश देश आपस में या गृह युद्ध में रत होंगे (इस्राइल-फिलिपिंस, भारत-पाक, दोनो कोरिया, मिश्र, इराक, अफगानिस्तान, लिबिया, मध्य अफ्रीकी देश सुलग रहे हैं )
 5.- ईसाइयत के मुकाबले इस्लाम मजबूत होगा , उन पर कोई नियम कायदे लागू नही होंगे ।
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अब देखें वह समय कब आएगा - 
जब बृहस्पति और शनि मेष राशि में होंगे तब बर्बादी शुरू होगी । फांस और इटली मे अफरा तफरी मचेगी (I-51) जब बृहस्पति और शनि का मे, राशि में सोयगे हो चूका होगा (1999 मे हो चूका है) 
 कैसे आएगा - रातमें ऐसा लगेगा मानो सूरज निकल आया हो । सुअर जैसे मुखौटे पहने लोग दिखेंगे । शोर और चीख पुकार के बीच आसमान में भी युद्ध शुरू हो जाएगा । (I-64)
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इसके अलावा कई ऐसे तथ्य हैं जो महायुद्ध की शुरूआत की ओर इशारा कर रहे हैं -
* एक देश के द्वारा कीटाणु युद्ध की शुरूआत के बाद दो महाशक्ति (अमेरिका - ब्रिटेन) एक साथ आएंगे ।
*नया पोप वेटिकन को छोड फांस मे रहेगा ।
*सभी देश युद्धरत रहेंगे चाहे वह घरेलू हालात हों या दुसरे देशों से ।
*विश्व मे बाढ, भूकंप सहित तमाम प्राकृतिक आपदाएं अपना कहर बरपाएंगी ।
*विशाल पर्वत दहशत पैदा करेंगे और भूकंप देशों को बरबाद करेंगे ।
*भारत के जानवर जाति वाले नाम के मुखिया की मौत के बाद दक्षिण भारतीय नेता कमान संभालेगा ।
*सत्ताधीश कानून का माखौल उडाएंगे और जनता त्राही त्राही करेगी ।
*भय, भूख और भ्रष्टाचार का सर्वत्र माहौल होगा ।
*ताकतवर और ताकतवर बनेंगे लेकिन कमजोरों की लाशों को बिछा कर ।
*इस्लाम अपने सर्वोच्तम पर पहुंचेगा और हर देश में इनका स्वयं का नियम कायदा होगा ।
*इस्राइल को खत्म करने के लिये अरब एकजूट हो जाएगा ।
*चीन अरबों गठबंधन पश्चिमी देशों के लिये परेशानी खडा करेगा ।
*भारत मे मूल धर्म को कुचल दिया जाएगा और हरे सफेद धर्म वाले अपना प्रभुत्व कायम करेंगे  ।
*मुस्लिम शहजादा ईसाइ से प्रेम विवाह करेगा जिसके बाद से उसके देश मे हाहाकार मच जाएगा । 
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अब आगे क्या होगा यह तो समय बताएगा लेकिन अब हमें सोचना है कि हम अपने  धर्म के प्रति क्या भावना रखते हैं ।

Wednesday, May 8, 2013

कर्नाटक, कांग्रेस औऱ कराह

8 मई 2013 का दिन कर्नाटक की जीत के साथ देश की दशा और दिशा तय करने वाले दिन के रूप मे याद रखा जाएगा । यह चुनाव उस दौर मे हुए जबकि केन्द्रनीत कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के साथ साथ ताजा उठे रेलमंत्री के भांजे के घूस कांड मे उलझी हुई दिखलाई पड रही थी । देश को लग रहा था कि कांग्रेस के केन्द्र पर लग रहे भ्रष्टाचार और रिश्वत के साथ साथ सी.बी.आई. को मैनेज करने के आरोपों के बीच बीजेपी कर्नाटक को आसानी से निकाल लेगी और येदि का कोई भी प्रभाव बीजेपी पर नही पडेगा । 
                                                         लेकिन कर्नाटक की जनता  ने जिस शांत भाव से चुनाव मे अपना वोट देकर कांग्रेस को पूर्ण बहुमत से वापसी करवाई  उससे सभी दलों को  एक स्पष्ट संदेश मिला कि केन्द्र मे जो हो रहा है वह सांसद निपटेंगे और हमारे प्रदेश मे जो लूट खसोट कर रहा है हम उसे बेदखल कर देंगे । भाजपा के बुढऊ रणनीतिकारों की कार्यप्रणाली पर यह प्रश्न चिन्ह लग चूका है कि अब उनमे कोई दमखम नही बचा है और वो पार्टी के लिये केवल एक बोझ हैं । गुजरात के चुनाव को मोदी ने अपने अकेले के दम पर केवल अपने विकास के नाम पर जिताया तो वहीं दुसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी को हिमाचल के बाद कर्नाटक मे भी पटखनी दे दी । 
                                                          चूंकि मोदी कर्नाटक चुनाव मे सक्रिय नही रहे क्योंकि जिन लोगों ने उनके लिये गुजरात में कठिनाई पैदा किये थे कर्नाटक की जवाबदारी उन्ही के हाथों पर थी और उन लोगों ने यहां पर मोदी के जादू चलाने का असफल प्रयास भी किये . दरअसल यह जीत बीजेपी के रूढिवादी बुढऊ नेतृत्व की करारी हार है जिसे मोदी और कांग्रेस दोनों ने मिल कर उन्हे प्रदान किये हैं । कर्नाटक मे पूरी तरह से अपनी मनमानी चलाने वाले तथाकथित लौहपुरूष इतनी करारी शिकस्त के बाद भी जीवित कैसे बचे हैं यह भी जनता के लिये रहस्य रहेगा । 
                                                         कांग्रेस की इस जीत ने उसमे एक नया उत्साह भर दिया है और वह नवंबर मे होने वाले चुनाव के लिये पूरी तरह से तैय्यार हो चुकी है । डर केवल इस बात है कि कहीं कांग्रेस अतिआत्मविश्वास मे आकर कहीं लोकसभा भंग ना करा दे क्योंकि ऐसा हुआ तो बीजेपी पूरी तरह से नरेन्द्र मोदी को आगे कर देगी और फिर कांग्रेस का जादू मोदी के आगे फिका पड सकता है । कर्नाटक चुनाव पूरी तरह से सोनिया और राहुल के नियंत्रण मे रहा है और यह जीत पूरी तरह से जीत का श्रेय केवल इन्ही दोनो को जाएगा । यह पहला चुनाव देखने को मिला है जिसमे सोनिया ने पूरी सक्रियता के साथ अकेले हर मोर्चे पर बीजेपी को शिकस्त दी है जो प्रशंनीय है । राहुल गांधी भी राज्य के युवाओ को रिझाने मे कामयाब रहे उनके भाषण छोटे लेकिन पूरी तरह से आक्रामक रहे और सबसे बडी बात कांग्रेस इसलिये जीती क्योंकि जनता को प्रदेश की भ्रष्ट सरकार से मुक्ति चाहिये थी जैसे छत्तीसगढ की जनता मुक्त होने को तडप रही है ।

Sunday, March 24, 2013

छत्तीसगढ- कैंसर पीडित की वेदना संयुक्त राष्ट्र परिषद तक पहुंची ।



 ये मेडिकल सर्टीफिकेट पी.जी. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय , बिलासपुर के प्राध्यापक डॉ. एस.सी. शुक्ला का है जिन्हे मेडिकल डॉक्टरों के द्वारा चेकअप करने के पश्चात कोशिका कैंसर से पीडित पाते हुए उन्हे यह सर्टिफिकेट दिया था । इस मेडिकल सर्टिफिकेट को जारी करने की तिथी है 7 अप्रेल 2012 । यह एक वर्ष की वैधता वाला है तथा इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि छ.ग. शासन कि परिपत्र क्रमांक 2-39/93/17 मेडि. 4 दिनांक 10.11.1995 के अनुसार लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के उपचार में द्वितीय अभिमत से छूट दी गई है । 
                             अब जबकि इन्हे कैंसर है औऱ इनका नियमित इलाज अपोलो अस्पताल में चल रहा है, इसके बाद भी छत्तीसगढ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के द्वारा 30 जुलाई 2012 को स्थानांतरण आदेश दे दिया जाता है और इनका ट्रांसफर बिलासपुर से बाहर शास. महाविद्यालय पंडरिया, जिला कबीर धाम कर दिया गया । स्थानांतरण के बाद भी सरकार के अन्याय की इंतेहा खत्म नही हुई , बल्कि उसी सूची में इनकी धर्म पत्नी श्रीमती अर्चना शुक्ला का स्थानांतरण भी शास. राजीव गांधी महाविद्यालय लोरमी जिला मुंगेली कर दिया गया । नियमों के अनुसार यदि पति पत्नी एक ही विभाग में कार्यरत हों तो उनका स्थानांतरण एक साथ- एक ही स्थान पर किया जाता है जबकि इस मामले में नियमों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है ।
                      डॉ. एस.सी. शुक्ला की पत्नी व इनके छोटे भाई कमल शुक्ला के द्वारा कई बार मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग सहित मुख्यमंत्री के पास निवेदन दिया गया , यहां तक की मुख्यमंत्री के जनदर्शन में भी यह अपनी बात रख आए किंतु 7-8 माह बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा कोई सुध नही ली गई ।
                   
