तस्वीर में दिख रही एटीएम की पर्ची केवल देखने के लिये है, बल्कि इसमें एक मानवीय संवेदना भी है । जरी गौर से इस एटीएम से निकाली गई रकम और बची हुई रकम को देखिये । 100 रूपये निकालने के बाद खाते में शेष रकम मात्र 28 रूपये बची हुई है । अब आप सोचेंगे इस बात से क्या खबर बन रही है है अब खबर भी देखें ।
दुर्ग स्टेशन में हमारे अखबार के रिपोर्टर अनिल राठी अपनी माताजी के साथ दुर्ग रेल्वे स्टेशन में आज दोपहर 1.30 गोंदिया जाने वाली ट्रेन में बैठाने स्टेशन पहुंचे । दोपहर 2.05 पर रायपुर की ओर जाने वाली ट्रेन प्लेटफार्म में खडी हुई थी कि तभी उसकी नजर एटीएम पर उमडी भीड की ओर पडी । वहां जाने पर पता चला कि इस 128 रूपये शेष रकम वाले खाते से निकाला गया सौ रूपये एक तरफ से छपा हुआ था और दुसरी ओर से कोरा । वह लडका रूआँसा हो रहा था कि इस संवाददाता नें उस लडके को तत्काल 200 रूपये देकर ट्रेन की ओर भेजा और वह एक तरफ से कोरा नोट लेकर कार्यालय पहुंचा । नोट देखने के बाद बडी देर विचार विमर्श हुआ और तय किया गया कि इस नोट को संभाल कर रखा जाय । अब ये नोट इस्पात की धडकन अखबार की मिल्कियत बन गया है लेकिन एक बात दिमाग में ये बराबर उठ रही है कि क्यों ना रिजर्व बैंक इसी तरह के नोटों को छापना शुरू कर दे ........
एक तरफ की छपाई का पैसा तो बचेगा ।
Friday, October 29, 2010
Wednesday, October 27, 2010
भिलाई- 70 वर्षीय अनुसूचित जाति वृद्ध दंपत्ति को थाने से अपमानित कर भगाया
आज सरकार वृद्धों को न्याय देने की बातें कर रही है लेकिन उन्ही वृद्धों को थाने में क्या क्या हाल झेलना पड रहा है इसकी एक बानगी भिलाई शहर के सुपेला थाने में विगत दिनों देखने को मिली जहां 70 वर्षीय रामनगर, सुपेला निवासी राम लगन प्रसाद अपनी 55 वर्षीय पत्नी के साथ चंगोरभाटा, रायपुर निवासी राहुल राव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने वैशालीनगर पुलिस चौकी पहुंचे । प्रार्थी दंपत्ति के अनुसार राहुल राव इनके निवास के भीतर चाकू और कट्टा (देसी पिस्तौल) दरवाजे की कुंडी तोडकर भीतर घुसा और इनकी बेटी रंजीता के बारे में पुछताछ करने लगा । इस बारे अनभिज्ञता जाहिर करने पर राहुल द्वारा रामलगन को पूरे परिवार के साथ जान से मारने की बातें करने लगा जिस कारण पूरा परिवार भयभीत हो गया । ज्ञात हो कि रामलगन की तलाकशुदा बेटी रंजीता को राहुल राव द्वारा जबरन उठाकर रायपुर में अपने साथ रख लिया गया था । रंजीता के पहले पति से 2 लडके और एक लडकी हुए थे जिनमें से बडा लडका अपने पिता के साथ रहता है जबकि एक लडका और एक छेटी लडकी अपने नाना रामलगन के पास रह रहे हैं । राहुल का कहना था कि रंजीता उसके पास से भाग कर कहीं चली गई है और वह अपने पिता के अलावा कहीं नही जा सकती है । जबकि रामलगन को इस बात का अंदेशा था कि राहुल उनकी बेटी की हत्या कर चुका है और अब उसे लापता बताने की कोशिश कर रहा है । राहुल आदतन अपराधी है ।
भयभीत दंपत्ति इस संबंध में वैशालीनगर पुलिस चौकी में जब रिपोर्ट करने पहुंचे तो वहां मौजूद चौकी प्रभारी की उपस्थिति में वहां के सिपाहीयों नें उक्त वृद्ध दंपत्ति की उम्र को नजरअंदाज करते हुए बदतमिजी करते हुए अपमानित करके थाने से भगा दिये । प्रभारी मुंशी ने रिपोर्ट लिखने से इंकार करते हुए रायपुर थाने में रिपोर्ट करने की बात कही और आवेदन को फाडकर फेंक दिया और दुबारा चौकी में कदम रखने पर अंदर कर देने की धमकी दी । इस बात की कई बार मौखिक शिकायत वैशालीनगर पुलिस चौकी में रामलगन द्वारा की जा चुकी है जिस पर आजतक कोई कार्यवाही नही होने के कारण राहुल रानव कता मनोबल बढा हुआ है ।
क्या प्रशासन गरीब अनुसूचित जाति पर हो रहे पुलसिसिया अत्याचारों को जानता है अथवा जानना नही चाहता । इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होना आवश्यक है क्योंकि नक्सली शहरों में कदम बढा रहे हैं और कहीं औसा ना हो कि गरीबों की सहानुभूति आगे चल कर ऐसे पुलिस वालों के कारण प्रशासन की सिरदर्दी ना बन जाए ।
Sunday, October 10, 2010
हे रावण तुम कब आओगे
हे महावीर , पराक्रमी, महाज्ञानी, महाभक्त, न्यायप्रिय, अपनों से प्रेमभाव रखने वाले , अपनी प्रजा को पुत्र से ज्यादा प्रेम करने वाले, धर्म आचरण रखने वाले,
अपने शत्रुओं को भयभीत रखने वाले, वेदांत प्रिय त्रिलोकस्वामी रावण आपकी सदा जय हो !
हे महावीर आपके समक्ष मैं नासमझ अनजाना बालक आपसे सहायता मांग रहा हूँ । हे रावण मेरे देश को बचा लो उन दुष्ट देवता रूपी नेताओं से जो हर साल आपके पुतले को जलाकर आपको मार रहे हैं और आपको मरा समझ अपने को अजेय मान रहे हैं । हे पराक्रमी दसशीशधारी आज मेरे देश को आपकी सख्त जरूरत आन पडी है । जनता त्राही त्राही कर रही है ओर राजशासन इत्मीनान से भ्रष्टाचार, व्याभिचार और धर्मविरोधी कार्यों में लगा हुआ ।
हे रावण मुझे आपकी सहायता चाहिये इस देश में धर्म को बचाने के लिये , उस धर्म को जिसे निभाने के लिये आप स्वयं पुरोहित बनकर राम के समक्ष बैठकर अपनी मृत्यु का संकल्प करवाए थे । आज हमारे राजमंत्री अपने को बचाने के लिये प्रजा की आहूति दे रहे हैं । हे रावण आप जिस राम के हाथों मुक्ति पाने के लिये अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिये वही राम आज अपने ही देश में, अपनी ही जन्मस्थली को वापस पाने के लिये इस देश के न्यायालय में खडे हैं । हे रावण अब राम में इतना सामर्थ्य नही है कि वह इस देश को बचा सके इसलिये आज हमें आपकी आवश्यकता है ।
हे दशग्रीव हम बालक नादान है जो आपकी महिमा और ज्ञान को परे रखकर अब तक अहंकार को ना जला कर मिटाकर आपको ही जलाते आ रहे हैं । हे परम ज्ञान के सागर, संहिताओं के रचनाकर अब हमें समझ आ रहा है कि जो दक्षिणवासी आप पर श्रद्धा रखते आ रहे हैं वो हम लोगों से बेहतर क्यों हैं । हे त्रिलोकी सम्राट हमें अपनी शरण में ले लो और केवल दक्षिण को छोड समस्त भारत भूमि की रक्षा करने आ जाओ । हे वीर संयमी आपने जिस सीता को अपने अंतःपुर मे ना रख कर अशोक वाटिका जैसी सार्वजनिक जगह पर रखे ताकि कोई आप पर कटाक्ष ना कर सके वही सीता आज सार्वजनिक बाग बगीचों में भी लज्जाहिन होने में गर्व महसूस कर रही है ।
हे शिवभक्त मेरे देश में यथा राजा तथा प्रजा का वेदकथन अभी चरितार्थ नही हो पाया है अभी प्रजा में आपका अंश बाकि है लेकिन हे प्रभो ये रामरूपी राजनेता , प्रजा के भीतर बसे रावण को पूरी तरह से समाप्त करने पर तुले हुए हैं ।
त्राहीमाम् त्राहीमाम् ....... हे राक्षसराज रावण हमारी इन रामरूपी नेताओं से रक्षा करो ।
Saturday, October 9, 2010
भारत के नागरिकों के लिये सनातनी हिंदु धर्म का पालन अनिवार्य किया जाए
शीर्षक पढ कर समझ आ गया होगा कि मैं हिंदुत्व का राग अलापने जा रहा हूँ । हाँ मैं अपने देश के प्रचीन सनातन धर्म के उपनाम हिंदु धर्म पर ही बात करने जा रहा हूँ । कल रात मैं ब्रह्मकुमारी के आश्रम में प्रतिदिन जाने वाले अपने पडोसी दीपक बुक डिपो के संचालक श्री धनराज टहल्यानी से चर्चा कर रहा था और वहीं से निकली बातों की गंभीरता यहां लिख रहा हूँ , क्योंकि उन्हे वहां नही समझा सकता था ।
बात निकली हिंदु धर्म की तो उन्होने सनातन धर्म की रट पकड लिये उनका कहना था कि हिंदु शब्द मुस्लिम आक्रांताओं नें दिये हैं जबकि मेरा मत था कि सदियों पहले जब हमारा देश और चीन एक साथ प्रेमभाव में बसते थे उस समय चीनी हमें इन्दु (चंद्रमा) कहते थे क्योंकि हमारे पंचांग, राशियों का निर्धारण चंद्रमा की गति, स्थान से ही होता है, जो धीरे धीरे इ से हि में बदल गया (शब्दों पर ध्यान दिजिये स का ह में बदलना अटपटा लगता है लेकिन इ और हि के उच्चारण समान होते हैं )
अब हम हिंदु सनातनीयों को सोचना होगा कि हम क्या कर रहे हैं बजाय विश्व में अपने सनातनी हिंदु धर्म को फैलाने, प्रचार करने के उस एक ही चीज के दो नामों पर अडते हुए लड रहे हैं । आप बताइये मेरे हिंदु कहने पर आपके सनातन नाम पर क्या फर्क पड रहा है । मैं हिंदु हूँ उस पर ब्राह्मण भी हूँ मैं मानव जाति की श्रेष्ठ जाति हूँ लेकिन मैं अपने धर्म को सनातन ना कह कर हिंदु कह रहा हूँ तो क्या आप मेरी जाति बदल देंगे या मेरे विचार मिटा देंगे । हमें आज की बातों को सोचते हुए ये भी सोचना होगा कि हमारे पूर्वजों की इसी अकड के कारण आज हमारी विभिन्न जातियां धर्मों में बदल गई हैं । सिक्ख, जैन, बौद्ध क्या पहले से धर्म हैं ? नहीं ! फिर सबसे पहले ये सोचिए कि किस कारण से हिंदु धर्म की जातियां अलग धर्मों में बदल गई हैं ।
यदि मैं ये नही लिखूंगा तो मेरा मन हमेशा मेरे ब्राह्मणत्व को कचोटेगा कि मैने समय पर ये सब क्यों नही बताया । यदि आप सनातन की रट पकड कर रखेंगे तो यकिन जानिये वो दिन दूर नही रहेगा जब आप सनातनी धर्म और मैं हिंदु धर्म का अनुयायी कहलाऊंगा, बजाय आप अपने को केवल सनातनी कहने के सनातनी हिंदु कहें ताकि धीरे धीरे आज के हिंदुओं को लगने लगे कि हाँ हमारा हिंदु धर्म ही प्राचीन सनातनी धर्म है ।
नाम के पीछे भागने के बदले हमें एकता की जरूरत है केवल यज्ञ कर्म करने से हम अपने देश को मिटने से नही बचा सकेंगे हमें अपने ईश्वर को मानने के साथ साथ अपने कर्मों को भी बदलने की जरूरत है ।
- आज सौ करोड हिंदुओं को हमने केवल 800 आदमीयों के भरोसे क्यों रखे हैं ?
- आज नेताओं का भ्रष्टाचार खुलेआम चल रहा है इसके लिये हमारे धर्माचार्य क्या कर रहे हैं ?
- आज हमारा भविष्य विदेशी महिला और उसके संकर्ण प्रजाती के बच्चों के भरोसे क्यों दिया जा रहा है?
- आज भी हमारा संविधान हमें गर्व से हिंदु कहने की आजादी क्यों नही देता है ?
- आज हम अपने देश के धर्मदेवताओं की पवित्र भूमि को स्वतंत्र क्यों नही करा पा रहे हैं ?
- आज भी हमारा शिक्षा तंत्र विदेशी शिक्षा (मैकाले) पर क्यों निर्भर है ?
- आज हम अपने बच्चों को वैदिक ज्ञान दिलाने वाले शिक्षण संस्थान शुरू नही करवा पा रहे हैं क्यों ?
- आज हमारे देश की पुलिस और सैनिक भ्रष्ट नेताओं के कारण क्यों बलि चढ रहे है ?
- आज हम राष्ट्रीय सेवक संघ से क्यों नही जुड पा रहे हैं ?
10. आज हम देश के भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ खडे होने के बदले हाथ बांधकर उन संतो और बाबाओं के पीछे क्यों खडे होते हैं जो हमें भगवान की महिमा का बखान तो सुनाते हैं लेकिन असल जिंदगी में उनके बनाये उत्पादों का हम प्रचार करते हैं ?
