Tuesday, November 2, 2010

कब सुधरेगा मेरा देस

ना ना ना भारत की बात नही कर रहे हैं हैं हम तो अपने देस (छत्तीसगढ) भिलाई शहर की बात बात कर रहे हैं । लेकिन ये मत समझियेगा कि यह केवल एक देस की बात है , ये हमारे देश के हर देस की बात है । एक मित्र ने कहे थे कि अगर दुसरो को सुधारना चाहते हो तो पहले अपने को सुधारो पर ये नही बता पाया कि अगर हमारे सुधरने के बाद भी दुसरा ना सुधरे तो क्या करना होगा । ये कहना है हरीश पोपटानी का ।
            किस्सा है भिलाई के ओल्ड सरकुलर मार्केट का । यह पूरे छत्तीसगढ का सबसे सस्ता बाजार कहलाता है लेकिन इसी बाजार के बीच में तीन बिल्डिंग मटेरियल व्यवसायियों की दुकान  थी  जिनसे सारा बाजार परेशान था । सडक पर पडे ईंटा फैली हुई रेती से सभी व्यापारी परेशान हाल थे । तब मार्केट के व्यापारी संघ का चुनाव किया गया जिसमें उत्त्तम किराना स्टोर्स के संचालक हेमंत चोपडा और ओम किराना के कृपाल बजाज का विशेष सहयोग रहा इसके बाद बना ओल्ड व्यापारी संघ जिसका उद्देश्य था बाजार को व्यवस्थित बनाने के लिये हर संभव प्रयत्न करना  । आज से 2 माह पहले बाजार का हाल देखिये ः


ये हाल था हमारे बाजार का । ना पुलिस सुने ना ही निगम में कोई सुनने को खाली था । इसके बाद शुरू हुई व्यापारी संघ विरूद्ध अवैध कब्जाधारीयों  की लडाई । तीन बिल्डिंग मटेरियल व्यवसायियों में से एक हरीश पोपटानी नें संघ का साथ देते हुए अपना व्यवसाय बदल कर सेनेटरी का कर लिये । अब बचे दो ... दोनो ही बेहद अकडू , अपने को तुर्रमखाँ समझने वाले दोनो व्यापारियों का ये हाल किया जाने लगा ः-

  
 दांयी तस्वीर में दिख रहे युवा हैं भिलाई निगम आयुक्त श्री राजेश सुकुमार टोप्पो और मध्य में हैं मो. गफ्फार खान । इनके पास संघ की समस्या ज्यों ही पहुंची तुरंत उन्होने अपने मातहतों को निर्देश देकर कार्यवाही करने को कहे जिसका परिणाम आप बांयी तस्वीर में देख रहे हैं । लगातार एक माह तक इसी तरह की कार्यवाही की जाती रही । चूंकी संघ व्यापारीयों के हित के लिये बना था इसलिये हर बार इन व्यवसायियों को केवल समझाइश दी जाती रही । जब निगम और पुलिस की गाडियां आती तो ये गिडगिडाने लगते और कुछ दिन के बाद फिर से वही रवैय्या अपनाने लगे । इसलिये हमारे वार्ड  पार्षद मो. गफ्फार खान का सहयोग मांगा गया और निगम आयुक्त से इन व्यपारीयों पर कडी कार्यवाही हेतू आवेदन सौंपा गया ।  लेकिन दीपावली के कारण निगम नें व्यस्त रहने की बात कह कर टाल दिये जिसका परिणाम ......

                                                                                      
 यदि इतना ही तो कोई बात नही थी लेकिन इसके बाद दोनो बंधु मिलकर संघ के पदाधियारीयों को धमकाना शुरू कर दिये और उल्टी सीधी अफवाहें उडाने लगे जिससे तंग आकर व्यापारीयों नें उन्हे उनके हाल पर छोडकर अपने अपने काम पर लग गये हैं , आखिर दीवाली में उन्हे ग्राहकी भी तो देखना है जिनसे घर चलता है ।

 अब क्या होगा ये कोई नही जानता लेकिन इतना तय है कि हम सुधरेंगे , जग सुधरेगा की बातें गलत है । और अब ये तय कि कहावत बदलने का समय आ गया है कि - स्वयं को सुधारो , जग ना तो सुधरे तो डंडा उठाकर सुधारो फिर भी ना माने तो उन्हे छोडो औऱ अपना काम करो ।-