                       डॉ. शुक्ला का मामला इनके छोटे भाई कमल शुक्ला के द्वारा IHRO छत्तीसगढ के सामने रखा गया । मामले की शुरूआती बातों को जानने के बाद यह समझ में आया कि सरकार अपना रवैय्या नही बदलने वाली है अतः मेरे द्वारा यह मामला अपने मुख्यालय के समक्ष भेज दिया गया ।
                             मुख्यालय द्वारा मांगी गई सारी जानकरी उन्हे उपलब्ध करा दी गई जिसके बाद IHRO के राष्ट्रीय सचिव अनुराग ज्योति के द्वारा मामले को एमनेस्टी इंटरनेशनल, राष्ट्रीय  मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली भेजा गया  , किंतु मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी एक प्रति संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद के मुख्यालय जिनेवा , स्विटजरलैंड  भी भेज दी गई है ।  संभवतः पूरे छत्तीसगढ की यह पहली शिकायत है जो संयुक्त राष्ट्र मा.अ. परिषद को भेजी गई है किंतु यही एक शिकायत पूरे छत्तसीगढ के लोगों को उनके मानव अधिकार के बारे मे जागृत करने के साथ साथ सरकार को भी चेतावनी दे सकती है कि लोकतंत्र की सरकारों को विश्व समुदाय के बनाये नियमों के अनुसार चलना चाहिये अन्यथा भविष्य में इसके दुष्परिणाम झेलने पड सकते हैं ।

                                                

Saturday, February 23, 2013

देश का नकारा विपक्ष

आज देश की दुर्दशा के लिये हर कोई सत्ता पक्ष को कोस रहा है । कांग्रेस के कारण देश में महंगाई बढ गई है कांग्रेस के कारण देश मे आतंकी गतिविधियां बढ रही है , कांग्रेस के राज में भ्रष्टाचार चरम पर है , कांग्रेस के राज में बलात्कार हो रहे हैं , कांग्रेस का वर्तमान राज यानि अप्रत्यक्ष आपातकाल..........  वगैरह वगैरह......... कांग्रेस को सब कोस रहे हैं ..हम भी कोस रहे हैं और कोसते ही रहेंगे लेकिन  जिस तरह से सरकार सोचती है उस तरह से हम नही सोचते । संसद में क्या होता है जनता कुछ जानती है बाकि नही जानती । हर किसी को सोचने की आजादी है लेकिन उस सोच को लिखने की आजादी नही है । सोशल मिडिया में लिखते ही अगर कोई चपडगंजू केस करने की धमकी देता है तो सबसे पहले अपने उस विचार को हटाने की ओर ध्यान जाता है जो इस मानसिकता को दर्शाता है की यदि केस लगा तो कौन फालतू के झंझट में फंसेगा । सोशल मिडिया में हल्ला करने वाले सैकडों है जो देश औऱ धर्म की बातें करते रहते हैं लेकिन अपना नाम और चेहरा अज्ञात रखते हैं । 
                                  चलो अब सोशल मिडिया से बाहर आते हैं औऱ हमला करते हैं विपक्ष पर क्योकि हमारा विपक्ष सबसे अच्छा नकारा साबित हो रहा है । बोफोर्स से लेकर हेलीकॉप्टर घोटाले तक इससे ज्यादा घटिया विपक्ष का दुसरा उदाहरण देखने को नही मिल सकता । जब आम जनता बाबा रामदेव के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ रामलीला मैदान में जुटती है तो ये निकम्मे विपक्षी अपने अपने दडबों में घुसे रहते हैं जब दामिनी के लिये इंसाफ मांगने वालों के ऊपर पानी की बौछारें और आंसू गैस छोडी जाती है तो ये ऊंघते रहते है जब देश के प्रधानमंत्री टी.वी. पर पुछते हैं ठीक है तो ये आलसी सिर तक हिलाने की जहमत नही उठाते । 
                                अब संसद में जाकर बैठे तो कहते हैं गृहमंत्री भगवा आतंकवाद पर देश से माफी मांगे । यानि बजाय देश में हो रहे भ्रष्टाचार और आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने की मांग करने के इन्हे भगवा आतंकवाद की बात सूझ रही है । 
                                    पेट्रोल डीजल के बाद अब शक्कर की किमतें भी  बाजार को तय करने का अधइकार दिया जाने वाला है और शक्कर बाजार देने के बदले मिलने वाले समर्थन से सरकार चलते रहेगी लेकिन विपक्ष को भी लगता है हिस्सा मिलने वाला है औऱ वह शक्कर के बाजारों को नियंत्रण मुक्त होने के बाद देश बंद करने जैसी हरकतें करेंगे । एफ.डी.आई. पर विपक्ष ने क्या किया , हेलीकॉप्टर मामले पर विपक्ष क्या कर रहा है शक्कर को सरकारी नियंत्रण से क्यों मुक्त किया जा रहा है क्या ये सब बातें पुछने के लिये जनता को धरना प्रदर्शन करना पडेगा । ये निकम्मा विपक्ष इस तर की हरकतें कर रहा है मानो कोई उससे विपक्षी दल का पद छिन लेगा ।

Saturday, February 16, 2013

देश का सत्यानाशी मुद्दा ।

बहुत दिन पहले की बात है जब मैं लिखने की कोशिश करता था उस समय सोचता था ऐसा लिखूंगा वैसा लिखूंगा फिर अखबार में छपेगा और देश का कल्याण हो जाएगा । वैसे भी लेखकों के लिये अगर कोई विषय बचता है तो वह देश होता है । महंगाई से लेकर दामिनी तक जैसे  मुद्दे तो आते जाते रहते हैं लेकिन देश का मुद्दा एक ऐसा मुद्दा है जो   देश के नेताओं से लेकर भीखारी तक की सभी की भूख मिटाने में कारगर रहता है । देश के मुद्दों पर  औऱ घर के चुल्हों मं बहुत ही कम फर्क होता है । हम घर में रोटी पकाने के लिये पहले गेहूँ पिसकर आटा तैय्यार करते हैं फिर उस आटे में पानी मिलाकर गुंथते हैं फिर  उसकी लोई काटते हैं उसके बाद चुल्हा जला रोटी बेलते और सेकते जाते हैं । लेकिन देश के मुद्दों की रोटी पकाने की विधी उलट होती है । अब  अभी अपने पास कोई मुद्दा नही है  इसलिये पुराने मुद्दे को देखते की उसकी रोटी कैसे पकी । बहुत पहले यानि की लगभग दो तीन माह पहले का ये मुद्दा है दामिनी वाला उस दामिनी की रोटी देखिये कैसे पकी .... दामिनी अपने भावी मंगेतर के साथ घर के लिये लौटने हेतु बस का इंतजार कर रही थी । एक बस रूकी और उससे कहा गया कहां जाता है बहन जी ..आइये आइये ऊपर आ जाइये ... इसके बाद उस बस में बैठे 6 लोगों ने उसके साथ जो किया वो बताने के लिये आप किसी दुसरी साइट पर ढुंढिये क्योंकि यहां पर केवल मुद्दों की रोटी बन रही है । 
                                                 उसके बाद जो हुआ वो सब अचानक होता गया अचानक कई लोगों का विजय चौक पर जमा हो जाना अचानक से आप का आ जाना अचानक से राष्ट्रपति भवन पहुंचने की कोशिश करना , आधी रात को अचानक सोनिया का मोमबत्ती धारकों से मिलने आ जाना वगैरह वगैरह ... 
            अब देखिये इसकी रोटी कैसे बनती है - 
सबसे पहले दामिनी अस्पताल पहुंची  मुद्दा  बना अस्पताल पहुंचाने में देर लगाई गई 
फिर उसे इंसाफ दिलाने के लिये मोमबत्ती धारकों पर पुलिस प्रहार हुआ - मुद्दा बना पुलिस की क्रूरता
सोनिया रात को मोमबत्ती धारकों से मिली - मुद्दा  बना देश के लिये सोनिया जाग भी सकती हैं
फिर दामिनी को सिंगापुर ले गये -  मुद्दा बना मुर्दा शरीर को सिंगापुर क्यों ले जाया गया
फिर दामिनी को अधिकृत तौर से मृतिका घोषित करके वापस लाया गया और अँतिम संस्कार कर दिया गया-  मुद्दा बना गुप्त रूप से क्यों ये सब किया गया ।
फिर दामिनी के मातापिता को पैसे दिये गये -  मुद्दा बना पैसों से माँ बाप को खरीदा गया
फिर इंसाफ की मांग की गई -  मुद्दा  बना नाबालिग को कैसे फांसी की सजा दी जा सकती है
अब मामला फास्ट कोर्ट में है -  मुद्दा बना मामले में गति धीमी चल रही है ।
                                                               अब ये मुद्दे पर मुद्दे बनते चले गये और कई लोगों ने इसकी बनी रोटीयाँ खाई । किसी ने प्रेम से बैठकर तो किसी ने लाठी खाकर लेकिन दामिनी मुद्दे से रोटीयां सबको मिली । भीख मांगने वाला भी अपनी बेटी की ओर देखकर कहने लगा था बेटी संभल कर भीख मांगना दामिनी का मु्दा चल रहा है ।
                                        खैर ये तो हुई पुरानी बात अब एकदम ताजी ताजी खबर को मुद्दा बनाते हैं । ये मुद्दा इतनी तेजी से उछल रहा है की आप लोगों तक पहुंच ही चुका होगा या पहुंचने वाला होगा
                              ये मामला है गोधरा का जी हाँ  2002 को हुआ मामले में अभी तक रोटी बनाई और खाई जा रही है । ये हमारे देश के  लिये बेहद शर्मनाक मामला है और इसके मुद्दे की रोटी बहुत स्वादिष्ट होती है जबकि हमारे देश के लिये गौरव शाली इतिहास बनाते बोफोर्स, कामनवेल्थ, 2जी हेलीकाप्टर खरीद दलाली और महंगाई , भ्रष्टाचार  जैसे मामलों की रोटीयां इतनी कडवी होती है की बडी मुश्किल से इसका निवाला भीतर जा पाता है ।
                               इसलिये हे देश के लोगों यदि तु्म्हे मजेदार लज्जतदार मुद्दों की रोटीयां खानी हो तो दामिनी , एफ.डी.आई., भगवा आतंकवाद , क्रिकेट जैसे मु्द्दों  पर ही कायम रहना होगा क्योंकि इस देश में इस्लामी जेहाद, सरकारी घोटाले, नेताओं की काली करनी, आतंकवाद, पाकिस्तान, सैनिकों के सिर कटने जैसे मुद्दों की रोटियां आपके लिये महंगाई बढाकर स्वाद कडवा कर देंगी । 
                                   देख नही रहे हो हेलीकाप्टर घोटाले में फंसते ही सरकार ने पेट्रोल, डीजल के दाम बढा दी है और अब शक्कर को भी खुले बाजार में बिकवा कर महंगी करने की तैय्यारी में है ताकि ऐसे मुद्दे उठाने की कीमत तुम्हे कडवी रोटी देकर चुकानी पडे ।