कुछ आप सोचिये कुछ हम सोचेंगे तभी देश को एक रंग में बदल सकेंगे । तिरंगा झंडा हमारा कभी नही हो सकता क्योंकि उसमें तीन धर्मों का मिलान है और अब हम अपने देश को एक रंग में रखना चाहते हैं । केसरी हिंदु, सफेद ईसाइ और हरा मुसलामनों का धर्मरंग है, सारा देश केवल केसरी में रंगेगा तभी हम कह सकेंगे रंग गया बसंती चोला ।
चक्र को रहने देंगे क्योंकि वह हमारे विश्वसम्राट अशोक का राजचिन्ह है ।
Thursday, October 7, 2010
हिंदु आतंकवाद है ये
मैं अमन-ओ-चैन की परवाह नहीं करता
दंगा-ओ-फसाद, अजी इनआम है मेरा !
करता हूँ दिलो जान से, पाकिस्तान की परस्तिश
कहते हैं जिसे कुफ्र, वह "इस्लाम" है मेरा !!
अल्लाह ने बख्शा है, मुझे रूतबा-ए-घौंचू
चूतिया जिसे कहते हैं, वही बाम है मेरा !!
धन्य है ब्लॉगर सलीम खान जिसने कबूल तो किया कि लखनऊ की तहजीबी नगरी में उसने कैसी तमीज सीखी है । इसने लिखा आइये देखिये हिंदु-आतंकियों का जलील चेहरा और बढिया बढिया हिंदु नेताओं की और कारसेवकों की तस्वीरें लगा दिया । मैने सोचा कि इसके ब्लॉग पर ही धनिया बो दूं लेकिन फिर सोच क्या मतलब ये तो दन् से मेरी प्रतिक्रिया उडा देगा इसलिये अपने ब्लाग पर लिखने के बाद उसे लिंक दूंगा ।
मिस्टर घोचू (इसे आपने अपना रूतबा कहा है जनाब ) आपने जो लिखा है उसमें आपका दोष नही है क्योंकि ये आपके भीतर की भडास है जो आप अपने पूर्वजों पर व्यक्त नही कर पा रहे हैं । मैं आगे की कोई बात लिखने से पहले आपको एक सलाह दूंगा कि आप अपने मां बाप से पूछो कि तुम्हारा खानदान कब से मुसलमान है । अब ये मत कह देना कि जब से इस्लाम बना है तब से तुम लोग मुसलमान हो क्योंकि ऐसा होता तो तुम्हारा चेहरा ओसामा बिन लादेन और अरबी शेखों की तरह होता ना कि आम हिंदुस्तानी भारतीयों की तरह । तुम्हारे हिंदु आतंक को संबोधित लेख के जवाब में मैं कई मुस्लिम आतंकवाद की घिनौनी तस्वीरें भेज देता जिनमे से सबसे नई तो दो चार माह पुरानी ही होती । आपने तो 1992 की बाबरी मस्जिद की तस्वीरें भेजी हैं तो ये क्यों नही बताया जनाब कि ये रही हिदु आतंकवाद की 2010 की तस्वीरें ?
बाबरी मस्जिद जो किसी बाबर नाम के आक्रमणकारी नें भारत में आकर हमारे धर्म पर, हमारी आस्था पर हमला करके हमारे देश के प्रथम युगपुरूष श्री राम की जन्मभूमि पर कब्जा कर मस्जिद बना दिया था उसे तोड कर अपनी हजारों साल पुरानी सभ्यता को वापस पाने की मुहिम चलाने पर हिंदु आतंकवादी बन गये लेकिन आप क्या रहे हैं सलीम मिंया... आप बजाए ये सोचने के की हो सकता है उस आक्रमणकारी आतंकवादी बाबर के साथ आए मुस्लिम सैनिकों में से या खुद बाबर नें तुम्हारी किसी पूर्वज औरत की इज्जत तार तार करके जबरन मुस्लिम बना दिया जिसके कारण बाबर की मौत के बाद भी तुम उसके धर्म को मान रहे हो । सलीम भाई सोचो कि तुम कौन हो अगर तुम अपने को मुसलमान मानते हो तो तुम्हे ये स्वीकार करना होगा कि तुम कायर हो और अपने पूर्वजों के अत्याचार को सह रहे हो तुम ये नही सोचते हो कि जबरन गऊमांस खिलाकर तुम्हारे पूर्वजों को धर्मभ्रष्ट कर दिया गया था और तुम अपने पुरखों की जबरदस्ती को आज अपने रिवाज में शामिल कर लिये हो । सोचकर देखो और जरूरत पडे तो इतिहास में झांककर देखो कि रेगिस्तान से आए अरब लोगों को गाय का मांस कहां मिला होगा ? जवाब आपके पास नही है कोई बात नही मैं देता हूँ -
बाबर का जन्म फ़रगना घाटी के अंदिजन नामक शहर में हुआ था जो अब उज्बेकिस्तान में है। उसके पिता उमर शेख़ मिर्ज़ा, जो फरगना घाटी के शासक थे । हालाँकि बाबर का मूल मंगोलिया के बर्लास कबीले से सम्बन्धित था पर उस कबीले के लोगों पर फारसी तथा तुर्क जनजीवन का बहुत असर रहा था, वे इस्लाम में परिवर्तित हुए तथा उन्होने तुर्केस्तान को अपना वासस्थान बनाया। मंगोल जाति (जिसे फ़ारसी में मुगल कहते थे) का होने के बावजूद उसकी जनता और अनुचर तुर्क तथा फारसी लोग थे। उसकी सेना में तुर्क, फारसी,पश्तो के अलावा बर्लास तथा मध्य एशियाई कबीले के लोग भी थे। बाबर के चचेरे भाई मिर्ज़ा मुहम्मद हैदर ने लिखा है कि उस समय, जब चागताई लोग असभ्य तथा असंस्कृत थे तब उन्हे ज़हिर उद-दिन मुहम्मद का उच्चारण कठिन लगा। इस कारण उन्होंने इसका नाम बाबर रख दिया। इन रेगिस्तानी कबीले वालों का एक ही काम हुआ करता था दुसरे कबीले पर हमला करके उनकी औरतें और ऊंठ और भेडों को लूटना । रेगिस्तान में गाय नही होती हैं इन्हे अखंड भारत के लोगों को गऊमांस इसलिये खिलाया जाता था ताकि इसके बाद उन्हे अन्य हिंदु लोग अलग कर दें और उस समय की हिंदु परंपरा के अनुसार गऊभक्षकों को अछुत कहकर सनातन धर्म की सभी जातियों और संप्रदायों द्वारा अलग कर दिया जाता था जिसके कारण मुस्लिमों को अलग से बसने की जगह मिलती गई ।
इसके बाद भी कहने को बहुत कुछ बचता है सलीम खान साहब जिस समय बाबर आया था उस समय हमारा देश धर्म में नही जातियों , वर्णों और संप्रदायों में बंटा हुआ था और सभी केवल सनातन धर्म को ही मानते थे । रेगिस्तान की औलाद बाबर और उसके साथियों नें हमारे देश के धन को लूटा, औरतों की इज्जत तार तार कर दिये, बच्चों का जबरन खतना किया गया, आदमीयों को गऊमांस खिलाया गया ताकि उनका जनेऊ उतर जाए, मतलब ये कि बाबर नें जो धर्म परिवर्तन किया उसका एक उदाहरण आप भी हो सकते हैं ।
अब आप देखिये हमारी भारत माता की पावन धरा का असर की बाबर जैसे आतताई, क्रूर हत्यारे और लुटेरे का पौत्र अकबर इसी धरती पर हिदु मुस्लिम एकता का अनुपम उदाहरण देते हुए दीन ए इलाही का गठन करता है अल्लाह हो अकबर तो आज भी आप कहते हैं खान साहब ।
घोंचू साहब सोचीये कि भारतीय मुस्लिमों के चेहरे हिंदुओं के चेहरों से क्यों मिलते हैं । हां एक बात और है कि -
मुस्लिम पीर पैगंबरों नें अपनी सिद्धियों के एवज में भी धर्म परिवर्तन कराने में भूमिका निभाई है । आपके शहर के आसपास ही कोई जगह है जिसे मौदहा के नाम से जाना जाता है आज की पीढी से तीन पीढी पहले तो वह ठाकुरों का गांव हुआ करता था सलीम साहब आपसे अनुरोध है कि उस घटना के बारे में आप बताएं तो ज्यादा अच्छा होगा कि मौदहा के साथ के 7 गांव और मुसलमान क्यों बने --- क्योंकि हम तो ठहरे हिंदु आतंकवादी भला हमारी बात आप कैसे समझ सकेंगे ।
दंगा-ओ-फसाद, अजी इनआम है मेरा !
करता हूँ दिलो जान से, पाकिस्तान की परस्तिश
कहते हैं जिसे कुफ्र, वह "इस्लाम" है मेरा !!
अल्लाह ने बख्शा है, मुझे रूतबा-ए-घौंचू
चूतिया जिसे कहते हैं, वही बाम है मेरा !!
धन्य है ब्लॉगर सलीम खान जिसने कबूल तो किया कि लखनऊ की तहजीबी नगरी में उसने कैसी तमीज सीखी है । इसने लिखा आइये देखिये हिंदु-आतंकियों का जलील चेहरा और बढिया बढिया हिंदु नेताओं की और कारसेवकों की तस्वीरें लगा दिया । मैने सोचा कि इसके ब्लॉग पर ही धनिया बो दूं लेकिन फिर सोच क्या मतलब ये तो दन् से मेरी प्रतिक्रिया उडा देगा इसलिये अपने ब्लाग पर लिखने के बाद उसे लिंक दूंगा ।
मिस्टर घोचू (इसे आपने अपना रूतबा कहा है जनाब ) आपने जो लिखा है उसमें आपका दोष नही है क्योंकि ये आपके भीतर की भडास है जो आप अपने पूर्वजों पर व्यक्त नही कर पा रहे हैं । मैं आगे की कोई बात लिखने से पहले आपको एक सलाह दूंगा कि आप अपने मां बाप से पूछो कि तुम्हारा खानदान कब से मुसलमान है । अब ये मत कह देना कि जब से इस्लाम बना है तब से तुम लोग मुसलमान हो क्योंकि ऐसा होता तो तुम्हारा चेहरा ओसामा बिन लादेन और अरबी शेखों की तरह होता ना कि आम हिंदुस्तानी भारतीयों की तरह । तुम्हारे हिंदु आतंक को संबोधित लेख के जवाब में मैं कई मुस्लिम आतंकवाद की घिनौनी तस्वीरें भेज देता जिनमे से सबसे नई तो दो चार माह पुरानी ही होती । आपने तो 1992 की बाबरी मस्जिद की तस्वीरें भेजी हैं तो ये क्यों नही बताया जनाब कि ये रही हिदु आतंकवाद की 2010 की तस्वीरें ?
बाबरी मस्जिद जो किसी बाबर नाम के आक्रमणकारी नें भारत में आकर हमारे धर्म पर, हमारी आस्था पर हमला करके हमारे देश के प्रथम युगपुरूष श्री राम की जन्मभूमि पर कब्जा कर मस्जिद बना दिया था उसे तोड कर अपनी हजारों साल पुरानी सभ्यता को वापस पाने की मुहिम चलाने पर हिंदु आतंकवादी बन गये लेकिन आप क्या रहे हैं सलीम मिंया... आप बजाए ये सोचने के की हो सकता है उस आक्रमणकारी आतंकवादी बाबर के साथ आए मुस्लिम सैनिकों में से या खुद बाबर नें तुम्हारी किसी पूर्वज औरत की इज्जत तार तार करके जबरन मुस्लिम बना दिया जिसके कारण बाबर की मौत के बाद भी तुम उसके धर्म को मान रहे हो । सलीम भाई सोचो कि तुम कौन हो अगर तुम अपने को मुसलमान मानते हो तो तुम्हे ये स्वीकार करना होगा कि तुम कायर हो और अपने पूर्वजों के अत्याचार को सह रहे हो तुम ये नही सोचते हो कि जबरन गऊमांस खिलाकर तुम्हारे पूर्वजों को धर्मभ्रष्ट कर दिया गया था और तुम अपने पुरखों की जबरदस्ती को आज अपने रिवाज में शामिल कर लिये हो । सोचकर देखो और जरूरत पडे तो इतिहास में झांककर देखो कि रेगिस्तान से आए अरब लोगों को गाय का मांस कहां मिला होगा ? जवाब आपके पास नही है कोई बात नही मैं देता हूँ -
बाबर का जन्म फ़रगना घाटी के अंदिजन नामक शहर में हुआ था जो अब उज्बेकिस्तान में है। उसके पिता उमर शेख़ मिर्ज़ा, जो फरगना घाटी के शासक थे । हालाँकि बाबर का मूल मंगोलिया के बर्लास कबीले से सम्बन्धित था पर उस कबीले के लोगों पर फारसी तथा तुर्क जनजीवन का बहुत असर रहा था, वे इस्लाम में परिवर्तित हुए तथा उन्होने तुर्केस्तान को अपना वासस्थान बनाया। मंगोल जाति (जिसे फ़ारसी में मुगल कहते थे) का होने के बावजूद उसकी जनता और अनुचर तुर्क तथा फारसी लोग थे। उसकी सेना में तुर्क, फारसी,पश्तो के अलावा बर्लास तथा मध्य एशियाई कबीले के लोग भी थे। बाबर के चचेरे भाई मिर्ज़ा मुहम्मद हैदर ने लिखा है कि उस समय, जब चागताई लोग असभ्य तथा असंस्कृत थे तब उन्हे ज़हिर उद-दिन मुहम्मद का उच्चारण कठिन लगा। इस कारण उन्होंने इसका नाम बाबर रख दिया। इन रेगिस्तानी कबीले वालों का एक ही काम हुआ करता था दुसरे कबीले पर हमला करके उनकी औरतें और ऊंठ और भेडों को लूटना । रेगिस्तान में गाय नही होती हैं इन्हे अखंड भारत के लोगों को गऊमांस इसलिये खिलाया जाता था ताकि इसके बाद उन्हे अन्य हिंदु लोग अलग कर दें और उस समय की हिंदु परंपरा के अनुसार गऊभक्षकों को अछुत कहकर सनातन धर्म की सभी जातियों और संप्रदायों द्वारा अलग कर दिया जाता था जिसके कारण मुस्लिमों को अलग से बसने की जगह मिलती गई ।
इसके बाद भी कहने को बहुत कुछ बचता है सलीम खान साहब जिस समय बाबर आया था उस समय हमारा देश धर्म में नही जातियों , वर्णों और संप्रदायों में बंटा हुआ था और सभी केवल सनातन धर्म को ही मानते थे । रेगिस्तान की औलाद बाबर और उसके साथियों नें हमारे देश के धन को लूटा, औरतों की इज्जत तार तार कर दिये, बच्चों का जबरन खतना किया गया, आदमीयों को गऊमांस खिलाया गया ताकि उनका जनेऊ उतर जाए, मतलब ये कि बाबर नें जो धर्म परिवर्तन किया उसका एक उदाहरण आप भी हो सकते हैं ।
अब आप देखिये हमारी भारत माता की पावन धरा का असर की बाबर जैसे आतताई, क्रूर हत्यारे और लुटेरे का पौत्र अकबर इसी धरती पर हिदु मुस्लिम एकता का अनुपम उदाहरण देते हुए दीन ए इलाही का गठन करता है अल्लाह हो अकबर तो आज भी आप कहते हैं खान साहब ।
घोंचू साहब सोचीये कि भारतीय मुस्लिमों के चेहरे हिंदुओं के चेहरों से क्यों मिलते हैं । हां एक बात और है कि -
मुस्लिम पीर पैगंबरों नें अपनी सिद्धियों के एवज में भी धर्म परिवर्तन कराने में भूमिका निभाई है । आपके शहर के आसपास ही कोई जगह है जिसे मौदहा के नाम से जाना जाता है आज की पीढी से तीन पीढी पहले तो वह ठाकुरों का गांव हुआ करता था सलीम साहब आपसे अनुरोध है कि उस घटना के बारे में आप बताएं तो ज्यादा अच्छा होगा कि मौदहा के साथ के 7 गांव और मुसलमान क्यों बने --- क्योंकि हम तो ठहरे हिंदु आतंकवादी भला हमारी बात आप कैसे समझ सकेंगे ।
Wednesday, October 6, 2010
पुलिस मर रही है नेता क्यों नही ?
