Thursday, November 4, 2010

क्यों ना फोडे फटाके, बच्चे हमारे

हमारे घर के पास रहने वाले एक सज्जन हैं जिनका नाम है  धनराज टहल्यानी ... भिलाई शहर के प्रतिष्ठीत पुस्तक व्यवसायी इन सज्जन की चर्चा का विषय था दीवाली पर फटाके फोडने से अपन े बच्चों को मना किया जाना चाहिये . इससे प्रदुषण फैलता है, बच्चों को चोट लगने का खतरा बना रहता है कभी कभी भयंकर दुर्घटना घटने की संभावना भी रहती है वगैरह वगैरह -

 " अपने देश के नागरिकों को चाहिये की वे बच्चों को समझाएं की किस तरह से फटाकों का प्रदुषण हमारे लिये जान का खतरा बन सकता है और बन भी रहा है " - धनराज टहल्यानी (ब्रह्मकुमारी)


  " मैं ऐसा नही मानता । मेरी सोच में देश के हर नागरिक  को अपने इस सबसे बडे त्यौहार को पूरे हर्षोल्लास से मनाना चाहिये । रही बात प्रदुषण की तो पहले सरकार बडी फैक्ट्रीयों से निकल रहे पर्यावरण को हानि पहुंचाने वाले पदार्थों को रोके , धर्म को प्रदुषण से जोडना गलत है  " - मो. अकरम खान (संचालक - कोहिनीर इलेक्ट्रीकल्स)


" साल के इस सबसे बडे त्यौहार पर मैं कोई बात नही कहूंगा । .सिवाय इसके कि मैं अपने बच्चों के लिये अगर फटाके लेकर घर नही गया तो दीवाली के दिन घर पर महाभारत हो जाएगी " - हरीश पोपटानी (प्रतिष्ठीत सेनेटरी व्यवसायी)



" किसी भी त्यौहार को रोकने के लिये कुतर्क करना बेकार है । लोगों को चाहिये कि वे धर्म को छोडकर बाकि समस्याओं पर ध्यान दें । दीवाली पर होने वाले प्रदुषण को नापने के लिये विदेशी मशीनें आ जाती है लेकिन फैक्ट्रीयों से निकलने वाले धुए को रोकने के लिये कोई उपाय नही होता । कुछ इसी तरह की बातें बकरीद के बारे में की जाती है कि जीव हत्या बंद करो , लेकिन जो चीजें धर्म के अनुसार हम कर रहे हैं उस पर किसी भी तरह की पाबंदी गलत है " - अख्तर चौहान (संचालक - चौहान लाइम डिपो व समाजसेवी)

" सभी धर्मों को अपनी अपनी तरह के त्यौहार मनाने के लिये पूरी छूट है । किसी भी तरह की ऐसी बातें करना जिससे त्यौहार की चमक खो जाए गलत बात है । मैं इस बात  का विरोधी हूँ । यदि प्रदुषण रोकना है तो इन   फटाकों को बनाने की फैक्ट्री बंद कर देना चाहिये । सबसे ज्यादा प्रदुषण चीनी फटाकों से होता है हमें लोगों को इनसे बचने की सलाह देना चाहिये । दीवाली में बम, होली में रंग,  ईद में सेवंई औऱ क्रिसमस में केक ना हों तो इन त्यौहारों का क्या मतलब " - गफ्फार खान (पार्षद व समाजसेवक)
 चलिये हो गई अब बहुत बातें अब जरा खबरों पर आया जाए -

आप बताएं कि कितने लोग मिलकर कितने फटाके जलायें कि तस्वीर से निकलता धुंआ शरमा कर बंद हो जाये । ये तस्वीर मैं रोज खींच खींच कर भेज सकता हूँ जब हर शाम को 3 बजे के बाद मेरे घर के पीछे की फैक्ट्री इस तरह से धुंआ निकालती है ।