Saturday, January 19, 2013

देश भक्ति मत झाडो, देश हम चला रहे हैं ।

डीजल हर महिने 50 पैसे की दर से बढते हुए अंततः सब्सीडी मुक्त हो जाएगा .औऱ हाँ रसोई के दामों की चिंता ना करे वो तो आप जब खरीदने के लिये पहुंचेगे तब बता दिया जाएगा की उसकी किमत कितनी बढाई गई है आप तो इस बात पर खुश हो जाइये की कांग्रेस ने सिलेंडर की संख्या 6 से बढा कर 9 कर दी है । ये हमारे देश की बदकिस्मती है की  जनविरोधी सरकार हम पर राज कर रही है और जनता केवल लोकतंत्र का ढोल अपने माथे पर फोड रही है । देश में एक बदलाव की उम्मीद जागी थी अन्ना हजारे से, लेकिन वो केजरीवाल के भ्रष्ट आचरण में ढह गई फिर लगा बाबा रामदेव कुछ कर दिखलाएंगे लेकिन आधी रात के सरकारी लाठीचार्ज से वो भी भाग गये । जनता खामोश रही चुपचाप एफ.डी.आई. औऱ भ्रष्टाचार को सहती रही फिर आ गई दामिनी , इसने एक नई दिशा दिखलाई लोग बिना किसी बाबा या नेता के सहारे खुद ब खुद जमा हो गये और देश की लाखों दामिनी के लिये लडते दिखलाई पडे । लेकिन फिर वही हुआ जिसका देश को से अंदेशा था दामिनी की आग को बुझाने के लिये सबसे पहले एफ.डी.आई. लागू कर दिया गया उससे फर्क ना पडते देख सचिन से सन्यास दिलवाया गया उसमें भी सचिन की बेइज्जती होती देख लाठी डंडो और आंसू गैस का सहारा लिया गया सब कुछ होता रहा लेकिन दामिनी की आग नही बुझ पाई ।
                                    जिस दामिनी के लिये पूरा देश लडने के लिये दिल्ली पहुंच रहा था उस दामिनी को भी सरकार इंसाफ नही दिला पा रही है इससे ज्यादा शर्म की बात कांग्रेस के लिये नही देश के लोगों के लिये है, देश की जनता के लिये है । कितनी आसानी से दामिनी को लोग भुला कर सैनिकों के कटे सिर के पीछे दौड पडे    कट्टर राष्ट्रवाद से बचने की नसीहतें सरकार देती दिखलाई पडने लगी । कांग्रेस भूल गई की ये देश केवल सरकार को सत्ता संभालने के लिये दिया गया है ना कि जनता को गुलाम बना कर रखने के लिये  और फिर कटे सिर के सैनिक ने सरकार की सारी खामियों को दबा दिया । लोग भ्रष्टाचार भूल गये, एफ.डी.आई. भूल गये, दामिनी भूल गये औऱ आज देश की जनता सैनिक के कटे सिर को केवल इसलिये भूल गई क्योंकि उन सैनिको के घर सेना प्रमुख चले गये     और इसके साथ ही उन सैनिकों की याद मिटाने के लिये सरकार ने डीजल की आग लगा दी ताकि उसमें उसके सारे पाप जल जायें ।
                                                                अब कांग्रेस का चिंतन शिविर लगेगा जिसमें बात होगी अपनी छबी सुधारने की । किस तरह से सोशल मिडिया पर नियंत्रण किया जाय या उसके बडे ग्रुप के लोगों को किस तरह से मिडिया की तरह मैनेज किया जा सके क्योंकि खुद कांग्रेस के नेताओं की फालोवर संख्या उतनी नही हो पाती है जितनी एक देशभक्ति से ओत प्रोत एंटी कांग्रेस वाले किसी ग्रुप की हो जाती है ।
                                                   हर बडी घटना से बडी घटना बनाने के बाद पहली घटना को दबाने की ये कांग्रेसी चाल कब आम जनता को समझ पडेगी ये देखने और समझने की बात है । वैसे अब ज्यादा समय नही है जब कांग्रेस को उसके गुनाहों की सजा मिलेगी । ये भारत देश है जहां के लोगों का अटल विश्वास  है की हर गुनाहों की सजा ईश्वर जरूर देता है । वैसे भी कांग्रेस के चिंतन शिविर में सुबह सोनिया ने कही की कांग्रेसी आपस में लडना बंद करें और उसी रात छत्तीसगढ भिलाई की होटल अमित में कांग्रेसी शराब के नशे में धुत होकर गोलीयां चला दिये आपसी झगडे में ।

Saturday, December 22, 2012

समस्या से बडा बलात्कार

बडे दिनों से एक मनमोहिनी बांसुरी की गुंज सुनाई पड रही थी । कभी उस धुन से सिलेंडर मरता था तो कभी पेट्रोल जलता था लेकिन उस मनमोहिनी धुन को सुनना सबकी मजबूरी थी क्योंकि उसे बजाने वाला अपनी ही धुन सुनाने में तुला रहता था उसे इस बात से कोई फर्क नही पडता था की कोई उससे बांसुरी रोकने को कह रहा है या कोई उससे कुछ समय चुप रहने की मांग कर रहा है उसे कोई फर्क नही पडता था। तभी उसकी बांसुरी का सुर बदल कर एफडीआई पर आ गये उस धुन पर उसे सुनने वाले खूब चिखे चिल्लाये उसे चुप हो जाने को कहते रहे लेकिन कोई फर्क नही पडा आखिर लोग ही चुप हो गये और धुन यथावत बजती रही । जनता खामोश थी  उसके लिए धुन सुनना इसलिये भी मजबूरी थी क्योंि उसे पता ही नही था की वह मनमोहिनी बांसुरी बजा कौन रहा है ।  
                                                  अब उसके सुर धीरे धीरे थमने लगे ... देश जैसा का तैसा शांति पूर्वक चल रहा था अचानक एक हादसा हो गया । बांसुरी वादक के घर में ही बलात्कार हो गया वो भी ऐसा की जिसने हर किसी के रोंगटे खडे कर दिये जिसने सुना वह उत्तेजित हो गया इस बीच उसके सहयोगी जो अलग अलग वाद्य लेकर बैठे थे उनके आपसी सुर बदल गये और ध्वनी कर्कश हो गई बस फिर क्या था उसल कान फाडू संगीत को बंद कराने के लिये जनता घरों से निकल पडी । अब उसे तलाश है उस बांसुरी वादक की जो देश की   अस्मत  से खिलवाड होने के बाद भी अपने घर में बैठा चैन की बांसुरी बजा रहा है । 