चलो बच्चे लोग.... सब मिलकर ताली बजाओ आज एक नया खेल दिखाएगे ये नक्सली ... चार पुलिस वालों को बांधकर उन्हे एक एक कर धीरे धीरे गले पर धारदार हथियार से हलाक कर देंगे । पुलिस वाले चिल्लाते रहेंगे मगर हम सब लोग हंसते रहेंगे और उन्हे तडप तडप कर मरते देखते रहेंगे । तो फिर क्या कहते हो , खेल शुरू किया जाये । आंआंआं ... रूको रूको पहले कुछ और तमाशाबीनों को बुलाते हैं ः-
सबसे पहले आ रहे हैं वीरों के वीर प्रदेश के सरदार वैद्यराज रमन सिंह जी
आप इनके मुस्कुराते चेहरे पर ना जाएं । ये मुस्कान तो हमेशा ही रहती है । इनके पास प्रदेश के हर रोगों की दवा हैं इनकी दवायें एकदम अचूक होती हैं बस कभी कभी जरा सी समस्या ये आ जाती है कि जिस आदमी के हाथों दवा भेजते हैं वह रास्ते में महंगी दवाओं को बेच देता है जिससे कोई कोई मौत हो जाती है लेकिन एक बात समझ में नही आती कि इनका परिवार कैसे चल रहा है । छोडिये व्यंग्यात्मकता को सीधे सीधे कहते हैं । ये हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी है स्वभाव से सरल व मृदुभाषी । ये प्रदेश की जनता के भलाई के बारे में हमेशा चिंतित रहते हैं लेकिन इनके बाकि बचे संगी साथी इनके ऊपर दाग धब्बे लगाते रहते हैं । ये पुलिस के हित की बातें गंभीरता से सोचते हैं ...... लेकिन सोचते हैं अमल में नही ला पाते ।
इसके बाद आता है नंबर बाकियों का जिनमें से अपने गृहमंत्री को याद ना करना शहिद पुलिस का अपमान होगा । ये साहेबान जिनका नाम ननकीराम कंवर है ये प्रदेश में बढते अपराधों से बेहद चिंतित हैं इनका दर्द तब और बढ जाता है जब इनके करीबी गंभीर अपराधों में कभी कभार लिप्त मिलते हैं तो उन्हे छुडाने में इन्हे बहुत मेहनत करना पड जाता है । खैर आखिर हैं तो बेचारे मानव ही जब अपनों से फुरसत पाएंगे तब तो अपने सैनिकों का हालचाल जान पाएंगे ।
और हां एक आदमी नही पूरी संस्था की बात किये बिना तो बात पूरी ही नही होगी ... जी हां ठीक समझे मानवाधिकार आयोग । ये आयोग बडे ध्यान से देखता है कि कितने नक्सली मरे और कितनें ग्रामीण मरे । मृतकों की जांच पडताल करने ये किरंदुल के घने जंगलों में जाकर पडताल करके बता सकते हैं कि फलां आदमी तो ग्रामीण था पुलिस नें उसे नक्सली बता कर मार डाला । अब इन्हे कौन समझाकर अपनी माथा फोडी करे इसलिये पुलिस अधिकारी कहते हैं कि देखो जवानो भले गोली खाकर मर जाना हम तुम्हे शहीद का दर्जा दे देंगे लेकिन किसी बिना वर्दी वाले नक्सली को मारे तो जीते जी हम मर जाएंगे ।
मतलब समझे आप ... चाहे कुछ भी हो .. नेता अधिकारी सब मिल कर पुलिस को शहीद करना चाहते हैं लेकिन एक बात जो सच है वो ये कि हमारे राज्य की पुलिस सबसे ज्यादा कर्तव्य परायण है वह बेधडक गोली खा लेती हैं मगर उफ्फ तक नही करती ।
हमारे राज्य की पुलिसिया शहादत अमर रहे ।
Friday, September 24, 2010
काग्रेसीयों कसाब को छोड दो
क्या करेंगे रख कर कसाब को जिंदा रख कर ये पुछो इन हरामखोर नेताओं को जिन्हे सिवाय मुफ्तखोरी के कोई काम नही आता है । कसाब को पालेंगे करोडों खर्च कराएंगे उस एक आतंकी को पालेंगे किसलिये ? केवल दुनिया को ये दिखाने के लिये कि देखो हमारे यहां मुसलमान आतंकीयों को भी हम कितने अच्छे से पाल रहे हैं उसको खाना खिला रहे हैं, करोडों अरबों की सुरक्षा दे रहे हैं और हम ऐसा इसलिये कर रहे हैं ताकि कह सकें कि ये है हमारा लोकतंत्र । भूल जाते हैं ये कांग्रेसी नेता कि गरीबों को सडता अनाज नही बांटने का फैसला भी उन्ही का है । कसाब को फांसी की सजा मिली तो चला वह हाईकोर्ट में अपील करने के लिये और बैठे हैं ये कमीने लोग अपनी तनख्वाह बढाने के लिये सदन में एकता दिखाते हुए । क्यों नही कहा किसी ने की ये फोटो देखो कसाब की उसका चेहरा मिला कर देखो औऱ तुरंत बोलो पुलिस वालों की तुम्हारे साथियों को इसने जैसे बीच सडक में मारा है वैसे ही जैसे चाहो वैसे मारो । बजाय ये कहने के की एक झटके में फांसी देने से क्या होगा ? अरे इसके तो पिछाडे में पेट्रोल डाल कर दौडाओ और जब ये भाग भाग थक जाये तो दोनो हाथों को पकड कर मुंबई से घसीटते हुए बाहर की ओर ले चलो । इसको जमीन पर तब तक घसीटो जब तक उसकी रूह कांपते हुए बाहर आकर ना बोले की अब बख्श दो मैं दुबारा इस देश की ओर पैर करके भी नही सोउंगा ।
लेकिन ये लोग ऐसा नही करेंगे । इसलिये नही की क्यों करें बल्कि इसलिये की इस देश के नागरिकों को मुर्दे की तरह सहने की आदत डाले रखो । अगर इन्हे इनके अधिकार की झलक दिखा दिये तो कल को कसाब के बाद उनकी भी बारी आ जाएगी । दरअसल नेताओं को कसाब में अपना भविष्य सुरक्षित लग रहा है . अभी कोई आतंकी संगठन किसी विमान का अपहरण करके कहे कि कसाब को छोडो तो ये एक पैर पर खडे हैं उसको छोडने के लिये ।
लेकिन ये लोग ऐसा नही करेंगे । इसलिये नही की क्यों करें बल्कि इसलिये की इस देश के नागरिकों को मुर्दे की तरह सहने की आदत डाले रखो । अगर इन्हे इनके अधिकार की झलक दिखा दिये तो कल को कसाब के बाद उनकी भी बारी आ जाएगी । दरअसल नेताओं को कसाब में अपना भविष्य सुरक्षित लग रहा है . अभी कोई आतंकी संगठन किसी विमान का अपहरण करके कहे कि कसाब को छोडो तो ये एक पैर पर खडे हैं उसको छोडने के लिये ।
Monday, September 20, 2010
क्या कह रहे हो साहू जी।
आप हैं छत्तीसगढ राज्य के कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष धनेन्द्र साहू ।
बडी जल्दी याद आ गई आपको कि छत्तीसगढ की भाजपा सरकार स्थानीय लोगों को नौकरी ना देकर बाहरी लोगों को नौकरी दे रही है । चलो भाजपा की सरकार कुछ भी करे नौकरी तो दे रही है लेकिन केंद्र में बैठी आपकी सरकार क्या कर रही है ? रोजगार देना तो छोडो मुफ्त अनाज बांटने की सलाह और आदेश को मानने से इंकार कर रही है । आपके साथी कौन है ? शरद पवार - देश के सबसे बडे पावर इसलिये बन गये हैं क्योंकि इन्हे आपने बढाया है ये ऐसे व्यक्ति हैं जो भगवान की दी गई सजा के बाद भी नही जागे और केवल भगवान ही इन्हे सजा दे सकते हैं इनके कुकर्मों की । 2. मुलायम और लालू जैसे सत्ता के भूखे लोग जिन्हे केवल इसलिये सत्ता चाहिये ताकि वो अपने अपराधी गुर्गों को बचा सकें ।
मैंने इन्ही लोगों के नाम इसलिये चुना क्योंकि अभी तक ये ही लोग सामने आए हैं बाकि शशि थरूर जैसे तो ना जाने कितने लोग होंगे । इन्हे आपकी मैडम नें शेर क्यों बना रखा है ये तो वही बता सकेंगी लेकिन आप अपनी भी तो सोचिये । आप क्या कह रहे हैं जानते हैं । आप हंसने वाली बात कह रहे हैं , आप ये बता रहे हैं कि विपक्ष के पास अब बाहरी लोगों भीतरी लोगों के अलावा और कोई मुद्दा नही बचा है । लेकिन माफ किजिएगा धनेन्द्र साहू जी यदि आप केवल इन्ही मुद्दों को उठा रहे हैं तो मैं खुले रूप से ये कह सकता हूँ प्रदेश में चल रहे भारी भ्रष्टाचार का एक हिस्सा यकिनन आपके पास आ रहा है । यदि आप प्रदेश से बाहरी लोगों को बाहर करना चाहते हैं तो उनको किजिये जो नक्सली गतिविधीयों से हमारे शांत प्रदेश को अशांत बना रहे हैं । उन नेताओं के साथ आप भी प्रदेश से बाहर चले जाइये जो इस प्रदेश को लूट रहे हैं तो हम सुखी हो जाएंगे । यदि आप प्रदेश से बाहर चले जाएंगे तो इमानदार कहलाएंगे ।
आपको प्रदेश में चल रहे निर्माण कार्यों का घोटाला नही दिख रहा है ? कैसे इस बारिश में पूरी सडकें बह गई हैं आप नही देख रहे हैं ? पुल जर्जर हो रहे हैं या फिर नीचे बना दिये गए हैं । सरकारी निर्माण ध्वस्त हो रहे हैं । अब आप भाजपा सरकारी नेताओं की तरह कहेंगे भई इसका कोई प्रमाण नही मिल रहा है । चलिये प्रमाण मैं दे रहा हूँ - टाटीबंध से आप चाहे रिंगरोड में जाइये या फिर बिलापुर रोड पर जाइये ... जाकर देखिये तो सही साहू जी और हां पता कर लिजियेगा कि बीरगांव में बह गई रोड कितने माह पहले बनाई गई थी । चलिये छोडिये सडक को क्योंकि वहां तो केवल बडी गाडियों को परेशानी होती है और आपकी पार्टी केवल गरीबों की सोचती है, तो एक काम किजिये गरीब बच्चों के मध्यांह् भोजन कार्यक्रम में शामिल हो जाइये और हां पहले उनके लिये बनाए गये सरकारी भवन को देखना ना भुलियेगा ।
अच्छा चलो इनका हिस्सा तो आपको मिल गया होगा, अब वहां कि बात करते हैं जिसका हिस्सा आप तक नही पहुंचा । जरा ये तो पता करिये की नक्सली क्षेत्रों में कितनी सरकारी मदद किस किस रूप में भेजी जा रही है ? जनाब मैंने अखबारों में पढा है कि करोंडो रूपये की दवाइयां इन क्षेत्रो में भेजी गई है लेकिन देखिये तो सही वहां पहुंची की नही ।
लेकिन आपको इन सब बातों से कोई मतलब नही क्योंकि आपको अभी भीतरी लोग- बाहरी लोगों की बात ज्यादा जरूरी लग रही है ताकि आप मैडम को बता सकें देखिये मैने रमन सिंह से इस्तीफे की मांग कर दी है ।
Saturday, September 18, 2010
क्या ये न्याय है ?