Wednesday, October 17, 2012

मनमोहन के बाद कट्टर हिंदुत्व लाएगी कांग्रेस ।

ये एक दुर्लभ संयोग है की वर्तमान समयकाल जो दृष्य दिखला रहा है उसे सैकडों वर्ष पूर्व नास्त्रेदमस देख चुके हैं औऱ अपनी पुस्तक में लिख भी दिये हैं । यह अजब परिस्थिति शुरू से ही रही है की जब तक वह समय बीत नही जाता है लोगों को यह आभास तक नही होता है की नास्त्रेदमस की पुस्तक के अनुसार वह घटना घटित हो रही है । जैसा की मैने पहले भाग में लिखा था की मनमोहन सिंह वह व्यक्ति है जो हमारे देश का नेतृत्व 9 सालों तक संभालेंगे और उसके बाद कोई दक्षिण भारतीय नेता सत्ता संभालेगा । यह क्यों और कैसे होगा यह तो समय ही बतलाएगा किंतु यह तय है की वह समय किसी भी क्षण आ सकता है । 
                                           इस समय कांग्रेस के लिये कुछ चीजें जो सिरदर्द बनी हुई है वह भ्रष्टाचार , पार्टी की घटती साख और दुसरे क्षेत्रीय दलों  का बढता प्रभाव । इस समय सोनिया अपनी पार्टी की पारंपरिक निती को अपनाते हुए जो कदम उठा सकती है वह है मनमोहन को हटाने का ( या हो सकता है संयोगवश मनमोहन की मृत्यु हो जाये ) मनमोहन के जाते ही नई मंत्रणा चलेगी और पार्टी के सामने जो समस्या सबसे बडी खडी होगी वह होगी स्वयं को धर्मनिरपेक्ष बतलाने की । अभी तक कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टिकरण की निती वाला दल माना जाता रहा है कितु सलमान खुर्शीद पर उठ रही उंगली और खुलेआम मिल रहे भ्रष्ट सबूतों के कारण अब उसका यह पत्ता पार्टी और देश दोनो के लिये खतरनाक होग सकता है यह आलाकमान समझने लगा है । 
                              वैसे भी कांग्रेस का मुस्लिम कार्ड पूरी तरह से मुलायम सिंह खेल रहे हैं इसलिये अब कांग्रेस किसी कट्टरवादी हिंदु को अगला प्रधानमंत्री बनाना चाहेगी जो दक्षिण भारत का हो इससे उसे दक्षिण भारत के क्षेत्रीय दलों का समर्थन आसानी से मिल जाएगा और मुलायम के ऊपर दबाव बढ जाएगा जो स्वयं  प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं, साथ ही नरेन्द्र मोदी जिनकी छबी कट्टर हिंदुवादी की है और वर्तमान समय में उनके आगे देश के सारे नेता बौने के नजर आ रहे हैं उनसे भी काफी हद तक टक्कर लेने में पार्टी समर्थ हो सकेगी ।  कोई ऐसा व्यक्ति जो देश की सबसे बडी हिंदु बहुसंख्यक आबादी को अपनी कार्यशैली से प्रभावित करके दुसरे दलों को नेस्तनाबूत कर सके और अगले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का परचम वापस फहरा सके ऐसे वय्कति की तलाश शायद पूरी हो चुकी है और जल्द ही राष्ट्रपति को भी बतला दिया जाएगा की अगला प्रधानमंत्री ये रहे  ।  इस समय प्रधानमंत्री बदल कर  कांग्रेस देश का ध्यान भ्रष्टाचार से भी हटाने में सफल हो सकेगी और अरविंद केजरीवाल जैसे नये सत्तालोलुपों को भी सबक सिखा देगी । 
                                 यह सब कुछ घटित होगा मनमोहन के सत्ता संभालने के 9वें साल में और अब इंतजार करो दो छोटे छोटे देशों के बीच लडाई शुरू होने का और नवंबर में एक उल्का पिंड गिरने का ।

Wednesday, September 26, 2012

नास्त्रेदमस - तीसरे विश्वयुद्ध की आहट शुरू -1

कोई धमकी चमकी नही सीधी खरी बातें लिख रहा हूँ । मुझे कई जगह खोज करने के बाद जो जानकारी मिली वो ना केवल रोंगटे खडे करने वाली रही बल्कि नास्त्रेदमस की लिखि भविष्यकथाओं को प्रमाणिकता भी देती नजर आई । मैंने पहले भी इस बारे में लिख चुका हूं और मनमोहन सिंह के दोबारा प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी का आधार भी नास्त्रेदमस ही थे जिनकी भविष्यवाणी के अनुसार मनमोहन सिंह के इस देश के मुखिया बने रहने के समय काल में ही तीसरे विश्वयुद्ध की शुरूआत होने के संकेत हैं । 

            अब सबसे पहले मैने मनमोहन सिंह के बारे में सोचा की यदि नास्त्रेदमस नें तीसरे महायुद्ध के संकेत की शुरूआत के रूप में इनकी ओर इशारा किया है तो क्या बातों की समानता हो सकती है । अब आगे की बातें बाद में करते हैं पहले मनमोहन सिंह की ओर होने वाले इशारे को आप नास्त्रेदमस के शब्दों में देखें ------
 The man will be called by a barbaric name

that three sisters will receive from destiny.
He will speak then to a great people in words and deeds,
more than any other man will have fame and renown.  (सेंचुरी-1-76)

 इसमे से तीन बहनों के नाम  destiny  पर आधारित होने की बात कही गई है destiny का हिंदी में अर्थ - भाग्य, नियति या प्रारब्ध होता है । मनमोहन सिंह की तीन बेटियां हैं (जो आपस में सगी बहनें हैं) इनके नाम उपेनदर कौर, दमन कौर और अमृत कौर हैं । अब  मैने सोचा इनके नाम भाग्य पर आधारित कैसे हैं  सबसे पहले इनके नाम के पीछे लगा कौर जो हर सिक्ख महिला के नाम में जोडा है इसका अर्थ होता है समृद्धि (जो भाग्य से ही मिलती है) इसके अलावा उपेनदर का अर्थ - उप राजा या छोटे इन्द्र का पद होता है और यह भी भाग्य से मिलता है है, दमन या पतन तभी होता है जब भाग्य में लिखा होता है और अमृत केवल भाग्य से मिलता है । 
                                यानि मनमोहन की तीनों बेटियों के नाम भाग्य पर आधारित हैं और किसी जानवर के नाम वाली जाति पूरे विश्व में केवल सिंह जाति ही है ।
                                   गुरू गोविंद सिंह नें श्रीदशमग्रंथ साहिब में चौबीसवें निष्कलंक अवतार के रूप में महान योद्धा के जन्म लेने की बात लिखें हैं जो भ्रष्टचार, अनैतिकता, अराजकता, अधर्म, नास्तिकता, भोग-विलास, अश्लीलता, अनाचार और कुकर्मों के दौर में प्रकट होगा । वर्तमान समय में हमारा देश इसी दौर से गुजर भी रहा है । 
                             इसके बाद की कुछ भविष्यवाणियां जो वर्तमान काल में पूरी होती जा रही हैं या होने को तैय्यार है उनका कुछ विश्लेषण  भी करने का प्रयास किया हूँ  जैसे--

The false trumpet concealing madness
will cause Byzantium to change its laws.
From Egypt there will go forth a man who wants
the edict withdrawn, changing money and standards.
इसमें मध्य एशिया के किसी देश का जिक्र है जहां नए किस्म के धन (संभवतः तेल) के कारण जीवन स्तर बदलने के संकेत हैं तथा धार्मिक फतवे जारी होने की बातें हैं ( वर्तमान में इरान एख ऐसा देश है जो अपने नये धन के कारण अपनी ताकत पूरी दुनिया को बतलाता है औऱ साथ ही वहीं से सबसे ज्यादा फतवे जारी होते हैं )

Alas, how we will see a great nation sorely troubled

and the holy law in utter ruin.
Christianity (governed) throughout by other laws,
when a new source of gold and silver is discovered. (सेंचुरी-1-49) इसमें नये धन श्रोतों के कारण इसाइयों के लिये सिरदर्द बनने वाले धर्म के बारे में कहा गया है । इस समय सभी ईशाइ देशों के लिये अरब देश सरदर्द बने हुए हैं ।


Nine years the lean one will hold the realm in peace,

Then he will fall into a very bloody thirst:
Because of him a great people will die without faith and law
Killed by one far more good-natured. (सेंचुरी 2-9) 