दिन ः- शुक्रवार17 सितंबर समय ः- सायं 4 बजे स्थान ः- छत्तीसगढ हाईकोर्ट , बिलासपुर
माननीय न्यायाधीश ः- श्री धीरेन्द्र मिश्रा विषय ः- - निधी तिवारी की मौत
संदर्भ ः- स्व. निधी तिवारी के पति राजेश तिवारी के ऊपर धारा 306, 323, 498-ए का आरोप लगा कर पुलिस डायरी पेश की गई । डायरी में चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज हैं जो राजेश को निर्दोष बताते हैं जिसमें प्रमुख गवाह मृतका की 11 वर्षीय पुत्री रितीका तिवारी को बताया गया है । दुसरी ओर मृतका के लिखे पत्र है जिसमें उसनें अपनी मौत का जिम्मेदार राजेश तिवारी को बताई है और मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट है ।
मैं कोई आरोप नही लगा रहा हूँ और ना ही न्यायपालिका पर उंगली उठा रहा हूँ । मेरी कोई औकात नही है कि मैं ऐसा कर सकूं । विशेषकर तब तो बिल्कुल भी नही जब देश के पूर्व काननूमंत्री शशिभूषण नें देश की सर्वोच्च न्याय मंदिर में हलफनामा देकर बताये हैं कि उक्त मंदिर के 16 में से 8 न्याय देवता भ्रष्ट थे । जब वे पूर्व की बात कर रहे हैं तो वर्तमान में तो देश नें तरक्की ही की है इसलिये आगे कुछ भी बताना व्यर्थ है ।
न्यायालीन प्रक्रिया प्रारंभ हुई । सबसे पहले आरोपी पक्ष के अधिवक्ता नें रितीका का पत्र पढकर बताया कि - मैं स्कूल से घर वापस आई । मम्मी नें भिंडी की सब्जी बनाई थी मुझे खाना खिलाकर मम्मी बोली ए.सी. वाले कमरे में पढने चलो । मुझे ए.सी. वाले कमरे में बैठाकर मम्मी अंदर कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लीं । थोडी देर बाद कमरे से धुंआ निकलता देख कर मैं मम्मी को आवाज देने लगी मैं दरवाजे के पास गई तो अंदर मम्मी की ओह ओह करके आवाज आ रही थी । खिडकी का कांच गर्म हो गया था .................वगैरह वगैरह.........
मृत निधी की ओर से सरकारी वकिल थे जिनकी कार्यशैली निचली अदालतों के सरकारी वकील से जरा भी अलग नही थी । उन्होने निधी के पूर्व में लिखे पत्र को पढकर बताये कि राजेश का अपनी विधवा भाभी से अवैध संबंध है और राजेश उस संबंध के बदले में निधी को जान से भी मार सकता है ... सरकारी वकील की बात को काटते हुए न्यायधीश महोदय नें पुछे चिट्ठी कब लिखी गई है सरकारी वकिल नें जवाब दिये - तारीख नही दिख रही है सन 1984 है । न्यायधीश महोदय नें कहे कि पुरानी चिट्ठीयों का आज कोई मतलब नही है ।
मृतिका निधी तिवारी के पिता की ओर से नियुक्त विद्धान अधिवक्ता विभाष तिवारी नें सरकारी वकील के समर्थन में जज महोदय को बताये कि लार्डशिप पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निधी की मौत का कारण गला दबने से है इसके अलावा उसके पेट में जहर मिला है और ये दिखाने का प्रयास किया गया है कि उसनें अपने आपको आग लगा ली है । भला ये कैसे मुमकिन है कि कोई इस तरह से आत्महत्या करे ।
और फिर जो हुआ मुझे शशिभूषण जी आप बहुत याद आए । जज महोदय नें अपने आदेश में कहे कि ये सही है कि मामला हत्या का लग रहा है लेकिन चश्मदीद गवाह रितीका के बयान से जाहिर है निधी की मौत के समय उसका पति राजेश वहां नही था इसलिये आरोपी का जमानत आवेदन स्वीकार किया जाता है ।
मैं आपके के चेहरे के रंग बदलते भी देख रहा था आपके मन की उथापोहल को समझ रहा था आप थोडा जल्दी मे थे शायद घर का कोई काम अधुरा छुट गया होगा । आप मुझे देवता लग रहे थे लेकिन अफसोस आपने वह नही किया जो आपको करना था ।
मैने दसवीं के बाद पढाई छोड दी क्योंकि मुझे रट्टू तोता बनना अच्छा नही लगा । मैं खुलकर बोलने और और अपनी कमियों को सुनकर सहने का अभ्यस्थ हूँ । लेकिन ...... माफ किजिएगा सर आपने उस नाबालिक लडकी के बयान को सुनने औऱ समझने के साथ साथ वहां की परिस्थितियों को ना समझने की गलती कर चुके हैं । जब आपको विपक्ष के वकील नें फोटो दिखाना चाहे तो वह आपको देखना था , ना केवल देखना था बल्कि पुछना चाहिये था कि जो फोटो पुलिस डायरी में नही है वह आपके पास कहां से आई ? तब आपको जानकारी मिलती की निधी के पिता ने सुचना के अधिकार के तहत जिन फोटो और सीडीयों को हासिल कर लिये हैं वह पुलिस डायरी में नही लगाई गई है । आपको जानना चाहिये था उस नाबालिक लडकी के बयान को आधार बनाने से पहले कि वह लडकी किसके पास है और कहीं दबाव में तो नही है वह भी बात को यदि हम छोड दें तो भी ये बात हमें भ्रष्टाचार की याद दिलाती रहेगी कि जब आप मान रहे हैं कि हत्या हुई है तो फिर ये कैसे संभव है वह लडकी बाहर मुख्य दरवाजे पर बैठी रहे और अंदर कोई उसकी मां को सिर पर मारकर, जहर मिलाकर , गला घोंटकर मार दे और उसके बाद उसकी माँ के शरीर पर आग लगा कर कहीं गायब हो जाए ?
मैं जानता हूँ इसे पढने के बाद कई लोग कहेंगे कि - हमें न्याय पर विश्वास रखना चाहिये । आज के भ्रष्ट हालातों में न्यायपालिका ही हमें राहत पहुंचाती है लेकिन इस केस में मुझे दुःख केवल इस बात का है कि निधी की जिस विभित्सापूर्क तरीके से हत्या की गई है उसके हत्यारों के लिये फांसी भी कम है ।
माननीय न्यायाधीश ः- श्री धीरेन्द्र मिश्रा विषय ः- - निधी तिवारी की मौत
संदर्भ ः- स्व. निधी तिवारी के पति राजेश तिवारी के ऊपर धारा 306, 323, 498-ए का आरोप लगा कर पुलिस डायरी पेश की गई । डायरी में चश्मदीद गवाहों के बयान दर्ज हैं जो राजेश को निर्दोष बताते हैं जिसमें प्रमुख गवाह मृतका की 11 वर्षीय पुत्री रितीका तिवारी को बताया गया है । दुसरी ओर मृतका के लिखे पत्र है जिसमें उसनें अपनी मौत का जिम्मेदार राजेश तिवारी को बताई है और मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट है ।
मैं कोई आरोप नही लगा रहा हूँ और ना ही न्यायपालिका पर उंगली उठा रहा हूँ । मेरी कोई औकात नही है कि मैं ऐसा कर सकूं । विशेषकर तब तो बिल्कुल भी नही जब देश के पूर्व काननूमंत्री शशिभूषण नें देश की सर्वोच्च न्याय मंदिर में हलफनामा देकर बताये हैं कि उक्त मंदिर के 16 में से 8 न्याय देवता भ्रष्ट थे । जब वे पूर्व की बात कर रहे हैं तो वर्तमान में तो देश नें तरक्की ही की है इसलिये आगे कुछ भी बताना व्यर्थ है ।
न्यायालीन प्रक्रिया प्रारंभ हुई । सबसे पहले आरोपी पक्ष के अधिवक्ता नें रितीका का पत्र पढकर बताया कि - मैं स्कूल से घर वापस आई । मम्मी नें भिंडी की सब्जी बनाई थी मुझे खाना खिलाकर मम्मी बोली ए.सी. वाले कमरे में पढने चलो । मुझे ए.सी. वाले कमरे में बैठाकर मम्मी अंदर कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लीं । थोडी देर बाद कमरे से धुंआ निकलता देख कर मैं मम्मी को आवाज देने लगी मैं दरवाजे के पास गई तो अंदर मम्मी की ओह ओह करके आवाज आ रही थी । खिडकी का कांच गर्म हो गया था .................वगैरह वगैरह.........
मृत निधी की ओर से सरकारी वकिल थे जिनकी कार्यशैली निचली अदालतों के सरकारी वकील से जरा भी अलग नही थी । उन्होने निधी के पूर्व में लिखे पत्र को पढकर बताये कि राजेश का अपनी विधवा भाभी से अवैध संबंध है और राजेश उस संबंध के बदले में निधी को जान से भी मार सकता है ... सरकारी वकील की बात को काटते हुए न्यायधीश महोदय नें पुछे चिट्ठी कब लिखी गई है सरकारी वकिल नें जवाब दिये - तारीख नही दिख रही है सन 1984 है । न्यायधीश महोदय नें कहे कि पुरानी चिट्ठीयों का आज कोई मतलब नही है ।
मृतिका निधी तिवारी के पिता की ओर से नियुक्त विद्धान अधिवक्ता विभाष तिवारी नें सरकारी वकील के समर्थन में जज महोदय को बताये कि लार्डशिप पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निधी की मौत का कारण गला दबने से है इसके अलावा उसके पेट में जहर मिला है और ये दिखाने का प्रयास किया गया है कि उसनें अपने आपको आग लगा ली है । भला ये कैसे मुमकिन है कि कोई इस तरह से आत्महत्या करे ।
और फिर जो हुआ मुझे शशिभूषण जी आप बहुत याद आए । जज महोदय नें अपने आदेश में कहे कि ये सही है कि मामला हत्या का लग रहा है लेकिन चश्मदीद गवाह रितीका के बयान से जाहिर है निधी की मौत के समय उसका पति राजेश वहां नही था इसलिये आरोपी का जमानत आवेदन स्वीकार किया जाता है ।
मैं आपके के चेहरे के रंग बदलते भी देख रहा था आपके मन की उथापोहल को समझ रहा था आप थोडा जल्दी मे थे शायद घर का कोई काम अधुरा छुट गया होगा । आप मुझे देवता लग रहे थे लेकिन अफसोस आपने वह नही किया जो आपको करना था ।
मैने दसवीं के बाद पढाई छोड दी क्योंकि मुझे रट्टू तोता बनना अच्छा नही लगा । मैं खुलकर बोलने और और अपनी कमियों को सुनकर सहने का अभ्यस्थ हूँ । लेकिन ...... माफ किजिएगा सर आपने उस नाबालिक लडकी के बयान को सुनने औऱ समझने के साथ साथ वहां की परिस्थितियों को ना समझने की गलती कर चुके हैं । जब आपको विपक्ष के वकील नें फोटो दिखाना चाहे तो वह आपको देखना था , ना केवल देखना था बल्कि पुछना चाहिये था कि जो फोटो पुलिस डायरी में नही है वह आपके पास कहां से आई ? तब आपको जानकारी मिलती की निधी के पिता ने सुचना के अधिकार के तहत जिन फोटो और सीडीयों को हासिल कर लिये हैं वह पुलिस डायरी में नही लगाई गई है । आपको जानना चाहिये था उस नाबालिक लडकी के बयान को आधार बनाने से पहले कि वह लडकी किसके पास है और कहीं दबाव में तो नही है वह भी बात को यदि हम छोड दें तो भी ये बात हमें भ्रष्टाचार की याद दिलाती रहेगी कि जब आप मान रहे हैं कि हत्या हुई है तो फिर ये कैसे संभव है वह लडकी बाहर मुख्य दरवाजे पर बैठी रहे और अंदर कोई उसकी मां को सिर पर मारकर, जहर मिलाकर , गला घोंटकर मार दे और उसके बाद उसकी माँ के शरीर पर आग लगा कर कहीं गायब हो जाए ?
मैं जानता हूँ इसे पढने के बाद कई लोग कहेंगे कि - हमें न्याय पर विश्वास रखना चाहिये । आज के भ्रष्ट हालातों में न्यायपालिका ही हमें राहत पहुंचाती है लेकिन इस केस में मुझे दुःख केवल इस बात का है कि निधी की जिस विभित्सापूर्क तरीके से हत्या की गई है उसके हत्यारों के लिये फांसी भी कम है ।
Wednesday, September 8, 2010
कुरान बनाम तीसरा विश्वयुद्ध ?
एक खबर फेलोरिडा से आई है कि वहां का एक छोटा सा चर्च डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर 11/9 की बरसी पर कुरआन की प्रतियां जलाने वाला है । इस खबर से ओबामा प्रशासन हिल गया है और वह उस छोटे से चर्च के आगे गिडगिडा रहा है कि कुरआन मत जलाओ ।
मंगलवार को अमेरिकी अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने ईसाई, इस्लाम और यहूदी समुदाय के नेताओं से मुलाकात की. उन्होंने फ्लोरिडा के चर्च से आग्रह किया कि वह अपने दिमागी फितूर को रद्दी की टोकरी में फेंक दे. होल्डर के मुताबिक अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा, ''यह तुच्छ और खतरनाक मंशा'' है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा, ''इससे हमारे फौजियों की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी. सेना को खतरे में डालने वाली ऐसी भी कोई भी गतिविधि प्रशासन के लिए चिंता की बात है.'' अफगानिस्तान में अमेरिकी और नाटो सेनाओं के कमांडर जनरल डेविड पेट्रियास भी ऐसी ही चिंता जता चुके हैं. जनरल पेट्रियास के मुताबिक छोटे चर्च की इन हरकतों से सेना के सारे प्रयास विफल हो जाएंगे.
सेंटर के प्रमुख जोन्स का कहना है, ''दूसरे क्या करेंगे या क्या कर सकते हैं, इसके बारे में आरोप लगाने के बजाए हम उन्हें सीधी चेतावनी क्यों नहीं देते. हम इस्लामी कट्टरपंथियों को सीधा ये संदेश क्यों नहीं देते कि अगर ऐसा मत करना. अगर तुम हम पर हमला करोगे तो हम भी तुम पर वार करेंगे.''
फ्लोरिडा के गेन्सविल्ले में डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर नामक इस प्रोटेस्टेंट समुदाय को इस इलाके में भी बहुत से लोग नहीं जानते हैं. लेकिन 11 सितंबर की बरसी पर अपने गिरजे के अहाते में कुरान की प्रतियां जलाने की घोषणा के साथ वह अचानक सुर्खियों में आ गया है. अमेरिका के ईसाई, यहूदी व मुस्लिम संगठन चिंतित हैं. उन्होंने मीडिया से अपील की है कि वे इस मामले को महत्व न दें.
आखिर चर्च नें ऐसा कदम क्यों उठाया है जिससे एक धार्मिक व पूजनीय स्थान का सीधा सीधा दुसरे धर्म पर हमला करने जैसी बात हो गई है । इसकी वजह है ओबामा का मुस्लिमों के प्रति बढती संवेदना । भले ही ओबामा मुस्लिमो के प्रति प्रेम भाव दिखा कर अफगानिस्तान और ईराक में लड रहे अपने सैनिकों पर हो रहे हमले पर कमी कर रहे हों, लेकिन इससे आम अमेरिकी नागरिक क्रोधित हो उठा है । इसका एक उदाहरण तब सामने आया जब एक विरोधी ने एक बड़ा सा कार्टून तैयार किया है, जिसमें लबादा पहने हाथ में कुरान लिए हुए इमाम ओबामा को दिखाया गया है. इसकी वजह यह है कि राष्ट्रपति का मानना है कि न्यूयार्क के ग्राउंड जीरो के पास अन्य धर्मों के पूजास्थलों के साथ एक इस्लामी सेंटर बनाया जा सकता है ।
मंगलवार को अमेरिकी अटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने ईसाई, इस्लाम और यहूदी समुदाय के नेताओं से मुलाकात की. उन्होंने फ्लोरिडा के चर्च से आग्रह किया कि वह अपने दिमागी फितूर को रद्दी की टोकरी में फेंक दे. होल्डर के मुताबिक अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा, ''यह तुच्छ और खतरनाक मंशा'' है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता रॉबर्ट गिब्स ने कहा, ''इससे हमारे फौजियों की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी. सेना को खतरे में डालने वाली ऐसी भी कोई भी गतिविधि प्रशासन के लिए चिंता की बात है.'' अफगानिस्तान में अमेरिकी और नाटो सेनाओं के कमांडर जनरल डेविड पेट्रियास भी ऐसी ही चिंता जता चुके हैं. जनरल पेट्रियास के मुताबिक छोटे चर्च की इन हरकतों से सेना के सारे प्रयास विफल हो जाएंगे.
सेंटर के प्रमुख जोन्स का कहना है, ''दूसरे क्या करेंगे या क्या कर सकते हैं, इसके बारे में आरोप लगाने के बजाए हम उन्हें सीधी चेतावनी क्यों नहीं देते. हम इस्लामी कट्टरपंथियों को सीधा ये संदेश क्यों नहीं देते कि अगर ऐसा मत करना. अगर तुम हम पर हमला करोगे तो हम भी तुम पर वार करेंगे.''
फ्लोरिडा के गेन्सविल्ले में डोव वर्ल्ड आउटरीच सेंटर नामक इस प्रोटेस्टेंट समुदाय को इस इलाके में भी बहुत से लोग नहीं जानते हैं. लेकिन 11 सितंबर की बरसी पर अपने गिरजे के अहाते में कुरान की प्रतियां जलाने की घोषणा के साथ वह अचानक सुर्खियों में आ गया है. अमेरिका के ईसाई, यहूदी व मुस्लिम संगठन चिंतित हैं. उन्होंने मीडिया से अपील की है कि वे इस मामले को महत्व न दें.
आखिर चर्च नें ऐसा कदम क्यों उठाया है जिससे एक धार्मिक व पूजनीय स्थान का सीधा सीधा दुसरे धर्म पर हमला करने जैसी बात हो गई है । इसकी वजह है ओबामा का मुस्लिमों के प्रति बढती संवेदना । भले ही ओबामा मुस्लिमो के प्रति प्रेम भाव दिखा कर अफगानिस्तान और ईराक में लड रहे अपने सैनिकों पर हो रहे हमले पर कमी कर रहे हों, लेकिन इससे आम अमेरिकी नागरिक क्रोधित हो उठा है । इसका एक उदाहरण तब सामने आया जब एक विरोधी ने एक बड़ा सा कार्टून तैयार किया है, जिसमें लबादा पहने हाथ में कुरान लिए हुए इमाम ओबामा को दिखाया गया है. इसकी वजह यह है कि राष्ट्रपति का मानना है कि न्यूयार्क के ग्राउंड जीरो के पास अन्य धर्मों के पूजास्थलों के साथ एक इस्लामी सेंटर बनाया जा सकता है ।
चुनाव के समय अमेरिकी राष्ट्रपति अपने साथ हनुमानजी की मूर्ति लेकर चलते थे जिससे लोगों को यकिन हुआ कि वे हिंदु धर्मावलंबी होंगे, लेकिन अब वही ओबामा अब उन्हे मुस्लिम लगने लगे हैं । जबकि मेरी धारणा कहती है कि कोई भी लोकतांत्रिक देश का नेता धर्म को नही मानता । यदि हमारे देश के हिंदु नेता एक साथ हो जाएं तो हमारा देश हिंदु देश बन जाएगा लेकिन हम दुनिया को बताने के लिये धर्म निरपेक्षता का लबादा ओढे हुए हैं ।
यूं तो चर्च अपने खतरनाक हमलों के लिये कुख्यात है लेकिन जबसे मुस्लिमो का वर्चस्व बढा उसनें अपने हमले बंद करके मिशनरियों के माध्यम से धर्म परिवर्तन का रूख अख्तियार कर लिया । इनकी मिशनरियों के द्वारा संचालित स्कूलों व अस्पतालों के बारे में आपने कभी गौर किये हैं ! नही । इनकी हकिकत पर गौर फरमाइये -
भिलाई शहर के एक मिशनरी हास्पिटल का नाम है करूणा अस्पताल । यहां आप इलाज करवाने के लिये जार आइये और देखिये इनकी करूणा के भाव । गरीबों का मुफ्त या सस्ते में इलाज का दावा ठोंकने वाली मिशनरीज की पोल खुल जाएगी । यहां के स्टाफ का दुर्व्यवहार अब हर जगह पहुंच गया है जिससे लोग यहां आने से अब कतरा रहे हैं । अस्पताल के साथ के मेडिकल स्टोर्स में जिन दरों पर दवाइयां मिलती है वही दवाइयां दुसरे मेडिकलों में 20 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं और अगर आपने गलती से बाहर की दवाइयां ले लिये हैं तो फिर भूल जाइये कि इस अस्पताल में आपकी खातिर हो सकेगी ।
ये तो मेरे शहर के एक अस्पताल का हाल है तो बाकि जगहों के हाल की कल्पना हम कर सकते हैं । हां एक बात सही है कि मिशनरी आदिवासी इलाकों में मुफ्त इलाज और मुफ्त शिक्षा जरूर बांटती है लेकिन एक छोटी सी शर्थ के साथ कि आप हमारे धर्म को अपनाओ । ईसाई बन जाओ ताकि जन्नत में आपको पूरे एशोआराम मिल सकें ।
मेरी ऊपर लिखी बातें जादू के पिटारे की तरह है ताकि आप वह पढें जो मैने लिखा है अब बात करें कुरआन जलाने की ।
कुरआन जलाकर चर्च क्या बताना चाहता है ? दरअसल चर्च अपने घटते वर्चस्व को लेकर चिंतित हो रहे हैं । रविवार को चर्च में लोग कम आ रहे हैं लेकिन शुक्रवार को मस्जिदों में भीड बढ रही है , मंदिरों से लोग जुड रहे हैं । इसलिये मुस्लिम आतंकी संगठनों की आड में चर्च कुरआन जलाने जैसा घिनौना षणयंत्र रच रहा है वह बताना चाहता है कि पूरा मुस्लिम धर्म ही आतंकी हैं ।
क्या होगा जब कुरआन जलेगी ? जब चर्च कुरआन जलाएगी तो इसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होगी, आतंकी संगठनों को फसाद फैलाने का भरपूर मौका । आतंकी संगठन तुरंत इस्लाम खतरे में है कहकर मुस्लिम युवाओं का उन्माद बढाएंगे और चर्च पर हमले शुरू करवा देंगे । जब चर्च पर हमले होंगे तो मजबूरन वेटिकन चर्चों के बचाव में उतरेगा और इसका अर्थ होगा धर्म की आड में दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध की कगार पर खडा हो जाएगा । ईरान इस्त्रायल पर हमला बोलेगा, चीन पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान पर हमला बोलते हुए अफ्रीका पर कब्जा जमाने पहुंचेगा . उधर सूडान भी मौका पाकर अपने आसपास के कबीलेनुमा देशों पर हमला बोल देगा ।
Friday, September 3, 2010
दबे कुचले देश की राष्ट्रीय अध्यक्ष को बधाई
"हम लोगों को हमेशा ही दबे कुचले लोगों के लिए काम करना चाहिए भले ही सत्ता में हों या न हों."
यह बात कह कर सोनिया गांधी नें साबित कर दी की कांग्रेस पार्टी का भला इसी में है कि देश में दबे कुचले लोग ही रहें और जो स्वस्थ, मजबूत और ताकतवर हों वो देश के नेता बन जाए । सोनिया गांधी बजाय दबे कुचले लोगों की बात कहने के ये कहती कि देश के विकास, अभिमान और समृद्धि के लिये काम करना चाहिये तो शायद ज्यादा अच्छा होता , लेकिन जो महिला स्वयं अपना देश छोडकर दबे कुचले देश की सबसे ताकतवर महिला बन गई हो उसके लिये ये शब्द तुच्छ हैं ।
देश के सांसद अपने वेतन बढाने के लिये एकमत हो जाते हैं और देश के गोदामों में सड रहे अनाज को जनता के बीच मुफ्त बांटने के मुद्दे पर चुप हो जाते हैं । ऐसा केवल उसी देश में हो सकता है जो दबा कुचला हो । हम लोकतांत्रिक देशवासी कहलाते हैं हमें हर बात को खुल कर कहने की आजादी है लेकिन देश में सड रहे अनाजों के भंडार, खेल के पीछे हो रहे भ्रष्टाचार, सडकों पर हो रहे घोटाले, दफ्तरों में चल रहे अन्याय, नेताओं की दादागीरी गुंडो की मनमर्जी हर नागरिक की आजादी छिन लेती है ।
यह बात कह कर सोनिया गांधी नें साबित कर दी की कांग्रेस पार्टी का भला इसी में है कि देश में दबे कुचले लोग ही रहें और जो स्वस्थ, मजबूत और ताकतवर हों वो देश के नेता बन जाए । सोनिया गांधी बजाय दबे कुचले लोगों की बात कहने के ये कहती कि देश के विकास, अभिमान और समृद्धि के लिये काम करना चाहिये तो शायद ज्यादा अच्छा होता , लेकिन जो महिला स्वयं अपना देश छोडकर दबे कुचले देश की सबसे ताकतवर महिला बन गई हो उसके लिये ये शब्द तुच्छ हैं ।
देश के सांसद अपने वेतन बढाने के लिये एकमत हो जाते हैं और देश के गोदामों में सड रहे अनाज को जनता के बीच मुफ्त बांटने के मुद्दे पर चुप हो जाते हैं । ऐसा केवल उसी देश में हो सकता है जो दबा कुचला हो । हम लोकतांत्रिक देशवासी कहलाते हैं हमें हर बात को खुल कर कहने की आजादी है लेकिन देश में सड रहे अनाजों के भंडार, खेल के पीछे हो रहे भ्रष्टाचार, सडकों पर हो रहे घोटाले, दफ्तरों में चल रहे अन्याय, नेताओं की दादागीरी गुंडो की मनमर्जी हर नागरिक की आजादी छिन लेती है ।
Tuesday, August 17, 2010
हत्या या आत्महत्या ः- मामला आप सुलझांए ।
आप सभी पाठक गणों से अनुरोध है कि इन प्रश्नों के हल ढुंढने का प्रयास करें ताकि निधी की आत्मा को शांति मिल सके ।
अभी तक केवल दैनिक अमृत संदेश और नई दुनिया के अलावा और किसी भी अखबार को निधी की मौत एक सामान्य सा आत्महत्या की खबर लग रही थी, लेकिन सच्चाई क्या है ये आप बताएं - अधिक फोटो व दस्तावेजों के लिये क्लिक करें ।
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अभी तक केवल दैनिक अमृत संदेश और नई दुनिया के अलावा और किसी भी अखबार को निधी की मौत एक सामान्य सा आत्महत्या की खबर लग रही थी, लेकिन सच्चाई क्या है ये आप बताएं - अधिक फोटो व दस्तावेजों के लिये क्लिक करें ।
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क्या ऊपर की तस्वीरें झूठ कह रही हैं या फिर आंखो का धोखा है । अगर ऐसा लगता कि ये एक इत्तेफाक है तो जरा गौर फरमाए इस बात पर
क्या आप इस बात पर यकिन कर सकते हैं कि शरीर में आग जल रही हो और कोई व्यक्ति बिना तडपे या भागदौड करे बिना एक जगह चुपचाप पडे पडे जल कर मर सकता है ? यदि आप इस बात पर यकिन कर सकते हैं तो आपके लिये ये देखना भी जरूरी है ः-
क्या आप इतनी चीजें देखकर कहेंगे कि ये एक साधारण आत्महत्या का मामला है । आइये जरा हम पाठकगण भी कुछ पोस्टमार्टम करें तस्वीरों का ः-
फोटो में दर्ज नंबरों के आधार पर पैदा हुए सवाल जिनके जवाब चाहिये ः-
प्रश्न -1 .आंखों में से खून बाहर क्यों निकला ?
प्रश्न -2 . नाक से खून किन कारणों से लगातार बहता रहा ? (पोस्टमार्टम ककी टेबल पर भी लगातार बह रहा था )
प्रश्न -3 .जीभ मुंह से इतनी बाहर कैसे निकली ?