इसमें इशारा है एक दुबले पतले नेता का जो 9 साल तक शांतिपूर्वक देश चलाने के बाद उसे घातक संघर्ष में धकेल देगा तब उसी के दल का दुसरा नेता आकर उसे मारेगा । मुझे इस समय अपने देश के मनमोहन के अलावा दुसरा कोई नही दिख रहा है । उनके शासन का यह 9वां साल है (2004 से 2012 तक) जो भारी उपद्रव से भरा हुआ लग रहा है । इससे जाहिर तौर पर ऐसा लगता है की कोई दुसरा नेता जो संभवतः दक्षिण भारतीय होना चाहिये मनमोहन के बदले सत्ता संभालेगा और गुरूवार को अवकाश घोषित करवाएगा ।
Eyes closed, opened by antique fantasy,
The garb of the monks they will be put to naught:
The great monarch will chastise their frenzy,
Ravishing the treasure in front of the temples. (सेंचुरी2- 12) इसमें बंद आँखो का जिक्र है जो हमारे देश के कानून के बारे में कही जाती है साथ ही हम अपने उन नेताओं के संदर्भ में भी कह सकते हैं जो अपने धर्म को भूल चुके हैं और एक महान सम्राट के द्वारा उन्हे मंदिर तोडने का दंड दिये जाने से संबंधित लगती है ।   
At Tours, Gien, guarded, eyes will be searching,
Discovering from afar her serene Highness:
She and her suite will enter the port,
Combat, thrust, sovereign power. (सेंचुरी 2- 14 ) इसमें संभवतः किसी द्विप को लेकर होने वाली निगरानी और विवाद का  जिक्र है जो की वर्तमान समय में चीन, जापान और ताइवान में शुरू हो चुका है  ।                                   
                                         शेष अगले भाग में .................             

Sunday, August 19, 2012

ये है भगवा हिंदु आतंकवाद


   मैं अमन-ओ-चैन की परवाह नहीं करता

   दंगा-ओ-फसाद, अजी इनआम है मेरा !

   करता हूँ दिलो जान से, पाकिस्तान की परस्तिश

   कहते हैं जिसे कुफ्र, वह "इस्लाम" है मेरा !!

   अल्लाह ने बख्शा है, मुझे रूतबा-ए-घौंचू

                                                         चूतिया जिसे कहते हैं, वही बाम है मेरा !!

                 धन्य है ब्लॉगर सलीम खान (स्वच्छ संदेश में देखियेगा कितने अच्छे देशभक्ति के संदेश हैं )  जिसने कबूल तो किया कि लखनऊ की तहजीबी नगरी में उसने कैसी तमीज सीखी है । इसने लिखा आइये देखिये हिंदु-आतंकियों का जलील चेहरा और बढिया बढिया हिंदु नेताओं की और कारसेवकों की तस्वीरें लगा दिया । मैने सोचा कि इसके ब्लॉग पर ही धनिया बो दूं लेकिन फिर सोच क्या मतलब ये तो दन् से मेरी प्रतिक्रिया उडा देगा इसलिये अपने ब्लॉग पर लिखने के बाद उसे लिंक दूंगा ।
                                                 (हालांकी ये मेरा सन 2010 में लिखा लेख है लेकिन मुझे लगता है की मेरी कुछ रचना कालजयी हैं जो हर वक्त पर कहीं ना कहीं फिट होती रहती है इसलिये उन्ही रचनाओं में थोडा परिवर्तन कर प्रस्तुति दे रहा हूँ ) 
                                    
                                                                मिस्टर घोचू (इसे आपने अपना रूतबा कहा है जनाब ) आपने जो लिखा है उसमें आपका दोष नही है क्योंकि ये आपके भीतर की भडास है जो आप अपने पूर्वजों पर व्यक्त नही कर पा रहे हैं । मैं आगे की कोई बात लिखने से पहले आपको एक सलाह दूंगा कि आप अपने मां बाप से पूछो कि तुम्हारा खानदान कब से मुसलमान है । अब ये मत कह देना कि जब से इस्लाम बना है तब से तुम लोग मुसलमान हो क्योंकि ऐसा होता तो तुम्हारा चेहरा ओसामा बिन लादेन और अरबी शेखों की तरह होता ना कि आम हिंदुस्तानी भारतीयों की तरह । तुम्हारे हिंदु  आतंक को संबोधित लेख के जवाब में मैं कई मुस्लिम आतंकवाद की घिनौनी तस्वीरें भेज देता जिनमे से सबसे नई तो दो चार माह पुरानी ही होती । आपने तो 1992 की बाबरी मस्जिद की तस्वीरें भेजी हैं तो ये क्यों नही बताया जनाब कि ये रही हिदु आतंकवाद की 2010 की तस्वीरें ?
                                    बाबरी मस्जिद जो किसी बाबर नाम के आक्रमणकारी नें भारत में आकर हमारे धर्म पर, हमारी आस्था पर हमला करके हमारे देश के प्रथम युगपुरूष श्री राम की जन्मभूमि पर कब्जा कर मस्जिद बना दिया था उसे तोड कर अपनी हजारों साल पुरानी सभ्यता को वापस पाने की मुहिम चलाने पर हिंदु आतंकवादी बन गये लेकिन आप क्या रहे हैं सलीम मिंया... आप बजाए ये सोचने के की हो सकता है उस आक्रमणकारी आतंकवादी बाबर के साथ आए मुस्लिम सैनिकों में से या खुद बाबर नें तुम्हारी किसी पूर्वज औरत की इज्जत तार तार करके जबरन मुस्लिम बना दिया जिसके कारण बाबर की मौत के बाद भी तुम उसके धर्म को मान रहे हो । सलीम भाई सोचो कि तुम कौन हो अगर तुम अपने को मुसलमान मानते हो तो तुम्हे ये स्वीकार करना होगा कि तुम कायर हो और अपने पूर्वजों के अत्याचार को सह रहे हो तुम ये नही सोचते हो कि जबरन गऊमांस खिलाकर तुम्हारे पूर्वजों को धर्मभ्रष्ट कर दिया गया था और तुम अपने पुरखों की जबरदस्ती को आज अपने रिवाज में शामिल कर लिये हो । सोचकर देखो और जरूरत पडे तो इतिहास में झांककर देखो कि रेगिस्तान से आए अरब लोगों को गाय का मांस कहां मिला होगा ? जवाब आपके पास नही है कोई बात नही  मैं देता हूँ -
                                बाबर का जन्म फ़रगना घाटी के अंदिजन नामक शहर में हुआ था जो अब उज्बेकिस्तान  में है। उसके पिता उमर शेख़ मिर्ज़ा, जो फरगना घाटी के शासक थे । हालाँकि बाबर का मूल मंगोलिया के बर्लास कबीले से सम्बन्धित था पर उस कबीले के लोगों पर फारसी तथा तुर्क जनजीवन का बहुत असर रहा था, वे इस्लाम में परिवर्तित हुए तथा उन्होने तुर्केस्तान को अपना वासस्थान बनाया।  मंगोल जाति (जिसे फ़ारसी में मुगल कहते थे) का होने के बावजूद उसकी जनता और अनुचर तुर्क तथा फारसी लोग थे। उसकी सेना में तुर्क, फारसी,पश्तो के अलावा बर्लास तथा मध्य एशियाई कबीले के लोग भी थे। बाबर के चचेरे भाई मिर्ज़ा मुहम्मद हैदर ने लिखा है कि उस समय, जब चागताई लोग असभ्य तथा असंस्कृत थे तब उन्हे ज़हिर उद-दिन मुहम्मद का उच्चारण कठिन लगा। इस कारण उन्होंने इसका नाम बाबर रख दिया। इन रेगिस्तानी कबीले वालों का एक ही काम हुआ करता था दुसरे कबीले पर हमला करके उनकी औरतें और ऊंठ और भेडों को लूटना । रेगिस्तान में गाय नही होती हैं इन्हे अखंड भारत के लोगों को गऊमांस इसलिये खिलाया जाता था ताकि इसके बाद उन्हे अन्य हिंदु लोग अलग कर दें और उस समय की हिंदु परंपरा के अनुसार गऊभक्षकों को अछुत कहकर  सनातन धर्म की सभी    जातियों और संप्रदायों द्वारा अलग कर दिया जाता था  जिसके कारण मुस्लिमों को अलग से बसने की जगह मिलती गई ।
                            इसके बाद भी कहने को बहुत कुछ बचता है सलीम खान साहब जिस समय बाबर आया था उस समय हमारा देश धर्म में नही जातियों , वर्णों और  संप्रदायों में बंटा हुआ था और सभी केवल सनातन धर्म को ही मानते थे ।  रेगिस्तान की औलाद बाबर और उसके साथियों नें हमारे देश के धन को लूटा, औरतों की इज्जत तार तार कर दिये, बच्चों का जबरन खतना किया गया, आदमीयों को गऊमांस खिलाया गया ताकि उनका जनेऊ उतर जाए,  मतलब ये कि बाबर नें जो धर्म परिवर्तन किया उसका एक उदाहरण आप भी हो सकते हैं ।
                                अब आप देखिये हमारी भारत माता की पावन धरा का असर की बाबर जैसे आतताई, क्रूर हत्यारे और लुटेरे का पौत्र अकबर इसी धरती पर हिदु मुस्लिम एकता का अनुपम उदाहरण देते हुए दीन ए इलाही का गठन करता है  अल्लाह हो अकबर तो आज भी आप कहते हैं खान साहब ।
                    घोंचू  साहब सोचीये कि भारतीय मुस्लिमों के चेहरे हिंदुओं के चेहरों से क्यों मिलते हैं । हां एक बात और है कि -
                       मुस्लिम पीर पैगंबरों नें अपनी सिद्धियों के एवज में भी धर्म परिवर्तन कराने में भूमिका निभाई है । आपके शहर के आसपास ही कोई जगह है जिसे मौदहा के नाम से जाना जाता है आज की पीढी से तीन पीढी पहले तो वह ठाकुरों का गांव हुआ करता था सलीम साहब आपसे अनुरोध है कि उस घटना के बारे में आप बताएं तो ज्यादा अच्छा होगा कि मौदहा के साथ के 12 गांव और मुसलमान क्यों बने ---  क्योंकि हम तो ठहरे हिंदु आतंकवादी भला हमारी बात आप कैसे समझ सकेंगे ।

Saturday, August 18, 2012

झण्डा उल्टा रहे हमारा ।

 वैधानिक चेतावनी - कृपया देश भक्ति की विचार धारा वाले इसे ना पढें । उनकी विचारधारा पलटने का खतरा है , इसके लिये लेखक याने मैं यानि की डब्बू मिश्रा किसी रूप से जवाबदार नही रहूँगा ।
                   
                          हमारे क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित नेता का नाम था राम इकबाल मिश्रा अब जाहिर सी बात है उनका इंतकाल (निधन नही) हो गया है इसलिये उनके बारे में ज्यादा बातें ना करके केवल नाम और काम की बातें करेंगे । 
                             आजकल कैटरीना कैफ के संबंधों की बडी चर्चा है कभी शाहरूख तो कभी सल्लू के बीच लेटने वाली इमेज बनाकर मिडिया नें उन्हे मुसलमानों की वेश्या बना दिये हैं । यहा तक की विकी पिडिया लिखता है - कश्मीरी पिता और ब्रिटिश माँ के यहाँ जन्मी कैफ़ अपने माता-पिता की आठ संतानों में से एक है।[2] उनका पालन पोषण हवाई में हुआ, और उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में मॉडलिंग शुरु की, जब उनसे एक आभूषण अभियान के लिए संपर्क किया गया। उसके बाद वह लंदन में मॉडलिंग करने लगी। अभी वह अभिनेता सलमान खान के साथ डेटिंग कर रही है , यानि उनकी उपलब्धी में शामिल है सलमान के साथ डेटिंग ......... अरररररर मैं तो काम की बातें पहले बताने लगा । चलो काम की बातें यहीं समाप्त करते हुए नाम की बात करते हैं ...
                 हां तो मैं कह रहा था की हमारे देश में राम इकबाल मिश्रा जैसे कई हिंदू और भी मिल जाएंगे  जो अपने  पिता के दिये नामों में किसी मुस्लिम नाम को जोड कर स्वयंसिद्ध धर्मनिरपेक्ष बन जाते हैं ठीक उसी तरह से जैसे गयासुद्दिन गाजी नें अंग्रेजों से जान बचाने के लिये अपना नाम गंगाधर कर लिया और उपनाम रखा नहरवाले नेहरू यानि जवाहर लाल नेहरू के दादा  और उस नेहरू की लडकी इंदिरा नें जब फिरोज खान से शादी कर ली तो धर्म सद्भावना व नेहरू खानदान की इज्जत बचाने के लिये मोहनदास नें देश का करम फोडते हुए उसे स्वयं-भू हिंदु धार्मिक संत की तरह मुसलमान को गांधी उपनाम दे दिये ( ये अलग बात है की मरते दम तक फिरोज ने कभी खुद को गांधी नही कहा और सभी जगह वो फिरोज खान ही  कहे गये )  ।
                          ओह मैं फिर भटक गया  ........ बात तो मैं झण्डे की कर रहा था ना ।  हां तो मैं बता रहा था की  किस तरह से हमारे देश में आसानी के साथ हिंदु धर्म से  खिलवाड किया जा सकता है । अजमल कसाब जैसे आतंकवादीयों को मोहनदास की तथाकथित संतान कांग्रेस सरकार केवल इस लिये पालना मजबूरी बताती है क्योंकी उनके किसी पूर्वज को गाजी से नेहरू बनना पडा था । अब रही बात आतंकवाद की तो देश में अब सांप्रदायिक दंगे होना इसलिये जरूरी है क्योंकी कांग्रेस को मालूम है की देश में तभी तक उनकी सरकार है जब तक देश अशांत है । देसी मुसलमानों ने कांग्रेस के साथ धोखा करके उसे यूपी चुनाव में नीचा दिखा दिये तो उसने उन मुसलमानों से बदला लेने के लिये बांग्लादेश, म्यांमार औऱ बर्मा से कट्टरपंथी मुसलमान आयात किये जो उसकी सहायता कर सके । 
                                                          अब बात हो रही है आतंकवाद की तो ढण्डा कहां से आया ... अरे भाई जब देश के लगभग हर क्षेत्र में देश आतंकवाद, जातिवाद और सांप्रदायिक दंगे झेल रहा है आम जनता मपर रही है और एक आप हो की बस .... झण्डे के पीछे पडे ुए हो...अब झण्डे में हरा ऊपर हो भगवा... झण्डा तो जवाहर का ही बनाया हुआ है ना .. वो कभी सीधा हो ही नही सकता ..क्योंकी मुसलमान उसे ऊपर करेंगे औऱ हिंदु नीचे ... इसलिये सीधा हो या उल्टा रहेगा तो तिरंगा ही ना ...देखा कितनी अच्छी सोच रखी थी हमारे प्यारे जवाहरी ओह जवाहर नें ।

Saturday, July 21, 2012

कांग्रेस की राजनीती से हिंदु नदारद, ईसाइयों का वर्चस्व ।


 क्यों ...क्या मैने कोई नई बात कह दिया है क्या..... हमारे देश के महान कांग्रेसियों यदि आप हिंदु हैं तो इसे जरूर पढें और सोचें की क्या आपकी अपनी ही पार्टी में एक जोकर से ज्यादा की हैसियत है क्या । जिस समय राजीव गांधी की मौत हुई उस समय बजाय किसी भारतीय कांग्रेसी को बैठाने के आप लोगों नें एक ऐसी औरत का चुनाव कर लिये जो ना केवल कांग्रेस पार्टी की  वरन पूरे देश के लिये घातक बन गई है । मैं यहां साफ साफ कहूंगा की सोनिया गांधी एक ऐसी महिला हैं जो पूर्ण रूप से मिशनरी के हाथो की कठपुतली हैं । आप कांग्रेसी होकर भी किसी महत्वपूर्ण पद पर इसलिये नही बैठ सकते क्योंकि आपमें गुलाम बनने की आदत शुमार नही है आपका अपना जमीर जिंदा है वरना आप प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं । 
                  स्व. श्री अर्जुन सिंह, शरद पवार, पं. श्यामाचरण शुक्ल, विद्याचरण शुक्ल, माधवराव सिंधिया सहित ना जाने कितने सशक्त  हिंदु कांग्रेसी नेता थे और हैं भी लेकिन किसी हिंदु के मजबूत बनने पर देश भी मजबूत बन जाता और मैकाले की शिक्षा पद्यति में आमूलचूल परिवर्तन हो जाते जो किसी भी हालत में मिशनरी को स्वीकार नही हो सकता था । मिशनरी आझ पूरे देश पर राज कर रही है । मैं इस भारत देश के सारे हिंदु कांग्रेसियों को आइना दिखा रहा हूँ । अगर अब नही चेते, समझे तो अपनी औलादों को क्या समझाओगे ये अभी से समझना होगा । सोनिया की ताकत केवल पार्टी से ही है अगर किसी भी राज्य से केवल 500 कांग्रेसी इकट्ठा होकर सोनिया के विरोध में किसी हिंदु संगठन के साथ खडे हो जाएंगे ...यकिन मानिये सोनिया माईलो गांधी उसी तरह से गायब हो जाएगी जिस तरह से बीमारी का बहाना करके अन्ना के आंदोलन के समय ढाका से गायब होकर अमेरिका में मिली थी ।     
                                  किसी भी देश की ताकत उसके मंत्रालय होते हैं ...वर्तमान में हमारे देश के सारे मंत्रालयों पर केवल ईसाइ या मुस्लिम बैठे हुए हैं और हमारे देश के महान हिंदु कांग्रेसी सोनिया की चाटुकारिता में अपना धर्म भूल रहे हैं । जयचंद को कोसने वाले कांग्रेसियों को अब अपने गिरेबान में झांकने का समय आ गया है ... नीचे हमारे भारत देश के पदों पर आसिन नेताओं के नाम पद के साथ हैं इनमें से जिने भी नामों के आगे >>> लगे हुए हैं वह सभी विभाग सीधे ईसाइ मिशनरी या फिर सोनिया माईनो के आधीन हैं और इन्ही पदों पर नियंत्रण रखते हुए वर्तमान में कांग्रेसियों की यह त्याग की मूर्ति दुनिया की चौथी सबसे रईस महिला राजनेता बन गईं है ।  (सोनिया गाँधी का असली नाम “सोनिया” नहीं बल्कि “ऎंटोनिया” है, यह बात इटली के राजदूत ने 27 अप्रैल 1983 को लिखे पत्र में स्वीकार की है, यह पत्र गृह मंत्रालय नें अपनी मर्जी से कभी सार्वजनिक नहीं किया। “एंटॊनिया” नाम सोनिया गाँधी के जन्म प्रमाणपत्र में अंकित है। सोनिया गाँधी को “सोनिया” नाम उनके पिता स्व.स्टेफ़ानो माईनो ने दिया था। ...सुरेश चिपलुनकर जी के ब्लॉग से )  
नीचे                 