प्रश्न -4 . हाथ इतनी बुरी तरह से कैसे जला, क्योंकि अपने हाथों से मिट्टी तेल अपने शरीर पर डालने से हाथ में मिट्टी तेल नही गिरता है जिसकी वजह से हाथ नही जलते ।
प्रश्न -5. कान पूरी तरह से जल गये हैं ।
प्रश्न -6. जब कान इस बुरी कदर जल गए तो फिर पिछे सिर के बाल बिना जले कैसे रह गए ?
प्रश्न -7. अगर निधी नें आत्महत्या की तो सिर के बीच में ये चोट कैसे लगी ?
प्रश्न -8. हर जले भाग में इसी तरह से चमडी फटी है , लेकिन फफोले ( जलने के बाद जो पानी से भरे छाले पडते हैं ) क्यों नहीं पडे ?
सभी पाठक गणों से अनुरोध है कि इन प्रश्नों के हल ढुंढने का प्रयास करें ताकि निधी की आत्मा को शांति मिल सके ।
Friday, August 13, 2010
जल रहा है ब्रिटेन ।
लंदन। ब्रिटेन ने अपने देश के लोगों को भारत से आने वाले पर्यटकों को न छूने और करीब न जाने की सलाह दी है। विजिटबिटे्रन का कहना है कि ये सलाहें सांस्कृतिक जागरूकता बढाने, गलतफहमी से बचने और यात्रियों की देखभाल करने में कर्मचारियों की सेवा में इजाफा करने के लिए है। ब्रिटेन की पर्यटक एजेंसी विजिटब्रिटेन ने खेलों के दौरान प्रभावी उपभोक्ता सेवा देने के लिए होटल मालिकों से लेकर टैक्सी चालकों तक के लिए एक सूची तैयार की है जिसमें भारत से आए किसी भी व्यक्ति से पहली बार करीब न जाने की सलाह दी गई है।
सवाल उठता है कि ऐसा क्यों कहलवा रही है ब्रिटिश सरकार ? मेरे विचार से उनमें जलन की भावना पैदा हो रही है । वे हमारे देश से जल रहे हैं । वो सोच रहे हैं कि जितनी आसानी से हमारे देश के नेता भ्रष्टाचार करते चले आ रहें वो भी पूरे सम्मान के साथ , ऐसा उनके देश में क्यों नही हो पा रहा है । जिस देश को गुलाम बना कर रखा वो देश आज इतना संपन्न कैसे हो गया कि उस देश का छोटा सा नागरिक भी उनके देश के नागरिक से ज्यादा संपन्न दिखता है । यही कारण है कि ब्रिटेन की सरकार अपने नागरिकों को हिनभावना से बचाने के लिये ऐसी खबरें प्रसारित कर रही है ताकि उसके देश के लोग भारतीयों से दूर रहें और उनसे जल कर ब्रिटेन में भी ऐसी ही भ्रष्ट संस्कृति को जन्म देने की मांग ना उठाने लगें ।
फिर हमारे देश की केंद्र सरकार ऐसा क्यों कहलवा रही है कि ब्रिटिश वैज्ञानिकों का दिल्ली सुपरबग बैक्टीरिया भारत में नहीं फैल रहा है ?
इसकी वजह है कि भारत सरकार को समझ में आ गया है कि ब्रिटेन वाले कुछ दवा कंपनीयों से पैसा खाकर ऐसा प्रोपोगंडा कर रहे हैं । अब कोई बदनाम करें हमारे देश को ये कोई नई बात तो नही है ( पाकिस्तान और चीन तो सालों से यही कर रहे हैं लेकिन इन दोनो देशों के बदनाम करने से ही तो आयोग गठन करके और सेना के नाम से नेताओं को पैसा खाने को मिलता है) लेकिन इस बदनामी तो ऐसी हुई कि पइसा भी नही मिला और कलंक फालतू के लगा । जब अर्जुन सिंह के रहते भोपाल गैस कांड में करोडों पीट सकते हैं तो फिर भला ब्रिटेन को फालतू फालतू के क्यों कहने दें ।
हमारे देश में ऐसा सुपरबग बैक्टीरीया है जो सारे संसार को खत्म कर सकता है । इसलिये केवल ब्रिटेन ही नही सारी दुनिया को हमारे देश के उस सुपरबग बैक्टीरिया से बचने का प्रयत्न करना होगा , जिसका नाम है भ्रष्ट सुपरबग ।
सवाल उठता है कि ऐसा क्यों कहलवा रही है ब्रिटिश सरकार ? मेरे विचार से उनमें जलन की भावना पैदा हो रही है । वे हमारे देश से जल रहे हैं । वो सोच रहे हैं कि जितनी आसानी से हमारे देश के नेता भ्रष्टाचार करते चले आ रहें वो भी पूरे सम्मान के साथ , ऐसा उनके देश में क्यों नही हो पा रहा है । जिस देश को गुलाम बना कर रखा वो देश आज इतना संपन्न कैसे हो गया कि उस देश का छोटा सा नागरिक भी उनके देश के नागरिक से ज्यादा संपन्न दिखता है । यही कारण है कि ब्रिटेन की सरकार अपने नागरिकों को हिनभावना से बचाने के लिये ऐसी खबरें प्रसारित कर रही है ताकि उसके देश के लोग भारतीयों से दूर रहें और उनसे जल कर ब्रिटेन में भी ऐसी ही भ्रष्ट संस्कृति को जन्म देने की मांग ना उठाने लगें ।
फिर हमारे देश की केंद्र सरकार ऐसा क्यों कहलवा रही है कि ब्रिटिश वैज्ञानिकों का दिल्ली सुपरबग बैक्टीरिया भारत में नहीं फैल रहा है ?
इसकी वजह है कि भारत सरकार को समझ में आ गया है कि ब्रिटेन वाले कुछ दवा कंपनीयों से पैसा खाकर ऐसा प्रोपोगंडा कर रहे हैं । अब कोई बदनाम करें हमारे देश को ये कोई नई बात तो नही है ( पाकिस्तान और चीन तो सालों से यही कर रहे हैं लेकिन इन दोनो देशों के बदनाम करने से ही तो आयोग गठन करके और सेना के नाम से नेताओं को पैसा खाने को मिलता है) लेकिन इस बदनामी तो ऐसी हुई कि पइसा भी नही मिला और कलंक फालतू के लगा । जब अर्जुन सिंह के रहते भोपाल गैस कांड में करोडों पीट सकते हैं तो फिर भला ब्रिटेन को फालतू फालतू के क्यों कहने दें ।
हमारे देश में ऐसा सुपरबग बैक्टीरीया है जो सारे संसार को खत्म कर सकता है । इसलिये केवल ब्रिटेन ही नही सारी दुनिया को हमारे देश के उस सुपरबग बैक्टीरिया से बचने का प्रयत्न करना होगा , जिसका नाम है भ्रष्ट सुपरबग ।
Wednesday, August 11, 2010
निधी के पिता को धमकी
रायपुर, दिनांक 11 अगस्त समय दोपहर लगभग 2.30 बजे , स्थान तेलीबांधा से अवंती विहार की ओर आने वाली सडक । आझ सूर्यकांत शुक्ला (निधी के पिता) अपने मित्र के साथ निधी की मौत के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए दस्तावेज लाने तेलीबांधा थाने में गये थे । उन्हे वहां बैठे तकरीबन 15-20 मिनट हुए थे कि सुधीर तिवारी (निधी का जेठ) अपने साथ तीन चार लोगों को लेकर थाने में पहुंचा । वहां टी.आई. साहब के पास इन्हे बैठा देखकर चुपचाप बाहर निकल गया ।
इसके बाद जब सूर्यकांत शुक्ला अपने मित्र के साथ उनकी बाइक में वापस लौट रहे थे कि अचानक उन्हे दो आदमीयों नें बीच सडक पर रोक लिये ( वे दोनों सुधीर तिवारी के साथ थाने में पहुंचे थे) और उनसे कहा कि तुम्हारी बेटी नें आत्महत्या की है और तुम बेवजह तिवारी परिवार को तंग कर रहे हो । इस पर निधी के पिता नें कहे कि मेरी बेटी नें आत्महत्या की है या उसकी हत्या हुई है ये सब अदालत तय करेगी लेकिन तुम लोगों को इस मामले से क्या लेना देना है । इस बात पर दुसरे आदमी नें अपने हाथ का जोरदार वार शुक्ला जी के सिर किया जिसके कारण वे सडक पर गिरते गिरते बचे । तभी शुक्ला जी के मित्र नें गाडी खडी करके ज्यों ही उन्हे ललकारा तो वो दोनो लोग तुमको भी बाद में देख लेंगे की धमकी देते हुए सडक के दुसरी ओर चले गए । इस वारदात से भयभीत होकर शुक्लाजी बजाय थाने में जाने के सीधे अपने निवास (नेहरू नगर, भिलाई) आ गए और घर आकर ही उन्होने इस बात की जानकारी परिवार वालों को दी ।
अब सवाल ये उठता है आखिर सुधीर तिवारी के साथियों नें निधी के पिता को क्यों मारा और धमकाया ? इसका सबसे बडा कारण है निधी की हत्या के मामले की पूरी लीपापोती इसी आदमी के द्वारा की जा रही है । यह शख्स वर्तमान में प्रधानमंत्री सडक परियोजना, नगरी में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत है और सडकों में कीतनी धांधली हो रही है यह सभी जानते हैं , इसके पास भी अथाह पैसे यहीं से आ रहे हैं जिसकी वजह से यह अपने को इतना सामर्थ्यवान समझ रहा है कि हत्या को भी आत्महत्या में बदल सकता है । सुधीर तिवारी की भूमिका निधी हत्याकांड में सबसे ज्यादा संदग्ध रही है, मसलन खुद ही कहता है कि निधी 23 जुलाई को शाम 4.30 जलकर मर गई लेकिन निधी के मायके में फोन 6 बजे करके कहता है कि तुरंत मेकाहारा अस्पताल पहुंचो अस्पताल में कहता है कि निधी नें आत्महत्या कर ली है लेकिन उससे ये कहने पर कि मरी हुई निधी को अस्पताल क्यों लाए तो चुप हो जाता है । खैर यह हुई पुरानी बातें अब देखें पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या कहती है - पीएम रिपोर्ट के अनुसार निधी की मौत को 24 घंटे हो चुके थे (समय लगभग दोपहर 3 बजे का निकलता है), गला दबाये जाने के संकेत हैं, पेट में नशीले पदार्थ मिले हैं और उसके गले में कार्बन नही मिला है जैसा जीवित जलने वाले व्यक्ति की सांस के साथ गले तक उतरने पर मिलता है, इन सब बातों से यह साबित होता है कि निधी की हत्या करके साक्ष्य छुपाने के लिये जलाया गया है । इस नृशंस हत्याकांड को दबाने का प्रयास सुधीर तिवारी इस लिये कर रहा है ताकि उसकी नौकरी बच सके क्योंकि जब सारा मामला खुलेगा तो सबसे पहले सुधीर तिवारी पर ही आरोप तय होगा ।
अब सवाल ये उठता है कि जब सुधीर तिवारी पर सबसे पहले मृत निधी के शव को जलाकर हत्या के साक्ष्यों को मिटाने और कानून को गुमराह करने का प्रथम दृष्टि में सीधा सीधा मामला दिख रहा है तो उस जैसे खतरनाक अपराधी को कानून अब तक अपने शिकंजे में क्यों नही कसा ।
Monday, August 9, 2010
विधायक की मौज, जनता की मौत
आप हैं वैशाली नगर, भिलाई विधानसभा के विधायक श्री भजन सिंग निरंकारी जी । आप एक बेहद काबिल, कर्मठ और जनता के प्रति पूरी तरह से समर्पित नेता नजर आते हैं । आपकी विशेषता है नकारात्मक सोच । अगर आप इनसे कहैं कि भइया हमारे मार्केट में हाईमास्क लाइट चाहिये तो कहते हैं कि उसकी क्या जरूरत है । बताओ कि भइया हमारे मार्केट में पानी की समस्या है तो कहते हैं कि पानी वाली बाई तो सालों से मार्केट में पानी ला रही है, क्यों गरीबों को भुखे मारना चाहते हो । शिकायत करो कि फल-सब्जी के ठेले वाले लोगों के कारण मार्केट का यातायात अव्यवस्थित हो रहा है । तो आप फरमाते हैं कि मैं गरीबों की हाय नही लूंगा ।
अब आप सोचें कि ये विधायक महोदय कि बातें तो पूरी तरह से हमदर्दी वाली हैं लेकिन काम क्या है ? इन्हे पूरी तरह से मालूम है कि इन्होने चाहे जो भी काम किये हों एक काम इतना बुरा किये हैं कि लोगों की जानें जा रही हैं । जिसका सबसे ताजा शिकार 8 अगस्त की सुबह 10 बजे एक गरीब रिक्शावाला हुआ है । दरअसल इन्होनें राष्ट्रीय राजमार्गक्रमांक 6 में भिलाई में बनी फोरलेन को भिलाई की बसंत टाकीज के सामने से तोड दिये हैं ताकि लोग आसानी से अपने वाहनों को सडक के आर पार ले जा सकें, लेकिन हो ये रहा है कि लोग लापरवाही से ज्यों ही सडक के इस भाग से उस ओर निकलते हैं दुसरी ओर से आ रहे तेज रफ्तार वाहन उनसे टकरा जाते हैं । इसमें गलती चालक की नही होती है क्योंकि वह सडक बीच से इस तरह टुटी है कि पता ही नही चलता है कि वहां से कोई रास्ता खुला हुआ है ।
अब कोई इन विधायक महोदय को समझाए कि महोदय गरीबों का भला तभी हो पाएगा जब वह जिंदा रहेगा । अगर ऐसे ही उस अवैध रास्ते में लोग मरते रहे तो किसका भला होगा ये आपसे ज्यादा अच्छी तरह से कोई नही समझा सकेगा ।
Monday, July 26, 2010
रायपुर ः- निधी तिवारी की मौत पर सवाल