>>>1. प्रधानमंत्री के साथ ही उन मंत्रालयों और विभागों का प्रभार
जो किसी मंत्री को नहीं सौंपे गए हैं।
इनमें कार्मिक, जन शिकायत और पेंशन, योजना मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा
तथा अंतरिक्ष विभाग शामिल हैं। ..........................डॉ. मनमोहन सिंह (जो भी काम,जानकारी आए मैडम से मिले )
>>>>>2. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय .........  शरद पवार 
>>>>>>3. रक्षा मंत्रालय .................  ए. के. एंटनी 
>>>>>4. गृह मंत्रालय ...................  पी. चिदंबरम 
>>>>>5. विदेश मंत्रालय ................ एस. एम. कृष्णा
6. विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय.......................... श्री विलासराव देशमुख 
>>>>>7. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ...........  गुलाम नबी आजाद 
8. ऊर्जा मंत्रालय ................ श्री सुशील कुमार शिंदे
 >>>>>9. कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय .............. एम. वीरप्पा मोइली 
>>>>>10. नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय............ फारूक अब्दुल्ला 
>>>>>11. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ........... एस. जयपाल रेड्डी (कहां कहां मिल रही है गैस पहले हमें बताना ताकि ठेके अपने लोगों को दिये जा सकें और हां 27 प्रतिशत पेट्रोल पंप अपने लोगों के लिये आरक्षित कर दो )
12. शहरी विकास मंत्रालय............. श्री कमलनाथ
>>>>>13. प्रवासी भारतीय मामले का मंत्रालय ...........  वायलार रवि 
>>>>>14. सूचना और प्रसारण मंत्रालय........... अम्बिका सोनी 
>>>>>15. श्रम और रोजगार मंत्रालय......... मल्लिकार्जुन खड़गे 
>>>>>16. मानव संसाधन विकास, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय....  कपिल सिब्बल (पुच्च्च्च् ध्यान रखना शिक्षा प्रणाली मैकाले साहब से बाहर की ना होने पाए वैदिक ज्ञान सांप्रदायिक घोषित करो
17. वाणिज्य और उद्योग और कपड़ा मंत्रालय .......श्री आनंद शर्मा
18. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय........... श्री डॉ. सी. पी. जोशी
>>>>>19. आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन तथा संस्कृति मंत्रालय........... कुमारी शैलजा
20. पर्यटन मंत्रालय........ श्री सुबोध कांत सहाय
>>>>>21. पोत परिवहन मंत्रालय.........  जी. के. वासन ( ध्यान रखान अपना माल जा रहा है )
22. संसदीय कार्य तथा जल संसाधन मंत्रालय......... श्री पवन कुमार बंसल
23. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय....... श्री मुकुल वासनिक
>>>>>24. रसायन और उर्वरक मंत्रालय...........  एम. के. अलगिरि (
25. भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्रालय.......... श्री प्रफुल्ल पटेल
26. कोयला मंत्रालय ...............श्री श्रीप्रकाश जायसवाल
>>>>>27. विधि और न्याय मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय.......  सलमान खुर्शीद (अब समझे ..क्यों आतंकियों को चिकन बिरयानी और प्रज्ञा को यातनाएं दी जा रही है, बालकृष्ण को जेल के अंदर और सुब्बा को संसद के भातर रखा जा रहा है )
>>>>>28. जनजातीय मामलों के मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय........ वी. किशोर चंद्र देव 
29. इस्पात मंत्रालय....... श्री बेनी प्रसाद वर्मा 
30. रेल मंत्रालय......... श्री मुकुल रॉय 
31. ग्रामीण विकास मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय.....श्री जयराम रमेश
32. नागरिक उड्डयन मंत्रालय.........श्री अजित सिंह 
                                      तो मेरे प्यारे हिंदुस्तान के क्रिश्चियन बन रहे कांग्रेसी भाइयों ... आप क्या कहेंगे ... मुझे गाली देंगे ... धमकी देंगे ... या फिर सीधे हमला कर देंगे..... लेकिन एक बात सोचकर देखो की क्या केवल पैसों से ही हमारी संस्कृति, हमारी सभ्यता, हमारी परंपरा , हमारा धर्म चल रहा है । ....नही पैसे की चाह केवल दुसरे धर्म के लोगों को होती है इसलिये वे बारबार हमें लुटने आते रहते हैं .....हमारे देश में केवल तीन धर्म हैं हिंदु , मुस्लिम और ईसाइ........
                             सिक्ख, जैन औऱ बौद्ध तो हिंदु धर्म की ही शाखा हैं ....यदि वे माने तो भी ना माने तो भी ... हमारे देश के धर्म को तोडकर जातियों को धर्म में परिवर्तित कर दिया गया है और ना उन्हे कुछ मिला है और ना हमें कुछ मिल रहा है ।

Friday, July 20, 2012

देश में बढते कार्टुनी बच्चे ।

हिन्दू धर्म एक बहती हुई नदी के समान है, जिसमें कई प्रकार की धाराएं आकर मिलती हैं और उसी में एकरूप होती हैं… इस बहती हुई नदी की गहराई में विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु पनपते हैं जो आपसी साहचर्य से रहते हैं…...

ये शब्द लिखे मिले श्री सुरेश चिपलुनकर जी की फेसबुक वाल में औऱ बस फिर क्या था  उन्हे धन्यवाद देते हुए हम भी मैदान में आ गये । जिस तरह से हमारे वेद पुराणों को भुलाते हुए सुपरमैन, बैटमेन, बेन10 वगैरह वगैरह जैसे ना जाने कितने कालपनिक चरित्र हमारे बच्चों के मन में बस चुके हैं । बच्चे कार्टुन देखते हैं और हम एक दुसरे को बताते रहते हैं की देखो ना जब देखो तब बच्चे बस कार्टुन चैनल लगाकर अपने में मस्त रहते हैं ।...लेकिन क्या सचमुच बच्चे  अपने में मस्त रहते हैं ...नही वे ना केवल कार्टुन में मस्त रहते हैं बल्कि जीवन शैली में उसी चरित्र को उतारने का प्रयास करने लगते हैं । मैं अपने बडे बेटे प्रणव को देश के उन 85 प्रतिशत बच्चों में सम्मिलित देखता हूँ जो   12 साल की उम्र होने के बाद भी वह टीवी में कार्टुन चैनल देखना ज्यादा पसंद करता है और पापा देखते ही डिस्कवरी चैनल लगा लेता है । 

          सवाल ये नही की मेरा बच्चा क्या कर रहा है सवाल ये है की इसमें मेरा स्वयं कितना दोष है .... इसमें मैं स्वयं बहुत बडा दोषी हूं प्रणव को पूरा समय ना दे पाना, व्यवसाय का तनाव उसके सामने जाहिर करना और सबसे बडी बात वैदिक पढाई से उसे दूर रखना । .......... । मैने महसूस किया की मैं स्वयं अपने को अपनी प्राचीन शिक्षा पद्यति से दूर होता महसूस कर रहा हूँ । पूजा पाठ में पूरा समय ना दे पाना , बडों को आदर ना देना, चरण स्पर्श करने में हिनता महसूस करना...आखिर ये क्या हो रहा है क्यों मैं और मेरे बच्चे उस विद्या से दूर हो रहे हैं जिनकी बुनियाद पर मेरे संस्कार, मेरा अर्थशास्त्र, मेरे देश की राजनीति, दुश्मनो के लिये कूटनीती सब कुछ खडी थी कहां गया वो बुनियादी ढंचा । अब बच्चे राम औऱ कृष्ण के बने कार्टुन चरित्र देख रहे हैं ऐसी कहानियों के साथ जिनका कोई सिर पैर नही है यानि ...कोरी कल्पना जबकी रामायण से लेकर महाभारत तक सब कुछ वास्तविक घटनाएं हैं । वह हमारा ऐसा इतिहास है जिसे हमें याद रखना होगा और अपने बच्चों को बताना होगा ...लेकिन कैसे ....यह मुझे समझ में नही आ रहा है । 
                                                           कुछ दिन पहले मेरे छोटे बेटे नें अपनी क्लास 5 की पुस्तक पढते हुए पुछा की पापा आपको पता है चिकन में कितनी कैलोरी होती है ..... मैं सन्न रह गया लिखा था चिकन में हरी सब्जियों की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा कैलोरी होती है ... मात्रा का अता पता नही और लिख दिया गया था की इतने प्रतिशत ज्यादा ...मैने रात 9 बजे के आसपास बच्चे के स्कूल के एम.डी. को फोन करके सीधे पुछा की सरजी चिकन में कैलोरी की मात्रा बताएं... वह हडबडा गये बोले क्या बात है मिश्राजी इतनी रात को ये बात कैसे ...मैने उन्हे पूरी बात बताई तो उन्होने कहा की कल बच्चे के साथ उस पुस्तक को मेरे पास भेजिये ...मैने दुसरे दिन भेजा दोपहर को उनका फोन आया और उन्होने बताये की क्सास 5 की सभी कक्षाओं को सूचित कर दिया गया है की उस चैप्टर को हटा दिया जाए । ....... । लेकिन क्या यह उस समस्या का स्थाई समाधान हुआ .. इससे बाकी स्कूली  बच्चे क्या शिक्षा लेंगे । कक्षा नौंवी तक सभी बच्चों को पास करना जरूरी कर दिया गया है इससे शिक्षा के उस मापदण्ड का क्या होगा जो हमारे बुजुर्गों नें तय किये हैं । इतिहास में क्या पढाया जा रहा है उससे हम सब वाकिफ हैं लेकिन क्या कर रहे हैं ये नही सोचे...सोचने का समय भी नही है अब तो बस मैकालें अंकल का बताया पाठ पढ रहे हैं हम लोग और बच्चों को बता रहे हैं सब्जी छोडो चिकन खाओ ...दुध छोडो अण्डे खाओ....यानि अपनी परंपरा के साथ साथ हम बच्चों को धर्म से दूर करते जा रहे हैं ।
                                                                 एक समय था जब ब्राह्मणों के घर अण्डा या मांस मच्छी कहने पर कुल्ली करवा दी जाती थी और अण्डा छूने पर नहाना पडता था उन्ही ब्राह्मणों  घरों के बच्चे सुबह आमलेट दोपहर को केएफसी शाम को पिज्जाहट और रात में बीयर के साथ तंदूरी मुर्गा खाकर घर पहुंचते हैं और माँ बाप को पता भी नही चलता की बेटा क्या कर रहा है क्योंकी सबको जीने की आजादी सरकार नें दे दी है ....
                                              हमारे हिंदु धर्म के वर्णों को तोडकर अलग अलग धर्म बना दिया गया , एकल परिवार को बढावा दिया गया, परिवार नियोजन केवल हिंदुओं पर लागू करके रखा गया, आदिवासी ईसाइ बन गये हैं लेकिन उन्हे आरक्षण आदिवासियो का दिया जा रहा है , मुगलों के देश में आने पहले बने हमारे मंदिरों को मस्जिद, मजार और दरगाह माना जा रहा है , हमारा देश गाय बैलों के मांस का दुनिया का सबसे बडा निर्यातक बनने की ओर है ...............
                                         और हमारे बच्चे कार्टुनी चरित्र बनने की ओर.......पहली बार लिख रहा हूँ ...वंदे मातरम्

Thursday, June 21, 2012

मिशनरी बनेगी राष्ट्रपति ???

पी.ए. संगमा , 13वें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार । संगमा एक निर्भिक छबी वाले कद्दावर नेता हैं जो पार्टी के नामों से कम और व्यक्तिगत रूप से ज्यादा जाने जाते हैं । मैने फेसबुक में कई बार इस बात का जिक्र किया था की सोनिया गांधी चाहे जिसका नाम राष्ट्रपति के रूप में सामने लाए , बात एक ईसाइ पर जरूर ठहरेगी । जी हां वह नाम है पी.ए. संगमा का ... और इस नाम को लाने वाला कोई विदेशी नही स्वयं को हिंदुत्व का प्रबल समर्थक कहलाने वाली भारतीय जनता पार्टी है । जैसा की मेरा मत था की किसी ईसाइ नाम को सामने लाने वाली कांग्रेस पार्टी या सोनिया गांधी होंगी लेकिन अफसोस मेरी धारणा चूर चूर हो गई और मैने पाया की भाजपा भ मिशनरी की चाल में आ गई है या फिर कह सकते हैं की बिक गई है ( कई बार बिकने के प्रमाण हाजिर हैं कांधार से लेकर संसद तक ) ।
                                  अब जबकी   पी.ए. संगमा   जो की वेटिकन सिटी , रोम के मानद सदस्य हैं उनके खिलाफ सोनिया कैसे वोट करेंगी इसलिये मुझे पूरा यकिन है की कांग्रेस पार्टी या फिर पूरे यू.पी.ए. में फूट दिखाने की कोशिशें की जा रही है और सामने जाहिर किया जा रहा है की प्रणव मुखर्जी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार है , जबकि हकीकत ये है की यदि सोनिया गांधी नें संगमा का नाम प्रस्तावित की होती तो लोग इसके पीछे मिशनरी के होने की संभावनाएं भले व्यक्त नही करते लेकिन सोनिया का धर्मप्रेम उजागर हो जाता किंतु अब .... अब क्या......
                                      अब बचते हैं कुछ सवाल जो पुछने है भाजपा से ---

  •  क्या कारण है की राष्ट्रपति पद के लिये उपयुक्त उम्मीदवार की तलाश भाजपा ने पहले से करने का प्रयास नही  की ।
  •  बीजेपी नें पहले से राष्ट्रपति पद की तैय्यारी क्यों नही की 
  • आडवाणी, जेठमलानी, जसवंत सिंह सहित कई वरिष्ठ लोग थे जिन्हे इस पद के योग्य माना जा सकता था , इन्हे नजरअंदाज क्यों किया गया 
  • पी.ए. संगमा नें तथाकथित रूप से सारी कैम्पेन खुद किये हैं और यदि ये जीतते हैं तो जाहिर है की किसी भी दल को इसका श्रेय नही मिलेगा और संभवतः ये अब तक के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति होंगे जिन पर कोई भी दवाब नही बना सकेगा ... यानि इनका निर्णय़ व्यक्तिगत भी हो सकता है । भाजपा को इस प्रत्याशी से क्या लाभ होगा या देश का कैसे हित होगा बताए ।
  • जब समय है राष्ट्रपति के चुनाव का उस समय नरेन्द्र मोदी  को प्रधानमंत्री बनाने का मामला क्यों उठाया जा रहा है  जबकी इस समय इस बात का कोई औचित्य नही है  ।
  • बीजेपी किसके दिमाग से चल रही है और संसद में सही विपक्ष की भूमिका क्यों नही निभा रही है , जबकि सारा देश रामदेव और अन्ना हजारे जैसे अविश्वसनीय लोगों को समर्थन दे रहा है उस समय जनता बीजेपी पर भरोसा क्यों नही कर रही है ...
                                                          देश की बदहाली के लिये जितनी जिम्मेदार यूपीए सरकार   है उससे कहीं ज्यादा विपक्ष है , सरकार तो नाकाम हो ही रही है विपक्ष भी कम नाकाम नही रहा है । जिस समय भ्रष्टाचार के मामले उठते हैं उसी समय भाजपा की अदरूनी कलह उजागर होने लगती है । भले ही यह सोची समझी साजिश हो किंतु है वह देश के लिये घातक साबित हो रही है । कभी कलमाणी तो कभी येदुरप्पा चाहे भाजपा हो या कांग्रेस भ्रष्टाचार की कालिख में दोनो ही लिपटे हुए हैं और इस हालत का सबसे ज्यादा फायदा मिशनरी
 उठाती चली आ रही है । 
                                                 कितने लोगों नें यह जानने का प्रयास किये हैं की वर्तमान सरकार में कितनें अधिकारी ईसाइ हैं , यहां ईसाइ व्यक्ति केवल एक धर्म ही नही   बल्कि पूरी कैथोलिक ईसाइ  मिशनरी का सदस्य होता है और पी.ए. संगमा रोम कैथोलिक चर्च के मानद सदस्य हैं । यह मैं नही पी.ए. संगमा की बायोग्राफी कहती है । 
                                              अब संगमा की जीत किसकी जीत मानी जाए यह मेरी समझ से परे है , यदि आपको कुछ समझ आ रहा हो तो बताएं ।