अवैध संबंधों की परिणिती है निधी की मौत
निधी द्वारा पूर्व में लिखे एक पत्र में अपने मायके वालों को अपने
पति राजेश और उसकी विधवा भाभी रेखा तिवारी के अवैध संबंधो के बारे में
लिखा गया है । उसमें निधी नें स्पष्ट लिखा है कि राजेश के अपनी विधवा बडी
भाभी रेखा के साथ अवैध संबंधहै जिसकी वजह से वे दोनो मिलकर मुझे (निधी
तिवारी) प्रताडित करते रहते हैं अगर मेरी अस्वाभाविक मौत होती है तो इसकी
जवाबदारी मेरे पति राजेश और मेरी जेठानी रेखा तिवारी (पत्नि स्व.सुरेश
तिवारी) को माना जाये ।
इस लिहाज से अगर देखा जाये तो यह हत्या का आधार भी बनता है और
वह इस दिशा में विचार करते हुए पुलिस कार्यवाही कर सकती है जबकि अभी तक
की उनकी कार्यवाही आत्महत्या को लेकर ही केंद्रित है ।
संलग्न सभी फोटोएं मन को विचलित करने वाली हैं और विडियो
घटनास्थल का है। इन ह्दयविदारक तस्वीरों आपको भेजने के लिये मैं
क्षमाप्रर्थी हूँ किंतु सबूत के लिये मुझे य़ह आवश्यक लग रहा है इसलिये
भेज रहा हूँ ।संलग्न विडियो घटनास्थल का है और इसमें घटनास्थल के चलचित्र
हैं जो 24 जुलाई 2010 को 8, जलविहार कालोनी, रायपुर (छत्तीसगढ) में उतारे
गये हैं. जहां निधी तिवारी की रहस्यमय मौत हुई है । परिजनों के द्वारा
हत्या व दहेज का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है जबकि तेलीबांधा थाना व
फोरेंसिक अधिकारीयों द्वारा आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है । जिस
कमरे में निधी की जलने से मौत हुई है वहां जमीन पर केवल एक ही जगह पर
जलने के निशान है जो इसतरह से बने हैं जैसे किसी सोये हुए व्यक्ति पर
मिट्टीतेल डालकर आग लगा दी गई हो। जबकि आग लगने वाली जगह से मात्र 2फिट
दूर और 4 फीट की ऊंचाई पर बिना जला एक 3 फीट लंबा कपडा, सिरहाने पर रखा
टेबल और उसका टेबलक्लाथ, एक टेबल जिसमें कापी किताबें हैं, कमरे में रखा
जूते का रेक, खूंटी पर टंगे सफेद कपडे, स्टील की आलमारीयां, आसपास की
दीवारें सबकुछ एकदम सही हलत में है ।पूरे कमरे में कहीं भी भागने दौडने
के निशान नही हैं. जहा निधी जली है वहां पर पडी राख के साथ एक 3 गांठ
वाली कटी हुई रस्सीनुमा कपडे का टुकडा पडा था जिससे हाथों को बांधे जाने
का संकेत मिल रहा है । घटनास्थल पर मिले सारे सबूत चीख चीख कर हत्या का
संकेत दे रहे हैं मसलन- जिस कमरे में निधी जली हैतथा दरवाजा तोडकर भीतर
घुसना बताया जा रहा है, उसी कमरे के साथ लगा हुआ एक और दुसरा रास्ता
बेडरूम से होते हुए बाहर निकलने का है जो बाहर से बंद था, इससे यह प्रमाण
मिलता है कि दरवाजा दिखावे के लिये तोडा गया है । एक टुटी हुई बडी सौस की
बोतल मिली है जिससे सिर पर वार किये जाने का संकेत मिल रहा है, कमरे में
जलने के बाद कहीं भी भागने दौडने के चिन्ह नही मिले हैं, जबकि आग लगने के
बाद छटपटाहट होना स्वाभाविक होता है चाहे वह स्वयं ही क्यों ना लगाई गई
हो । मिट्टी तेल का 2 लीटर का केन रखा हुआ था जिसमें थोडा मिट्टी तेल भरा
हुआ था, तो क्या निधी नें अपने आप पर आधा मिट्टीतेल डाल कर चुपचाप लेट गई
और पडे पडे ही अपने को आग लगा ली और चुपचाप जलती रही पर कोई आवाज तक नही
निकाली जबकि वह अपना हाथ सीधा करती तो पानी के मटके से उसका हाथ टकरा
जाता और हाथ ऊपर करती तो टेबल क्लाथ में आग लग जाती । मृतका का जहां सिर
था वहां से मा्त्र 2 फिट की दूरी पर पानी से भरा हुआ मटका ज्यों का
त्यों रखा है, जिसे मृतका द्वारा हाथ भी ना लगाया जाना आश्चर्य प्रकट
करता है ।
मृत निधी की तकरीबन 2-3 इंच जीभ बाहर निकली हुई थी तथा मुंह व
नाक से खून बह रहा था जिसे फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा जलने के बाद होने
वाली स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रीया बताई जा रही है, जबकि ऐसा मामला अक्सर
केवल हत्या में ही देखा जाता है । सभी पारिस्थितिजन्य साक्ष्य हत्या को
आत्महत्या साबित करने का प्रयास है । पंचनामा के समय निधी के मायके पक्ष
की महिलाओं नें निधी के सिर पर चोट लगने के निशान और पीठ पर खरोंचो के
निशान देखे हैं । इसके अलावा निधी द्वारा अपने माता पिता (सूर्यकांत
शुक्ला व श्रीमती बेला शुक्ला) को लिखे अंर्तदेशीय पत्र में उसने साफ साफ
लिखा है कि उसकी अस्वाभाविक मौत का जिम्मेदार उसका पति राजेश तिवारी, और
उसकी जेठानी रेखा होंगे । प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर मामला हत्या का
दिख रहा है । निधी नें पूर्व में महिला थाना,दुर्ग में इस संबंध में
आवेदन दी थी लेकिन उसके जेठ और ननंद नंनदोईयों द्वारा अपने व्यवहार को
सुधारने की बात कहने तथा ससुराल पक्ष द्वारा माफी मांगनें के बाद वह
उन्हे एक मौका और देने के लिये वापस ससुराल गई थी जहां उसकी हत्या कर दी
गई । परिजनों के मन में यह शंका हो रही है कि तेलीबांधा थाना प्रभारी
द्वारा पक्षपातपूर्ण कार्य किया जा रहा है लडकी के द्वारा लिखी गई
चिट्ठीयों की नोटराइज्ड प्रति थाना प्रभारी के सामने पेश की गई तो
उन्होने उसे लेने से मना कर दिया और मूल प्रतियों की मांग की गई जो निधी
के माता पिता कोर्ट में पेश करने के इच्छुक हैं । वर्तमान परिस्थिति में
जहां घटनास्थल हत्या करके साक्ष्य छुपाने के लिये लाश को जलाने का इशारा
कर रहे हैं वहीं पुलिस और उसकी फोरेसिक टीम अभी भी इसे आत्महत्या का
मामला बता रही है ।
निधी के परिजनों का कहना है कि निधी एक बहादुर और
संर्घषशील लडकी थी और वह किसी भी परिस्थिति का बहादुरी से सामना करती थी
। उसके कठोर प्रतिरोध के कारण ही उसके ससुरालियों को पहले उसकी हत्या
करनी पडी है और उसके बाद साक्ष्य छुपाने के लिये उसके शरीर पर मिट्टी तेल
डालकर आग लगाया गया है और उसकी 11 साल की बेटी जो उस समय घर पर थी अभी तक
उसे किसी के सामने नही लाया गया है । हो सकता है उसकी बेटी इस संबंध में
कुछ जानती हो जिससे उसकी भी जान को खतरा है । रेखा व सुधीरके फरार होने
की आशंका है और बच्ची उनके पास है बच्ची की सुरक्षा के लिये एवं सुधीर व
रेखा के फरार ना होने की पुलिस नें क्या व्यवस्था की है इसके बारे में
पुलिस परिजनों को कुछ भी नही बता रही है ।
घटनास्थल देखने में ऐसा लग रहा है मानो निधी घुटना मोडकर सो रही थी और उस पर मिट्टीतेल डाल कर आग लगा दी गई हो । इस संबंध में एक नजरिया यह भी बन रहा है कि हत्या दुसरे कमरे में करके करके शव को
उस जगह पर रख कर जलाया गया हो । कुछ बातें जो मामले को हत्या होने का
संकेत दे रही हैं ः-
राजेश का अपनी विधवा भाभी के साथ अवैध संबंध, छोटे
से कमरे में (तकरीबन 8 बाई 12 का) निधी जहां जली उस जगह के अलावा सारा
कमरा पूर्ण व्यवस्थित रहना, रस्सी का 3गांठो वाला टुकडा जिससे हाथों को
बांधे जाने का संकेत मिलता है, निधी का सिर और गला पूरी तरह से जलना
मारने से हुई चोटों के साक्ष्य को छुपाने का मामला दर्शाते हैं,
निधी के जलने का समय गवाहों के अनुसार शाम 4.00 से 4.30 बजे का बताया जा रहा है जबकि
उसके जेठ नें शाम 6 बजे फोन करके निधी के माता पिता को सच्चाई ना बता कर
केवल मेकाहार अस्पताल पहुंचने को कहा यानि वे जानते थे कि निधी मर चुकी
है और वे केवल दिखावे के उसे अस्पताल लेकर गए यहां ये भी बात सामने आती
है कि जलविहार कालोनी से मेकाहारा लगभग 15 मिनट की दूरी है लेकिन निधी
को अस्पताल लाये जाने का समय अस्पताल रिकार्ड के अनुसार 6.25 का है और शव
को लाने वाला निधी का जेठ सुधीर तिवारी था (राजेश तिवारी उस समय कहां
था), जब सुधीर तिवारी को मालूम हो चुका था कि निधी मर चुकी है तो उसने
बजाय पुलिस को सूचना देने के निधी की जली लाश को मेकाहारा क्यों लाया, घर
का दरवाजा तोडने के संदर्भ में तीन बयान सामने आ रहे हैं
1.रेखा तिवारी
के अनुसार दरवाजा राजेश तिवारी नें तोडा, सुधीर तिवारी के अनुसार दरवाजा
उसने पडोसियों के साथ मिलकर तोडा और मकान मालकिन के बेटे सोनू के अनुसार
उसने घर की सबली से दरवाजा तोडा,मकान मालिक के बयानों से भी संदेह की बू
आती है निधी के माता पिता नें निधी के जेठ सुधीर और ननंद मीनू ,जेठानी
रेखा और राजकमल मिश्रा के नाम लिये थे जब सभी को मालूम था कि अंदर के
कमरे से आने जाने का दुसरा दरवाजा भी है जो बेडरूम से होते हुए उसी कमरे
से जुडता है जहां निधी जली थी तो उन्होने उस दुसरे दरवाजे को क्यों नही
खोला यानि दरवाजा दिखावे के लिये तोडा गया । निधी की जीभ का बाहर
आना,मुंह और नाक से खून का लगातार बहते रहना और उसके पति राजेश तिवारी का
पूरे समय गायब रहना किसी विभत्य हत्या कांड की ओर इशारा कर रहे हैं ।
निधी द्वारा पूर्व में लिखे एक पत्र में अपने मायके वालों को अपने
पति राजेश और उसकी विधवा भाभी रेखा तिवारी के अवैध संबंधो के बारे में
लिखा गया है । उसमें निधी नें स्पष्ट लिखा है कि राजेश के अपनी विधवा बडी
भाभी रेखा के साथ अवैध संबंधहै जिसकी वजह से वे दोनो मिलकर मुझे (निधी
तिवारी) प्रताडित करते रहते हैं अगर मेरी अस्वाभाविक मौत होती है तो इसकी
जवाबदारी मेरे पति राजेश और मेरी जेठानी रेखा तिवारी (पत्नि स्व.सुरेश
तिवारी) को माना जाये ।
इस लिहाज से अगर देखा जाये तो यह हत्या का आधार भी बनता है और
वह इस दिशा में विचार करते हुए पुलिस कार्यवाही कर सकती है जबकि अभी तक
की उनकी कार्यवाही आत्महत्या को लेकर ही केंद्रित है ।
संलग्न सभी फोटोएं मन को विचलित करने वाली हैं और विडियो
घटनास्थल का है। इन ह्दयविदारक तस्वीरों आपको भेजने के लिये मैं
क्षमाप्रर्थी हूँ किंतु सबूत के लिये मुझे य़ह आवश्यक लग रहा है इसलिये
भेज रहा हूँ ।संलग्न विडियो घटनास्थल का है और इसमें घटनास्थल के चलचित्र
हैं जो 24 जुलाई 2010 को 8, जलविहार कालोनी, रायपुर (छत्तीसगढ) में उतारे
गये हैं. जहां निधी तिवारी की रहस्यमय मौत हुई है । परिजनों के द्वारा
हत्या व दहेज का गंभीर आरोप लगाया जा रहा है जबकि तेलीबांधा थाना व
फोरेंसिक अधिकारीयों द्वारा आत्महत्या का मामला बताया जा रहा है । जिस
कमरे में निधी की जलने से मौत हुई है वहां जमीन पर केवल एक ही जगह पर
जलने के निशान है जो इसतरह से बने हैं जैसे किसी सोये हुए व्यक्ति पर
मिट्टीतेल डालकर आग लगा दी गई हो। जबकि आग लगने वाली जगह से मात्र 2फिट
दूर और 4 फीट की ऊंचाई पर बिना जला एक 3 फीट लंबा कपडा, सिरहाने पर रखा
टेबल और उसका टेबलक्लाथ, एक टेबल जिसमें कापी किताबें हैं, कमरे में रखा
जूते का रेक, खूंटी पर टंगे सफेद कपडे, स्टील की आलमारीयां, आसपास की
दीवारें सबकुछ एकदम सही हलत में है ।पूरे कमरे में कहीं भी भागने दौडने
के निशान नही हैं. जहा निधी जली है वहां पर पडी राख के साथ एक 3 गांठ
वाली कटी हुई रस्सीनुमा कपडे का टुकडा पडा था जिससे हाथों को बांधे जाने
का संकेत मिल रहा है । घटनास्थल पर मिले सारे सबूत चीख चीख कर हत्या का
संकेत दे रहे हैं मसलन- जिस कमरे में निधी जली हैतथा दरवाजा तोडकर भीतर
घुसना बताया जा रहा है, उसी कमरे के साथ लगा हुआ एक और दुसरा रास्ता
बेडरूम से होते हुए बाहर निकलने का है जो बाहर से बंद था, इससे यह प्रमाण
मिलता है कि दरवाजा दिखावे के लिये तोडा गया है । एक टुटी हुई बडी सौस की
बोतल मिली है जिससे सिर पर वार किये जाने का संकेत मिल रहा है, कमरे में
जलने के बाद कहीं भी भागने दौडने के चिन्ह नही मिले हैं, जबकि आग लगने के
बाद छटपटाहट होना स्वाभाविक होता है चाहे वह स्वयं ही क्यों ना लगाई गई
हो । मिट्टी तेल का 2 लीटर का केन रखा हुआ था जिसमें थोडा मिट्टी तेल भरा
हुआ था, तो क्या निधी नें अपने आप पर आधा मिट्टीतेल डाल कर चुपचाप लेट गई
और पडे पडे ही अपने को आग लगा ली और चुपचाप जलती रही पर कोई आवाज तक नही
निकाली जबकि वह अपना हाथ सीधा करती तो पानी के मटके से उसका हाथ टकरा
जाता और हाथ ऊपर करती तो टेबल क्लाथ में आग लग जाती । मृतका का जहां सिर
था वहां से मा्त्र 2 फिट की दूरी पर पानी से भरा हुआ मटका ज्यों का
त्यों रखा है, जिसे मृतका द्वारा हाथ भी ना लगाया जाना आश्चर्य प्रकट
करता है ।
मृत निधी की तकरीबन 2-3 इंच जीभ बाहर निकली हुई थी तथा मुंह व
नाक से खून बह रहा था जिसे फोरेंसिक एक्सपर्ट द्वारा जलने के बाद होने
वाली स्वाभाविक शारीरिक प्रक्रीया बताई जा रही है, जबकि ऐसा मामला अक्सर
केवल हत्या में ही देखा जाता है । सभी पारिस्थितिजन्य साक्ष्य हत्या को
आत्महत्या साबित करने का प्रयास है । पंचनामा के समय निधी के मायके पक्ष
की महिलाओं नें निधी के सिर पर चोट लगने के निशान और पीठ पर खरोंचो के
निशान देखे हैं । इसके अलावा निधी द्वारा अपने माता पिता (सूर्यकांत
शुक्ला व श्रीमती बेला शुक्ला) को लिखे अंर्तदेशीय पत्र में उसने साफ साफ
लिखा है कि उसकी अस्वाभाविक मौत का जिम्मेदार उसका पति राजेश तिवारी, और
उसकी जेठानी रेखा होंगे । प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर मामला हत्या का
दिख रहा है । निधी नें पूर्व में महिला थाना,दुर्ग में इस संबंध में
आवेदन दी थी लेकिन उसके जेठ और ननंद नंनदोईयों द्वारा अपने व्यवहार को
सुधारने की बात कहने तथा ससुराल पक्ष द्वारा माफी मांगनें के बाद वह
उन्हे एक मौका और देने के लिये वापस ससुराल गई थी जहां उसकी हत्या कर दी
गई । परिजनों के मन में यह शंका हो रही है कि तेलीबांधा थाना प्रभारी
द्वारा पक्षपातपूर्ण कार्य किया जा रहा है लडकी के द्वारा लिखी गई
चिट्ठीयों की नोटराइज्ड प्रति थाना प्रभारी के सामने पेश की गई तो
उन्होने उसे लेने से मना कर दिया और मूल प्रतियों की मांग की गई जो निधी
के माता पिता कोर्ट में पेश करने के इच्छुक हैं । वर्तमान परिस्थिति में
जहां घटनास्थल हत्या करके साक्ष्य छुपाने के लिये लाश को जलाने का इशारा
कर रहे हैं वहीं पुलिस और उसकी फोरेसिक टीम अभी भी इसे आत्महत्या का
मामला बता रही है ।
निधी के परिजनों का कहना है कि निधी एक बहादुर और
संर्घषशील लडकी थी और वह किसी भी परिस्थिति का बहादुरी से सामना करती थी
। उसके कठोर प्रतिरोध के कारण ही उसके ससुरालियों को पहले उसकी हत्या
करनी पडी है और उसके बाद साक्ष्य छुपाने के लिये उसके शरीर पर मिट्टी तेल
डालकर आग लगाया गया है और उसकी 11 साल की बेटी जो उस समय घर पर थी अभी तक
उसे किसी के सामने नही लाया गया है । हो सकता है उसकी बेटी इस संबंध में
कुछ जानती हो जिससे उसकी भी जान को खतरा है । रेखा व सुधीरके फरार होने
की आशंका है और बच्ची उनके पास है बच्ची की सुरक्षा के लिये एवं सुधीर व
रेखा के फरार ना होने की पुलिस नें क्या व्यवस्था की है इसके बारे में
पुलिस परिजनों को कुछ भी नही बता रही है ।
घटनास्थल देखने में ऐसा लग रहा है मानो निधी घुटना मोडकर सो रही थी और उस पर मिट्टीतेल डाल कर आग लगा दी गई हो । इस संबंध में एक नजरिया यह भी बन रहा है कि हत्या दुसरे कमरे में करके करके शव को
उस जगह पर रख कर जलाया गया हो । कुछ बातें जो मामले को हत्या होने का
संकेत दे रही हैं ः-
से कमरे में (तकरीबन 8 बाई 12 का) निधी जहां जली उस जगह के अलावा सारा
कमरा पूर्ण व्यवस्थित रहना, रस्सी का 3गांठो वाला टुकडा जिससे हाथों को
बांधे जाने का संकेत मिलता है, निधी का सिर और गला पूरी तरह से जलना
मारने से हुई चोटों के साक्ष्य को छुपाने का मामला दर्शाते हैं,
निधी के जलने का समय गवाहों के अनुसार शाम 4.00 से 4.30 बजे का बताया जा रहा है जबकि
उसके जेठ नें शाम 6 बजे फोन करके निधी के माता पिता को सच्चाई ना बता कर
केवल मेकाहार अस्पताल पहुंचने को कहा यानि वे जानते थे कि निधी मर चुकी
है और वे केवल दिखावे के उसे अस्पताल लेकर गए यहां ये भी बात सामने आती
है कि जलविहार कालोनी से मेकाहारा लगभग 15 मिनट की दूरी है लेकिन निधी
को अस्पताल लाये जाने का समय अस्पताल रिकार्ड के अनुसार 6.25 का है और शव
को लाने वाला निधी का जेठ सुधीर तिवारी था (राजेश तिवारी उस समय कहां
था), जब सुधीर तिवारी को मालूम हो चुका था कि निधी मर चुकी है तो उसने
बजाय पुलिस को सूचना देने के निधी की जली लाश को मेकाहारा क्यों लाया, घर
का दरवाजा तोडने के संदर्भ में तीन बयान सामने आ रहे हैं
1.रेखा तिवारी
के अनुसार दरवाजा राजेश तिवारी नें तोडा, सुधीर तिवारी के अनुसार दरवाजा
उसने पडोसियों के साथ मिलकर तोडा और मकान मालकिन के बेटे सोनू के अनुसार
उसने घर की सबली से दरवाजा तोडा,मकान मालिक के बयानों से भी संदेह की बू
आती है निधी के माता पिता नें निधी के जेठ सुधीर और ननंद मीनू ,जेठानी
रेखा और राजकमल मिश्रा के नाम लिये थे जब सभी को मालूम था कि अंदर के
कमरे से आने जाने का दुसरा दरवाजा भी है जो बेडरूम से होते हुए उसी कमरे
से जुडता है जहां निधी जली थी तो उन्होने उस दुसरे दरवाजे को क्यों नही
खोला यानि दरवाजा दिखावे के लिये तोडा गया । निधी की जीभ का बाहर
आना,मुंह और नाक से खून का लगातार बहते रहना और उसके पति राजेश तिवारी का
पूरे समय गायब रहना किसी विभत्य हत्या कांड की ओर इशारा कर रहे हैं ।
इस पूरे प्रकरण में एक और व्यक्ति है । पंकज शुक्ला नाम का यह शख्स राजेश तिवारी का
घनिष्ठ दोस्त बताता है । ये रिश्तेदार भी है लेकिन राजेश की मदद के लिये इस तरह से भागदौड कर रहा है जैसे राजेश फंसा तो यह भी नही बचेगा ।
Sunday, June 20, 2010
रेल में हिजडों का आतंक
क्या आप नागपूर से सूरत के सफर पर निकल रहे हैं ? फिर तो आपको सावधान रहने की जरूरत है और हां 10 रू के कुछ नोटों को अलग करके जरूर रख लिजियेगा । जैसे ही आप नागपूर से निकल कर भूसावल के पास पहुचेंगे हिजडों ( जिसमें किन्नरों का रूप धर कर कुछ औरत आदमी भी शामिल हो सकते हैं) की फौज जिसमें तकरीबन 10 से 15 सदस्य होंगे आप की बोगी पर हमला बोल देंगे औऱ हर सवारी से 10-10 रूपये की वसूली चालू कर देंगे । अगर आपने दिये तो ठीक वरना अपनी बेइज्जती करवाने को तैय्यार हो जाइये । ये हिजडे पैसे ना देने वाले की जेब में हाथ डालकर पैसे छिन लेते हैं, पैंट फाड कर चड्डी तक खोल देते हैं और इतनी अश्लील हरकते करना शुरू कर देते हैं कि आप अगर शरीफ ना हों तो ठीक वरना ट्रेन से कुद कर मरना ज्यादा पसंद करेंगे ।
मैं कोई कहानी नही सुना रहा बल्कि एक ऐसे आदमी से रूबरू करवा रहा हूँ जो अपनी बेटी को लेने अहमदाबाद गया था । ये हैं भिलाई में संत रविदास नगर के रहवासी समरलाल लांडेकर । इनकी दांये आंख के नीचे ध्यान से देखिये जो कालापन है वह हिजडों के मारने से हुई सूजन है । इस गरीब का कसूर केवल इतना था कि इसनें हिजडों के मांगने पर 10 रूपये नही दिये । आपको लगता होगा कि क्या आदमी है 10 रूपये दे देता तो क्या जाता । लेकिन जनाब कई लोगों के लिये आज भी ये रकम बहुत बडी है फिर एक सवाल ये भी है कि जब हम टिकिट कटाकर ट्रेन में बैठे हैं तो इन्हे पैसे क्यों दें इन्हे ही क्यों जो भिखारी घुमते हैं उन्हे भी क्यों दे । समरलाल ने अपने साथ हुए दर्व्यवहार की जानकारी जीआरपी के सिपाही को दी तो वह अनसुना करते हुए हिजडों का पक्ष लेने लगा और उन्हे बेचारा साबित करने पर तुल गया । इनकी मानें तो उस समय अहमदाबाद एक्सप्रेस ठसाठस भरी हुई थी और हिजडे वहां पूरी तरह से राज कर रहे थे । ऐसा नही है कि केवल उसी,ट्रेन में ये सब हो रहा है अब तो हर ट्रेन की यही हालत हो गई है सबसे आश्चर्य की बात तो ये है कि इनकी शिकायतें भी नही लिखी जाती जिससे ये सब मिलीभगत का खेल समझा जा सकता है । तसल्ली तभी होती है जब ट्रेन एक तरफ गुजरात में या फिर छत्तीसगढ राज्य में पहुंचती है तभी ये सब यकायक उतर कर गायब हो जाते हैं ।
ये एक सनसनीखेज खबर भी बन सकती है लेकिन हर किसी को अपनी अपनी पडी है । भला जनरल बोगी में सफर करने वालों के साथ रहना भी कौन पसंद करता है । है ना ?
Wednesday, June 16, 2010
भिलाई के साथी
अरेरेरेरेरेरेरेरेरेरे रूको भाई ... ये तस्वीर श्रद्धांजली के लिये नही लगाया हूँ , बल्कि इस व्यक्ति के बारे में कुछ बताने आया हूँ । ये शख्स हैं श्रीमान अख्तर चौहान जी उम्र 32 साल (बस अब आगे की डिटेल नही दूंगा वर्ना इनके घरवाले मेरा सर फोड देंगे ये सोच कर कि मैं इसका रिश्ता जमा रहा हूँ) ये हैं ओल्ड सरकुलर मार्केट व्यापारी संघ के महासचिव, यानि मेरे जोडीदार । इन्हे एक चीज से बेहद नफरत है वो है धर्म पर चर्चा करना या विवाद पैदा करना । इनकी विशेषता ये है कि ये हैं कट्टर कांग्रेसी इतने कट्टर की कांग्रेस के खिलाफ बोलने वाले को कट्टा मार दे....... (चूने की बोरी भी कट्टा कहलाती है भाई) तो ये मार्केट साथ देने के लिये भाजपानीत निगम में क्यों जाते हैं । जरा उनके प्रवचन पर गौर फरमाएं ..... " ऐसी की तैसी तुम्हारी पार्टी की और तुम्हारे अधिकारीयों की हम लोग व्यापारी हैं इसलिये तुम्हारे पास मदद के लिये आए हैं वर्ना तुम्हारी कुर्सी के साथ तुमको सडक पर फेंक देता "..... नानानानानाना गलत फहमी मत पालियेगा वैसे तो ये बडे ही दयालु और नेक हैं लेकिन क्या करें ... कभी कभी हम जैसों की संगत लग जाती है .... बस शुरू हो जाते हैं ।
अब इनकी एक कठोर सच्चाई बताता हूँ . ... ये मार्केट के साथ केवल इसलिये लड रहे हैं क्योंकि ये जनहित का मामला है .. यानि लोगों की भलाई के लिये इन्होने अपने हर स्वार्थ को किनारे कर दिये हैं । अब मैं अपने दिल की बात कहता हूँ ... मैं इस शख्स के बगैर कुछ नही सकता था ।.... वैसे हमारी तिकडी प्रसिद्ध हो रही है .... (अब आप पुछेंगे तीसरा कौन ..... यह तो सस्पेंस है भाई अगले पन्ने का )
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